कला-संस्कृति संस्कृति उद्योग नीति के अभाव में गुलामी का रास्ता September 12, 2010 / December 22, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 3 Comments on संस्कृति उद्योग नीति के अभाव में गुलामी का रास्ता -जगदीश्वर चतुर्वेदी भारत में मौजूदा हालात काफी चिन्ताजनक हैं। हमारे यहां विकासमूलक मीडिया के बारे में तकरीबन चर्चाएं ही बंद हो गई हैं। समूचे मीडिया परिदृश्य देशी इजारेदार मीडिया कंपनियों , बहुराष्ट्रीय मीडिया कंपनियों और विज्ञापन कंपनियों ने वर्चस्व स्थापित कर लिया है। विभिन्न मीडिया मालों की बिक्री के माध्यम से ये कंपनियां दस हजार […] Read more » culture संस्कृति
कला-संस्कृति दिल लुभाती रमज़ान की रौनक़ September 8, 2010 / December 22, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 6 Comments on दिल लुभाती रमज़ान की रौनक़ -फ़िरदौस ख़ान मरहबा सद मरहबा आमदे-रमज़ान है खिल उठे मुरझाए दिल, ताज़ा हुआ ईमान है हम गुनाहगारों पे ये कितना बड़ा अहसान है या ख़ुदा तूने अता फिर कर दिया रमज़ान है… माहे-रमज़ान इबादत, नेकियों और रौनक़ का महीना है। यह हिजरी कैलेंडर का नौवां महीना होता है। इस्लाम के मुताबिक़ अल्लाह ने अपने बंदों […] Read more » Ramjan रमज़ान
कला-संस्कृति भारतीय संस्कृति और डॉ. राम मनोहर लोहिया August 14, 2010 / November 25, 2010 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 3 Comments on भारतीय संस्कृति और डॉ. राम मनोहर लोहिया – डॉ. मनोज चतुर्वेदी भारतीय संस्कृति का नाम लेते ही हमारे मन में एक ऐसे राष्ट्र का चित्र सामने आता है जो विश्व का सबसे प्राचीनतम राष्ट्र है। जिसके संबंध में महाकवि जयशंकर प्रसाद ने कहा – ”अरूण यह मधुमय देश हमारा। जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।” ‘अर्थात् मानव जाति ने जब […] Read more » भारतीय संस्कृति राममनोहर लोहिया
कला-संस्कृति लुप्त होती कठपुतली कला May 11, 2010 / December 23, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 4 Comments on लुप्त होती कठपुतली कला -फ़िरदौस ख़ान भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब लोककलाओं में झलकता है। इन्हीं लोककलाओं में कठपुतली कला भी शामिल है। यह देश की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम भी है, लेकिन आधुनिक सभ्यता के चलते मनोरंजन के नित नए साधन आने से सदियों पुरानी यह कला अब लुप्त होने के कगार पर है। […] Read more » Puppetry Arts कठपुतली कला
कला-संस्कृति पेटू की संस्कृति है मासकल्चर May 5, 2010 / December 23, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment -जगदीश्वर चतुर्वेदी लोक संस्कृति और लोक कलाओं का उत्तर-आधुनिक अवस्था में स्वरुप बुनियादी तौर पर बदल जाता है। इन कला रुपों में दैनन्दिन जीवन की गहरी छाप होती है। उत्तर-आधुनिक स्थिति इनका औद्योगिकीकरण कर देती है। उन्हें संस्कृति उद्योग का माल बना देती है। मानकीकरण करती है। उनमें व्याप्त स्थानीयता का एथनिक संस्कृति के नाम […] Read more » culture मासकल्चर संस्कृति
कला-संस्कृति भारतीय संस्कृति और भोगवाद April 27, 2010 / December 24, 2011 by विश्वमोहन तिवारी | 22 Comments on भारतीय संस्कृति और भोगवाद क्या भोगवाद उन्नति का नाप है और क्या भारतीय संस्कृति आउट आफ़ डेट है? (मानव व्यवहार इतना जटिल है कि उसके विषय में कोई भी कथन यदि 60 प्रतिशत भी सही हो तो उसे सही माना जाना चाहिये।) मुझे लगता है कि भोगवाद का विषय आज तर्क के तथा समझने समझाने के परे हो गया […] Read more » Indian Culture भारतीय संस्कृति भोगवाद
