धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने विश्व कल्याण की भावना से वेदों का प्रचार किया September 11, 2020 / September 11, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना किसी नवीन मत–मतान्तर के प्रचार अथवा प्राचीन वैदिक धर्म के उद्धार के लिये ही नहीं की थी अपितु उन्होंने वेदों का जो पुनरुद्धार व प्रचार किया उसका उद्देश्य विश्व का कल्याण करना था। यह तथ्य उनके सम्पूर्ण जीवन व कार्यों पर दृष्टि डालने व मूल्याकंन […] Read more » Rishi Dayanand preached the Vedas with the spirit of world welfare. ऋषि दयानन्द वेदों का प्रचार
धर्म-अध्यात्म मनुष्य की पूर्ण आत्मोन्नति वेदज्ञान एवं आचरण से ही सम्भव है September 10, 2020 / September 10, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का शरीर जड़ प्रकृति से बना होता है जिसमें एक सनातन, शाश्वत, अनादि, नित्य चेतन सत्ता जिसे आत्मा के नाम से जाना जाता है, निवास करती है। जीवात्मा को उसके पूर्वजन्मों के कर्मों का भोग कराने के लिये ही परमात्मा उसे जन्म व शरीर प्रदान करते हैं। शुभ व पुण्य […] Read more » वेदज्ञान
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज शुद्ध ज्ञान व कर्मों से युक्त मनुष्य का निर्माण करता है September 7, 2020 / September 7, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment देश और समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि सभी मनुष्यों की बुद्धि व शरीर के बल का पूर्ण विकास कर उन्हें शुद्ध ज्ञान व शक्ति सम्पन्न मनुष्य बनाया जाये। ऐसे व्यक्ति ही देश व समाज के लिये उत्तम, चरित्रवान, देशभक्त तथा परोपकार की भावना से युक्त होते हैं व देश व समाज के […] Read more »
चिंतन धर्म-अध्यात्म देश एवं मानव निर्माण में गोरक्षा एवं गोसंवर्धन का महत्वपूर्ण स्थान September 7, 2020 / September 7, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने मनुष्य एवं इतर आत्माओं के लिये इस सृष्टि को उत्पन्न कर धारण किया है। परमात्मा में ही यह सारा ब्रह्माण्ड विद्यमान है। आश्चर्य होता है कि असंख्य व अनन्त लोक–लोकान्तर परमात्मा के निमयों का पालन करते हुए सृष्टि उत्पत्ति काल 1.96 अरब वर्षों से अपने अपने पथ पर चल […] Read more » Important place of cow protection Important place of cow protection and cow culture Important place of cow protection and cow culture in country and man-making गोरक्षा एवं गोसंवर्धन
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज ईश्वरीय ज्ञान वेद का प्रचारक संसार का अनोखा संगठन है September 5, 2020 / September 5, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार में अनेक संगठन है जिनके अपने-अपने उद्देश्य व लक्ष्य हैं तथा जिसे पूरा करने के लिये वह कार्य व प्रचार करते हैं। सभी संगठन या तो धार्मिक होते हैं या सामाजिक। इनसे इतर भी अनेक विषयों को लेकर अनेक संगठन बनाये जाते हैं। देश की रक्षा करने के लिये भी […] Read more » आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श, प्रेरक एवं अनुकरणीय जीवन September 2, 2020 / September 2, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वैदिक धर्म एवं संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन आदर्श, अनुकरणीय एवं प्रेरक उदाहरणों से युक्त जीवन है। वह आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा, आदर्श शत्रु, आदर्श मित्र, ईश्वर, वेद एवं ऋषि परम्पराओं को समर्पित, उच्च आदर्शों एवं चरित्र से युक्त महापुरुष व महामानव थे। त्रेता युग […] Read more » inspirational and exemplary life of Maryada Purushottam Ram मर्यादा पुरुषोत्तम राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श
