पर्यावरण लेख हिमालय पर कालिख और पिघलते ग्लेशियर June 5, 2026 / June 5, 2026 by जयसिंह रावत | Leave a Comment दूसरा बड़ा और विनाशकारी कारण हर साल गर्मियों में लगने वाली जंगलों की आग है। इन अग्निकांडों से निकलने वाली टनों राख और ब्लैक कार्बन की सघन मात्रा वायुमंडलीय धाराओं के सहारे सीधे संवेदनशील ग्लेशियरों की गोद Read more » पिघलते ग्लेशियर
पर्यावरण लेख धरती का हरा गहना है पर्यावरण June 4, 2026 / June 4, 2026 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment मानव सभ्यता के इतिहास में वर्तमान जितना सुविधासंपन्न है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी बन गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने जीवन को सरल तो बनाया है मगर विकास की अंधी दौड़ ने प्रकृति के संतुलन को गंभीर रूप से बिगाड़ा है। Read more » पर्यावरण और विकास का संतुलन
पर्यावरण लेख दिखावे से नहीं, इरादों से बचेगी पृथ्वी June 4, 2026 / June 4, 2026 by उमेश कुमार साहू | Leave a Comment हम अक्सर सोचते हैं कि "अकेले मेरे बदलने से क्या होगा?" बस यही सोच सबसे आत्मघाती है। जब तक हर व्यक्ति खुद को इस तबाही का जिम्मेदार नहीं मानेगा, तब तक कोई भी कानून या सरकारी योजना इस धरती को नहीं बचा सकती।इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हमें खुद से कुछ कड़े सवाल करने होंगे: Read more » विश्व पर्यावरण दिवस
पर्यावरण लेख जन-चेतना से जल चेतना June 4, 2026 / June 4, 2026 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment जल जीवन की प्रथम शर्त है। हमारे शरीर में दौड़ता रक्त भी नदीजल के ‘चेरावेति- चेरावेति’ को सार्थक करता जल ही तो है। हमारे ऋषियों ने इसे ‘आपो ज्योति रसोअमृतम’। Read more » विश्व पर्यावरण दिवस
पर्यावरण लेख पर्यावरणीय संकट से समाधान की ओर बढ़ने का समय June 4, 2026 / June 4, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment पर्यावरणीय संकट का मूल कारण विकास की वह अवधारणा है जिसमें प्रकृति को केवल संसाधन और उपभोग की वस्तु मान लिया गया है। हमने जंगलों को उद्योगों के लिए, नदियों को अपशिष्ट के लिए और भूमि को कंक्रीट के जंगलों में बदलने के लिए प्रयोग किया। प्रकृति हमें जीवन का आधार निःशुल्क देती है, Read more » पर्यावरणीय संकट से समाधान की ओर
पर्यावरण लेख प्रकृति के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी है पर्यावरण संरक्षण June 4, 2026 / June 4, 2026 by संतोष कुमार तिवारी | Leave a Comment वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले की तुलना में लगभग 1.1 से 1.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। Read more » पर्यावरण संरक्षण
पर्यावरण विश्ववार्ता पृथ्वी को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी June 3, 2026 / June 3, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कम आबादी के लिए गृह उद्योग पर्याप्त थे, किंतु बढ़ती जनसंख्या एवं जरूरतों के चलते मशीनीकरण हमारी मजबूरी बन चुका है। पेट्रोल-डीजल एवं अन्य रासायनिक तत्त्वों के इस्तेमाल से निकलने वाली कार्बन डाईऑक्साइड एवं अन्य हानिकारक गैसें वायुमण्डल को निरन्तर प्रदूषित कर रही हैं। इससे उत्पन्न ग्लोबल वार्मिंग ने ऋतुओं का चक्र ही बिगाड़ दिया है। Read more » विश्व पर्यावरण दिवस
पर्यावरण लेख El Niño की आहट से डरा मानसून 2026, भारत के सामने सूखा, गर्मी और पानी संकट का खतरा May 30, 2026 / May 30, 2026 by निशान्त | Leave a Comment El Niño की आहट से डरा मानसून 2026 Read more » El Niño की आहट से डरा मानसून 2026
पर्यावरण लेख सूरज के तीखे होते तेवर और अल-नीनो May 26, 2026 / May 26, 2026 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment इस बार गर्मी का मिजाज इसलिए भी अलग है, क्योंकि कई तटीय इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में नमी वाली गर्मी यानी उमस का असर भी देखने में आ रहा है। इससे लू लगने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। Read more » अल-नीनो
पर्यावरण लेख तपती धरती, तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा : बिगड़ता पर्यावरण संतुलन और अस्तित्व का संकट May 25, 2026 / May 25, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment आज भारत का सामान्य नागरिक यह महसूस करने लगा है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। बचपन की गर्मियां और आज की गर्मियों में जमीन-आसमान का अंतर है। कभी मई-जून की दोपहरें भी इतनी भयावह नहीं लगती थीं। गांवों में पेड़ों की छांव, मिट्टी की नमी Read more » Scorching earth Suffering Lives the System's Sleepiness: Deteriorating Environmental Balance and an Existential Crisis तड़पता जीवन तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा तपती धरती बिगड़ता पर्यावरण संतुलन
पर्यावरण अब तो रातें भी नहीं ठंडी, क्यों हो गई है भारत की गर्मी और खतरनाक May 22, 2026 / May 22, 2026 by निशान्त | Leave a Comment भारत की गर्मी Read more » भारत की गर्मी
पर्यावरण समाज तपती धरती, झुलसता जीवन: हीटवेव की चुनौती May 22, 2026 / May 22, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment हीटवेव का सबसे बड़ा कारण केवल बढ़ता तापमान नहीं, बल्कि वह विकास मॉडल है जिसने धरती की प्राकृतिक ढाल को कमजोर कर दिया। जंगल सदियों से पृथ्वी के प्राकृतिक एयर कंडीशनर रहे हैं। Read more » झुलसता जीवन तपती धरती