लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

प्रवक्‍ता ब्यूरो

Posted On by &filed under विश्ववार्ता.


मृत्युंजय दीक्षित

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में चल रही आतंकवादी गतिविधियों से अब पूरा विश्व अपने आप को असुरक्षित मानने लगा है। विगत दिनों भारत के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी चीन में कुछ ऐसी घटनाएं घटीं जिसके कारण उसे भी यह कहना पड़ गया  कि शिनजियांग प्रान्त की हिंसा के पीछे उइगर कटटरपंथियों का हाथ है जिन्हें पाक में प्रशिक्षण मिला है। प्राप्त समाचारों के अनुसार गुलाम कश्मीर की सीमा से लगे शिनजियांग प्रांत में हिंसक वारदातों में 22 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस क्षेत्र में चीन के यूघूर के मूल निवासियों का विद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा है। अतः चीनी सरकार ने आरोप लगाया है की कि एक प्रमुख यूघुर अलगाववादी नेता को पाकिस्तान के आतंकी शिविरों में प्रशिक्षण मिला है। यह आरोप उस दिन लगाया गया जब पाक खुफिया एजेंसी आई.एस.आई के प्रमुख अहमद शुजा पाशा बीजिंग की यात्रा पर थे। इस बयान के बाद चीनी मीडिया पूरी ताकत के साथ अपने सदाबहार मित्र पाकिस्तान के खिलाफ जमकर लिखने लग गया। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब चीनी मीडिया ने पाक के खिलाफ खुलकर लिखा है। इस घटना से साफ है कि चीन में बढ़ रही अलगावादी हिंसा से वह भी डर गया है तथा चीनी नेताओं को भी शिनजियांग प्रान्त की हिंसा के पीछे किसी गहरे षड़यंत्र की बू नजर आने लगी है। उधर पाक पर बढ़ रहे अमेरिकी दबावों को दरकिनार करने के लिए पाक खुफिया एजेंसी प्रमुख अहमद शुजा पाशा ने चीन की गुप्त यात्रा भी की है। उनकी यह यात्रा चीन के साथ व्यापक रणनीतिक वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए थी। पाक सेना के चीफ आफ स्टाफ लेटिनेंट जनरल वहीद अरशद भी चीन की गोपनीय यात्रा कर आए हैं। ज्ञातव्य है कि अमेरिका पाक पर दबाव बना रहा है कि वह पहले हक्कानी गुट और अन्य आतकी नेटवर्कों का सफाया करें। अमेरिका की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाक में बढ़ रही राजनैतिक अस्थिरता तालिबानों की नये सिरे से बढ़ती ताकत से पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों व हथियारों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। अगर ये हथियार आतंकियों के हाथ पड़ गये तो वैश्विक सुरक्षा भारी खतरे में पड़ सकती है। एन. बी. सी. न्यूज के अनुसार इन खतरनाक परिस्थितियों के मद्देनजर अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अपने नियंत्रण में लेने की आकस्मिक योजना बना रखी है। पाकिस्तान में आंतरिक संकट, परमाणु संयंत्रो पर आतंकी हमले, भारत के साथ युध्द, चरमपंथियों द्वारा सरकार का तख्ता पलटने या सेना में विद्रोह जैसी स्थिति में अमेरिका यह कदम उठा सकता है।

