एक गजल -वादा करके भी तुम मुकर जाते हो

वादा करके भी तुम मुकर जाते हो |
सच सच बताओ,तुम किधर जाते हो ||

करती हूँ तुम्हारा इन्तजार,बैचेन रहती हूँ |
साथ मुझको भी ले जाओ,जिधर जाते हो ||

उमर नहीं है तुम्हारी,इधर उधर घूमने की |
मेरा भी ख्याल रखो,क्यों नहीं सुधर जाते हो || 

बदनामी हो रही,लोगो की उँगलियाँ उठ रही |
जहाँ जाना नहीं चाहिए ,तुम उधर जाते हो ||

जाने को कहीं जाओ,तुमको कोई मनाही नहीं |
उधर मत जाओ,जहाँ लोग बिगड़ जाते हो ||

रस्तोगी की इल्तजा है,बुढापे में तो सुधर जाओ |
ऊपर जाने को बैठे हो,क्यों नहीं सुधर जाते हो ||

आर के रस्तोगी 
गुरुग्राम मो 9971006425

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