विश्ववार्ता रासलीला है, संसार का पहला खुला रंगमंच April 26, 2020 / April 26, 2020 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव देश ओर काल की परंपरागत विभिन्न परिस्थितियो में भारत के नाट्य रंगमंचों को विश्व में कला ओर संस्कृति का विशिष्ट स्थान प्राप्त है तभी वेदपुराणों ओर शास्त्रों के ऋषियों ने रास- रसेश्वर श्रीकृष्ण की रासलीला का खुले में लीला को साकार रूप दिये जाने के कारण रासलीला को विश्व के खुले रंगमंच […] Read more » raslila खुला रंगमंच भारत के नाट्य रंगमंच रासलीला संसार का पहला खुला रंगमंच
धर्म-अध्यात्म मनोरंजन रामायण में काण्ड का नाम सुन्दर काण्ड क्यों? April 14, 2020 / April 14, 2020 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव महर्षि वाल्मीक रचित रामायण हो या गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित्र मानस, दोनों में बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किंधाकाण्ड, उत्तरकाण्ड नामकरण कर रामकथा के प्रसंगों को इन काण्डों में समाहित किया है जिसमें सुंदरकाण्ड नामकरण किए जाने की विशेषताओं का रहस्य विरले ही समझ पाते है विशेषकर वे लोग जो नित्य प्रतिदिन सुंदरकाण्ड का पाठ करते है […] Read more » ramayan sundar kand in ramayan Why is the name of the case Sundara Kanda in Ramayana? सुन्दर काण्ड
लेख ग्वाल-ग्वाला वंश परंपरा के पूज्य देवी-देवता April 9, 2020 / April 9, 2020 | 1 Comment on ग्वाल-ग्वाला वंश परंपरा के पूज्य देवी-देवता आत्माराम यादव पीव यह ब्रह्मांड एक शक्तिपुंज है जिसमें आदिशक्ति शिव ओर प्रकृतिरूपा शक्ति की अनेक नाम ओर स्वरूप मे देवियो को पूजने का विधान है। प्राय सभी जाति ओर वर्ग में लोक देवी देवता शक्ति के अवतार माने गए है जिनके उदभव, विकास ओर सुयश के संबंध में अनेक गाथाएँ, किवदंतिया लोक जीवन में आस्था […] Read more » Worshiped deities of the Gwal-Gwala dynasty
लेख 200 साल रहा था देवगिरि के यादवों का साम्राज्य April 6, 2020 / April 6, 2020 | Leave a Comment ऐतिहासिक दृष्टि से मध्यप्रदेश ओर उसकी संस्कृति का प्राचीन इतिहास कम देखने को मिलता है। भूगोल एवं मानस शास्त्र के अनुसार मध्यभारत का यह मध्यप्रदेश प्रांत देश के मध्य मे होने से भारत का कटिबन्ध रहा है जहा उत्तर ओर दक्षिण तथा पूर्व ओर पश्चिम का सम्मिलन स्वाभाविक है। मध्यप्रदेश का इतिहास ओर संस्कृति इसके […] Read more » देवगिरि के यादवों का साम्राज्य
कविता साहित्य क्यों राम नहीं तुम बन सके March 19, 2020 / March 19, 2020 | Leave a Comment क्यों राम नहीं तुम बन सके कारण तो बतला दो भैईया ? मातपिता से क्यों मुंह मोड़ा कारण तो समझा दो भैईया ? कमी कहॉ हुई उनकी ममता में क्यों बोलना वे भूले भैईया ? बहिन भाई से क्यों प्रीति तोड़ी अनमोल खजाना क्या पाया भैईया? जिस माता पिता ने जन्म दिया, अंधेरी उनकी हर […] Read more » क्यों राम नहीं तुम बन सके
कविता तुम सबसे अंनूठी हो मॉ March 14, 2020 / March 14, 2020 | Leave a Comment तुम सबसे अंनूठी हो मॉ दुख आया तो दवा नहीं ली हारी नहीं, तू खुद से लडी थी पिताजी देखे, सख्त बहुत थे तनखा लाकर वे दादी को देते पाई पाई को तू तरसा करती मजबूरी थी तू मजदूरी करती बेकार हुये जब कपड़े पिता के झट सिलवाती,,रहे न हम उघडे वे भी क्या दिन […] Read more » तुम सबसे अंनूठी हो मॉ
