धर्म-अध्यात्म वैदिक मतानुसार सृष्टय़ुत्पत्ति कालीन स्थिति November 2, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” ईश्वरीय ज्ञान वेद के सृष्टय़ुत्पत्ति विचारधारा के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि एक इकाई है, जिसका प्रत्येक विभाग किसी विशेष प्रयोजन की सिद्धि के लिये बना है और वह अपने स्वरूप में दूसरे का पूरक है। एक के विना दूसरा चल नहीं सकता। वर्तमान में उपलब्ध संसार प्रारम्भ में भी इन समस्त जीवों और उनके […] Read more » Featured वैदिक मतानुसार सृष्टय़ुत्पत्ति कालीन स्थिति
धर्म-अध्यात्म भगवान पर भ्रम October 31, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment चर्च ऑफ़ इंग्लैंड और दुनिया में बहुत दिनों से चल रही लैंगिग समानता पर बहस के बीच बिट्रेन के संसद हाउस ऑफ़ लार्डस में बैठने वाली पहली महिला पादरी रेशाल ट्रवीक ने कहा है कि “चर्च ऑफ़ इग्लैंड” को भगवान के लिए पुर्लिंग शब्द (HE) का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए! उन्हौने अपने संम्बोधन में […] Read more » भगवान पर भ्रम
धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म की वेदी पर प्रथम बलिदान: महर्षि दयानन्द October 31, 2015 / October 31, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आज 30 अक्तूबर को बलिदान दिवस पर आज महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का बलिदान दिवस है। आज ही के दिन 30 अक्तूबर, सन् 1883 को अजमेर में सूर्यास्त के समय महर्षि दयानन्द ने अपने जीवन की अन्तिम सांस ली थी। उनके बलिदान का कारण उनका वैदिक धर्म का प्रचार करना था। स्वार्थी, पाखण्डी व अज्ञानी […] Read more » Featured महर्षि दयानन्द वैदिक धर्म की वेदी पर प्रथम बलिदान
धर्म-अध्यात्म मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम सहित महर्षि वाल्मिकी भी विश्व के आदरणीय एवं पूज्य October 30, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हमारे पौराणिक भाईयों ने वैदिक वा आर्य गुण सम्पन्न मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द्र जी को ईश्वर का अवतार स्वीकार किया है और अपने मन्दिरों में उनकी मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना करते हैं। अनुमान है कि विगत ढाई हजार वर्षों में, जब भी मूर्ति पूजा का आरम्भ हुआ, सबसे पहले जिस महापुरूष की मूर्ति […] Read more » Featured पूज्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम महर्षि वाल्मिकी विश्व के आदरणीय
धर्म-अध्यात्म मनुष्य जीवन की सफलता के लिए वेदों की शरण लेना आवश्यक October 29, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनुष्य जीवन संसार की सभी जीव योनियों में सर्वश्रेष्ठ है जिसे निर्विवाद रुप से सभी स्वीकार करते हैं। इसी प्रकार वैदिक सिद्धान्त, मान्यताओं व पद्धति के अनुसार व्यतीत मनुष्य जीवन ही सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है। संसार में अनेक जीवन शैलियों व पद्धतियों को मानने वाले लोग हैं। पारसी, बौद्ध, जैन, मुस्लिम व पौराणिक पद्धति से […] Read more » Featured वेदों की शरण
धर्म-अध्यात्म दोष न दें विभीषण को October 29, 2015 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on दोष न दें विभीषण को डॉ. दीपक आचार्य आज चिरंजीवियों में जिस महापुरुष का नाम सबसे कम लोग लेते हैं वे हैं विभीषण महाराज। अन्य सभी चिरंजीवियों अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, कृपाचार्य, परशुराम एवं मार्कण्डेय का कहीं न कहीं जिक्र आता ही है। लेकिन सारे गुणों, सत्य, धर्म और नैतिक आदर्शों के बावजूद केवल राक्षस कुल में जन्म लेने […] Read more » दोष न दें विभीषण को
