कला-संस्कृति नकल, एक और कालिख ? January 30, 2012 / January 30, 2012 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू निश्चित ही छत्तीसगढ़ विकास की दिशा में अग्रसर हो रहा है, लेकिन कई रोड़े भी नजर आ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अनेक बदलाव के कारण यहां की प्रतिभाएं निखर कर सामने आ रही हैं। फिर भी शिक्षा नीति में कई बदलाव की जरूरत है। इसमें सबसे बड़ी जरूरत है, छग को […] Read more » Chhatisgarh छत्तीसगढ़ प्रतिभा पलायन
कला-संस्कृति झालरापाटन का सूर्य मंदिर January 22, 2012 / January 21, 2012 by पंडित दयानंद शास्त्री | 1 Comment on झालरापाटन का सूर्य मंदिर `अतीत में झालरों के नगर के नाम से जाना पहचाना झालरापाटन हैं। जिसका हृदय स्थल यहाँ का सूर्य मंदिर हैं। इस मंदिर का निर्माण नवीं सदी में हुआ था। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और स्थापत्य वैभव के कारण कोर्णाक के सूर्य मंदिर और ग्वालियर के विवस्वान मंदिर का स्मरण कराता हैं। कर्नल टॉड ने इस […] Read more » sun temple of jhalrapatan झालरापाटन का सूर्य मंदिर
कला-संस्कृति संवत्सर की विविध भारतीय परम्पराए January 7, 2012 / January 7, 2012 by मनोज श्रीवास्तव 'मौन' | 5 Comments on संवत्सर की विविध भारतीय परम्पराए मनोज श्रीवास्तव ‘‘मौन’’ हमारे देश के संवत्सर प्रारम्भ के सम्बन्ध में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की परम्परा में कुछ अन्तर है। भारत के कुछ भागों में माह कृष्ण पक्ष की अगली प्रतिपदा से प्रारम्भ होते हैं और शुक्ल पक्ष के साथ समाप्त होते हैं। ऐसे माह को पूर्णिमान्त कहते हैं ऐसे माह को अमावस्यान्त कहते […] Read more » Indian Culture भारतीय परम्पराए संवत्सर की विविध भारतीय परम्पराए
कला-संस्कृति चश्म-ए-बद्दूर बनाम बेलगाम घोड़े January 5, 2012 / January 5, 2012 by राम कृष्ण | 2 Comments on चश्म-ए-बद्दूर बनाम बेलगाम घोड़े रामकृष्ण फ़ुरसतनामा वह ज़माना फ़िल्मी दुनिया में राज कपूर के चरमोत्कर्ष का था, और के साथ ही शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी भी अपनी लोकप्रियता तब आसमान छू रहे थे. उन दिनों निर्मित होने वाली कम से कम पचास प्रतिशत फ़िल्में ऐसी ही होती थीं जिनमें शंकर-जयकिशन का सगीत हुआ करता था और हसरत-शैलेन्द्र के गीत. […] Read more » script writers in Indian movies shailendra शैलेन्द्र हसरत जयपुरी
कला-संस्कृति महर्षि दयानंद के महाप्रयाण (दीपावली) पर विशेष October 28, 2011 / December 5, 2011 by अखिलेश आर्येन्दु | Leave a Comment अखिलेश आर्येन्दु महर्षि दयानंद : तमसो मा ज्योतिर्गय के युगधर्मी संवाहक उपनिशदों में अंधकार से प्रकाश की तरफ जाने की प्रेरणा दी गर्इ है। तमसो मा ज्योतिर्गमय। अंधकार मृत्यु के समान और प्रकाश जीवन और अमरता के समान माना गया है। मौत से छुटकारा पाने की एक छटपटाहट इंसान के मन में गहरार्इ से दिखार्इ […] Read more » Diwali दीपावली पर विशेष महर्षि दयानंद
कला-संस्कृति कार्तिक माह: स्वर्ग-प्राप्ति की आसान राह October 24, 2011 / December 5, 2011 by राजेश कश्यप | Leave a Comment राजेश कश्यप कार्तिक का महीना व्रतों, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बेहद पावन होता है। कार्तिक महीने की प्रतिपदा से लेकर कार्तिक महीने की पूर्णमासी तक पूरे महीने धार्मिक अनुष्ठान चलते रहते हैं। देव उठनी एकादशी, गोवद्र्धन पूजा, दीपावली, भैयादूज, करवाचौथ, अहोई जैसे त्योहार इसी कार्तिक महीने में ही आते हैं। पौराणिक दृष्टि से […] Read more » kartik month कार्तिक माह स्वर्ग-प्राप्ति की आसान राह
