लेखक परिचय

संजय सक्‍सेना

संजय सक्‍सेना

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी संजय कुमार सक्सेना ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद मिशन के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत 1990 में लखनऊ से ही प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'नवजीवन' से की।यह सफर आगे बढ़ा तो 'दैनिक जागरण' बरेली और मुरादाबाद में बतौर उप-संपादक/रिपोर्टर अगले पड़ाव पर पहुंचा। इसके पश्चात एक बार फिर लेखक को अपनी जन्मस्थली लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वतंत्र चेतना' और 'राष्ट्रीय स्वरूप' में काम करने का मौका मिला। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे दैनिक 'आज' 'पंजाब केसरी' 'मिलाप' 'सहारा समय' ' इंडिया न्यूज''नई सदी' 'प्रवक्ता' आदि में समय-समय पर राजनीतिक लेखों के अलावा क्राइम रिपोर्ट पर आधारित पत्रिकाओं 'सत्यकथा ' 'मनोहर कहानियां' 'महानगर कहानियां' में भी स्वतंत्र लेखन का कार्य करता रहा तो ई न्यूज पोर्टल 'प्रभासाक्षी' से जुड़ने का अवसर भी मिला।

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mulayamउत्तर प्रदेश में 1849 प्रतिशत मुस्लिम(एम) वोटों को हासिल करने के लिये हाथ पैर मार रही कांग्रेस के सामने समाजवादी पार्टी रोड़ा बनकर खड़ी है। पहले तीन बार मुलायम और 2012 में  मुस्लिम वोटों के सहारे सत्ता की सीढि़या चढ़ने वाले अखिलेश यादव का मुसलमान मजबूती के साथ हाथ पकड़े हैं।कांग्रेस मुसलमानों के सपा प्रेम से हतप्रभ है। न तो केन्द्र सरकार की अल्पसंख्यकों के लिये चलाई जा रही योजनाएं और न ही मुसलमानों को सपा से दूर करने के लिये केन्द्रीय मंत्री और पूर्व सपा नेता(अब कांग्रेसी)बेनी प्रसाद वर्मा,सलमान खुर्शीद,श्री प्रकाश जायसवाल जैसे तमाम कांग्रेसियों द्वारा मुलायम के खिलाफ चलाये जा रहे शब्दबाणनिशाने पर बैठ रहे हैं।कांग्रेस काफी शिद्दत से कोशिश कर रही है कि किसी तरह मुस्लिम वोट बैंक एक मुश्त उसके पाले में आ जाए,इसके लिये वह भाजपा का हौवा खड़ा कर रही है तो यह भी बता रही है कि केन्द्र में अगर कांग्रेस कमजोर हुए तो उसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा।केन्द्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए चलायी जा रही योजनाओं को माध्यम बना कर प्रदेश की समाजवादी सरकार की नकारा साबित करने पर तुली है।

कांग्रेस इस बात की भी कोशिश कर रही है कि सपा-भाजपा को एक ही थाली के चट्टे-बट्टे बता कर मुसलमानों के दिल से मुलायम का प्रेम निकाला जाये।इसी लिये मुलायम के ,‘आडवाणी कभी झूठ नहीं बोलते।जैसे बयानों को कांग्रेसी खूब हवा देते रहते हैं।भाजपा के फायर ब्रांड नेता वरूण गांधी को अदालत से बरी होने और  सपा सरकार द्वारा इसके खिलाफ उच्च अदालत में जाने में देरी को भी मुद्दा बनाया जा रहा है।जेलों में बंद बेगुनाह मुसलमानों को छुड़ाने के लिये सपा सरकार ने जिस तरह ढुलमुल रवैया अपनाया,उसको लेकर भी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और सरकार पर निशाना दाग रही है।सपा की सरकार बनने पर मुलसमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण के वायदे की याद भी दिलाई जा रही है।मकसद,मुसलमानों के मन में समाजवादी पार्टी के प्रति भ्रम की स्थिति पैदा करना है।

