जन-जागरण धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार लेख आत्मा को दीप्त करता महापर्व-पर्युषण August 11, 2020 / August 11, 2020 by आचार्य डाॅ. लोकेशमुनि | Leave a Comment पर्युषण महापर्व 15 अगस्त- 22 अगस्त, 2020 पर विशेष – आचार्य डाॅ.लोकेशमुनि-जैन संस्कृति में जितने भी पर्व व त्योहारों मनाये जाते हैं लगभग सभी में तप एवं साधना का विशेष महत्व है। जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है पयुर्षण पर्व । यह पर्व ग्रंथियों को खोलने की सीख देता है और आत्मशुद्धि का वातावरण निर्मित करता […] Read more » Mahaparava-Paryushan पर्युषण महापर्व
धर्म-अध्यात्म समाज ऋषि दयानन्द का गृहाश्रम पर पठनीय महत्वपूर्ण उपदेश August 10, 2020 / August 10, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द का सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इसके चैथे अध्याय में समावर्तन, विवाह तथा गृहाश्रम पर उपदेश प्रस्तुत किये गये हैं। जैसा उपदेश ऋषि दयानन्द जी ने सत्यार्थप्रकाश में प्रस्तुत किया है वैसा उनके समय व पूर्वकाल में अन्यत्र प्राप्त होना दुर्लभ था। इसका दिग्दर्शन कराने के लिये हम […] Read more » Important sermons read by sage Dayanand on home ऋषि दयानन्द सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ
धर्म-अध्यात्म हमारा यह संसार तीन अनादि व नित्य सत्ताओं की देन है August 8, 2020 / August 8, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह जगत सूर्य, चन्द्र, पृथिवी सहित अनेकों ग्रह व उपग्रहों से युक्त है। इस समस्त सृष्टि में हमारे सौर्य मण्डल के समान अनेक व अनन्त सौर्य मण्डल हैं। इतने विशाल जगत् को देखकर जिज्ञासा होती है कि यह संसार किससे, क्यों, कैसे व कब अस्तित्व में आया और इसका भविष्य […] Read more » संसार
धर्म-अध्यात्म मृतक श्राद्ध का विचार वैदिक सिद्धान्त पुनर्जन्म के विरुद्ध है August 7, 2020 / August 7, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य महाभारत युद्ध के बाद वेदों का अध्ययन–अध्यापन अवरुद्ध होने के कारण देश में अनेकानेक अन्धविश्वास एवं कुरीतियां उत्पन्न र्हुइं। सृष्टि के आरम्भ ईश्वर से प्राप्त वैदिक सत्य सिद्धान्तों को विस्मृत कर दिया गया तथा अज्ञानतापूर्ण नई नई परम्पराओं का आरम्भ हुआ। ऐसी ही एक परम्परा मृतक श्राद्ध की है। मृतक श्राद्ध […] Read more » मृतक श्राद्ध
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द द्वारा हिन्दी अपनाने से इसका देश देशान्तर में प्रचार हुआ August 6, 2020 / August 6, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यआज हम जिस हिन्दी भाषा का प्रयोग करते हैं उसका उद्भव एवं विकास विगत लगभग दो सौ वर्षों में उत्तरोत्तर हुआ दृष्टिगोचर होता है। ऋषि दयानन्द (1825-1883) के काल में हिन्दी की उन्नति हो रही थी। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी को हिन्दी की उन्नति करने वाले पुरुषों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र […] Read more » ऋषि दयानन्द द्वारा हिन्दी अपनाने से इसका देश देशान्तर में प्रचार हुआ
धर्म-अध्यात्म मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन, आदर्शों एवं पावन स्मृति को सादर नमन August 5, 2020 / August 5, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम वैदिक धर्म एवं संस्कृति के आदर्श हैं। उनका जीवन एवं कार्य वैदिक धर्म की मर्यादाओं के अनुरूप हैं एवं संसार के सभी लोगों के लिए अनुकरणीय हैं। भगवान राम ने अपने आदर्श जीवन एवं व्यवहार से संसार के लोगों को धर्म एवं मर्यादाओं का पालन करने का […] Read more » मर्यादा पुरुषोत्तम राम
