ब्रजेश कुमार झा

गंगा के तट से यमुना के किनारे आना हुआ, यानी भागलपुर से दिल्ली। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से पढ़ाई-वढ़ाई हुई। कैंपस के माहौल में ही दिन बीता। अब खबरनवीशी की दुनिया ही अपनी दुनिया है।

हीरामन की बैलगाड़ी अब भी है सुरक्षित

पटना। सन 1966 में बनी यादगार फिल्म तीसरी कसम की चर्चा मात्र से साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु की खूब याद आती है। जिले के कसबा प्रखंड के बरेटा गांव में मौजूद एक बैलगाड़ी भी इसी की एक कड़ी है। यह वही बैलगाड़ी है जिसपर फिल्म के नायक हीरामन यानी हिन्दी सिनेमा के शोमैन राजकपूर ने सवारी की थी।

गोविंदाचार्य से ब्रजेश कुमार झा की बातचीत

वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में सज्जन शक्ति का चुन कर आना नामुमकिन होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया में सुधार की तत्काल जरूरत है।

सुरा पर फिदा तहजीब – ब्रजेश झा

पब संस्कृति को खत्म करने के नाम पर श्रीराम सेना के लोगों ने बड़ा उत्पात मचाया। इस दौरान युवतियों के साथ जो बेअदबी हुई, उससे भारतीय संस्कृति से जुड़े कई गहरे सवाल..

अजित कुमार यानि हिन्दी सहित्य का बेहद पहचाना हुआ नाम – ब्रजेश झा

सहित्य से अलग अजित कुमार को आम पाठक एक जमाने में धर्मयुग पत्रिका में खूब पढ़ा करते थे। अब नए जमाने के आम पाठकों में कम ही लोग धर्मयुग और अजित बाबु के बारे में नाम से ज्यादा कुछ जानते हैं।