धर्म-अध्यात्म भारत का योग दर्शन October 15, 2010 / December 21, 2011 | Leave a Comment – बजरंगलाल अत्रि दर्शनशास्त्र में योगदर्शन का विशेष महत्व है। इसीलिए भारतीय या वैदेशिक अथवा आस्तिक या नास्तिक समस्त दार्शनिक संप्रदाय किसी न किसी रूप में योग साधना करते हैं। इसका कारण है कि योगसाधना समस्त दर्शनों और विशेषकर सांख्यदर्शन का व्यवहारिक पक्ष है। योग दर्शन और साधना उतनी ही पुरानी है जितनी पुरानी मानव […] Read more » Yog योग
विविधा विकास की विडम्बना झेलते लोग October 14, 2010 / December 21, 2011 | 1 Comment on विकास की विडम्बना झेलते लोग -राखी रघुवंशी यह जरूरी नहीं कि सरकारी विकास योजनाएं हमेशा लोगों के लिए फायदेमंद ही हो। बल्कि कई बार ये उन्हीं लोगों को संकट में डाल देती है, जिनके हित में बनाई गई है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में इस तरह की कुछ घटनाएं सामने आई है, जो सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के तरीकों और नीतियों […] Read more » Developement विकास
प्रवक्ता न्यूज़ पत्रकार सौरभ मालवीय बने माखनलाल विवि के प्रकाशन अधिकारी October 14, 2010 / December 21, 2011 | 26 Comments on पत्रकार सौरभ मालवीय बने माखनलाल विवि के प्रकाशन अधिकारी भोपाल। युवा पत्रकार-लेखक सौरभ मालवीय तथा वरिष्ठ पत्रकार राघवेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के क्रमश: प्रकाशन अधिकारी व प्रकाशन प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। विदित हो कि माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय से प्रसारण पत्रकारिता में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने वाले व वर्तमान में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ विषय पर शोध कर रहे श्री […] Read more » Makhanlal Chaturvedi Patrakarita Vishwavidyalay माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
प्रवक्ता न्यूज़ कला आलोचना में व्यापक संभावनाएं : मनीष October 13, 2010 / December 21, 2011 | Leave a Comment पत्रकारिता विश्वविद्यालय में चित्रकार मनीष पुष्कले का व्याख्यान भोपाल 13 अक्टूबर। रजा फेलोशिप से सम्मानित अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चित्रकार मनीष पुष्कले का कहना है कि भारत में कला एवं सांस्कृतिक समीक्षा का स्तर दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ है। भारत में आलोचना केवल रिपोर्ताज तक ही सीमित है, इस कारण भारत में […] Read more » Art Criticism कला आलोचना
विविधा बिहार हाशिए पर क्यों? October 12, 2010 / December 21, 2011 | 1 Comment on बिहार हाशिए पर क्यों? -अनिल दत्त मिश्र बिहार का अतीत गौरवशाली रहा है। मौर्य साम्राज्य, कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’, नालंदा विश्वविद्यालय, विक्रमशिला विश्वविद्यालय, जैन-बौध्द धर्म का उदय, स्वतंत्रता संग्राम में राजेन्द्र प्रसाद, सच्चिदानंद सिन्हा, मौलाना मजरूल हक आदि अग्रणी नेता इसी प्रांत से आते हैं। महात्मा गांधी ने चंपारण आंदोलन बिहार से शुरू करके स्वतंत्रता का सुत्रपात किया। जयप्रकाश नारायण, […] Read more » bihar बिहार
विविधा दिल्ली के तिलस्म को ललकारता भयावह सच October 12, 2010 / December 21, 2011 | 3 Comments on दिल्ली के तिलस्म को ललकारता भयावह सच -बंशीधर मिश्र एक तरफ वैभव का विराट सम्मेलन हो, उसमें गोते लगाते तमाम देशी-विदेशी मेहमान हों और दूसरी तरफ, भूख से बिलबिलाते बच्चे हों, बाढ़ में सब कुछ गंवा चुके यतीम यायावर हों, तो आप किसके साथ खड़े होंगे? यदि एक तरफ अरबों के खर्च पर बने ‘खेलों के गांव’ हों और दूसरी तरफ उजड़ […] Read more » Delhi दिल्ली