धर्म-अध्यात्म मूक पशु की हत्या रोकने पर महर्षि दयानन्द और उदयपुर नरेश … October 28, 2015 / October 28, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मूक पशु भैंसों की हत्या रोकने पर महर्षि दयानन्द और उदयपुर नरेश महाराणा सज्जन सिंह के बीच वार्तालाप और उसका शुभ परिणाम स्वामी दयानन्द जी सितम्बर, 1882 में मेवाड़ उदयपुर के महाराजा महाराणा सज्जन सिंह के अतिथि थे। नवरात्र के अवसर पर वहां भैंसों का वध रोकने की एक घटना घटी। इसका वर्णन महर्षि […] Read more » भैंसों की हत्या
धर्म-अध्यात्म धर्म विषयक सत्य व यथार्थ ज्ञान को ग्रहण करना व कराना कठिन कार्य है October 27, 2015 / October 28, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment महर्षि दयानन्द ने आर्य समाज का चतुर्थ नियम यह बनाया है कि ‘सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिये।’ इस नियम को सभी मनुष्य चाहे वह किसी भी धर्म के अनुयायी क्यों न हों, सत्य मानते व स्वीकार करते हैं परन्तु व्यवहार में वह ऐसा करते हुए अर्थात् असत्य […] Read more » Featured धर्म विषयक सत्य व यथार्थ ज्ञान को ग्रहण करना
धर्म-अध्यात्म मनुस्मृति का आर्थिक दर्शन October 26, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment जो अर्थ की दृष्टि से शुद्ध है, वही शुद्ध है मनुस्मृति का आर्थिक दर्शन -अशोक “प्रवृद्ध” भारतीय परम्परा में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष- इन चार पुरुषार्थों को मानव जीवन के लिये अपरिहार्य माना गया है। पुरुषार्थ शब्द से अभिप्राय है- पुरुष का प्रयोजन अर्थात् मानव जीवन का लक्ष्य। साधारण मनुष्य अपने जीवन का […] Read more » Featured मनुस्मृति का आर्थिक दर्शन
धर्म-अध्यात्म यज्ञ : कुष्माण्ड बलिदान और बलि वैश्व देव October 25, 2015 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी अक्सर हिन्दू संस्कृति की कर्मकाण्ड पद्धति को लेकर बिना जाने स्वयं अधिकांश हिन्दू ही समय-समय पर प्रश्न खड़े करते रहते हैं। हाल ही में शारदीय नवरात्र के समापन पर जगह-जगह हुए यज्ञ के दौरान कुष्माण्ड बलिदान और बलिवैश्व देव का प्रथानुसार प्रयोग किया गया। इसे लेकर सोशल मीडिया में यत्र-तत्र यह बहस […] Read more » Featured कुष्माण्ड बलिदान बलि वैश्व देव यज्ञ
धर्म-अध्यात्म संसार के सभी मनुष्यों का धर्म क्या एक नहीं है? October 24, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment संसार में सम्प्रति अनेक मत-मतान्तर फैले हुए हैं जिनकी अनेक मान्यतायें समान, कुछ भिन्न व कुछ एक दूसरे के विपरीत भी हैं। यह सभी मत किसी एक ऐतिहासिक पुरुष द्वारा चलाये गये हैं। यही भी सत्य है कि मनुष्य अल्पज्ञ होता है। यह भी तथ्य है कि सभी मतों के प्रवर्तक वेद ज्ञान से शून्य […] Read more » Featured संसार के सभी मनुष्यों का धर्म क्या एक नहीं है?
धर्म-अध्यात्म राम के आदर्श जीवन के अनुरूप स्वयं को बनाने का व्रत लें October 23, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment विजयादशमी पर्व पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श जीवन के अनुरूप स्वयं को बनाने का व्रत लें विजयादशमी पर्व से हमारे पूर्वजों व देशवासियों ने मर्यादा पुरूषोत्तम श्री रामचन्द्र जी के आदर्श जीवन व उनके कृतित्व को जोड़ा है। यद्यपि आश्विन शुक्ला दशमी को मनाई जाने वाली विजयादशमी का श्री रामचन्द्र जी की लंकेश रावण […] Read more » Featured राम