ब्रह्मा विष्णु और रुद्र के संयुक्त स्वरुपवाली विश्व की पहली स्मार्ट सिटी है अयोध्या

डा. राधेश्याम द्विवेदी
वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, “अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या” और इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग 144कि.मी) लम्बाई तीन योजन (लगभग 36 कि.मी.) चौड़ाई में बसी थी। कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर है। यहां आज भी हिन्दू, बौद्ध, इस्लाम ऐवम जैन धर्म से जुड़े अवशेष देखे जा सकते हैं। जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित पांच तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। इसका महत्व इसके प्राचीन इतिहास में निहित है क्योंकि भारत के प्रसिद्ध एवं प्रतापी क्षत्रियों (सूर्यवंशी) की राजधानी यही नगर रहा है। उक्त क्षत्रियों में दाशरथी रामचंद्र अवतार के रूप में पूजे जाते हैं। पहले यह कोसल जनपद की राजधानी था। प्राचीन उल्लेखों के अनुसार तब इसका क्षेत्रफल 96 वर्ग मील था। यहाँ पर सातवीं शाताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहाँ 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3000 भिक्षु रहते थे।
वाल्मीकि रामायण में स्मार्ट सिटी पहले से ही दिखया जा चुका:-मोदी सरकार ने भले ही देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने का लक्ष्य रखा हो और फिलहाल इसके लिए 20 शहरों के नामों की घोषणा भी कर दी हो लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की पहली ‘स्मार्ट सिटी’ अयोध्या थी। हैरान रह गए ना आप। लेकिन, ये हम नहीं कह रहे बल्कि इसके सबूत हमें वाल्मीकि रामायण के भीतर ही मिलते हैं। वाल्मीकि रामायण के पांचवे सर्ग में अयोध्या पुरी का वर्णन विस्तार से किया गया है। आइए जानते हैं क्यों थी अयोध्या दुनिया की सबसे पुरानी स्मार्ट सिटी। साकेतपुरी अयोध्या का वर्णन करते हुए महर्षि वाल्मीकि, रामायण के बालकांड के पांचवें सर्ग के पांचवें श्लोक में लिखते हैं:
”कोसल नाम मुदित: स्फीतो जनपदो महान। निविष्ट: सरयूतीरे प्रभूतधनधान्यवान्।। (1/5/5)
अर्थात : सरयू नदी के तट पर संतुष्ट जनों से पूर्ण धनधान्य से भरा-पूरा, उत्तरोत्तर उन्नति को प्राप्त कोसल नामक एक बड़ा देश था। वाल्मीकि आगे लिखते हैं –”इसी देश में मनुष्यों के आदिराजा प्रसिद्ध महाराज मनु की बसाई हुई तथा तीनों लोकों में विख्यात अयोध्या नामक एक नगरी थी।(1/5/6) नगर की लंबाई चौड़ाई और सड़कों के बारे में महर्षि वाल्मीकि लिखते हैं –”यह महापुरी बारह योजन (96 मील) चौड़ी थी। इस नगरी में सुंदर, लंबी और चौड़ी सड़कें थीं। (1/5/7)
सड़कों की सफाई और सुंदरता:-वाल्मीकि जी सड़कों की सफाई और सुंदरता के बारे में लिखते हैं :”वह पुरी चारो ओर फैली हुई बड़ी-बड़ी सड़कों से सुशोभित थी। सड़कों पर नित्य जल छिड़का जाता था और फूल बिछाये जाते थे। (1/5/8) महर्षि आगे लिखते हैं – ”इंद्र की अमरावती की तरह महाराज दशरथ ने उस पुरी को सजाया था। इस पुरी में राज्य को खूब बढ़ाने वाले महाराज दशरथ उसी प्रकार रहते थे जिस प्रकार स्वर्ग में इन्द्र वास करते हैं।” (1/5/9)
साकेत पुरी की सुंदरता :- साकेत पुरी की सुंदरता का बखान करते हुए वाल्मीकि लिखते हैं : ”इस पुरी में बड़े-बड़े तोरण द्वार, सुंदर बाजार और नगरी की रक्षा के लिए चतुर शिल्पियों द्वारा बनाए हुए सब प्रकार के यंत्र और शस्त्र रखे हुए थे।” (1/5/11) उसमें सूत, मागध बंदीजन भी रहते थे, वहां के निवासी अतुल धन सम्पन्न थे, उसमें बड़ी-बड़ी ऊंची अटारियों वाले मकान जो ध्वजा पताकाओं से शोभित थे और परकोटे की दीवालों पर सैकड़ों तोपें चढ़ी हुई थीं। (1/5/12)
