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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने आख़िर आम आदमी पार्टी से सम्बंधित हाल के मुद्दों पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। शुक्रवार को उन्होंने कई टेलीविज़न चैनल्स को इंटरव्यू दिए और कई लंबित सवालों के जवाब भी दिए। जिस बात पर कुमार ने सबसे प्रमुखता से ज़ोर डाला, वो था वोटर्स और वालंटियर्स से संवाद। उल्लेखनीय है कि हाल के कई चुनावों में आम आदमी पार्टी को हार का मुँह देखना पड़ा। इसके बारे में कुमार ने कहा कि कई मुद्दों पर हमारे स्टैंड से हमारे वोटर सहमत नहीं थे और आम आदमी पार्टी ने इसे समझने में देर कर दी। कुमार ने कहा कि कहीं न कहीं पार्टी अपनी भ्रष्टाचार-विरोधी छवि को कायम रखने में असमर्थ रही है। उन्होंने कई बार ज़ोर दे कर कहा कि इस समय ज़रुरत है कि पार्टी अपने वालंटियर्स को दोबारा संगठित करे और उनमे ऊर्जा भरे। गत एमसीडी और पंजाब चुनावों में प्रचार से दूरी बनाए रखने को ले कर उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें ऐसा करने को कहा था और पार्टी के एक अनुशासित सिपाही होने के कारण उन्हें यही करना उचित लगा। ईवीएम के मुद्दे पर कुछ हद तक अरविन्द केजरीवाल का समर्थन करते हुए कुमार ने कहा कि एवीएम में गड़बड़ी का होना एक जाँच का विषय है, लेकिन फिर भी हमें यह विचार करना होगा कि जनता ने हमें किन कारणों से नकारा। सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी इत्यादि मुद्दों पर बोलते हुए कुमार ने कहा कि आम आदमी पार्टी समेत सभी राजनैतिक दलों को हड़बड़ी में बयान देने से बचना चाहिए। विश्वास ने राजनीति में भाषा के गिरते स्तर पर भी चिंता व्यक्त की। यह इंटरव्यू एक ऐसे समय पर आए हैं जब आम आदमी पार्टी वोटर्स, छवि और वालंटियर सब कुछ खो रही है। ऐसे में इस इंटरव्यू से साफ़ है कि हाल में मिली हारों के बाद आम आदमी पार्टी अपनी गिरती साख को ले कर चिंतन करने के मूड में है। ज़ाहिर है कि वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों में आम आदमी पार्टी की एकमात्र संजीवनी यही हो सकती है कि ज़मीनी कार्यकर्ताओं को दोबारा आवाज़ लगा कर एक बार पूरी ऊर्जा से दोबारा खड़ा किया जाए। इस पर बोलते हुए कुमार ने कार्यकर्ताओं से माफ़ी भी मांगी, कि आम आदमी पार्टी के नेता कार्यकर्ताओं की उम्मीद पर पूरी तरह से खरे नहीं उतरे। साथ ही कुमार ने कहा कि जब तक वो हैं, जंतर-मंतर वाले मूल आंदोलन को वो ज़िंदा रखेंगे। यह तो आने वाला समय बताएगा कि आम आदमी पार्टी हाल के चोटों से कितना उबर पाती है, लेकिन निराशा और हताशा के इस क्षण में इस इंटरव्यू से वालंटियर्स को ज़बरदस्त ऊर्जा मिलेगी जिससे वे सकारात्मक राजनीति की नई पारी खेलने के लिए उतर सकेंगे, एक ऐसी राजनीति जो करने का संकल्प ले कर आम आदमी पार्टी गठित हुई थी।

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