धर्म-अध्यात्म नित्य, अजर अर्थात अमर है जीवात्मा January 5, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” वेद, उपनिषद, दर्शनादि ग्रन्थों के अनुसार शरीरी अर्थात जीवात्मा शरीर से पृथक है । सुन्दर वृद्ध होने वाले शरीर में इसका भोग करने वाला बैठा है । जीवात्मा देह बदलता रहता है । सुख- दुःख शरीर को प्राप्त होते हैं, परन्तु जो सदा से है, शरीर के साथ नष्ट नहीं होता, वह […] Read more » Featured अजर अमर है जीवात्मा नित्य
धर्म-अध्यात्म वेदों और आर्यसमाज का प्रचार और प्रभाव January 2, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment स्वाध्याय करते समय आज मन में विचार आया कि महर्षि दयानन्द ने गुरु विरजानन्द जी की आज्ञा से अज्ञान व अन्धविश्वासों का खण्डन-मण्डन और वैदिक मान्यताओं व सिद्धान्तों का प्रचार किया था। क्या कारण है कि इसका वह प्रभाव नहीं हुआ जो वह चाहते थे व होना चाहिये था? क्या महर्षि दयानन्द की वेदों पर […] Read more » Featured वेदों और आर्यसमाज का प्रचार और प्रभाव
धर्म-अध्यात्म सुख और दुःख जीवन में साथ चलते हैं December 29, 2015 by ललित गर्ग | Leave a Comment दुनिया का हर इंसान सुख चाहता है। दुःख कोई नहीं चाहता। वह दुःख से डरता हैं इसलिए दुःख से छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न करता है। मतलब दुःख को खत्म करने और सुख को सृजित करने के लिए हर इंसान अपनी क्षमता के मुताबिक हमेशा कुछ-न-कुछ करता है। सुख और दुःख धूप- छाया […] Read more » सुख और दुःख जीवन में साथ चलते हैं
धर्म-अध्यात्म सत्य के ग्रहण व असत्य के त्याग की भावना December 28, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment सत्य के ग्रहण व असत्य के त्याग की भावना से सर्व मत-पन्थों का समन्वय ही मनुष्यों के सुखी जीवन एवं विश्व-शान्ति का आधार मनुष्य के व्यवहार पर ध्यान दिया जाये तो यह सत्य व असत्य का मिश्रण हुआ करता है। जो मनुष्य सत्य व असत्य को जानता भी नहीं, वह भी सत्य व असत्य […] Read more » सत्य के ग्रहण व असत्य के त्याग की भावना
चिंतन धर्म-अध्यात्म व्रत, तप, तीर्थ व दान का वैदिक सत्य स्वरूप December 25, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on व्रत, तप, तीर्थ व दान का वैदिक सत्य स्वरूप मनमोहन कुमार आर्य भारत में सबसे अधिक पुरानी, आज भी प्रासंगिक, सर्वाधिक लाभप्रद व सत्य मूल्यों पर आधारित धर्म व संस्कृति ‘‘वैदिक धर्म व संस्कृति” ही है। महाभारत काल के बाद अज्ञान व अंधविश्वास उत्पन्न हुए और इसका नाम वैदिक धर्म से बदल कर हिन्दू धर्म हो गया। हम सभी हिन्दू परिवारों में उत्पन्न हुए […] Read more » Featured तप तीर्थ व दान का वैदिक सत्य स्वरूप व्रत
धर्म-अध्यात्म ईश्वर के कृतज्ञ सभी मनुष्यों को वैदिक विधि से ईश्वर-स्तुति करनी चाहिये December 22, 2015 by मनमोहन आर्य | 4 Comments on ईश्वर के कृतज्ञ सभी मनुष्यों को वैदिक विधि से ईश्वर-स्तुति करनी चाहिये मनुष्य विज्ञान की नई-नई खोजों के वर्तमान युग में ईश्वर व अपनी जीवात्मा के मूल स्वरुप को भूल बैठा है। आज ईश्वर को मानना व नाना प्रकार के मत-मतान्तरों प्रचलित विधि से उसकी स्तुति व प्रार्थना करना एक प्रकार का फैशन सा लगता है। कोई भी काम करने से पहले उसका यथेष्ट ज्ञान व विधि […] Read more » ईश्वर के कृतज्ञ सभी मनुष्यों को वैदिक विधि से ईश्वर-स्तुति करनी चाहिये
धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म व संस्कृति के सर्वाधिक प्रेमी December 22, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment स्वामी विरजानन्द और स्वामी दयानन्द वैदिक धर्म व संस्कृति के सर्वाधिक प्रेमी ऐतिहासिक देशवासी मनमोहन कुमार आर्य धर्म व संस्कृति के इतिहास पर दृष्टि डालने पर यह तथ्य प्रकट होता है कि महाभारत काल में ह्रासोन्मुख वैदिक धर्म व संस्कृति दिन प्रतिदिन पतनोन्मुख होती गई। महाभारत युद्ध का समय लगभग पांच हजार वर्ष एक सौ […] Read more »
धर्म-अध्यात्म निःस्वार्थ भाव से कर्म करने की प्रेरणा देती है गीता December 22, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | 1 Comment on निःस्वार्थ भाव से कर्म करने की प्रेरणा देती है गीता अशोक “प्रवृद्ध” महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण ने अपने कर्तव्य से विमुख अर्जुन को उसके कर्तव्य का भान कराने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का प्रवचन किया था । श्रीमद्भगवद्गीता वैराग्य अर्थात भक्तिप्रधान अवतारवाद का ग्रन्थ नहीं अपितु कर्मयोग का ग्रन्थ है , हाँ इसमें अध्यात्म का समावेश अवश्य है । कलियुग के प्रारंभ होने के […] Read more » holy book gita गीता
धर्म-अध्यात्म ईश्वर सबको हर क्षण देखता है और सभी कर्मों का यथोचित फल देता है December 20, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on ईश्वर सबको हर क्षण देखता है और सभी कर्मों का यथोचित फल देता है मनमोहन कुमार आर्य बहुत से अज्ञानियों के लिए यह संसार एक पहेली है। संसार की जनसंख्या लगभग 7 अरब बताई जाती है परन्तु इनमें से अधिकांश लोगों को न तो अपने स्वरुप का और न हि अपने जीवन के उद्देश्य व लक्ष्य का ज्ञान है। उन्हें इस संसार को बनाने वाले व हमें व अन्य […] Read more » Featured ईश्वर सबको हर क्षण देखता है सभी कर्मों का यथोचित फल देता है
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द और आर्यसमाज के दलितोद्धार कार्य December 18, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on महर्षि दयानन्द और आर्यसमाज के दलितोद्धार कार्य महर्षि दयानन्द और आर्यसमाज के दलितोद्धार कार्यों पर स्वामी वेदानन्द तीर्थ जी का प्रेरणादायक उपदेश सृष्टि के आरम्भ से महाभारत काल तक सभी वैदिक सनातनधर्मी स्वयं आर्य कहलाने में गौरव का अनुभव करते थे। तब तक हिन्दुओं शब्द का अस्तित्व भी संसार में नहीं था। मुस्लिम आक्रमणकारियों के भारत आने पर यह शब्द […] Read more » आर्यसमाज दलितोद्धार कार्य महर्षि दयानन्
धर्म-अध्यात्म मर्यादा पुरुषोत्तम राम का विश्व के महापुरुषों में सर्वोत्तम स्मरणीय चरित्र December 18, 2015 / December 18, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य यदि किसी मनुष्य को धर्म का साक्षात् स्वरुप देखना हो तो उसे वाल्मीकि रामायण का अध्ययन करना चाहिये। श्री राम का चरित्र वस्तुतः आदर्श धर्मात्मा का जीवन चरित्र है। महर्षि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना करके वस्तुतः श्री रामचन्द्र जी के काल में प्रचलित धर्म व संस्कृति को ही प्रचारित व प्रसारित […] Read more » Featured मर्यादा पुरुषोत्तम राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम का विश्व के महापुरुषों में सर्वोत्तम स्मरणीय चरित्र
धर्म-अध्यात्म आर्य जाति नहीं गुण सूचक शब्द है। December 17, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on आर्य जाति नहीं गुण सूचक शब्द है। सृष्टि के आदि काल व उसके बाद के समय में आर्य, दास तथा दस्यु आदि कोई मुनष्यों की जातियां नहीं थीं, और न ही इनके बीच हुए किसी युद्ध व युद्धों का वर्णन वेदों में है। वेद में आर्य आदि शब्द गुणवाचक हैं, जातिवाचक नहीं। जाति तो संसार के सभी मनुष्यों की एक है और […] Read more » Featured आर्य जाति नहीं गुण सूचक शब्द है।