धर्म-अध्यात्म सत्य सिद्धान्तों के प्रचार से ही देश व समाज का कल्याण होगा September 1, 2020 / September 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य संसार के सभी मनुष्य एक समान हैं। जन्म से सब एक समान व अज्ञानी उत्पन्न होते हैं। जीवन में ज्ञान की मात्रा व आचरण से ही उनके व्यक्तित्व व जीवन का निर्माण होता है। ज्ञान का आदि स्रोत चार वेद ही हैं। वेद न होते तो ज्ञान भी न होता। वेदों […] Read more » Promotion of true principles will only lead to welfare of the country and society
धर्म-अध्यात्म परमात्मा सब जीवात्माओं के जन्मदाता व माता-पिता होने से उपासनीय हैं September 1, 2020 / September 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा और आत्मा का सम्बन्ध व्याप्य-व्यापक, उपास्य-उपासक, स्वामी-सेवक, मित्र बन्धु व सखा आदि का है। परमात्मा और आत्मा दोनों इस जगत की अनादि चेतन सत्तायें हैं। ईश्वर के अनेक कार्यों में जीवों के पाप-पुण्यों का साक्षी होना तथा उन्हें उनके कर्मानुसार सुख व दुःख रूपी भोग प्रदान करना है। हमारा जो […] Read more » God is worshiped by being the creator and parent of all beings. परमात्मा
धर्म-अध्यात्म सत्य सिद्धान्तों के प्रचार से ही देश व समाज का कल्याण होगा August 31, 2020 / August 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार के सभी मनुष्य एक समान हैं। जन्म से सब एक समान व अज्ञानी उत्पन्न होते हैं। जीवन में ज्ञान की मात्रा व आचरण से ही उनके व्यक्तित्व व जीवन का निर्माण होता है। ज्ञान का आदि स्रोत चार वेद ही हैं। वेद न होते तो ज्ञान भी न होता। वेदों […] Read more » Promotion of true principles will only lead to welfare of the country and society सत्य सिद्धान्तों के प्रचार
धर्म-अध्यात्म वेदाध्ययन व वेद प्रचार से अविद्या दूर होकर विद्या वृद्धि होती है August 31, 2020 / August 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य एक ज्ञानवान प्राणी होता है। मनुष्य के पास जो ज्ञान होता है वह सभी ज्ञान स्वाभाविक ज्ञान नहीं होता। उसका अधिकांश ज्ञान नैमित्तिक होता है जिसे वह अपने शैशव काल से माता, पिता व आचार्यों सहित पुस्तकों व अपने चिन्तन, मनन, ध्यान आदि सहित अभ्यास व अनुभव के आधार पर […] Read more » Vedhyayana and Veda preaching leads to the removal of ignorance and increases learning. वेदाध्ययन व वेद प्रचार
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज एक अद्वितीय धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय संगठन है August 28, 2020 / August 28, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य संसार में किसी विषय पर सत्य मान्यता एक व परस्पर पूरक हुआ करती हैं जबकि एक ही विषय में असत्य मान्यतायें अनेक होती व हो सकती हैं। संसार में ईश्वर व धर्म विषयक मान्यतायें भी एक समान व परस्पर एक दूसरे की पूर्वक होती हैं। इसी कारण से संसार में ईश्वर […] Read more » Aryasamaj is a social and national organization Aryasamaj is a unique religious आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म वेदादि ग्रन्थों के स्वाध्याय से मनुष्य अन्धविश्वासों व दुष्कर्मों से बचता है August 27, 2020 / August 27, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वेद अपौरुषेय रचना है। सृष्टि क आरम्भ में परमात्मा ने ही अपने अन्तर्यामीस्वरूप से चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा को उनकी आत्माओं में वेदों का ज्ञान कराया वा दिया था। प्राचीन काल से अद्यावधि–पर्यन्त सभी ऋषि वेदों की परीक्षा कर इस तथ्य को स्वीकार करते आये हैं कि वेद […] Read more » वेदादि ग्रन्थों के स्वाध्याय