लेखक परिचय

अन्नपूर्णा मित्तल

अन्नपूर्णा मित्तल

एक उभरती हुई पत्रकार. वेब मीडिया की ओर विशेष रुझान. नए - नए विषयों के लेखन में सक्रिय. वर्तमान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परस्नातक कर रही हैं. समाज के लिए कुछ नया करने को इच्छित.

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मैंने “आखिर कब रुकेंगी औरतों पर होती यातनाएं ?” लेख लिखा। इस लेख को लोगों ने जिस प्रकार गंभीरतापूर्वक लिया उसके लिए सबका धन्यवाद। इस लेख पर लोगो की हर प्रकार की प्रतिक्रियाएँ आए और खासतौर पर शादाफ जाफ़र जी की, उसके बाद मुझे आखिर कब रुकेंगी औरतों पर होती यातनाएं ? – भाग दो, लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुझे लगता है की शादाफ जाफ़र जी वीणा मालिक से बहुत ज्यादा आहत हुए हैं, क्योंकि दुनिया मे सभी स्त्री या पुरुष एक जैसे नही होते। सबका दुनिया को देखने का अलग अलग नजरिया होता है। सब अलग अलग अंदाज़ मे दुनिया को जीते हैं। इसका मतलब ये नही है कि हम ऐसे इक्के दुक्के लोगों का उदहारण लेकर पूरी बीरदारी को बदनाम करे।

पहले के समाज मे जहां सिर्फ स्त्री ही प्रतारित होती थी वही आज के समाज मे दोनों ही प्रतारित होने लगे हैं। लेकिन आज भी जहां 96 उदहारण ऐसे मिलेंगे जिसमे महिलाएं प्रतारित होती हैं। वही केवल चार ही ऐसे उदहारण मिलेंगे जिसमे पुरुषों को प्रतारित किया जाता है। तो ये क्या आपके नजर मे ठीक है। और आज भी महिलाएं पुरुषों से कई माइने मे ठीक है। जाफ़र जी मै आपसे पूछती हूँ कि अगर आप वीणा मालिक पे उंगली उठाते हैं तो आपको सलमान खान का भी उदहारण भी देना चाहिए जो अपनी हर फिल्म मे अपनी शर्ट उतार देता है। जिस तरह से आपको औरतों को नग्न देखकर अभद्र लगता है उसी तरीके से मुझे भी किसी पुरुष को सड़क पर या किसी फिल्म मे नग्न देखकर अभद्र लगता है।

और इस बात को भी नही झुटलाया जा सकता की किसी भी समाज मे स्त्री और पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं, दोनों मिलकर ही एक सुखी परिवार की संरचना करते हैं। एक बच्चे का गुजारा बाप के बिना हो सकता है लेकिन माँ के बिना ये संभव ही नहीं, वो उसे नौ महीने अपने अंदर रखकर उसे पैदा करने का दर्द सहती है पुरुष नहीं।

आपने वीणा मालिक जैसी महिलाओं के उदहारण से कहा कि किस प्रकार आज नारी कुछ रूपयों की खातिर अपने मां बाप भाई खानदान का ख्याल नहीं करती। अपने बदन की सरेआम नुमाईश कर पूरे नारी समाज को बदनाम कर देती है। लेकिन क्या कभी आपने उन लोगों के बारे मे सोचा है, जो इस तरह के घटिया शो जनता के आगे परोसते हैं। मैं तो कहती हूँ की ऐसे लोग सबसे घटिया होते हैं, जो ये कहते हैं कि हम वही दिखाते हैं जो जनता देखना चाहती है, खासकर मीडिया। लेकिन क्या मीडिया ने कभी ऐसी वोटिंग कराकर लोगों से ये जानने की कोशिश करी है की वो क्या देखना चाहती है, मैंने तो कभी ऐसी वोटिंग के बारे मे नहीं सुना।

आजकल मीडिया जबरदस्ती लोगों के आगे कुछ भी परोस कर कहती है की पब्लिक यही देखना चाहती है। उदहारण के तौर पर इंडिया टीवी को ही ले लीजिये, जिस चैनल मे रोज़ भूत, पिशास, प्रेमिका को वश मे करने के तरीके, स्वर्ग की यात्रा और पता नही क्या क्या बकवास दिखाई जाती है। फिर ये कहा जाता है की है आजकल आम लोग यही पसंद करते है, मुझे नहीं लगता की कोई इस तरीके की झूठी और घाटियां चीजों पर भरोसा भी करता होगा। FHM मैगज़ीन ही ले लीजिये जिसमे खुले तौर पर नग्न प्रदर्शन हो रहा है। तो क्यूँ जबरदस्ती लोगों के आगे ऐसी चीज़े परोसी जा रही हैं। इसका जवाब है आपके पास।