बाग-उद्यान :- नगर के बागों उद्यानों पर प्रकाश डालते हुए महर्षि वाल्मीकि लिखते हैं :”स्त्रियों की नाट्य समितियों की भी यहां कमी नहीं है और सर्वत्र जगह-जगह उद्यान निर्मित थे। आम के बाग नगरी की शोभा बढ़ाते थे। नगर के चारो ओर साखुओं के लंबे-लंबे वृक्ष लगे हुए ऐसे जान पड़ते थे मानो अयोध्या रूपिणी स्त्री करधनी पहने हो।” (1/5/13)
नगर की सुरक्षा और पशुधन:-नगर की सुरक्षा और पशुधन का वर्णन करते हुए महर्षि वाल्मीकि लिखते हैं : ”यह नगरी दुर्गम किले और खाई से युक्त थी तथा उसे किसी प्रकार भी शत्रु जन अपने हाथ नहीं लगा सकते थे। हाथी, घोड़े, बैल, ऊंट, खच्चर जगह-जगह दिखाई पड़ते थे। (1/5/14) ”राजभवनों का रंग सुनहला था, विमान गृह जहां देखो वहां दिखाई पड़ते थे।” (1/5/16) ”उसमें चौरस भूमि पर बड़े मजबूत और सघन मकान अर्थात बड़ी सघन बस्ती थी। कुओं में गन्ने के रस जैसा मीठा जल भरा हुआ था।” (1/5/17) ”नगाड़े, मृदंग, वीणा, पनस आदि बाजों की ध्वनि से नगरी सदा प्रतिध्वनित हुआ करती थी। पृथ्वीतल पर तो इसकी टक्कर की दूसरी नगरी थी ही नहीं।” (1/5/18) ”उस उत्तम पुरी में गरीब यानी धनहीन तो कोई था ही नहीं, बल्कि कम धन वाला भी कोई न था, वहां जितने कुटुम्ब बसते थे, उन सब के पास धन-धान्य, गाय, बैल और घोड़े थे।(1/6/7)
ब्रह्मा विष्णु और रुद्र तीनों का संयुक्त स्वरुप अयोध्या:- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार ब्रह्माजी के पास पहुंचकर मनु ने सृष्टिलीला में निरत होने के लिए उपयुक्त स्थान सुझाने का आग्रह किया। इसपर ब्रह्माजी उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब भगवान विष्णु ने मनु को आश्वासन दिया कि समस्त ऐश्वर्यसंपूर्ण साकेतधाम मैं अयोध्यापुरी भूलोक में प्रदान करता हूं। भगवान विष्णु ने इस नगरी को बसाने के लिए ब्रह्मा जी तथा मनु के साथ देवशिल्पी विश्वकर्मा को भेज दिया। इसके अलावा अपने रामावतार के लिए उपयुक्त स्थान ढूंढ़ने के लिए महर्षि वसिष्ठ को भी उनके साथ भेजा। मान्यता है कि वसिष्ठ द्वारा सरयू नदी के तट पर लीलाभूमि का चयन किया गया जहां विश्वकर्मा ने नगर का निर्माण किया। स्कंद पुराण के अनुसार अयोध्या भगवान विष्णु के चक्र पर विराजमान है। इसी पुराण के अनुसार अयोध्या में ‘अ’ कार ब्रह्मा, ‘य’ कार विष्णु और ‘ध’ कार रुद्र का ही रूप है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या आगमन:-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 31 मई2017 को अयोध्या पहुंचे। योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्यमंत्री राम लला के दर्शन करने वाले उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री हैं. इससे पहले बतौर मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह 2002 में अयोध्या गये थे. 1991 में हुए बाबरी विध्वंस के बाद राम लला के दर्शन करने वाले वह दूसरे मुख्यमंत्री हैं. यहां उन्होंने अस्थायी राम मंदिर में पूजा-अर्चना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद भार संभालने के बाद वह पहली बार अयोध्या आए हैं। मुख्यमंत्री 31 मई2017 को सुबह यहां पहुंचे। