लेख धृतराष्ट्र उवाच से भगवतगीता की शुरुआत क्यो? April 29, 2024 / April 29, 2024 | Leave a Comment सनातन धर्म और संस्कृति में श्रीमदभगवत गीता का अत्यन्त विशिष्ट महत्त्व है, कारण गीता एक मात्र साक्ष्य है जो महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण के मुखारबिन्द से मोहग्रसित हुये अर्जुन के सभी संदेहों से मुक्त करने हेतु उदभूत हुई है। श्रीमदभगवतगीता का महत्व इसलिए सबसे ज्यादा है क्योकि गीता का पहला ही शब्द है धृष्टराष्ट्र उवाच अर्थात हस्तिनापुर साम्राज्य के […] Read more » Why does Bhagavad Gita begin with Dhritarashtra Uvaach?
व्यंग्य मक्खी मरी नही, तो गई कहाँ? April 24, 2024 / April 24, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव नन्हें-नन्हें पंखों वाली नन्ही सी सुंदर काया वाली मक्खी ओर मक्खा यत्र तत्र सर्वत्र निवास करते है। सबसे ज्यादा नटखट, फुर्तीली यह मक्खी सभी जगह घट-घट में मिल जाएगी, दुनिया का ऐसा कोई स्थान नहीं जो मक्खी से अछूता हो। दिन हो या रात मक्खी बिना आलस किए काम करती है। […] Read more »
लेख तुलसीदास रचित रामचरित मानस में नारी पात्र April 10, 2024 / April 10, 2024 | Leave a Comment गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस में नारी पात्रों को हम सामान्यया पढने के बाद अपने मन में उन पात्रों की महत्वपूर्ण भूमिकाएं पर चिंतन कर इनसे मिलने वाली सीख पर विचार नहीं कर पाते हैं। इन नारियों ने किन-किन परिस्थितियों में क्या-क्या चरित्र जीया और उनके जीवन में बनने वाली विभिन्न स्थितियां तथा उनके क्या परिणाम […] Read more » तुलसीदास रचित रामचरित मानस में नारी पात्र
व्यंग्य सबकी अपनी-अपनी खूंटी April 8, 2024 / April 8, 2024 | Leave a Comment – आत्माराम यादव पीव हर मनुष्य का अपना-अपना व्यक्तित्व है और वही उसकी पहचान भी है। करोड़ों की भीड़ में हरेक मनुष्य अपने निराले व्यक्तित्व के कारण पहचान लिया जाता है, यही उसकी विशेषता भी है। जैसे प्रकृति का नियम है कि वह पूरे जगत में एक भी वृक्ष,पौधा,बेल आदि सभी प्रकार की वनस्पति हो […] Read more »
व्यंग्य दूध और पानी की मैत्री April 7, 2024 / April 7, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव दूध और पानी आपस में गहरे मित्र है। ग्वालों के घर पैदा हुआ हॅू इसलिए गायों की प्रकृति को समझता हॅू, वहीं गाय जो हमें अमृत रूपी दूध देती है उस दूध और पानी की मित्रता तथा आपसी प्रेम को लेकर अनेक बार नानी जी उनकी प्रेम कहानी बताती रही […] Read more »
लेख माखनलाल चतुर्वेदी के बचपन की होली March 19, 2024 / March 19, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव रंगों का पर्व होली आपसी झगडे, फॅसाद, आपसी वैमनस्यता समाप्त कर एक दूसरे पर रंग गुलाल डालकर गले मिलने का अनूठा त्यौहार है। ब्रजमण्डल ही नहीं अपितु उत्तर मध्य भारत में प्राय: सभी वर्ग एवं संप्रदाय के लोग होली उत्सव को धूमधाम से मनाते है तथा एक विशेष वर्ग भी है […] Read more » माखनलाल चतुर्वेदी के बचपन की होली