यहाँ मैं एक सवाल उन लोगों से भी पूछना चहुंगी कि आज जो लोग अपने प्रोग्राम की सफलता के लिए ये फिरते हैं कि हम केवल वही दिखाते हैं जो पब्लिक देखना चाहती है, तो मै ये सवाल उन लोगों से करती हूँ की आप किस हद तक दिखा सकते हैं ? एक इंसान की जिज्ञासा को किस हद तक मिटा सकते हैं ? अगर कल को पब्लिक कहे कि हमे एक ऐसा रिऐलिटि शो देखना है जिसमे दस व्यक्ति को लाइव ज़िंदा काटा जाये, तो क्या डायरकटर अपने आप को कटवाएगा, क्या लोगों की इस भूख को मीडिया शांत करेगी। और मै दावे के साथ बोल सकती हूँ कि अगर ऐसा शो शुरू किया गया तो इस शो की टी आर पी दुनिया के किसी भी शो से ज्यादा ही होगी। तो क्या मीडिया ये भी दिखाएगी क्या?

हम सब अच्छी तरीके से जानते हैं कि आज का वक्त ऐसा है कि अगर सड़क पर दो कुत्ते भी लड़ने लगे तो उसे देखने के लिए भी दस लोग खड़े हो जाते हैं, तो क्या इसे भी प्रोग्राम बनाकर जनता के आगे परोसा जाये। नहीं परोसा जाएगा न, तो फिर ऐसे शो बनाए ही क्यू जाते हैं जिसमे नारी का अभद्र रूप दिखाया जाता है। ऐसे प्रोग्राम बनाने वालों का एक ही मकसद होता है की कैसे भी करके उस प्रोग्राम की टी आर पी बढ़ाई जाये। जिससे की अधिक से अधिक पैसा कमाया जाए। क्या औरतों को नग्न करके पैसे कमाने का जरिया सही है। इतिहास गवाह है कि जब से फिल्में बननी शुरू हुई हैं तब से औरतों का नग्न प्रदर्शन ही टी आर पी का एक जरिया बन गया है।

ऐसे प्रोग्राम को देखते वक्त तो सब बड़े आनंद लेते हैं, क्या ऐसे शो दिखाने वाले लोग थोड़े से पैसों इन महिलाओं से भी नीचे नहीं गिर रहे। तो सारी बदनामी का ठीकरा अकेली महिला के ऊपर ही क्यूँ आ जाता है। सरकार को नहीं चाहिए कि जो इस तरह के शो को जिसमे थोड़ी भी अश्लीलता झलकती है, तुरंत बंद किए जाये। ऐसे चैनल या मैगजीन जो अपनी टी आर पी के लिए कुछ भी परोसने पर उतारूँ हो जाते हैं या कुछ भी गलत दिखाते हैं, पर तुरंत बैन लगना चाहिए। अब जवाब आपको खुद ढूंदना है, मैंने तो केवल तर्क दिया है।

 

 

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8 Comments on "आखिर कब रुकेंगी औरतों पर होती यातनाएं ? – भाग दो"

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archana chaturvedi
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मैने आप का लेख बड़ा गोंर से पढ़ा है लेख आच्छा है ………..

nirmal kumar
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कीप इट अप ! अन्नपूर्णा जी

chetnaa
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आपने बिलकुल ठीक लिखा है, ये बात बहुत आगे तक पहुचनी चाहिए, तभी हमारे समाज में कोई उपाय हो सकेगा.

harendra
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आप बहुत अच्छा लिखती हैं, आपकी लेखनी में पैनापन है, आशा है की आप आगे भी ऐसे सामाजिक लेखों से हमे परिचित कराती रहेंगी,
एक बार मैं फिर लेखिका का धन्यवाद करता हूँ.

SARKARI VYAPAR BHRASHTACHAR
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||ॐ साईं ॐ|| सबका मालिक एक है इसीलिए प्रकृति के नियम क़ानून सबके लिए एक है | अन्ना बेकरार है …जनलोकपाल का इन्तजार है | ये तो नहीं मिलना है भैया,,क्योकि बिच में कांग्रेस का भ्रष्टाचार है || दुनिया के किसी भी देश मे भ्रष्टाचार और अपराध से निपटने के लिए कठोर और प्रभावी कानून व्यवस्था का होना तो अति आवश्यक है ही… साथ ही इसके प्रभावी मशीनरी के द्वारा प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाना भी बेहद आवश्यक है। दुनिया भर मे कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस और अन्य सरकारी मशीनरियाँ काम करती हैं। अब लगभग… Read more »
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