कविता खण्डहर लगता पुराना मकान March 12, 2020 / March 12, 2020 | Leave a Comment सदैव अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर पिता बनाता है एक सुंदर सा मकान जिसमें वह अधिष्ठित करता है अपने इष्टदेव अपने कुलदेवता को । साल दिन महीने वर्ष के साथ बदलती है ऋतुए, सर्दी गर्मी ओर बरसात हर साल वह देवों को सुलाता है होली दीवाली नवरात्रि मनाता है गणेश चतुर्थी, शिवरात्रि, जन्माष्टमी […] Read more » खण्डहर लगता पुराना मकान
व्यंग्य होशंगशाह किले की व्यथा March 7, 2020 / March 7, 2020 | Leave a Comment होशंगशाह गौरी का किला है कुछ खास खण्डहर हो चुका कभी था वह आवास नर्मदा का तट था सुल्तान को भाया सन चोदह सौ एक में किला बनवाया मंगलवारा घाट से मैं उसे अक्सर निहारू किले के अतीत का चिंतन मन में विचारु अनगिनत सवालों का सैलाब मन में होता अपने घर लौट आता ख्याल […] Read more » होशंगशाह किले की व्यथा
कविता शीशे का शहर होशंगाबाद March 7, 2020 / March 7, 2020 | Leave a Comment नर्मदातट पर बसा होशंगाबाद एक पारदर्शी शीशे का शहर है महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कुछ ऊंचे लोग बसते है जो शहरवासियों को दुर्भावनाओ षडयंत्रो ओर दुरभिसंधिओ के काँच से निहार, पत्थर बने है ॥ आधे अधूरे गुमनाम से ये लोग एक नहीं दो-दो पहचान रखते है सत्ता के गलियारे ओर दरवाजे पर गिरगिट […] Read more » Glass town hoshangabad शीशे का शहर होशंगाबाद होशंगाबाद
लेख भरत से हारकर राम ने मनाई जीत की खुशी March 3, 2020 / March 3, 2020 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव राम अपने छोटे भाई लक्ष्मण, भरत ओर शत्रुघन सहित अपने बाल सखायो की टोली लिए राजमहल से बाहर आते है ओर अयोध्या की गलियों में भमरा, लट्टू डोरी का खेलते है। गोस्वामी तुलसीदास ने गीतावली में भगवान के अनेक ललित लीलाओ उनके रूपमाधुर्य ओर उच्च चरित्र का चित्रण किया है। […] Read more » Ram celebrates victory by defeating Bharat राम ने मनाई जीत की खुशी
कविता हम इंसान कहलाने योग्य कब होंगे ? February 28, 2020 / February 28, 2020 | Leave a Comment दिल्ली सुलग रही है ओर देश चुप है देश का आम आदमी चुप है पता नहीं क्यों कुछ विशेष आततायी भीड़ मे घिनोना चेहरा लिए आसानी से फूँक देते है मकान-दुकान जला देते है राष्ट्र की संपत्ति । उखाड़ फैकते है पीढ़ी दर पीढ़ी रह रहे लोगों के इंसानी रिश्ते फूँक देते है उनके आशियाने […] Read more » हम इंसान कहलाने योग्य कब होंगे ?
कविता बोलिये…. प्यारी-प्यारी बोलियाँ… February 27, 2020 / February 27, 2020 | Leave a Comment अब कहाँ बोली जाती है, लोगों में रसीली बोलियाँ जहाँ देखों वहीं मिलती है, लोगों में बनावटी बोलियाँ । भले प्रेमियों की आँखों में बँसी हो, प्रेमसनी अनकही बोलियाँ भले नाते-रिश्तों में घुली हुई हो, मिश्री सी मीठी बोलियाँ। बिखरे से है सभी साबुत लोग, बोलते है आपस में अटपटी बोलियाँ। व्हाटसअप’-फेसबुक के हजारों मित्र […] Read more » बोलिये…. प्यारी-प्यारी बोलियाँ...