नोट बंदी होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल

अवनीश सिंह भदौरिया

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पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ पीएम मोदी सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद अब पीएम ने कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है जी हां 8 नवंबर की रात देश में अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए यह बताया कि आधी रात से 1000-500 के नोट कानूनन अमान्य होंगे। पीएम ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि अब हम भष्टाचार को हिन्दुस्तान से बाहर उखाड़ फेकेंगे। पीएम मोदी के इस फैसले से पूरे देश में अफरातफरी का माहौल मचा हुआ है । पीएम ने कहा इस फैसले से काले धन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जालीनोटों के कारोबार पर लगाम लगेगी। पीएम ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राक करने पूरी दुनिया ने उन्हें सराहया था।  वहीं, पीएम ने जो कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक की है इसका असर सबसे ज्यादा पाकिस्तान पर पड़ेगा क्यों कि पाकिस्तान में जालीनोटों का कारोबार किया जाता है जो आतंक के लिए काम में लाया जाता है। वहीं, अब पीएम की काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान में हलचल मची हुई है। वहीं, भारत वासियों के साथ-साथ इस कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक को कई देश सराहनीय बता रहे हैं। वही, भारत में लोगों को पैसा चैंज व जमा कराने में दिक्क्त आ रही है पर देश की आवाम ने पीएम मोदी के इस फैसले को जनता ने सराहा है और भारत की आवाम ने कहा है कि अगर इस फैसले से भारत की उन्नती होती है। तो हम इस तकलीफ को बरदास्त कर लेंगे। वहीं, पीएम ने कहा था कि देश वासियों को तकलीफ होगी पर मैं इस के लिए माफी मांगता हूं। वहीं, पीएम ने कहा कि राष्ट्रहित पहले उसके बाद कुछ और। वहीं, भारत की राजनीतिक गलियारों में भुचाल आ गया है। वहीं, विपक्षी पार्टियाँ एक तरफ पीएम मोदी के काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले को गलत मान रहीं है। पर एक बात समझ से परे है कि एक तरफ विपक्षी पार्टियाँ पीएम के इस फैसले को गलत बता रहीं है तो इस फैसले को सही  बता रहीं है। अब विपक्षी पार्टियों क्या मजलब है यह समझ से परे है। वहीं, एक बात समझ में नहीं आई की मायावती ने तो पीएम पर आरोप लगाते हुए कहा है की पीएम मोदी ने इस फैसले से पहले ही विदेशों में पैसा जमा कर लिया है। उन्होंने कहा पीएम का यह फैसला बिलकुल गलत है। इससे भ्रष्टाचार और बढ़ेगा। माया के इन बोलों को क्या समझा जाए। क्या यह समझा जा कि पीएम के इस फैसले से सबसे ज्यादा नुक्सान उन्हें ही हुआ है या फिर ये समझा जाए कि उन्हें राष्ट्र से ज्यादा पैसे से प्यार है? वहीं, दूसरी तरफ सपा मुखिया मुलायम सिंह भी बहती हुई गंगा में हाथ धोने से पीछे नहीं हटे और उन्होंने कहा कि पीएम ने जो काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक की है वो ठीक है लेकिन समय सही नहीं है। उन्होंनें कहा कि पीएम को यह फैसला वापस लेना चाहिए। वहीं, भारत की राजधानी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पीएम मोदी के बीच हमेशा से सांप नेवले वाले रिस्ते हैं। वहीं, केजरीवाल ने कहा कि पीएम का यह फैसला गलत है। वहीं, इससे भ्रष्टाचार और बढ़ेगा न की कम होगा। वहीं पीएम के इस फैसले का साथ देना चाहिए तब विपक्षी पार्टियाँ इस पर सियासी रोटी सेंक रहीं है। और आप को बता दें कि पूर्व सत्ता में रहे कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी राष्ट्रहित से परे सियासत के इस भवंर में में खूब डुबकी मार रहे हैं। पर उन्हें यह पता नहीं है कि जो भी भवंर के बीच जाता है वह कही वहां से निकल नहीं सकता। उन्हेंने भी काले धन पर पीएम के इस सर्जिकल स्ट्राइक को गलत बाता है और कहा है कि इससे उन्होंने कहा कि इसस फैसले से आम लोगों को परेशानी हो रही है। लेकिन भारत की आवाम तो इस फैसले से ख्ुाश है तो फिर राहुल गांधी को क्यों चिंता हो रही। भारत वासी कह रहे हैं कि हम राष्ट्रहित के लिए थोड़ी सी परेशानी उठा सकते हैं। और पीएम का यह फैसला सराहनीय है। तो राहुल गांधी बैंकों में जाके राजनीतिक रोटियां क्यों सेक रहै हैं? या तो पीएम मोदी के इस फैसले से कांग्रेस पार्टी को सायद ज्यादा नुकसान हुआ है। नुकसान का मतलब काला धन जो अब उनके कुछ काम का नहीं है। मुझे लगता है कि इस से भारत की राजनीति में भुचाल मचा हुआ है। वहीं, राजनीतिक पार्टियों ने पीएम के इस फैसले पर सियासत करते हुए कहा कि “पीएम भारत के तानाशाह बनना चाहते हैं। वे पूरे देश को प्रधानमंत्री आर्थिक तंगी लाना चाहते हैं। पीएम मोदी ने जो काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक की है उससे आतपात काल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। ऐसे में देश बहुत पीछे चला जाएगा। पीएम मोदी ओछी राजनीति कर रहे हैं”। लेकिन इन सब बातों से परे हटके एक बात  है कि भारत की आवाम पीएम मोदी के साथ कंधे से कंधा मिलकार खड़ी है। वहीं पीएम के इस फैसले से एक बात तो साफ हो गई है कि आने वाले वक्त में सब कुछ साफ हो जाएगा कि हमारे देश में भ्रष्टाचार कितना हमारे देश को खोखला कर रहा है। काले धन, भ्रष्टाचार पर सचमुच रोक लगानी है, तो केवल करेंसी बदलना पर्याप्त नहींहोगा। राजनीति से लेकर व्यापार तक जो अनैतिक गठजोड़ होते हैं, बाहुबलियों, राजनेताओं, अफसरों की मिलीभगत होती है, क्या उसे भी सरकार बदल पाएगी? पीएम मोदी के इस फैसले का विपक्षी पार्टियों को विरोध करना यह साफ दर्शाता है कि कहीं न कहीं भ्रष्टाचार तो है। वहीं, देखना है कि यह मोदी मोदी की काले धन पर सर्र्जिकल स्ट्राइक का अर्थव्यवस्था पर, काले धन पर, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जाली नोटों के धंधे पर क्या असर पड़ेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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