मृत्यु और हम

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मनमोहन कुमार आर्य यह समस्त जड़ चेतन रूपी संसार सादि व सान्त अर्थात् उत्पत्ति धर्मा और प्रलय को प्राप्त होने वाला है। सभी जड़ पदार्थ सत, रज व तम गुणों वाली मूल प्रकृति के विकार हैं। मनुष्य व प्राणियों के शरीरों पर विचार करें, तो पाते हैं कि इसमें हमारे व अन्यों के शरीर तो… Read more »

निराशा असमय मृत्यु और आशा जीवन की वीणा है

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मित्रों, हममें से अधिकतर लोग इस कारण से दुःखी, परेशान और तनावग्रस्त रहते हैं, क्योंकि हम जाने-अनजाने अपने वर्तमान को, स्वयं ही नष्ट कर रहे हैं। कोई भी सामान्य व्यक्ति यदि ईमानदारी से स्वयं का आकलन करेगा तो वह पायेगा कि गुजर चुका समय और आने वाला समय हमेशा उसे परेशान रखता है और भूत… Read more »