अरुण तिवारी

भारत का पहला नदी द्वीप ज़िला माजुली

माजुली में वर्षा काफी होती है और प्रदूषक औद्योगिक इकाइया हैं नहीं। इस कारण माजुली में प्रदूषण का संकट तो नहीं है, लेकिन जीवन की असुरक्षा और अनिश्चितता यहां एक बड़ा संकट है। एक आकलन के मुताबिक, बीसवीं सदी के अंत तक माजुली की 33 प्रतिशत भूमि ब्रह्यपुत्र के प्रवाह में समा चुकी थी। ब्रह्यपुत्र, हर वर्ष माजुली का बड़ा टुकड़ा निगल जाता है। 1991 से लेकर अब तक 35 गावों का नामोनिशां मिट चुका है।

मावफलांग के खासी

दैवशक्ति लबासा की निगाह में पवित्र जंगल का बुरा करना अथवा जंगल के भीतर बुरा सोचना-बोलना किसी बड़े अपराध से कम नहीं। इसकी सजा अत्यंत घातक होती है। इसी विश्वास और जंगल पर सामुदायिक हकदारी ने लंबे अरसे तक मावफलांग के जंगल बचाये रखे। जंगलों पर हकदारी और जवाबदारी दोनो ही हिमाओं के हाथ में है।

कितना असाधारण अब सौ फीसदी कुदरती हो जाना

परिस्थिति के हिसाब से किसानों के तर्क व्यावहारिक हैं। उनकी बातों से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे केचुंआ खाद, कचरा कम्पोस्ट आदि से परिचित नहीं है। गोबर गैस प्लांट उनकी पकड़ में नहीं है। हरी खाद पैदा करने के लिए हर साल जो अतिरिक्त खेत चाहिए, उनके पास उतनी ज़मीन नहीं है। ज़िला कृषि कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी गांव में आते-जाते नहीं। सच यही है कि जैविक खेती के सफल प्रयोगों की भनक देश के ज्यादातर किसानों को अभी भी नहीं है।

गणेश चतुर्थी -भारतीय संस्कृति में सर्वाधिक लोकप्रिय महापर्व

गणेश चतुर्थी-गणेश भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं, वे सात्विक देवता हैं और विघ्नहर्ता हैं…