अवनीश सिंह भदौरिया

लेखक दैनिक न्यू ब्राइट स्टार में उप संपादक हैं।

भारतीय रेल नहीं हादसों की रेल कहिए!

20-11-2016 की वह दर्दनाक वह सुबह अब भुले भुलाई नहीं जा सकती है। रविवार की वह मनहूस सुबह जब लोग आराम से ट्रेन में सो रहे थे कि अचानक से एसा लगा कि 10 की तीव्रता से भूकंप आया हो जब तक लोग कुछ समझ पाते कि वो मौत की आगोश में सो गऐ। जी हां हम बात कर रहे हैं 20-11-2016 की वह मनहूस सुबह जब लोग इंदौर-पटना एक्सप्रेस रेल में अपने सपनो में खाये हुए थे काई अपनी मंजली पर पहुंचने के सपने देख रहा था तो काई अपने घर पहुचने के तो कोई अपने बुढ़े मां-बाप की चिंता में खोया हुआ था कि अचानक चिल्लकारी मच गई लो हाए दईया-हाए तौबा करने लगे देखते ही देखते इंदौर-पटना एक्सप्रेस रेल पटरी से उतर गई।

राजधानी की आवोहवा में जहर!

देश में लाखों डेयरियों में रोज शाम को धुंए के बादल उठते दिखाई देने लगते हैं। भले ही वातावरण में मच्छर हों या न हों। परंतु अब प्रदूषण की यही स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई लगती है। खासतौर पर हमारे देश से संबंधित ऐसे भयानक आंकड़े सामने आने लगे हैं जो हमें यह बताने के लिए काफी हैं कि इन हालात को पैदा करने के जि़म्मेदार भी हम स्वयं हैं।

नेताजी के कुनबे में राजनीतिक भूचाल?

चाचा-भतीजे की लड़ाई में विपछी पार्टियां खूल चुटकियां ले रही हैं वहीं कुछ दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि मुलायम सिंह अपने कुनबे को तो सभाल नहीं पा रहे हैं तो यूपी क्या सभालेंगे। वे यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि पैर उतने ही पसारने चाहिए कि जितनी बड़ी चादर हो वरना ढंड लग जाएगी।

चीन की गिरगिट वाली औकात?

चीन ने ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोका अब हम सब चीन की कोई भी प्रोडक्ट बाजार से न खरीदें अब हम सब भारतवासी हैं तो चीन को सबक सिखाने का इससे अच्छा मौका कभी नहीं मिलेगा। आज पुरी दुनिया में चाईनीज चीजों का बोल बाला है और यह हम सब जानते हैं। बाजारों में जहां नजर उठाकर देखो वहीं चाइनीज चीजें ही दिखाई देती हैं।