कला-संस्कृति संस्कृति ही है भारत की एकता का आधार April 28, 2012 / April 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment सुधांशु त्रिवेदी आज संपूर्ण विश्व एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। कहा जा रहा है कि बदलते समीकरणों के अनुसार 21 वीं सदी भारत और चीन की सदी होगी। एक अनुमान के अनुसार भारत आज विश्व की उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति ही नहीं है , बल्कि 21 वीं शताब्दी के मध्य तक भारत की […] Read more » संस्कृति सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म वर्तमान समय में राम की प्रासांगिकता April 23, 2012 by राजीव गुप्ता | 2 Comments on वर्तमान समय में राम की प्रासांगिकता राजीव गुप्ता विश्व गुरु बनने का सपना संजोने वाली अधिकांश भारतीय संततियों का ध्येय जब अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए राष्ट्र हितों के मानक मूल्यों से समझौता करने तक की तरफ अग्रसर होने लगे तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या हमने अब अपने पुरखों की दी हुए विरासत को नीलाम करना शुरू कर […] Read more » importance of ram in present scenario राम की प्रासांगिकता
कला-संस्कृति शख्सियत शूद्रों को ब्राहमण बनाने वाले परशुराम April 23, 2012 / April 23, 2012 by प्रमोद भार्गव | 5 Comments on शूद्रों को ब्राहमण बनाने वाले परशुराम प्रमोद भार्गव भगवान परशुराम जयंती 24 अप्रेल के अवसर पर :- हमारे धर्म ग्रंथ और कथावाचक ब्राहमण भारत के प्राचीन पराक्रमी नायकों की संहार से परिपूर्ण हिंसक घटनाओं के आख्यान तो खूब सुनाते हैं, लेकिन उनके समाज सुधार से जुड़े जो क्रांतिकारी सरोकार थे, उन्हें लगभग नजरअंदाज कर जाते हैं। विष्णु के दशावतारों में से […] Read more » bhagwan parsuram भगवान परशुराम
कला-संस्कृति मिसाल बन गया गांव बड़ी जाम April 21, 2012 / April 21, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment मनोज कुमार अक्षय तृतीया २४ अप्रेल के लिये मध्यप्रदेश का व्यवसायिक जिला है इंदौर। इंदौर जिले का एक छोटा सा गांव है बड़ी जाम। लगभग गुमनाम सा गांव बड़ी जाम ने आदर्श कायम किया है जिसकी गूंज इंदौर से भोपाल तक और शायद कल पूरे देश में होगी। इस गांव में बाल विवाह का आयोजन […] Read more » अक्षय तृतीया
कला-संस्कृति औषधीय पादपों की खेती April 19, 2012 / April 19, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment कल्पना डिण्डोर जनजाति काश्तकारों की सेहत सँवार रही है औषधीय पादपों की खेती राजस्थान के जनजाति बहुल क्षेत्रों के किसान आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए जिन नवीन योजनाओं को अपनाने लगे हैं उनमें खेती-बाड़ी से जुड़ी योजनाएं अहम् हैं। जनजाति क्षेत्रों के किसानों के लिए अत्याधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीकों से होने वाली खेती के […] Read more » औषधीय पादपों
कला-संस्कृति फ़तवा मानो या मत मानो, उलेमा को मत कोसो! April 11, 2012 / April 11, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 2 Comments on फ़तवा मानो या मत मानो, उलेमा को मत कोसो! इक़बाल हिंदुस्तानी तर्क और आस्था में टकराव तो सदियों से चलता आ रहा है? दारुल उलूम देवबंद से कुछ दिन पहले एक फतवा आया था कि शराब के नशे में दी गयी तलाक भी तलाक मानी जायेगी। इस फतवे पर मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के नायब सदर और मशहूर शिया नेता मौलाना क़ल्ब ए सादिक़ ने […] Read more » Fatwa muslims उलेमा फ़तवा
