प्रमोद भार्गव

प्रमोद भार्गव

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लेखक प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार है ।

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लेखक - प्रमोद भार्गव - के पोस्ट :

विविधा

उद्योगों के लाभ से ज्यादा जरूरी है मानव स्वास्थ्य

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वाहन प्रदूषण की वजह से लोगों में गला,फेफड़ें और आंखों की तकलीफ बढ़ रही हैं। कई लोग मानसिक अवसाद की गिरफ्त में भी आ रहे हैं। हालांकि हवा में घुलता जहर महानगरों में ही नहीं छोटे नगरों में भी प्रदूषण का सबब बन रहा है। कार-बाजार ने इसे भयावह बनाया है। यही कारण है कि लखनऊ, कानपुर, अमृतसर, इंदौर और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी प्रदूषण खतरनाक स्तर की सीमा लांघने को तत्पर है। उद्योगों से धुंआ उगलने और खेतों में बड़े पैमाने पर औद्योगिक व इलेक्ट्रोनिक कचरा जलाने से भी इन शहरों की हवा में जहरीले तत्वों की सघनता बढ़ी है। इस कारण दिल्ली दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है। वैसे भी दुनिया के जो 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहर हैं,उनमें भारत के 13 शहर शामिल हैं।

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विश्ववार्ता

गिलगिट-बाल्टिस्तान : पाकिस्तान के गाल पर करारा तमाचा

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ब्लूचिस्तान ने 70 साल पहले हुए पाक के कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया। लिहाजा वहां अलगाव की आग निरंतर बनी हुई है। नतीजतन 2001 में यहां 50 हजार लोगों की हत्या पाक सेना ने कर दी थी। इसके बाद 2006 में अत्याचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करने वाले 20 हजार सामाजिक कार्यकर्ताओं को अगवा कर लिया गया था, जिनका आज तक पता नहीं है। 2015 में 157 लोगों के अंग-भंग किए गए। फिलहाल पुलिस ने जाने-माने एक्टिविस्ट बाबा जान को भी हिरासत में लिया हुआ है। पिछले 16 साल से जारी दमन की इस सूची का खुलासा वाॅशिगटंन में कार्यरत संस्था “गिलगिट-बाल्टिास्तान नेशनल कांग्रेस” ने किया है।

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कला-संस्कृति विविधा

सृष्टि की रचना का पहला दिन

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प्रचीन भारत और मघ्यअमेरिका दो ही ऐसे देश थे, जहां आधुनिक सैकेण्ड से सूक्ष्मतर और प्रकाशवर्ष जैसे उत्कृष्ठ कालमान प्रचलन में थे। अमेरिका में मय सभ्यता का वर्चस्व था। मय संस्कृति में शुक्रग्रह के आधार पर कालगणना की जाती थी। विश्वकर्मा मय दानवों के गुरू शुक्राचार्य का पौत्र और शिल्पकार त्वष्टा का पुत्र था। मय के वंशजो ने अनेक देशों में अपनी सभ्यता को विस्तार दिया। इस सभ्यता की दो प्रमुख विशेषताएं थीं, स्थापत्य कला और दूसरी सूक्ष्म ज्योतिष व खगोलीय गणना में निपुणता। रावण की लंका का निर्माण इन्हीं मय दानवों ने किया था। प्रचीन समय में युग,मनवन्तर,कल्प जैसे महत्तम और कालांश लधुतम समय मापक विधियां प्रचलन में थीं। समय नापने के कालांश को निम्न नाम दिए गए

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विविधा

खुशियों के देश !

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धर्म में रूढ़ि और आडंबर को प्रचारित किया जा रहा है। जबकि खासतौर से सनातन धर्म अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत समन्वय है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक संदर्भों में कम ही परिभाषित किया जा रहा है। मानव-शरीर सरंचना के परिप्रेक्ष्य में विज्ञान की पहुंच केवल अस्थि-मज्जा के जोड़ और जैविक रसायनों के घोल तक सीमित है। जबकि मानव शरीर महज जैविक रसायनों का संगठन भर नहीं है, बल्कि उसकी अपनी मनोवैज्ञानिक एवं उससे भी इतर आध्यात्मिक सत्ता भी है, जो मानसिक स्तर पर मानवीय चेतना एवं व्यक्तित्व विकास का प्रमुख आधार तत्व है।

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राजनीति

वजूद के संकट में मायावती

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मायावती ने मूर्तियों के माध्यम से दैवीय प्रतीक गढ़ने की जो कवायद की, हकीकत में ऐसी कोशिशें ही आज तक हरिजन, आदिवासी और दलितों को कमजोर बनाए रखती चली आई हैं। उद्यानों पर खर्च की गई धन राशि को यदि बंुदेलखण्ड की गरीबी दूर करने अथवा दलितों के लिए ही उत्कृष्ठ विद्यालय व अस्पताल खोलने में खर्च की गई होती तो एक तरफ खेती-किसानी की माली हालत निखरती और दूसरी तरफ वंचितों को निशुल्क शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं मिलती। किंतु मायावती की अब तक की कार्य संस्कृति में मानक व आदर्श उपायों और नई दृष्टि का सर्वथा अभाव रहा।

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राजनीति

मुस्लिम तुष्टिकरण के बिना भी बड़ी जीत

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पा, बसपा और कांग्रेस ने जिस तादात में मुस्लिमों को टिकट दिए और संप्रदाय व जतीयता को उभारने के प्रयत्न किए, उसके चलते मायावती से जहां उसका परंपरागत जाटव वोट छिटका, वहीं सपा से यादव छिटक गए। मुलायम कुनबे की लड़ाई ने भी इस क्षरण में इजाफा करने का काम किया। कांग्रेस का राहुल गांधी के नेतृत्व में जिस तरह से जनाधार सिमट रहा है, उससे साफ है कि वंशवादी राजनीतिक परंपरा से जनता अब छुटकारा चाहती है। देश की 58 प्रतिशत आबादी और 25 फीसदी जीडीपी वाले 14 राज्यों में भाजपा की सरकारें बन जाना इसका प्रमाण है।

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