बात ताकतकी कि जाये तो यूपी में मुसलमानों के बिना कांग्रेस के लिये लोकसभा चुनाव की जंग जीतना आसान नहीं होगा।इस बात का आभास उसे विधान सभा में हो भी चुका है।लोकसभा चुनाव 2009 में जब कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट पड़े थे तो कांग्रेस को 22 सीटें मिली थीं, पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मुस्लिम मतों की मदद से बड़ी कामयाबी मिली,परिणाम स्वरूप् उसका न केवल मत प्रतिशत बढ़ा  था बल्कि सीटों से भी इजाफा हुआ। कांग्रेस पार्टी सूबे में समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के समानंतर आकर खड़ी हो गई थी,लेकिन कांग्रेस इसे संभाल नहीं पाई।उसने सलमान खुर्शीद जैसे नेताओं के सहारे मुसलमानों को छोड़ दिया,खुर्शीद भले ही यूपीए सरकार में अल्पसंख्यक कोटे के मंत्री बने हो लेकिन मुसलमान खुर्शीद को कभी अपना नही मान पाये।खुर्शीद की बयान बाजी भी अक्सर मुसीबत बन जाती है।जैसे पिछले चुनाव में मुसलमानों को अलग से साढ़े चार प्रतिशत आरक्षण की बात उनके लिये सिरदर्द बन गया।एक बरस पहले हुए विधानसभा चुनाव में सारी ताकत झोंकने के  बाद उसे आशातीत सफलता नहीं मिली तो पार्टी के रणनीतिकारों के माथे पर बल पड़ गया।कांग्रेस में आम राय उभर कर आई कि मुस्लिम मतों के सपा के पक्ष में एकजुट हो जाने से उसका मिशन 2012 परवान नहीं चढ़ सका।इसके बाद कांग्रेस ने मुस्लिम नेताओं के सहारे मुसलमानों को लुभाने की कोशिश कम कर दी।अब वह अल्पसंख्यक कल्याण के लिये अनाप-शनाप और आधी अधूरी लेकिन लुभावनी योजनाएं बना कर मुसलमानों पर डोरे डाल रही है। कांग्रेस यह बात भी शिद्दत से महसूस करती है कि विधान सभा चुनाव में मुसलमानों द्वारा सपा के पक्ष में थोक के भाव वोटिंग करने से कांग्रेस की हालत पतली हुई यह अलग सच्चाई है,लेकिन कांग्रेसी इस बात को भी अनदेखा नहीं कर पा रहे हैं कि समाजवादी पार्टी ने मुसलमानों के लिये कांग्रेस के मुकाबले कोई काम नहीं किया फिर भी उसके बात बहादुर नेताओं ने सपा के पक्ष में फिजा बांध दी।वहीं कुछ कांग्रेसी दबी जुबान से यह भी कहते हैं कि 2009 से लेकर 2012 तक केन्द्र की कांग्रेस गठबंधन वाली सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया था जिससे लगता कि वह मुसलमानों के प्रति चिंतित है। कांग्रेस के नेता मुसलमानों को आरक्षण,सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग में फंसाये रहे तो दिल्ली के बाटला हाउस कांड पर दिग्विजय सिंह की सियासत ने कांग्रेस को पूरी तरह से धो डाला।दिग्गी राजा के बेतुके बयानों के कारण ही उनकी यूपी से विदाई की बात दबी जुबान लोग कह रहे हैं।

बहरहाल,अतीत से सबक लेते हुए कांग्रेस अबकी किसी एक नेता के सहारे मैदान मारने की बजाये टीम भावना से काम कर रही है।इन दिनों कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत सपा को कठघरे में खड़ा करने के लिए लगा रखी है।उसने कद्दावर  मुस्लिम नेताओं केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद,केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्री रहमान,पुराने कांग्रेसी नेता और सांसद जफर अली नकवी,रशीद मसूद को मैदान में एक्शन प्लान के तहत उतार दिया है

मुसलमानों को लुभाने के लिये उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी जगह-जगह  अल्पसंख्यक सम्मेलन करा रही है। सम्मेलन की श्रंखला की शुरूआत 15 जून को वाराणसी से हुई थी। यह सिलसिला लखनऊ में (11 नवम्बर को) मौलाना आजाद की 126वीं वर्षगांठ  के मौके पर खत्म होगा,जिसमें कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के भाग लेने की संभावना है।अपने अल्पसंख्यक सम्मेलनों के माध्यम से कांग्रेस केन्द्र सरकार द्वारा संचालित मुस्लिम कल्याणकारी योजनाओं पर प्रदेश सरकार किस तरह पानी फेर रही इसकी जानकारी दे रही है। कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि सच्चर कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप केन्द्र सरकार ने मुसलमानों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं बनायी हैं जिसका लाभ यूपी में मुसलमानों को नहीं मिल रहा हैं।

कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेस प्रदेश की सपा सरकार के सामने मुस्लिम हितों से जुड़ी कुछ ऐसी मांगे भी रख सकती है जिन्हें पूरा करने के लिए सपा सरकार को लंबी शासकीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। मसलन वह अखिलेश सरकार से कहेगी कि मुसलमानों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक थाने में दो मुस्लिम सिपाहियों के अलावा आबादी के अनुरूप मुस्लिम वर्ग के थानाध्यक्ष और पुलिस अधीक्षक नियुक्त किये जाएं। यह मांग भी उठायी जाएगी कि उर्दू को राज्य सरकार अनिवार्य भाषा का दर्जा दे। कांग्रेस यह भी मांग करेगी कि बुनकर बहुल क्षेत्रों में 24 घंटे मुफ्त बिजली  मुहैया करायी जाए। कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ विभाग के चेयरमैन मारूफ खां कहते हैं कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को बुनकरों के उत्थान के लिए 4000 करोड़ रूप्ये का पैकेज दिया गया,जिसकी बंदरबांट हुई।मारूफ कहते हैं कि सवा साल की सपाई हुकूमत में 27 दंगे  हुए और अधिकांश दंगाग्रस्त इलाकों में मुसलमानों को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।उनकों जानमाल दोनों का नुकसान हुआ।कारोबर बंद रहने से बच्चे भूखे मरने लगे।यही वजह है सपा राज में मुस्लिम समाज अपने आप को  असुरक्षित महसूस कर रहा है।

