लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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नई दिल्ली। राजस्थान में कोटा से करीब बीस किलोमीटर दूर कुन्हाडी थाना क्षेत्र में डाबी इलाके में बीती शाम ढहे पुल का मलबा एक के बाद एक लाशें उगलता ही जा रहा है। मरने वालों की संख्या ने हाफ सेंचुरी पार कर लिया बताया जा रहा है। निर्माणाधीन इस पुल के गिरने के हादसे में मारे गए लोगों के आश्रितों को दस दस लाख और घायलों को दो दो लाख रूपए देने की घोषणा भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा की गई है।

बताया जाता है कि पुल का निर्माण कर रही गेमन इंडिया लिमिटेड और हुंडई के तेरह लोगों के खिलाफ मामला पंजीबध्द कर दो लोगों को पुलिस अभिरक्षा में ले लिया गया है। कोटा के पास चंबल नदी पर बनने वाले इस पुल के रात में ढह जाने से अनेक मजदूर इसके नीचे दब गए थे।

इस हेंगिग पुल के गिरने से नेशनल हाईवे अर्थारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के लचर प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी है। एनएचएआई के सूत्रों का दावा है कि हादसे वाले पुल का निर्माण वही गेमन इंडिया कंपनी कर रही है, जिसे छ: माह पूर्व देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में डीएमआरसी (दिल्ली मेट्रो) के एक पुल के ढहने के कारण डीएमआरसी ने काली सूची में डाल दिया गया था।

केंद्रीय मंत्री कमल नाथ जैसे संवेदनशील जनसेवक जिन्हें वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के बाद जहाजरानी और भूतल परिवहन मंत्रालय में से भूतल परिवहन मंत्रालय की अहम जिम्मेवारी सौंपी गई है, के विभाग ने उन्हीं की आंख में धूल झोंककर गेमन इंडिया कंपनी को पूरा पूरा प्रश्रय प्रदान किया।

सूत्रों का कहना है कि डीएमआरसी की कार्यवाही के बावजूद भी एनएचएआई के अफसरों ने गेमन इंडिया लिमिटेड के काम के मूल्यांकन की आवश्यक्ता नहीं समझी। सूत्र कहते हैं कि अगर किसी निर्माण कंपनी को ब्लेक लिस्टिड कर दिया जाता है तो अन्य सरकारी महकमे उस कंपनी से कार्य कराने के पहले उसके कार्य का पुर्नमूल्यांकन इसलिए करती है, ताकि वह कंपनी दुबारा गल्ती न दोहरा सके। विडम्बना ही कही जाएगी कि एनएचएआई द्वारा एसा नहीं किया गया, परिणामस्वरूप पचास से अधिक लोगों को जान से हाथ धोना पडा और अनेक घायल हो गए हैं।

-लिमटी खरे

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