पर्यावरण अकेले नहीं आता अकाल-अनुपम मिश्र February 10, 2010 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on अकेले नहीं आता अकाल-अनुपम मिश्र अकाल की पदचाप साफ सुनाई दे रही है। सारा देश चिंतित है। यह सच है कि अकाल कोई पहली बार नहीं आ रहा है लेकिन इस अकाल में ऐसा कुछ होने वाला है, जो पहले कभी नहीं हुआ। देश में सबसे सस्ती कारों का वादा पूरा किया जा चुका है। कार के साथ ऐसे अन्य […] Read more » Famine अकाल
पर्यावरण वेदों में पर्यावरण एवं जल संरक्षण February 4, 2010 / December 25, 2011 by डॉ. पुनीत बिसारिया | 3 Comments on वेदों में पर्यावरण एवं जल संरक्षण पर्यावरण का स्वच्छ एवं सन्तुलित होना मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। पाश्चात्य सभ्यता को यह तथ्य बीसवीं शती के उत्तारार्ध्द में समझ में आया है, जबकि भारतीय मनीषा ने इसे वैदिक काल में ही अनुभूत कर लिया था। हमारे ऋषि-मुनि जानते थे कि पृथ्वी, जल, अग्नि, अन्तरिक्ष तथा वायु इन पंचतत्वों से […] Read more » Water Conservation जल संरक्षण पर्यावरण वेद
पर्यावरण बंद होना चाहिए पचौरी का महिमा मण्डन February 2, 2010 / December 25, 2011 by लिमटी खरे | 2 Comments on बंद होना चाहिए पचौरी का महिमा मण्डन ”ग्लोबल वार्मिंग” इस शब्द से हिन्दुस्तान के लोग कुछ साल पहले तक भली भांति परिचित नहीं थे, पर मीडिया ने इसे जैसे ही हौआ बनाया लोगों की नींदें उडने लगीं। दुनिया आग के गोले में तब्दील हो जाएगी। सब कुछ जलकर खाक हो जाएगा। समाचार चैनल्स ने भी अपनी टीआरपी (टेलीवीजन रेटिंग प्वाईंट) को दुरूस्त […] Read more » Global Warming आर.के. पचौरी ग्लोबल वार्मिंग
पर्यावरण 13 महीने में 19 बाघ हुए काल कलवित January 30, 2010 / December 25, 2011 by लिमटी खरे | 1 Comment on 13 महीने में 19 बाघ हुए काल कलवित सिवनी। एक तरफ केंद्र सरकार द्वारा एक के बाद एक कार्यक्रम लागू कर करोडों अरबों रूपए खर्च कर वन्य जीवों के संरक्षण के लिए नित नई योजनाओं को बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक के बाद एक बाघों ने दम तोडा है, जिससे यह साबित हो रहा […] Read more » Tiger पेंच नेशनल पार्क बाघ
पर्यावरण हालत नहीं सुधरे तो बाघों का अस्तित्व खतरे में December 29, 2009 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on हालत नहीं सुधरे तो बाघों का अस्तित्व खतरे में सिवनी यशों-: पेंच नेशनल पार्क देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इस नेशनल पार्क के संरक्षण में करोडों रूपये खर्च किये जाते है। नेशनल पार्क का महत्व मोगली की जन्म स्थली होने के कारण भी बढा है परंतु नेशनल पार्क के संरक्षण के लिये जिम्मेदार अमले द्वारा निरंतर लापरवाही का रवैया अपनाया जा रहा […] Read more » National Park पेंच नेशनल पार्क
पर्यावरण सावधान! कोहरा आ रहा है December 28, 2009 / December 25, 2011 by लिमटी खरे | 1 Comment on सावधान! कोहरा आ रहा है दिसंबर की हाड गलाने वाली ठण्ड के आते ही आवागमन ठहर सा जाता है। वैसे तो समूचे भारत में कोहरे की मार इन दिनों में जबर्दस्त होती है, किन्तु उत्तर भारत विशेषकर आगरा के आगे के इलाकों में कोहरा शनै: शनै: बढता ही जाता है। कोहरे के कारण जन जीवन थम सा जाता है। आंकडों […] Read more » Fog कोहरा