अलपसंख्यक विभाग के मारूफ खां कहते हैं कि मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए बनोय गये कमीशन और कमेटियों का यूपी में वजूद न होना चिंता का विषय है।अभी  तक मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यक वित्त विकास  निगम , फखरूद्दीन अली अहमद कमेटी, उर्दू अकादमी के गठन में देरी को भी मुद्दा बनाया जाएगा। मारूफ सपा के मुस्लिम प्रेम को छलावा करार देते हुए कहते हैं कि कांग्रेस मुस्लिमों की तरक्की पसंद पार्टी है,जबकि समाजवादी पार्टी मुस्लिम भावनाओें को भड़काने का काम करती है,वह कहते हैं कि सच्चर कमेटी की ही बात की जायें।मुलायम सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की बात बार-बार केन्द्र से कहते हैं।अगर उन्हे सच्चाई पता होती तो वह ऐसा न बोलते।सच्चर कमेटी ने अल्पसख्ंयकों की आर्थिक और सामाजिक दशा सुधारने के लिये 76 सिफारिशें सरकार से की थी,जिसमें से 69 सिफारिशों को केन्द्र सरकार ने मंजूरी देकर उसमें से 66 सिफारिशों पर काम भी शुरू कर दिया है,मात्र सात सिफारिशें इस लिये नहीं मानी जा सकीं क्योंकि उसमें संवैधानिक संकट आ रहा था।

कांग्रेस नेता सिराज मेंहदी कहते हैं कि अल्पसंख्यकों के कल्याण की योजनाओं के लिए प्रदेश में करीब 1100 करोड़ रूपये  भेजे थे, लेकिन अब तक केवल 70 फीसदी  रकम  ही खर्च हो सकी है।तमाम योजनाएं अल्पसंख्यकों तक पहुंच ही नहीं सकी हैं। केंद्रीय मंत्री अल्पसंख्यकों की योजनाएं जिलों तक न पहुंचने से निराश है। जल्दी ही अल्पसंख्यक मंत्रालय स्वंयसेवी और गैर सरकारी लोगों की कमेटी बनाने  जा रहा हैं। इसमें कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के जिलों के लोग भी शामिल होंगे। कमेटी सभी 75 जिलों में बनाई जाएगी। कमेटी जिलों में भेजी जाने  वाले छात्रृवृत्ति, स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम आंगनबाड़ी कार्यक्रमों पर नजर रखेगी।इतना ही नहीं केंन्द्र की पहल से ही केन्द्र की विभिन्न योजनाओं की 15 प्रतिशत राशि मुस्लिम बाहुल्य इलाको के विकास में खर्चं की जा रही है।

 

कांग्रेस के मुस्लिम प्रेम ने समाजवादी पार्टी को चैकना कर दिया है।आजम खाँ अब भाजपा से अधिक कांगे्रस पर बरसते हैं।सपा के प्रवक्ता और मंत्री राजेन्द्र चौधरी भी हर समय कांगे्रस से दो-दो हाथ करने में लगे रहते हैं।चौधरी को लगता है कि लोकसभा चुनाव का मौसम आया तो बसपा, कांग्रेस और भाजपा जातीयता और संप्रदायिकता की राजनीति को हवा देने में लग गए हैं। उत्तर प्रदेश की समस्याओं से ध्यान हटाकर कांगे्रस प्रदेश में अल्पसंख्यक सम्मेलन कर मुस्लिमों को गुमराह करने के खेल में लग गयी है। खुद केन्द्र की कांगे्रस सरकार ने सच्चर कमेटी बनाई थी जिसने अपनी रिपोर्ट में मुस्लिमों की हालत दलितों से बदतर बताई। रंगनाथ मिश्र आयोग भी कांग्रेस ने बिठाया लेकिन उसकी सिफारिशें कूड़े के ढेर में डाल दीं।मुलायम सिंह यादव ने संसद में जब इस बारे में सवाल उठाए तो प्रधानमंत्री तक जबाब टाल गए। मुस्लिमों की घोर उपेक्षा करने वाले और बाबरी मस्जिद ध्वंस में भाजपा के सहयोगी कांग्रेस नेता अब मुस्लिमों को बरगलाने के काम में लग गए हैं। 

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1 Comment on "यूपीः मुस्लिम वोटों के लिये कांग्रेस की कसरत"

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इक़बाल हिंदुस्तानी
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Musalmaan congress की बजाये सपा ko zyaada behtar maanta hai.

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