धर्म-अध्यात्म सब सत्य विद्याओं एवं उससे उत्पन्न किए व हुए संसार व पदार्थों का मूल कारण ईश्वर November 15, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हम कोई भी काम करते हैं तो उसमें विद्या अथवा ज्ञान का प्रयोग करना अनिवार्य होता है। अज्ञानी व्यक्ति ज्ञान के अभाव व कमी के कारण किसी सरल कार्य को भी भली प्रकार से नहीं कर सकता। जब हम अपने शरीर का ध्यान व अवलोकन करते हैं तो हमें इसके आंख, नाक, कान, श्रोत्र, बुद्धि, […] Read more » Featured ईश्वर सत्य विद्याओं एवं उससे उत्पन्न किए व हुए संसार व पदार्थों का मूल कारण संसार व पदार्थों का मूल कारण ईश्वर
धर्म-अध्यात्म सृष्टि की उत्पत्ति किससे, कब व क्यों? November 15, 2015 / November 15, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हम जिस संसार में रहते हैं वह हमें बना बनाया मिला है। हमारे जन्म से पूर्व इस संसार में हमारे माता-पिता व पूर्वज रहते आयें हैं। न तो हमें हमारे माता-पिता से और न हमें अपने अध्यापकों व विद्यालीय पुस्तकों में इस बात का सत्य ज्ञान प्राप्त हुआ कि यह संसार कब, किसने व क्यों […] Read more » Featured सृष्टि की उत्पत्ति कब सृष्टि की उत्पत्ति किससे सृष्टि की उत्पत्ति क्यों?
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द बलिदान दिवस और दीपावली November 12, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आज महर्षि दयानन्द बलिदान दिवस और दीपावली पर महर्षि दयानन्द ने मनुष्य को ईश्वर, जीवात्मा व संसार का यथार्थ परिचय कराने सहित कर्तव्य और अकर्तव्य रूपी मनुष्य धर्म का बोध कराया मनमोहन कुमार आर्य आज दीपावली का पर्व महर्षि दयानन्द जी का बलिदान पर्व भी है। कार्तिक मास की अमावस्या 30 अक्तूबर, 1883 को दीपावली […] Read more » दीपावली महर्षि दयानन्द बलिदान दिवस
धर्म-अध्यात्म गो-वध व मांसाहार का वेदों में कही भी नामोनिशान तक नहीं है November 10, 2015 by शिवदेव आर्य | 2 Comments on गो-वध व मांसाहार का वेदों में कही भी नामोनिशान तक नहीं है शिवदेव आर्य प्रायः लोग बिना कुछ सोचे समझे बात करते हैं कि वेदों में गो-वध तथा गो-मांस खाने का विधान है। ऐसे लोगों को ध्यान में रखकर कुछ लिखने का यत्न कर रहा हूं, आज तक जो भी ऐसी मानसिकता से घिरे हुऐ लोग हो वे जरुर इसको पढ़ कर समझने का प्रयास करें। क्षणिक […] Read more » गो वध मांसाहार मांसाहार का वेदों में मांसाहार का वेदों में कही भी नामोनिशान तक नहीं है
धर्म-अध्यात्म मैं और मेरा देश November 10, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मैं अपने शरीर में रहने वाला एक चेतन तत्व हूं। आध्यात्मिक जगत् में इसे जीवात्मा कह कर पुकारा जाता है। मैं अजन्मा, अविनाशी, नित्य, जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसा हुआ तथा इससे मुक्ति हेतु प्रयत्नशील, चेतन, स्वल्प परिमाण वाला, अल्पज्ञानी एवं ससीम, आनन्दरहित, सुख-आनन्द का अभिलाषी तत्व हूं। मेरा जन्म माता-पिता से हुआ है। […] Read more » मैं और मेरा देश
धर्म-अध्यात्म मनुष्य और उसका धर्म November 8, 2015 / November 8, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment संसार के सभी मनुष्य अपने-अपने माता-पिताओं से जन्में हैं। जन्म के समय वह शिशु होते हैं। इससे पूर्व 10 माह तक उनका अपनी माता के गर्भ में निर्माण होता है। मैं कौन हूं? यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रश्न है। मैं वह हूं जो अपनी माता से जन्मा है और उससे पूर्व लगभग 10 माह तक […] Read more » मनुष्य और उसका धर्म
