सिनेमा पुण्यतिथि 20 जुलाई पर विशेष : बाबू जी धीरे चलना………..;;;;;ii July 19, 2013 / July 20, 2013 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment “बाबू जी धीरे चलना प्यार में जरा संभलना ’’ फिल्म आर पार का ये गीत जब जब कानो में पडता है तब तब स्वभाव से शान्त, होठो पर बच्चो जैसी प्यारी मुस्कान लिये माथे पर हरदम मोटी बिन्दी लगाये, तबियत से बेहद जिद्दी ,गायकी में मादकता की बारिश करती हुई बेहद शर्मिली थोडी तुनक मिजाज […] Read more »
सिनेमा विषयविहीन हो चूका है आज का सिनेमा May 5, 2013 / May 5, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on विषयविहीन हो चूका है आज का सिनेमा ‘ये कहाँ आ गए है हम’ लता जी की मीठी आवाज़ में गया ये गाना आज भारतीय सिनेमा के १०० साल की यात्रा पर बिल्कुल फिट बैठता है क्योकि अपने उदगम से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा में इतने ज्यादा बदलाव आये हैं कि कोई भी अब ये नहीं कह सकता कि आज की दौर में बनने वाली […] Read more » विषयविहीन आज का सिनेमा
महिला-जगत सिनेमा चरित्रहीन आदर्शवाद May 4, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment (संदर्भःपूरब-पच्छिम फिल्म) आदित्य कुमार गिरि भारतीय हिन्दी फिल्मों का विश्लेषण करने पर जो एक बात सामने आती है वह यह है कि इसका पूरा चरित्र स्त्री विरोधी है।यह अपने फलक पर स्त्री विरोधी मानसिकता को स्थापित किये हुए है।स्त्री की जो छवि वह प्रस्तुत करता है वह कहीं से भी एक लोकतांत्रिक समाज के लिए […] Read more »
सिनेमा थम गई शमशाद बेगम की खनकती आवाज April 25, 2013 / April 25, 2013 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर ‘‘शादाब’’ ’’मेरे पिया गए रंगून’’, ’’कजरा मुहब्बत वाला’’ जैसे कई लोकप्रिय गीतों की आवाज़ अब नही रही। शमशाद बेगम का मुंबई में निधन हो गया है। भारतीय सिनेमा को ’’मेरे पिया गए रंगून’’ और ’’कजरा मुहब्बत वाला’’ जैसे अमर गीतो की बेगम खनकती आवाज की मलिका, ओपी नय्यर जैसे संगीतकार की पहली पसंद, […] Read more » शमशाद बेगम
सिनेमा अभिनय की दुनिया में जाना-पहचाना नाम है श्री सवाई बिस्सा April 24, 2013 / April 24, 2013 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment – डॉ. दीपक आचार्य किसी एक ही शख्स में खूब सारे किरदार देखने हाें तो वह हैं श्री सवाई कुमार बिस्सा। उम्र के नन्हें पड़ावों से ही अपनी बहुआयामी प्रतिभाओं का दिग्दर्शन कराने वाले बिस्सा कला संस्कृति और साहित्य के साथ ही मातृभूमि की सेवा के लिए वह समर्पित व्यक्तित्व हैं जिनकी प्रतिभा […] Read more » श्री सवाई बिस्सा
सिनेमा प्राण को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड April 14, 2013 / April 14, 2013 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment हिंदी सिनेमा के मशहूर खलनायक प्राण को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड बॉलीवुड के फिल्मी सफर में अपनी बेहतरीन अदायगी की छाप छोड़ने वाले मशहूर सिने अभिनेता प्राण को भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से प्राण को तीन मई 2013 को विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में नवाजा जाएगा। अपने छह […] Read more »
टॉप स्टोरी सिनेमा संजय दत्त को बचाना आग से खेलना है! March 23, 2013 / March 23, 2013 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 3 Comments on संजय दत्त को बचाना आग से खेलना है! संजय दत्त को जिस अपराध में सजा दी गयी है, उसमें उसे पहले ही विशेष कोर्ट द्वारा बहुत ही कम सजा दी गयी, अन्यथा देश के दुश्मनों और आतंकियों से सम्बन्ध रखने और उनसे गैर-कानूनी तरीके से घातक हथियार प्राप्त करने और उन्हें उपने घर में रखने। आतंकियों के बारे में ये जानते हुए कि […] Read more » संजय दत्त को बचाना आग से खेलना है!