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर में स्थित अस्थायी मंदिर में वह करीब आधे घंटे तक रहे। बाद में उन्होंने सरयू नदी के तट पर पूजा की। आदित्यनाथ ने सबसे पहले अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। अयोध्या दौरे पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर विवाद का समाधान बातचीत से निकाला जाए. उन्होंने कहा कि यूपी सरकार मंदिर निर्माण के लिए हर स्तर पर मदद करने के लिए तैयार है. साथ ही उन्होंने कहा कि कई मुस्लिमों ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि देने के बात कर एकता का संदेश दिया. योगी ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देश में एक नया माहौल बना है. गौरतलब है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने दोनों पक्षों को बैठकर बातचीत से इस मसले को सुलझाने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का कोई जज या वह खुद इसमें मध्यसता कर सकते हैं। लेकिन उनके इस प्रस्ताव को माना नहीं गया था।
योगी राज में विकास की संभावनायें :-यूपी सरकार ने अयोध्या का कायाकल्प करने की तैयारी शुरू कर दी है। कुछ समय पहले केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और योगी सरकार के बीच एक बैठक हुई थी, जिसमें तय किया गया था कि अयोध्या में विकास कार्य जल्द ही शुरू होगा। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा था, जब हम रामायण सर्किट की बात करते हैं तो इसका मतलब सिर्फ म्यूजियम ही नहीं है, इसमें पूरे अयोध्या शहर का समूचा विकास शामिल है। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया था कि उन्होंने और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें कई क्षेत्र शामिल हैं।
योगी के भाषण की मुख्य बातें :- अयोध्या से श्रीराम का नाम जुड़ा है. अयोध्या आने पर हर कोई श्रीराम बोलता है. पहले विश्व हिंदू परिषद ने 84 कोसी परिक्रमा शुरू करने की बात की, लेकिन तत्कालीन सरकार ने परिक्रमा नहीं होने दी. 5 कोसी, 84 कोसी, 14 कोसी परिक्रमा शुरू करेंगे.धर्म का मकसद लोक कल्याण है. धर्म को संकीर्ण दायरे में नहीं रखना है. भारत आस्था का देश है. अयोध्या धाम की हमेशा उपेक्षा होती रही है.हर संभव प्रयास किया गया कि अयोध्या में कोई विकास कार्य ही न हो पाए.अब अयोध्या धाम की उपेक्षा नहीं होगी. जब से केंद्र में मोदी सरकार आई है, तबसे अनेक लोककल्याणकारी योजनाएं शुरू की गईं. अयोध्या के विकास का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को दिया जाना चाहिए. राम-जानकी मार्ग का निर्माण जल्द ही होगा. जहां रामलीला होती है, वहां भगवान राम स्वयं विराज करते हैं. सरयू माता की हर रोज आरती हो, साथ ही महाआरती का आयोजन भी किया जाए. सरयू में पानी की कमी नहीं होने देंगे. रामघाट के लिए बिजली और सड़क समेत तमाम व्यवस्था करी जाएगी. अयोध्या में अखंड रामलीला चलेगी. अयोध्या की सड़कों के लिए 50 करोड़ दिए जाएंगे.पार्किंग की भी व्यवस्था की जाएगी. अयोध्या के विकास के लिए 350 करोड़ दिए जाएंगे.

1 thought on “ब्रह्मा विष्णु और रुद्र के संयुक्त स्वरुपवाली विश्व की पहली स्मार्ट सिटी है अयोध्या

  1. ज्ञानवर्धक निबंध के लिए डॉ. राधेश्याम द्विवेदी जी को धन्यवाद देते हुए मैं चाहूँगा कि पाठक अपने परिवार में नयी पीढ़ी के सदस्यों को इस निबंध से अवगत करा उनमें विषय के प्रति रूचि उत्पन्न करें|

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