विविधा प्रवक्ता डॉट कॉम के दो साल पूरे होने पर ऑनलाइन लेख प्रतियोगिता October 12, 2010 / April 13, 2012 | 23 Comments on प्रवक्ता डॉट कॉम के दो साल पूरे होने पर ऑनलाइन लेख प्रतियोगिता ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’ वेब पत्रकारिता का चर्चित मंच व वैकल्पिक मीडिया का प्रखर प्रतिनिधि है। इसकी शुरूआत 16 अक्टूबर, 2008 को हुई थी। ‘प्रवक्ता’ का उद्देश्य है जनसरोकारों से जुड़ी खबरों को लोगों तक पहुंचाना एवं विचारशील बहस को आगे बढ़ाना। विचार पोर्टल प्रवक्ता डॉट कॉम के दो साल पूरे होने पर एक ऑनलॉइन लेख […] Read more » Pravakta.com प्रवक्ता डॉट कॉम
विविधा ज्ञान प्राप्ति की पीड़ा का उल्लास October 12, 2010 / December 21, 2011 | 2 Comments on ज्ञान प्राप्ति की पीड़ा का उल्लास -हृदयनारायण दीक्षित भारतीय दर्शन में ‘इच्छाशून्यता’ की महत्ता है। गीता दर्शन में आसक्तिरहित जीवन पर ही जोर है लेकिन जानने की इच्छा भारतीय दर्शन पररपरा का सम्मानीय शिखर है। इस इच्छा की अपनी खास पीड़ा, इस पीड़ा का भी अपना आनंद है। गीता भी ज्ञान प्राप्ति की इच्छा पर जोर देती है। श्री कृष्ण अर्जुन […] Read more » Knowledge ज्ञान
विविधा आओ, अब भारत की ओर लौट चले! October 12, 2010 / December 21, 2011 | 2 Comments on आओ, अब भारत की ओर लौट चले! देश को आजाद हुए 63 साल हो चुके है किंतु भारत की विडम्बना है कि भारत के सभी गांवों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। भारत के काफी गांव सरकारी दावों के विपरित मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है, आज स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कोई भी थोड़ा सा आधुनिक विचारों वाला […] Read more » India देशप्रेम
प्रवक्ता न्यूज़ लंदन में प्रथम हिंदी छात्र सम्मेलन October 12, 2010 / December 21, 2011 | 2 Comments on लंदन में प्रथम हिंदी छात्र सम्मेलन ‘यू.के हिंदी समिति’ के 20 वर्ष एवं ‘हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता’ के दस वर्ष के उपलक्ष्य में लंदन के नेहरू केंद्र में में दिनांक 26 सितंबर को प्रथम हिंदी छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में यू.के. के विभिन्न शहरों से सैकड़ों हिंदी के विद्यार्थियों ने भाग लिया। सम्मेलन में 4 वर्ष की आयु से […] Read more » Student's Hindi seminar हिंदी छात्र सम्मेलन
महिला-जगत भारतीय चिंतन में नारी दृष्टि October 11, 2010 / December 21, 2011 | 7 Comments on भारतीय चिंतन में नारी दृष्टि -हृदयनारायण दीक्षित मां सृष्टि की आदि अनादि अनन्य अनुभूति है। प्रत्येक जीव मां का विकास है। मां प्रथमा है। दिव्यतम् और श्रेष्ठतम् अनुभूति है मां। इसलिए सभ्यता विकास के प्रारंभिक चरण में ही मनुष्य को जहां-जहां अनन्य प्रीति मिली, वहां-वहां उसने मां की अनुभूति पाई। जल जीवन का प्राण है। जल नहीं तो जीवन नहीं। […] Read more » Woman नारी
राजनीति राहुल गाँधी और उनके दो राजनैतिक भारत October 11, 2010 / December 21, 2011 | 4 Comments on राहुल गाँधी और उनके दो राजनैतिक भारत – डॉ. ज्योति किरण पिछले दिनों राहुल गाँधी की बंगाल यात्रा के दौरान एक न्यूज़ चैनल ने समाचार के साथ ही एक ‘विजुअल क्लिप’ दिखाया। यह क्लिप कई अर्थों में महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह एक हज़ार से भी अधिक शब्द बोल रहा था। बहुत नपी-तुली पर प्रेरक भाषा में राहुल कहते हैं पहले एक भारत […] Read more » Rahul Gandhi राहुल गांधी