कला-संस्कृति भारतीय संस्कृति का केंद्र था कराची August 20, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मुजफ्फर हुसैन कराची का पुराना नाम देवल नगर था। वहां कभी कितने मंदिर होंगे, इसका हिसाब लगाना कठिन है, पर पाकिस्तान में शामिल हो जाने के बाद भी आज वहां हिंदुओं के अनेक मंदिर हैं। कुछ बंद कर दिए गए हैं, तो कुछ ऐसे हैं, जहां शापिंग मॉल बना दिए गए हैं। पाकिस्तान में कराची […] Read more » Karanchi कराची
कला-संस्कृति महत्वपूर्ण लेख सोने की चिड़िया क्यों लुटती थी? August 13, 2011 / December 7, 2011 by शंकर शरण | 6 Comments on सोने की चिड़िया क्यों लुटती थी? शंकर शरण महान इतिहासकार विल ड्यूराँ ने अपना पूरा जीवन लगाकर वृहत ग्यारह भारी-भरकम खंडों में “स्टोरी ऑफ सिविलाइजेशन” लिखी था। उसके प्रथम खंड में भारत संबंधी इतिहास के अंत में उन्होंने अत्यंत मार्मिक निष्कर्ष दिए थे। वह हरेक भारत-प्रेमी के पढ़ने योग्य है। हजार वर्ष पहले भारत विश्व का सबसे धनी और समृद्ध देश […] Read more » India भारत सोने की चिड़िया
कला-संस्कृति विविधा सांस्कृतिक साम्राज्यवाद August 5, 2011 / August 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on सांस्कृतिक साम्राज्यवाद कैलाश बुधवार देश को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो जाने के बाद भी अक्सर यह दुख दुहराया जाता है कि हमारी दास मानसिकता नहीं गई पर मेरा भय एक नई दासता के बारे में है। पिछले साम्राज्यवादी कंगूरे ढह गए पर हम बेसुधी में एक नए साम्राज्यवाद के आगे घुटने टेके जा रहे हैं। लाखो […] Read more » सांस्कृतिक साम्राज्यवाद
कला-संस्कृति संस्कृति के हत्यारे August 5, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on संस्कृति के हत्यारे राजेन्द्र जोशी (विनियोग परिवार) पांच सौ साल पहले यह दुनिया आज की तुलना में सुखी और हिंसा रहित थी। लेकिन 1492 में एक ऐसी घटना घटी जिसने सारे विश्व के प्रवाह को मोड़ दिया। पहले देश-विदेश से वस्तु के आयात-निर्यात का काम जहाजों से होता था। ऐसे जहाजों को यूरोप के लुटेरे लूट लेते थे […] Read more » culture संस्कृति
कला-संस्कृति कहो कौन्तेय-४ July 27, 2011 / December 8, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on कहो कौन्तेय-४ विपिन किशोर सिन्हा पिछला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें समस्त आवेग, आवेश उद्वेग और अशान्त हस्तिनापुर से बहुत दूर गंधमादन पर्वत के शतशृंग शिखर पर सुनील सरोवर के किनारे हमारी पर्णकुटी थी। चारों ओर हरी भरी वनस्पतियां थीं। वृक्ष फलों से लदे रहते थे। हिरणों और खरगोशों के झुंड कुटी के आसपास भ्रमण […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
कला-संस्कृति कला की कसौटी पर हुसैन July 20, 2011 / December 8, 2011 by शंकर शरण | 1 Comment on कला की कसौटी पर हुसैन शंकर शरण प्रसिद्ध चित्रकार हुसैन के देहांत पर हमारे अधिकांश अंग्रेजी अखबारों में चर्चा राजनीति, हिन्दुत्वा, कलाकार की अभिव्यक्ति स्वाधीनता और भारत की कथित छवि की हुई। अजीब है कि वहाँ ठीक कला पर कोई विचार नहीं हुआ। दूसरी ओर, हुसैन की कुरुचिपूर्ण प्रवृत्तियों, राजनीतिक रुख और देश-बदल आदि पर आलोचनात्मक लेखों पर कहा जाता […] Read more » MF Hussain एम.एफ. हुसैन कला