पर्यावरण जलवायु परिवर्तन की मार महिलाओं पर December 19, 2009 / December 25, 2011 by सरिता अरगरे | Leave a Comment जलवायु परिवर्तन से पूरे समाज पर भले ही असर पड़ता हो लेकिन अब धीरे-धीरे जो तस्वीर उभर रही है उससे स्पष्ट हो रहा है कि पर्यावरण में आ रहे बदलावों और उससे पैदा होने वाली मुश्किलों का सबसे ज़्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है । कोपेनहेगन में हुए जलवायु शिखर सम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन […] Read more » Climate Change जलवायु परिवर्तन
पर्यावरण बिगड़ते पर्यावरण से बढ़ेगा पलायन December 16, 2009 / December 25, 2011 by हिमांशु शेखर | Leave a Comment तेजी से बिगड़ता पर्यावरण पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। यह जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंता ही है कि दुनिया के 192 देशों के बड़े नेता कोपेनहेगन में इस मसले पर बातचीत करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस सम्मेलन में आखिर क्या फैसला लिया जाएगा, इसके लिए तो अभी […] Read more » Enviroment पर्यावरण
पर्यावरण कोपेनहेगन जलवायु वार्ता: जनपक्षीय और समग्र हिमालयी नीति जरूरी December 13, 2009 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment संयुक्त राष्ट्र के कोपेनहेगन जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में आज दुनिया भर में जिस विषय पर यकायक चर्चा केन्द्रित हो गई है, वह विषय है तेजी से गरमाती धरती और वातावरण के कारण हो रहा जलवायु परिवर्तन। बाली से बार्सेलोना तक और ऋषिकेश से लेकर बेलम (ब्राजील) तक विभिन्न स्तरों पर जलवायु परिवर्तन […] Read more » Kopenhegan climate discussion कोपेनहेगन जलवायु वार्ता
पर्यावरण विश्ववार्ता कोपनहेगन सम्मेलन का अर्थ और उसके परिणाम December 7, 2009 / December 25, 2011 by सतीश सिंह | 3 Comments on कोपनहेगन सम्मेलन का अर्थ और उसके परिणाम कभी महात्मा गाँधी ने कहा था- इंसान की जरुरतों को प्रकृति तो पूरा कर सकती है लेकिन इंसान के लालच को नहीं। आज इंसान का लालच सभी सीमाओं को लांघ चुका है। इस लालच पर किस तरह से लगाम लगाया जाये, यही है इस सम्मेलन का प्रमुख मुद्दा। 192 देश के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में […] Read more » Copenhagen Conference कोपनहेगन सम्मेलन
पर्यावरण परशुराम कुण्ड पर संकट, बांध-फांस में फंसी धरोहर November 6, 2009 / December 26, 2011 by राकेश उपाध्याय | Leave a Comment संस्कृति, विरासत और परंपरा बलिदान करिए, द्रुत गति से विकास मार्ग पर चलिए। हमारे विकासवादियों का ये मंत्र अपना असर बखूबी दिखाने लगा है। अब बारी परशुराम कुण्ड की है। अरूणाचल प्रदेश में लोहित नदी पर बन रहे एक बांध के चलते परशुराम कुण्ड अस्तित्वविहीन होने जा रहा है। 1750 मेगावाट की देमवे जलविद्युत परियोजना […] Read more » Parshuram kund परशुराम कुण्ड
पर्यावरण सिर्फ बांधों के फायदे मत गिनाइए – इन स्याह तस्वीरों का क्या होगा! November 5, 2009 / December 26, 2011 by राकेश उपाध्याय | 3 Comments on सिर्फ बांधों के फायदे मत गिनाइए – इन स्याह तस्वीरों का क्या होगा! देश में बांधों की बाढ़ आ गई है। हिमाचल प्रदेश से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक और उत्तराखण्ड से लेकर सुदूर केरल तक बांधों की पौ-बारह है। ‘ले बांध, दे बांध’ की तर्ज पर सरकारी मशीनरी बांध प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई कर रही हैं। एक-एक नदी के प्रवाह पर दर्जनों बांध परियोजनाएं, कुछ मंझोली तो […] Read more » Dams बांध