कविता थकान February 27, 2020 / February 27, 2020 | Leave a Comment बहुत छायी,खूब छायी, जीवन में उदासी हताश मन,बोझल तन,ड़ूबी है बोझ से जिन्दगी उबासी। हैरान है,परेशान है, जीवन के रास्ते, हम बहुत थके, खूब थके, जिन्दगी तलाशते। हाथ थके,पाँव थके, थके सारे अंग, श्रद्धा थकी, विश्वास थका, थका जीने का ढंग। उम्मीद थकी, इंतजार थका, कल्पनाओं का आकाश थका मान थका,सम्मान थका, जीवन का हर […] Read more » थकान
कविता अभी जिंदा हूं खुद को बताना February 25, 2020 / February 25, 2020 | Leave a Comment अभी मरी नहीं हूं यह जतलाना खुदसे कहना, घर को जाती हूं मैं खुदसे कहना, घर को आती हूं मैं खुद से कहना, खाना खा लिया क्या खुद ही कहना, अभी कहां,खाती हूं मैं। जब भी घर में अकेली होती है, वह सभी काम कर रोती है बर्तन-कपड़े साफ करना खाना पकाना और खिलाना एक […] Read more » अभी जिंदा हूं खुद को बताना
कविता आदमी की कोई हद न रही February 20, 2020 / February 25, 2020 | Leave a Comment जाने ये क्या हद हो गयी ? कि आदमी की हद सरहदों में खो गयी सरहद बना ये आदमी,आदमी है कहाँ खोखला उसका वजूद और झूठा उसका जहाँ, सगे भाईयों के बीच,आपस में ठनी हो गयी, आंगन में लगी बाँगड़., और घनी हो गयी ? जाने ये क्या हद हो गयी कि आदमी मुस्कान गमों […] Read more » आदमी की कोई हद न रही
कविता साहित्य दान… February 20, 2020 / February 26, 2020 | Leave a Comment उतारो उतारो आज तुम जिस्म से अपनी खूबसूरत आत्मा का यह गहना उठो दुआयें देकर यमराज को, यह आत्मा दान दे दो। बनाकर भेजी थी विधाता ने तेरी निराली सूरत जिस्म इंसान का देकर, गढी गजब की मूरत उठो प्रार्थनायें गाकर अपने प्रभु को, इन साँसों का आभार दे दो। आज मगरूर है कितना, तेरा […] Read more » दान
कविता पहनी है धरती ने ज्योति की पायल February 20, 2020 / February 26, 2020 | Leave a Comment आज आसमाँ से ये जाकर कह दे कोई सितारों की महफिल कहीं और सजायें। पहनी है धरती ने ज्योति की पायल, दीपों के घुंघरू, स्वर झाँझन सुनायें। खैर नहीं तेरी ओ अमावस्या के अंधेरे धरती से उठा ले तू आज अपने ड़ेरे। रोशनी को देख अंधेरा थरथराया खूब चीखा पटाखों में, अंधेरे का हुआ सफाया। […] Read more » पहनी है धरती ने ज्योति की पायल
कविता खाली हाथ February 20, 2020 / February 21, 2020 | Leave a Comment सारी रात नींद आँखों से कोसों दूर है ख्यालों का पुलिंदा मधुर पल की चाह में एक पल के लिये जीने को उत्सुक है। नितांत अकेला, कुर्सी पर बैठा आदमी विचारों में ड़ूबा तलाश रहा है उस पल को और वह मधुर पल उसके हाथों से खिसक कर बहुत दूर असीम में सरकता हुआ चला […] Read more » खाली हाथ
कविता जो करना है अभी करें, आज के दिन February 20, 2020 / February 21, 2020 | Leave a Comment दिल में नये अरमान बसायें,आज के दिन। दिल को गूंचे की तरह खिलायें, आज के दिन॥ फूलों की तरह हँसे-हँसायें, आज के दिन। बादल की तरह झूमे-छा जायें, आज के दिन॥ मुस्कान की बरखा में नहायें,आज के दिन। कलियों की तरह खिल जायें, आज के दिन॥ भँवरों की तरह भनभनायें, आज के दिन। झरनों सा […] Read more » Do what you want to do nowadays जो करना है अभी करें
कविता ओ भारत की संतानों जागो February 20, 2020 / February 21, 2020 | Leave a Comment ओ सोये हुये नादानों जागो, ओ भारत की संतानों जागो परिवर्तन का सूर्य उगा है,नीदं भगाओ लम्बी न तानों। ओ माझी तूफान से लड़ने वालों देश सारा ड़ूब रहा है उसे बचालो । तोड़. सभी रूढ़ियों की कच्ची रस्सी इन रस्सियों को, आज जरा आजमालो । परिवर्तन का तूफान उठा है, पतवार उठाओं बाधमान तानों। […] Read more » Awake children of India ओ भारत की संतानों जागो
कविता मेरी बिटिया रानी February 20, 2020 / February 20, 2020 | Leave a Comment मेरे घर जन्मी मेरी बिटिया, जैसे कोई नन्ही सी परी हो। छोटी सी प्यारी मेरी बिटिया जैसे गुड़िया कोई फूल सी हो। दिल की सच्ची मेरी बिटिया सबसे बातें करती न्यारी न्यारी। तुतलाती कोमल हाथों वाली, दिल चुराती बिटिया मेरी प्यारी। गिरती सँभलती, नन्हें पैरों वाली ऊगली मम्मी की थामे मेरी बिटिया। दादा दादी ओर […] Read more » मेरी बिटिया रानी
कविता अपना आपा खो दॅू February 3, 2020 / February 3, 2020 | Leave a Comment अपने घर -परिवार के लिये, अपने सगे संबंधियों के लिये अपने समाज व देश के लिये मैं जीना चाहता हॅू सभी के लिये इस हद तक, कि अपना आपा खो दॅू। मैं अपने सारे स्वार्थो के बिना मैं अपने सारे हितों के बिना दूसरों के लिये अपना सारा जीवन जीना चाहता हॅू इस हद तक, […] Read more » अपना आपा खो दॅू
दोहे स्वर्गलोक-भूलोक हो एकीभूत February 3, 2020 / February 3, 2020 | Leave a Comment जो गिरा हुआ है, उसे गिरने का क्या डर होगा जो नतमस्तक है, उसे घमण्ड ने क्या छुआ होगा। खुद मालिक उसे राह दिखायेे,जो नम्र हुआ होगा। जिसने जीत लिया मन को,वह संतोशी रहा होगा। जो शरण प्रभु की पा जाये,समर्पित वह रहा होगा।। जो दिल का बोझ उठाये, वासनाओं में घिरा होगा।। जो सत्य […] Read more » स्वर्गलोक-भूलोक हो एकीभूत
धर्म-अध्यात्म लेख नर्मदा का कंकड़ भी नर्मदेश्वर शिवलिंग बन जाता है। January 27, 2020 / January 27, 2020 | Leave a Comment विश्व की एकमात्र पाप-नाशिनी है नर्मदा– आत्माराम यादव समूचे विश्व में जो दिव्य व रहस्यमयी है तो वह नर्मदा। नर्मदा का वर्णन चारों वेदों की व्याख्या में विष्णु के अवतार वेदव्यास जी ने स्कन्द पुराण के रेवाखण्ड में किया है। रामायण और महाभारत में भी नर्मदा का उल्ल्ेख मिलता है। कालिदास ने नर्मदा […] Read more » The pebble of Narmada also becomes Narmadeswara Shivling. नर्मदेश्वर शिवलिंग