लेख स्वेच्छाचारिणी मायावी सूर्पणखा की जीवन मीमांसा March 18, 2024 / March 18, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव सूर्पणखा का असली नाम बज्रमणि था। सूप की भाँति बड़े-बड़े नाखूनों के कारण इसे लोग सूर्पणखा कहते ये (वयंरक्षामः, सूर्पणखा खण्ड-54 देखें)। इसका विवाह कालखंजवंशी विद्युज्जित नामक राक्षस से हुआ था। (देखें अध्याय रा. 7/2/38-39)। ब्रह्माचक्र के अनुसार यह अपनी दो पुत्रियों के साथ लंका व किष्किन्धापुरी की सीमाओं की रक्षा करती थी। […] Read more » मायावी सूर्पणखा की जीवन मीमांसा
लेख नर्मदाघाट का जगदीश मंदिर है 750 साल पुराना, महन्तों की 12 वीं पीढ़ी कर रही है पूजा March 13, 2024 / March 13, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव नर्मदापुरम ऐतिहासिक काल से नंदों, मौर्य तथा शुंगों के विशाल साम्राज्य में शामिल रहा है ओर सातवाहनों दक्षिण के राष्ट्रकूट आभीरों तथा प्रतापी गुप्त सम्राटों के आधिपत्य में रखा है। सन् 1401 में गौरी तथा खिलजी सुल्तानों के नर्मदापुर को अपने राज्य में शामिल करने के पूर्व […] Read more » Jagdish temple of Narmadaghat is 850 years old the 12th generation of Mahants is doing the worship. नर्मदाघाट का जगदीश मंदिर नर्मदाघाट का जगदीश मंदिर है 850 साल पुराना
व्यंग्य क्या गोबर दोबारा मानव जाति का अन्न और प्राणदाता बन सकेगा ? March 11, 2024 / March 11, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव मैं गोबर हॅू, आज अपनी आत्मकथा सुनाना चाहता हॅॅू। मुझ गोबर के पिता का नाम जठरानलानन्द है और श्रीमती सुरभी अर्थात गाय मेरी माता हैं। मेरे जन्मस्थान का नाम लेने से दिन-भर अन्न-जल के दर्शन न होंगे, इसलिए नहीं बताऊँगा। हाँ, मैं इस बात से पूर्णतः आश्वस्त हॅू कि मेरे जन्म स्थान […] Read more » Will cow dung be able to become the food and life giver of mankind again?
धर्म-अध्यात्म लेख वर्त-त्यौहार शिव भस्म धारण से मिलता है कल्याण March 11, 2024 / March 11, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव शिव ही सर्वज्ञ, परिपूर्ण और अनंत शक्तियों को धारण किए हैं। जो मन, वचन, शरीर और धन से शिव भावना करके उनकी पूजा करते हैं, उन पर शिवजी की कृपा अवश्य होती है। शिवलिंग में शिव की प्रतिमा ने शिव भक्तजनों में शिव की भावना करके उनकी प्रसन्नता के लिए पूजा का विधान है जो […] Read more » One gets welfare by wearing Shiva Bhasma
धर्म-अध्यात्म लेख वर्त-त्यौहार शिव भस्म धारण से मिलता है कल्याण March 7, 2024 / March 7, 2024 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव शिव ही सर्वज्ञ, परिपूर्ण और अनंत शक्तियों को धारण किए हैं। जो मन, वचन, शरीर और धन से शिव भावना करके उनकी पूजा करते हैं, उन पर शिवजी की कृपा अवश्य होती है। शिवलिंग में शिव की प्रतिमा ने शिव भक्तजनों में शिव की भावना करके उनकी प्रसन्नता के लिए पूजा का विधान है जो […] Read more » शिव भस्म
लेख व्यंग्य गोबर दोबारा मानव जाति का अन्नदाता और प्राणदाता बन सकेगा ? March 4, 2024 / March 4, 2024 | Leave a Comment गोबर की आत्मकथा- आत्माराम यादव पीव मैं गोबर हॅू, आज अपनी आत्मकथा सुनाना चाहता हॅॅू। मुझ गोबर के पिता का नाम जठरानलानन्द है और श्रीमती सुरभी अर्थात गाय मेरी माता हैं। मेरे जन्मस्थान का नाम लेने से दिन-भर अन्न-जल के दर्शन न होंगे, इसलिए नहीं बताऊँगा। हाँ, मैं इस बात से पूर्णतः आश्वस्त हॅू कि […] Read more » Will cow dung again become the provider of food and life to mankind? गोबर की आत्मकथा