अन्ना जी अनशन तोड़ो

अन्ना जी अनशन तोड़ो
अब नहीं देर हो जाएगी ।
अगर हुआ कुछ तुम्हे
तो भारत में बर्बादी आएगी ।।
अलख जगाई है जो तुमने
आगे उसे बढाना है ।
मर जाएँ या मिट जाएँ
जन लोकपाल बिल लाना है ।।
चमड़ी मोटी बहुत हो गयी
है काले अंग्रेजों  की  ।
इनको दिखलानी है ताकत
भारत माँ के बेटों की  ।।
भ्रष्टाचारी सरकारें अब
सत्ता फिर न पाएंगी ।
अन्ना जी अनशन तोड़ो अब …………..

७४ के पार उम्र है
फिर भी जोश जवानों का ।
कैसे किया भरोसा ही
इन संसद के हैवानो का ।।
सवा अरब भारत की जनता
कहती है वो अन्ना है ।
पर भारत के संविधान को
जिसने किया निकम्मा है ।।
उससे ही आशाएं करके
जनता धोखा खाएगी ।
अन्ना जी अनशन तोड़ो अब …………..

गाँधी जी आदर्शों से
अपनी जान गंवाना है ।
लोहे की दीवारों से बस
अपना सिर टकराना है ।।
त्याग समर्पण से भारत को
कभी ना कुछ मिल पाया है ।
बिना महाभारत के कोई
धर्मराज ना आया है ।।
सोने की चिड़िया गिरवी है
वापस ना आ पायेगी ।
अन्ना जी अनशन तोड़ो अब …………..

1 thought on “अन्ना जी अनशन तोड़ो

  1. प्रिय कवि महोदय ,

    आपकी यह कविता पढ़कर मन बाग – बाग हो गया पर क्या करे ये तो भारत देश की बदकिस्मती है की कोई देश के बारे में कुछ सोचता ही नहीं और जो सोचता है उसे लगातार १२ दिनों तक भूखा रहने के बाद भी उसकी बातें सुनी नहीं जाती. अब समय आ गया सिर्फ बातें नहीं कुछ करना भी होगा सिर्फ गाँधी जी नहीं भगत जी, शुभाष चन्द्र बोस और आजाद बनना होगा …. ध्यानावाद ……

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