इस समाचार के खुलासे के बाद पाक के पूर्व सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ ने कहा कि यदि अमेरिका पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण करता है तो दोनो देशों के मध्य युध्द छिड़ जायेगा। ऐसी कार्यवाही किसी भी देश की संप्रभुता पर सीधा हमला होगा। वर्तमान परिस्थितियों से यह साफ प्रतीत हो रहा है कि पाकिस्तान में पनपे आतंकवादी समूह अब पूरे विश्व के लिए खतरा बन चुके हैं। विश्व का कोई भी देश इन आतंकवादी समूहों के रडार से नहीं बच पाया है। ये आतंकवादी इस्लाम के नाम पर विश्व के किसी भी देश पर या किसी भी शहर में कोहराम मचा सकते हैं। जब पाक प्रशिक्षित आतंकियों की गतिविधियों के चलते उसका सदाबहार मित्र चीन पाकिस्तान के प्रति कड़ा रूख अपना सकता है और ओबामा के सैनिकों का विशेष दस्ता ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए पाक सीमा का उल्लंघन कर सकते हैं फिर भारत सरकार अपने आतंकियों को पकड़ने के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकती? इस बात के संकेत है ंकि पाक प्रशिक्षित उइगर आतंकियों द्वारा फैलाई जा रही हिंसा से चीन में गृहयुध्द की आग तीव्र हो सकती है और वहां के अल्पसंख्यक समूह वहां के प्रान्तों को आजादी देने की मांग कर सकते हैं। पाक प्रशिक्षित उइगर कट्टरपंथियों की हिंसा के चलते चीन को अपने अस्तित्व पर खतरा नजर आया। अतः आज पाकिस्तान पूरे वैश्विक समुदाय के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। अमेरिका पाकिस्तान को अपने सामरिक हितों की पूर्ति के लिए उसे आर्थिक व सामाजिक तथा राजनैतिक संरक्षण प्राप्त कर रहा है। वहीं अमेरिकी व नाटो सेना की अफगानिस्तान से वापसी के चलते तालिबान अपनी ताकत का एक बार फिर प्रदर्शन करने लग गए हैं। चीन-पाक के मध्य हुई शाब्दिक बयान बाजियों के मध्य चीन पाक ने संयुक्त युध्दाभ्यास किया। पहली बार दोनों देशों का संयुक्त युध्दाभ्यास राजस्थान से लगी सीमा पर हुआ। पाकिस्तान ने इसकी सूचना भी भारत को नहीं दी। इससे चीन-पाक की गहराती मित्रता के साफ संकेत मिल रहे हैं। चीन वैसे भी पूरे दक्षिण एशिया में भारत को अपना चिर प्रतिद्वंदी मानता है और वह भारत को नीचा दिखाने के लिए हर उपाय करता रहता है। अतः भारत की सामरिक व कूटनीतिक तथा आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो वर्तमान व भविष्य की परिस्थितियां भारत के लिए बहुत विकट होने वाली हैं। यह बेहद निराशाजनक बात है कि भारत का वर्तमान केंद्रीय सत्ता प्रतिष्ठान इस समय बेहद कमजोर व अनिर्णायक स्थिति में है। सरकार के तहखाने से नित नये घोटाले अपराध प्रकाश में आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार अपने गुनाहों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का गला घोटने में ही लग गई हैं। गठबंधन व जातिवाद तथा क्षेत्रवाद की राजनीति का दौर है। अब न तो सत्तापक्ष में कोई स्वतंत्र विचारों वाला सबका प्रिय व दूरदर्शी तथा विद्वान विचारों वाला नेतृत्व है और नही विपक्ष में। जो कि पूरे देश को एक सूत्र में पिरोकर एक साथ लेकर चल सके। आज हमारा देश चीन-पाक जैसे खूंखार शत्रुओं की गतिविधियों से आक्रान्त हो रहा है। पग-पग पर भारत विरोधी षड़यंत्र रचे जा रहे हैं। देश की सुरक्षा पर कहीं भी-कभी भी आंच आ सकती है। वर्तमान समय में ऐसी सत्ता की आवश्यकता है जो विदेशी आक्रान्ताओं की गतिविधियों से निपटने के मद्देनजर तुरन्त कड़े निर्णय करने की क्षमता रखती हो। यह देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि आज देश कठिन राजनैतिक परिस्थितियों के दौर से गुजर रहा है। देश की सेना, सीमा व सुरक्षा सेना विकास के विषय में सोचने के लिए किसी भी नेता के पास समय नहीं है। अब यह देश की जनता को ही सोचना चाहिए की देश की सीमाओं पर व्याप्त संकटों को दूर करने के लिए वे किस प्रकार का सत्ता प्रतिष्ठान प्राप्त करना चाहते हैं। इस सरकार ने तो देश की सैन्य विकास की क्षमताओं को दस वर्षों पीछे धकेल दिया है। केंद्र में एक मजबूत व शक्तिशाली नेतृत्व वाली सरकार ही देश को आसन्न संकट से उबार सकेगी। नहीं तो चीन-पाक आतंकवादी गठजोड़ से देश की सुरक्षा के भविष्य पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो जायेगा।

* लेखक स्वतंत्र चिंतक हैं। 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz