धर्म-अध्यात्म वेद ईश्वरीय ज्ञान है November 9, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य, वेद ईश्वरीय ज्ञान है। इसका तात्पर्य है कि वेदों का ज्ञान ईश्वर प्रदत्त है। ज्ञान दो ही चेतन सत्ताओं के द्वारा दिया जाता है और मनुष्य आदि द्वारा ग्रहण किया जाता है। वेदों के सभी मन्त्र व उनके शब्द, अर्थ और सम्बन्ध ईश्वर द्वारा सृष्टि के आरम्भ में चार आदि ऋषियों अग्नि, […] Read more » वेद
धर्म-अध्यात्म सभी मनुष्य ईश्वर, ऋषियों, वेदमाता, माता-पिता, आचार्यों, प्रकृति, गोमाता, स्वदेश के ऋणी हैं November 8, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment नमोहन कुमार आर्य सभी मनुष्य संसार के रचयिता ईश्वर व अपने माता-पिता के सबसे अधिक ऋणी हैं। इसके साथ ही वह भूमि माता, गोमाता, ऋषि व आचार्यों आदि के भी ऋणी हैं। जो मनुष्य अपने ऋणों को भली प्रकार जानता है वह धन्य होता है। जो अपने ऋणों को जानने के साथ उनसे उऋण […] Read more » ईश्वर
धर्म-अध्यात्म यज्ञोपवीत धारण करना आवश्यक क्यों हैं? November 8, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, वैदिक धर्म व संस्कृति में मनुष्य के 16 संस्कार किये जाने का विधान है। इनमें से एक संस्कार उपनयन संस्कार कहलाता है। आजकल इस संस्कार को कराने की परम्परा प्रायः देखने को नहीं मिलती। व्यवहार की दृष्टि से देखें तो मनुष्य के जन्म से पूर्व कोई संस्कार नहीं कराये जाते। जन्म के […] Read more » यज्ञोपवीत
धर्म-अध्यात्म बलिवैश्वदेव यज्ञ की अनिवार्यता व उसका स्वरूप November 7, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य यज्ञ परोपकार के कार्यों को कहते हैं। यज्ञ ऐसा कार्य व कर्म है जिससे अपना भला होता है व दूसरों को भी लाभ पहुंचता है। हमारा भला दूसरों का भला करने से ही हो सकता है, दूसरों को हानि पहुंचा कर हमारा भला कभी नहीं हो सकता। इसका कारण यह है कि […] Read more » बलिवैश्वदेव यज्ञ
धर्म-अध्यात्म अभागे देश भारत ने ऋषि दयानन्द की शिक्षाओं से लाभ नहीं उठाया October 30, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महाभारत काल में हुई भारी जान माल की हानि के कारण कुछ वर्षों बाद भारत ज्ञान विज्ञान को विस्मृत कर अज्ञान व अंधविश्वासों में फंस गया। लगभग पांच हजार वर्षों तक भारत में वैदिक धर्म और संस्कृति का दिन प्रतिदिन पतन होता गया। सारा देश अविद्या अन्धकार में फंस गया और लगभग […] Read more » ऋषि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म सत्य और अहिंसा का स्वरूप October 28, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य आजकल धर्म और राजनीति में सत्य और अहिंसा की बहुत चर्चा होती है। हमें लगता है कि इनके वास्तविक स्वरूप व इनके प्रयोग के विषय में लोगों में अनेक भ्रान्तियां है। इसलिए हम आज इस विषय में कुछ विचार कर रहे हैं। सत्य और अहिंसा का वेद से लेकर सभी शास्त्रों में […] Read more » सत्य और अहिंसा का स्वरूप
धर्म-अध्यात्म जीवन की सफलता के लिए मन व इन्द्रियों पर नियंत्रण आवश्यक October 26, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य दर्शन ग्रन्थों में कहा गया है कि ‘मन एव मनुष्याणां कारणं बन्ध मोक्षयोः’ अर्थात् मनुष्य का मन ही जीवात्मा के बन्धन और मोक्ष का कारण है। बन्धन का अर्थ जन्म व मरण के चक्र फंसना व इसके कारण होने वाले दुःख होते हैं। इन बन्धनों से मुक्ति मन को वश में करने […] Read more » इन्द्रियों पर नियंत्रण
धर्म-अध्यात्म लोकैषणा से मुक्त व जीवात्मा की अल्पज्ञता के सिद्धान्त को प्रचारित व स्वयं स्वीकार करने वाले अपूर्व महापुरुष ऋषि दयानन्द October 26, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार में जो मनुष्य उत्पन्न होता है वह अल्पज्ञ अर्थात् अल्प, अधूरे व सीमित ज्ञान वाला होता है। ज्ञान में सर्वज्ञ व पूर्ण तो केवल ईश्वर ही होता है। अल्पज्ञता व अविद्या के कारण मनुष्यों में लोकैषणा, वित्तैषणा तथा पुत्रैषणा पायी जाती है। संसार का शायद ही कोई मनुष्य इससे मुक्त रहा […] Read more » ऋषि दयानन्द जीवात्मा
धर्म-अध्यात्म गोपाष्टमी 2017 —गो पूजन का एक पवित्र दिन October 25, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment प्रिय पाठकों/मित्रों,कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी के त्यौहार रूप में मनाया जाता है गोपाष्टमी का पर्व गोवर्धन पर्वत से जुड़ा त्यौहार है | श्रीकृष्ण ने गौचारण लीला गोपाष्टमी के दिन शुरू की थी। कहा जाता है की द्वापर युग में श्री कृष्ण भगवान ने गोवर्धन पर्वत को कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा को ब्रज […] Read more » गोपाष्टमी
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा के अस्तित्व व इसके पूर्व, मध्य व पर जन्मों पर विचार October 25, 2017 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on जीवात्मा के अस्तित्व व इसके पूर्व, मध्य व पर जन्मों पर विचार मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जीवन क्या है? इस प्रश्न का सन्तोषजनक उत्तर वैदिक साहित्य में ही मिलता है। इतर साहित्य में इस विषय पर पर्याप्त व निर्भ्रान्त जानकारी उपलब्ध नहीं होती। वैदिक विद्या के अनुसार संसार में ईश्वर, जीव व प्रकृति की सत्ता है जो अनादि, अनुत्पन्न, नित्य, अविनाशी व अमर है। ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, […] Read more » जीवात्मा
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म वर्त-त्यौहार छठ पूजा 2017 कब , क्यों और कैसे मनाएं ?? October 21, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment जानिए छठ पूजा का महत्त्व और छठ पूजा का पूजा विधान … छठ पर्व सूर्यदेव की उपासना के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि छठ देवी सूर्यदेव की बहन है। इसलिए छठ पर्व पर छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव को प्रसन्न किया जाता है।छठ हिंदू त्यौहार है जो हर साल लोगों […] Read more » Featured how to celebrate chath puja छठ पूजा छठ पूजा 2017
धर्म-अध्यात्म सत्यार्थप्रकाश का अध्ययन अविद्या दूर कर ज्ञानी बनाता है October 20, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment दीपावली एवं ऋषि दयानन्द बलिदान दिवस पर मनमोहन कुमार आर्य दीपावली का पर्व कार्तिक अमावस्या की रात्रि के अन्धकार को दीपमाला जलाकर, अन्धकार को किंचित मात्रा में दूर कर मनाया जाता है। जो लोग इस दीपमाला का इतना ही महत्व मानते हैं वह दीपावली का अधूरा ज्ञान रखते हैं। दीपक सीमित मात्रा में अन्धकार दूर […] Read more » Satyarthaprakash सत्यार्थप्रकाश