कला-संस्कृति हिंद स्वराज प्राचीन भारत में गणित September 14, 2013 / September 14, 2013 by विश्वमोहन तिवारी | 6 Comments on प्राचीन भारत में गणित विश्व मोहन तिवारी पायथागोरस सिद्धान्त सभी शिक्षित लोग जानते हैं, किंतु वे यह नहीं जानते कि वास्तव में इसके रचयिता पायथागोरस नहीं, वरन हमारे वैदिक ऋषि बौधायन ( ८०० ई.पू.) हैं, जिऩ्होंने यह रचना पायथागोरस ( ५७० ई.पू.- ४९५ ई.पू.) से लगभग ३०० वर्ष पहले की थी। ऐसा भी नहीं है कि पायथागोरस ने इसकी […] Read more » प्राचीन भारत में गणित
कला-संस्कृति जहां दूरियां मिलती हैं…नज़दीकियों के साथ September 14, 2013 / September 14, 2013 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on जहां दूरियां मिलती हैं…नज़दीकियों के साथ लम्हें जो गुजरे नेपाल में… पंडित सुरेश नीरव अभी 5 सितंबर को तीन दिनी आवास पर काठमांडू जाना हुआ। एलाइंस क्लब्स इटरनेशनल का आयोजन था। वेसे नेपाल की ये मेरी पांचवी-छठी यात्रा थी। मगर हर बार नेपाल मुझे एक अलग ही ढ़ंग से आकर्षित करता है। उसका एक बड़ा कारण तो यह है कि जो […] Read more »
कला-संस्कृति मानवीय गुणों के अवतार श्रीकृष्ण August 26, 2013 by प्रमोद भार्गव | 3 Comments on मानवीय गुणों के अवतार श्रीकृष्ण सदर्भ :–28 अगस्त श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष प्रमोद भार्गव हाल ही में एक भारतवंशी बि्रतानी शोधकर्ता ने खगोलीय घटनाओं और पुरातातिवक व भाषार्इ साक्ष्यों के आधार पर दावा किया है कि भगवान कृष्ण हिन्दु मिथक और पौराणिक कथाओं के काल्पनिक पात्र न होते हुए एक वास्तविक पात्र थे। सच्चार्इ भी यही […] Read more »
कला-संस्कृति गोरक्षा की उज्जवल परम्परा August 24, 2013 by विजय कुमार | 1 Comment on गोरक्षा की उज्जवल परम्परा भारत एक धर्मप्राण देश है। भारत की आत्मा के दर्शन करने हों, तो तीर्थों और धामों में जाना होगा। गोमाता इसी धर्म का सजीव रूप है। इसलिए किसी भी काम को करते समय गोमाता के दर्शन शुभ माने जाते हैं। यदि उस समय गोमाता अपने बछड़े या बछिया के साथ अर्थात सवत्स हो, फिर तो […] Read more » गोरक्षा की उज्जवल परम्परा
कला-संस्कृति महत्वपूर्ण लेख जब स्वतंत्रता के लिए बिना राजा के ही लड़ती रहीं जातियां August 14, 2013 / August 14, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारतीय इतिहास अदभुत रोमांचों से भरा पड़ा है। यह सच है कि विदेशी इतिहासकारों ने उन रोमांचपूर्ण किस्से कहानियों के सच को इतिहास में स्थान नही दिया। इसके विपरीत हमें समझाया और पढ़ाया गया कि तुम्हारा अतीत कायरता का रहा। दूसरे, तुम सदा युद्घ में पराजित हुए हो, तीसरे, तुममें कभी भी राष्ट्रवाद की भावना नही रही, चौथे-हिंदुओं की […] Read more » जब स्वतंत्रता के लिए बिना राजा के ही लड़ती रहीं जातियां
कला-संस्कृति भारतीय संस्कृति की अवधारणाएं-एक विवेचन July 15, 2013 / July 15, 2013 by डा.राज सक्सेना | Leave a Comment डा.राज सक्सेना समाज में सामान्य रूप से ‘संस्कृति’ शब्द को,सुरुचि और शिष्ट व्यवहार के रुप में लिया जाता है | विस्तृत अर्थों में संस्कृति की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है-“संस्कृति किसी एक समाज में पाई जाने वाली उच्चतम मूल्यों की वह चेतना है,जो सामाजिक प्रथाओं,व्यक्तियों की चित्तवृतियों, भावनाओं,मनोवृतियो,आचरण के साथ-साथ उसके द्वारा भौतिक पदार्थों को विशिष्ट […] Read more » भारतीय संस्कृति की अवधारणाएं