कला-संस्कृति लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी जैसे नहीं बन पा रहे हैं उत्तराखंडी लोक कलाकार March 30, 2012 / March 30, 2012 by भार्गव चन्दोला | Leave a Comment भार्गव चन्दोला उत्तराखंड में लोक गायक लगातार प्रसिद्धि पा रहे हैं मगर एक कमी जो इन कलाकारों को नरेंद्र सिंह नेगी जी के आसपास भी नहीं टिकने देती है वो है नरेंद्र सिंह नेगी जी का अपने गानों के माध्यम से उत्तराखंड के जनसरोकारों को प्रमुखता से उठाना| जिस प्रकार समाजसेवी अन्ना हजारे देश हित […] Read more » Lok kalakar Utrakhand उत्तराखंडी लोक कलाकार लोक कलाकार
कला-संस्कृति अलग-अलग हैं शाहबाज लाल कलंदर व झूलेलाल? March 25, 2012 / March 25, 2012 by तेजवानी गिरधर | Leave a Comment तेजवानी गिरधर जिस गीत दमा दम मस्त कलंदर को गा और सुन कर सिंधी ही नहीं, अन्य समुदाय के लोग भी झूम उठते है, उस पर यह सवाल आज भी मौजूं है उसका सिंधी समुदाय से कोई ताल्लुक है भी या नहीं? पाकिस्तान की मशहूर गायिका रेश्मा व बांग्लादेश की रूना लैला की जुबान से […] Read more » jhulelal Shahbaz lal Kalander झूलेलाल शाहबाज लाल कलंदर
कला-संस्कृति अरब की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति और भारत March 21, 2012 / March 21, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 7 Comments on अरब की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति और भारत – विश्वजीत सिंह ‘अनंत’ अरब देश का भारत, भृगु के पुत्र शुक्राचार्य तथा उनके पोत्र और्व से ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित है, यहाँ तक कि “हिस्ट्री ऑफ पर्शिया” के लेखकसाइक्स का मत है कि अरब का नाम और्व के ही नाम पर पड़ा, जो विकृत होकर “अरब”हो गया। भारत के उत्तर-पश्चिम में इलावर्त था, जहाँ दैत्य […] Read more » India vaidic culture अरब की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति और भारत भारत
कला-संस्कृति भक्ति, संगीत, सौहाद्र एवं कला का केंद्र बना बराड़ा February 28, 2012 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी भारतवर्ष जिसे पर्वों व उत्सवों का देश भी कहा जाता है, निस्संदेह अपने-आप में अनेकानेक ऐसे धार्मिक त्यौहारों, सामाजिक आयोजनों तथा परंपराओं को समेटे हुए है जो हमें अपनी प्राचीन संस्कृति व सभ्यता की समय-समय पर याद दिलाती रहती हैं। निश्चित रूप से भारतवर्ष दुनिया का अकेला एक ऐसा देश है जिसमें न […] Read more »
कला-संस्कृति भक्ति परम्परा का प्राचीनतम प्रतीक शबरी February 25, 2012 / February 25, 2012 by राजेश कश्यप | 1 Comment on भक्ति परम्परा का प्राचीनतम प्रतीक शबरी राजेश कश्यप रामायण भगवान श्रीराम के सम्पूर्ण जीवन का दर्पण है। विष्णु के अवतार रूपी श्रीराम की सम्पूर्ण कार्यकलापों व लीलाओं के प्रसंग श्रीमद्वाल्मीकीय ‘रामायण’, गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीराम चरितमानस’ आदि पौराणिक ग्रन्थों में वर्णित हैं। इन ग्रन्थों में श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की अपनी विशिष्टता एवं महत्ता रही। कई व्यक्ति तो […] Read more » shabri and Ram भक्ति परम्परा शबरी
कला-संस्कृति आओ मनाऐं नया साल-विक्रमी संवत 2069 February 3, 2012 / July 5, 2012 by विनोद बंसल | 4 Comments on आओ मनाऐं नया साल-विक्रमी संवत 2069 विनोद बंसल पाश्चात्य देशों के अंधानुकरण व अंग्रेजियत के बढते प्रभाव के बावजूद भी आज चाहे बच्चे के गर्भाधान की बात हो या जन्म की, नामकरण की बात हो या शादी की, गृह प्रवेश की हो या व्यापार प्रारम्भ करने की, सभी में हम एक कुशल पंडित के पास जाकर शुभ लग्न व मुहूर्त पूछते […] Read more » new year according to hindu mythology विक्रमी संवत 2069