सिनेमा गुम हो रही हैं फिल्मी धरोहरें March 23, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment बेहद अफसोसजनक बात है कि भारतीय फिल्मों के जनक दादा साहब फाल्के की ही पहली फिल्म के केवल दो प्रिंट बचे हैं। ऐसा केवल उनके साथ ही नहीं बाद के कर्इ फिल्मकारों की माइलस्टोन फिल्मों के साथ भी हुआ है। व्यवसिथत रखरखाव के अभाव में गुम होती […] Read more » गुम हो रही हैं फिल्मी धरोहरें
सिनेमा अभिव्यक्ति की आज़ादी को वोटबैंक से तोल रही है सरकारें ? February 7, 2013 / February 7, 2013 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 3 Comments on अभिव्यक्ति की आज़ादी को वोटबैंक से तोल रही है सरकारें ? इक़बाल हिंदुस्तानी खाप पंचायतों और मज़हबी कट्टरपंथियों को कानून का डर नहीं! फिल्म कलाकार कमल हासन की विवादित फिल्म विश्वरूपम हालांकि कुछ दिन विवाद के बाद तमिलनाडु में भी रिलीज़ हो गयी लेकिन फिल्म संेसर बोर्ड से पास होने के बावजूद जिस तरह से कट्टरपंथियों के दबाव में खुद जयललिता सरकार ने हाईकोर्ट में कानून […] Read more » अभिव्यक्ति की आज़ादी को वोटबैंक से तोल रही है सरकारें ?
जन-जागरण सिनेमा विश्वरूपम का विरोध February 7, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on विश्वरूपम का विरोध अमूमन मैं नई फिल्में नहीं देखता। बेटे की अनुशंसा पर मैंने आमिर खान की दो फिल्में – ‘थ्री इडियट्स’ और ‘तारे जमीं पर’ देखी थी। दोनों फिल्में बहुत अच्छी थीं। आमिर खान के बारे में मेरे मन में अच्छी धारणा बनी। मुझे ऐसा लगा कि राज कपूर के बाद हिन्दी फिल्म उद्योग में एक ऐसा […] Read more » विश्वरूपम का विरोध
महिला-जगत सिनेमा धार्मिक पाखंडों और रुढ़ियों पर चोट करती फ़िल्म ‘ओ माइ गॉड’ – सारदा बनर्जी February 6, 2013 / February 6, 2013 by सारदा बनर्जी | 2 Comments on धार्मिक पाखंडों और रुढ़ियों पर चोट करती फ़िल्म ‘ओ माइ गॉड’ – सारदा बनर्जी स्त्रियों का एक बड़ा सेक्शन है जिनका धार्मिक रुढ़ियों और आडम्बरों से बहुत आत्मीयता का संबंध है। खासकर बुज़ुर्ग महिलाओं का विभिन्न तरह के धार्मिक पाखंडों से रागात्मक संबंध आज भी बना हुआ है। इन धार्मिक छल-कपटों में बेइंतिहा भरोसा रखने वाली स्त्रियों को ज़रुर ‘ओ माइ गॉड’ फ़िल्म देखनी चाहिए। ‘ओ माइ गॉड’ विभिन्न […] Read more »
सिनेमा विश्वरूपम को लेकर उठा विवाद – कुलदीप चंद अग्निहोत्री February 2, 2013 / February 2, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 4 Comments on विश्वरूपम को लेकर उठा विवाद – कुलदीप चंद अग्निहोत्री कमल हासन ने अपनी सारी जमा पूँजी लगा कर एक फ़िल्म बनाई विश्वरूपम । एक मोटे अनुमान के अनुसार भी इस फ़िल्म के निर्माण में उनका लगभग सौ करोड़ रुपया लग गया । फ़िल्म आतंकवाद को लेकर एक जासूसी कहानी है , इसलिये इसमें अफ़ग़ानिस्तान भी आता है । अफ़ग़ानिस्तान पिछले लम्बे अरसे से […] Read more »