धर्म-अध्यात्म उदात्त गरिमा यश प्रदात्री श्रीलक्ष्मी November 8, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” समस्त लोकों की ईश्वरी, अपने कर-कमलों में कमल-युगल धारण करने वाली तथा समस्त सर्वांगींण कल्याण का विधान करने वाली जगजननी लक्ष्मी की उपासना भारतवर्ष और इसके बाहर के देशों में अति प्राचीन काल से ही प्रचलित रहा है तथा लक्ष्मी की दशांग उपासना की सम्पूर्ण विधि पटल, पद्धति, शतनाम, सहस्त्रनाम आदि स्त्रोतों एवं […] Read more » Featured उदात्त गरिमा यश प्रदात्री श्रीलक्ष्मी
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की कुछ प्रमुख मान्यतायें November 8, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment वेदों पर आधारित महर्षि दयानन्द जी की कुछ प्रमुख मान्यताओं को पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत कर रहे हैं: ईश्वर विषयक ईश्वर कि जिसके ब्रह्म, परमात्मादि नाम हैं, जो सच्चिदानन्दादि लक्षणयुक्त है, जिसके गुण, कर्म, स्वभाव पवित्र हैं, जो सर्वज्ञ, निराकार, सर्वव्यापक, अजन्मा, अनन्त, सर्वशक्तिमान, दयालु, न्यायकारी, सब सृष्टि का कर्ता, धर्ता, हर्ता, सब जीवों को […] Read more » Featured दयानन्द सरस्वती जी की कुछ प्रमुख मान्यतायें महर्षि दयानन्द महर्षि दयानन्द सरस्वती
धर्म-अध्यात्म क्षमाशीलता November 3, 2015 by कृष्ण कान्त वैदिक शास्त्री | Leave a Comment कृष्ण कान्त वैदिक क्षमाशीलता का अर्थ है निंदा, अपमान और हानि में अपराध करने वाले को दंड देने का भाव न रखना। संसार में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उनका यह विशेष गुण रहा है। मनुस्मृति में धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं जिनमें क्षमा का मुख्य स्थान है। आपस्तम्ब स्मृति के अनुसार- ‘क्षमागुणो […] Read more » क्षमाशीलता
धर्म-अध्यात्म क्या महर्षि दयानन्द को वेद की पुस्तकें धौलपुर से प्राप्त हुईं थीं? November 3, 2015 / November 3, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment महर्षि दयानन्द जी अपने विद्यागुरू प्रज्ञाचक्षु स्वामी विरजानन्द सरस्वती से अध्ययन पूरा कर और गुरु दक्षिणा की परम्परा का निर्वाह कर गुरुजी को दिए वचन के अनुसार भावी योजना को कार्यरूप देने वा निश्चित करने के लिए मथुरा से आगरा आकर रहे थे और यहां लगभग डेढ़ वर्ष रहकर उपदेश व प्रवचन आदि के द्वारा […] Read more » महर्षि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म वैदिक मतानुसार सृष्टय़ुत्पत्ति कालीन स्थिति November 2, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” ईश्वरीय ज्ञान वेद के सृष्टय़ुत्पत्ति विचारधारा के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि एक इकाई है, जिसका प्रत्येक विभाग किसी विशेष प्रयोजन की सिद्धि के लिये बना है और वह अपने स्वरूप में दूसरे का पूरक है। एक के विना दूसरा चल नहीं सकता। वर्तमान में उपलब्ध संसार प्रारम्भ में भी इन समस्त जीवों और उनके […] Read more » Featured वैदिक मतानुसार सृष्टय़ुत्पत्ति कालीन स्थिति
धर्म-अध्यात्म भगवान पर भ्रम October 31, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment चर्च ऑफ़ इंग्लैंड और दुनिया में बहुत दिनों से चल रही लैंगिग समानता पर बहस के बीच बिट्रेन के संसद हाउस ऑफ़ लार्डस में बैठने वाली पहली महिला पादरी रेशाल ट्रवीक ने कहा है कि “चर्च ऑफ़ इग्लैंड” को भगवान के लिए पुर्लिंग शब्द (HE) का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए! उन्हौने अपने संम्बोधन में […] Read more » भगवान पर भ्रम