कला-संस्कृति आदिवासी भाषाओं पर उपेक्षा का दंश……………. May 3, 2013 / May 3, 2013 by प्रतिमा गुप्ता | 1 Comment on आदिवासी भाषाओं पर उपेक्षा का दंश……………. विशिष्ट सभ्यता, संस्कृति के नाम पर लगभग एक सौ वर्ष के संघर्ष के बाद झारखंड राज्य तो अस्तित्व में आया, लेकिन इन विशिष्टताओं को पहचान देने वाली जनजातीय भाषाएं विकास की आंधी में कहीं गुम हो गई… झारखण्ड का गठन हुए एक दशक हो जाने के बावजूद आदिवासियों के द्वारा मांगी गई विकास की स्थितियां […] Read more » आदिवासी भाषा
कला-संस्कृति लोक रंगों का महामेला – बेणेश्वर February 25, 2013 / February 25, 2013 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment विशेष सामग्री संदर्भ: बेणेश्वर मुख्य मेला माघ पूर्णिमा-25 फरवरी 2013 लोक लहरियां उमड़ाती हैं आनंद का समंदर डॉ. दीपक आचार्य बेणेश्वर धाम…… दूर-दूर तक फैला टापू, अथाह पानी और संगम, खुला आसमान… जहाँ अहर्निश बहा करती हैं संस्कृति की जाने कितनी धाराएँ, उपधाराएँ और अन्तः सरणियाँ। वह नाम जिसमें समाए हुए हैं लोक संस्कृति, […] Read more » लोक रंगों का महामेला - बेणेश्वर
कला-संस्कृति वर्त-त्यौहार कुम्भ पर्व का आगाज, मध्य रात्रि के बाद शुरू हुआ मकर संक्रान्ति का स्नान January 15, 2013 / January 15, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment अवनीश सिंह माघ मकरगत रवि जब होइ, तीरथ पतिहिः आव सब कोइ। सोमवार को मध्य रात्रि के बाद तीर्थराज प्रयाग में पवित्र संगम के किनारे मकर संक्रान्ति के स्नान के साथ कुम्भ पर्व का आगाज हो गया। जैसे ही घड़ी की सुई बारह से आगे बढ़ी पवित्र संगम व गंगा के किनारे बने दर्जनो स्नान […] Read more » kumbh mela
कला-संस्कृति जरूर पढ़ें महत्वपूर्ण लेख तुलसी की नारी ताडऩ की नही ”तारन” की अधिकारी है December 11, 2012 / December 10, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 17 Comments on तुलसी की नारी ताडऩ की नही ”तारन” की अधिकारी है तुलसी के राम बाल्मीकि के राम से कई रूपों में भिन्न हैं। ऐसा प्रक्षेपों के कारण तो हुआ ही है साथ ही अर्थ का अनर्थ कर देने से भी हुआ है। असंगत अर्थों को और अतार्किक बातों को हमने पत्थर की लकीर मान लिया और लकीर के फकीर बनकर उन असंगत अर्थों को तोता की […] Read more » तुलसी की नारी
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म महत्वपूर्ण लेख साहित्य 300 रामायण : कथ्य और तथ्य September 11, 2012 / September 12, 2012 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | 1 Comment on 300 रामायण : कथ्य और तथ्य डॉ. रवीन्द्र अग्निहोत्री राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है , कोई कवि बन जाए सहज संभाव्य है . – राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त कुछ समय पहले अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो के प्रोफ़ेसर , ए के रामानुजन ( 1929 – 1993 ) के ‘ 300 Ramayanas ‘ शीर्षक लेख की चर्चा समाचारों में रही […] Read more » 300 ramayans 300 रामायण
कला-संस्कृति कहीं लुप्त न हो जाएँ कुड़बुङिया वाले? September 11, 2012 / September 11, 2012 by अनूप आकाश वर्मा | Leave a Comment अनूप आकाश वर्मा बात,शादी-ब्याह से शुरू करते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि भारत में वैवाहिक कार्यक्रमों में होने वाली धमाचौकङी समूचे विश्व में प्रसिद्ध है,जो उमंग जो जुनून यहाँ की बारात और बारातियों में है वो कहीं और नहीं। बेशक!आज शहरों में रिवाज़ अब बदल रहे हों लोग आधुनिक से अत्याधुनिक हो रहे हों,गाँवों […] Read more » कुड़बुङिया