धर्म-अध्यात्म राजनीति लेख वर्षों से प्रकाशस्तंभ की भाँति विद्यमान हैं लोकनायक श्रीराम August 5, 2020 / August 5, 2020 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment – लोकेन्द्र सिंह मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम भारत की आत्मा हैं। राम भारतीय संस्कृति के भव्य-दिव्य मंदिर के न केवल चमकते शिखर हैं, अपितु वे वास्तव में उसके आधार भी हैं। इसलिए राम का जीवन उनके समय से लेकर आज तक प्रासंगिक है। उनका जीवन प्रकाश स्तम्भ की तरह है, जो अंधेरे में हमारा मार्ग प्रशस्त करता है। संसार […] Read more » श्रीराम
धर्म-अध्यात्म ईश्वर के सत्यस्वरूप और ज्ञान का प्रकाश सर्वप्रथम वेदों द्वारा किया गया” August 4, 2020 / August 4, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार की अधिकांश जनसंख्या ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करती है। बहुत बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी किसी न किसी रूप में इस सृष्टि को बनाने व चलाने वाली सत्ता के होने का संकेत करते हुए उसे दबी जुबान से स्वीकार करते हैं। हमारा अनुमान व विचार है कि यदि यूरोप के वैज्ञानिकों […] Read more » ईश्वर के सत्यस्वरूप और ज्ञान का प्रकाश
धर्म-अध्यात्म हैदराबाद में धर्म की आजादी के लिए आर्यसमाज का सत्याग्रह, 1939 August 1, 2020 / August 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हैदराबाद आजादी से पूर्व एक मुस्लिम रियासत बन गई थी। यहां हिन्दुओं को अपने धर्म का पालन व प्रचार करने पर नाना प्रकार के प्रतिबन्ध लगा दिये गये थे। जैसा पाकिस्तान में विगत 70 वर्षों में हुआ है, ऐसा ही कुछ यहां होता था। आर्यसमाज को भी यहां वैदिक धर्म का […] Read more » खुशहालचन्द जी हैदराबाद में धर्म की आजादी
धर्म-अध्यात्म वेद मानवता व नैतिक मूल्यों के प्रसारक विश्व के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं July 30, 2020 / July 30, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि का आरम्भ सर्वव्यापक एवं सर्वशक्तिमान ईश्वर से सभी प्राणियों की अमैथुनी सृष्टि के द्वारा हुआ था। सृष्टि के आरम्भ में मनुष्य को भाषा व ज्ञान भी परमात्मा से ही मिला। वैदिक संस्कृत भाषा सृष्टि की परमात्मा प्रदत्त आदि भाषा है तथा वेद ज्ञान मनुष्यों को परमात्मा से प्राप्त हुआ प्राचीनतम […] Read more » वेद
धर्म-अध्यात्म विश्व में वेदों के प्रचार का श्रेय ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज को है July 28, 2020 / July 28, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य पांच हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध के बाद वेदों का सत्यस्वरूप विस्मृत हो गया था। वेदों के विलुप्त होने के कारण ही संसार में मिथ्या अन्धविश्वास तथा पक्षपात व दोषपूर्ण सामाजिक व्यवस्थायें फैली हैं। इससे विद्या व ज्ञान में न्यूनता तथा अविद्या व अज्ञानयुक्त मान्यताओं में वृद्धि हुई है। आश्चर्य […] Read more » ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज वेदों के प्रचार का श्रेय
धर्म-अध्यात्म मनुष्य जीवन की सार्थकता वेदाध्ययन एवं उनके आचरण में है July 27, 2020 / July 27, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हम मनुष्य है और अपनी बुद्धि व ज्ञान का उपयोग कर हम सत्य और असत्य का निर्णय करने में समर्थ हो सकते हैं। परमात्मा ने सृष्टि के आरम्भ चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद का ज्ञान दिया था। यह ज्ञान सभी मनुष्यों के लिए दिया गया था। यह ज्ञान ज्ञानी […] Read more » मनुष्य जीवन की सार्थकता मनुष्य जीवन की सार्थकता वेदाध्ययन वेदाध्ययन