कला-संस्कृति संस्कृति में रीतिवाद के खतरे April 5, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment जैसे विज्ञापन में रीतिवाद का महत्व होता है, प्रचार मूल्य होता है। विनिमय मूल्य होता है। उसी तरह लेखक संगठनों के द्वारा आयोजित कार्यक्रम भी होते हैं। उनका विज्ञापनमूल्य से अधिक मूल्य आंकना बेवकूफी है। जिस तरह मध्यकाल में आए बदलावों से संस्कृत के लेखक अनभिज्ञ थे उसी तरह आधुनिकाल में आए बदलावों को लेकर […] Read more » culture संस्कृति
कला-संस्कृति विश्व मंच पर पहचान बना रही हैं भारतीय ललित कलाएं April 1, 2010 / December 24, 2011 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment देर से ही सही भारतीय ललित कलाएं विश्व की कला दुनिया में अपनी जगह बना रही हैं। शास्त्रीय संगीत और नृत्य से शुरुआत तो हुई पर अब चित्रकला की दुनिया में भी भारत की पहल को स्वागतभाव से देखा जा रहा है। सतत जिद और जिजीविषा के चलते भारतीय कलाकारों की यह सफलता हमारे गर्व […] Read more » Lalit Kala ललित कला
कला-संस्कृति दफन हो जाये ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता March 12, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 6 Comments on दफन हो जाये ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मकबूल फिदा हुसैन को लेकर फिर चर्चा है। कतर की नागरिकता लेने के बाद उनके पक्ष में तकरीरें की जा रही है। प्रगतिशील और भारतीय आस्थाओं के विरोधी एक बार फिर लामबंद, सक्रिय और आक्रामक हैं। हुसैन की करतूतों के कारण भारत में उनका काफी विरोध हुआ। भारत में कानून की हालत यह है कि […] Read more » Fida Hussain अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मकबूल फिदा हुसैन
कला-संस्कृति हुसैन की बिल्ली थैले से बाहर निकली March 9, 2010 / December 24, 2011 by अम्बा चरण वशिष्ठ | 6 Comments on हुसैन की बिल्ली थैले से बाहर निकली बिल्ली तो अब थैले से बाहर आ ही गई। यह कहावत विख्यात चित्रकार मुहम्मद फिदा हुसैन पर पूरी तरह चरितार्थ होती है। साथ ही उनकी पोल भी खुल गई है। भारत की नागरिकता त्याग कर खाडी देश कतर की नागरिकता ग्रहण कर अपने आप को सम्मानित महसूस कर उन्होंने भी सैकुलरवाद, उदारवाद तथा जनतन्त्र के […] Read more » MF Hussain एफ एम हुसैन मकबूल फिदा हुसैन
कला-संस्कृति कला के जरिए कंडोम के प्रयोग पर जोर March 9, 2010 / December 24, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment हमारे समाज में सेक्स को वर्जित माना जाता है और शारारिक जरुरतों की अवहेलना की जाती है। दरअसल जीवन को संपूर्णता में जीने की कोशिश कोई नहीं करना चाहता। यौन कार्यकलापों को अश्लीलता की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मूल कारण है हमारी सभ्यता और संस्कृति, जो हमें उन्मुक्त एवं स्वछंद होने से रोकती […] Read more » Condom कंडोम कला
कला-संस्कृति मकबूल फिदा हुसैन के पलायन को लेकर उठे प्रश्न March 8, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 10 Comments on मकबूल फिदा हुसैन के पलायन को लेकर उठे प्रश्न मकबूल फिदा हुसैन ने 95 साल की उम्र में भारत की नागरिकता छोडकर कतर देश की नागरिकता स्वीकार कर ली है। वे जाने माने चित्रकार हैं और उनके चित्र लाखों में बिकते हैं। जो चीज लाखों में बिकती है वो सैकडों में ही चर्चित होती है। आम आदमी से उसका कोई ताल्लुक नहीं होता। लेकिन […] Read more » MF Hussain मकबूल फिदा हुसैन