आलोचना वाद को वाद ही रहने दें, विवाद न बनने दें… March 31, 2025 / March 31, 2025 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ गन कल्चर के नाम पर हरियाणा में कुछ गायकों के यू ट्यूब से डिलीट किए गए गानों पर इशारों-इशारों में रार जारी है। यह गायकों के साथ-साथ हरियाणवीं म्यूजिक इंडस्ट्रीज के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है। मौका पड़ते ही एक दूसरे पर छींटाकशी या टोंटबाजी से बात सुधरने के चांस कम, बिगड़ने के ज्यादा है। दस दिन के अंतराल में जो नुकसान इंडस्ट्रीज को हुआ है, उसके नुकसान की भरपाई होने में बहुत समय लगेगा। समय रहते वाद को विवाद होने से बचाने की पहल जरूरी है। अब ये पहल सरकार करे या गायकों के चुनिंदा नुमाइंदे। इसके बिना कोई समाधान नहीं निकलने वाला। देशभर में अपना विशेष स्थान रखने वाला हरियाणा पिछले दस दिन से अलग ही मूड में है। जिधर देखो, उधर गन कल्चर के नाम पर डिलीट किए गए गानों की चर्चा है। रोजाना सैकड़ों रील सोशल मीडिया पर अपलोड हो रही है। ध्यान रहे कि हरियाणा पुलिस ने इन दिनों गन कल्चर को बढ़ावा देने वाले गानों को निशाने पर लिया हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद से लगातार इस तरह के गानों की सूची बनाई जा रही हैं। जानकारी अनुसार अभी तक इस प्रकार के 10 गानों को यू ट्यूब से हटाया जा चुका है। माना जा रहा है कि इस तरह के 100 गाने और पुलिस के भेंट चढ़ने वाले हैं। जिन दस गानों के डिलीट होने की बात है, उनमें से सात एक ही गायक के बताए जा रहे हैं। ऐसे में उक्त गायक को दर्द होना तो लाजमी है। ये दर्द किसी दवा से कम होने वाला नहीं है। यह बात वो गायक भी जानते हैं और उनके चाहने वाले। नुकसान कितना होगा, यह अभी कोई नहीं जानता। हां जितना समय गुजरता जायेगा, नुकसान की मात्रा बढ़ती जायेगी। बौखलाहट, हड़बड़ाहट या बिना कुछ सोचे विचारे उठाए गए कदम लाभ की जगह नुकसान ही ज्यादा पहुंचाते हैं। फिलहाल हो भी यही रहा है। सरकार में पदासीन एक गायक की सोशल मीडिया पर विरोध रूपी हौसला अफजाई फॉलोवर्स लगातार कर रहे हैं। उद्वेगजनक कटु सर्पित वाक् शिलिमुख घाव को हरा ही कर रहे हैं। रही सही कसर ये माइक वाले भाई पूरी कर रहे हैं। जैसे ही किसी एक का कोई बयान आता है तो अपनी फैन फॉलोइंग बढ़ाने के चक्कर में दूसरे के पास पहुंच जाते हैं। जब तक उसके श्रीमुख से दूसरे के लिए कोई कड़वी बात न निकले, माइक को हटाते ही नहीं। जैसे ही कुछ बोला, उसे दूसरे को हैशटैग कर उसकी प्रतिक्रिया की बाट जोहना शुरू कर देते हैं। इन महानुभावों की दरियादिली तो देखिए ये दूसरे पक्ष के बुलावे का इंतजार भी नहीं करते, खुद ही अपना झोला झंडी उठाकर पहुंच जाते हैं एक नई फिल्म बनाने को। पिछले दस-बारह दिनों से यही तो हो रहा है। इनकी एक खास बात और भी है कि अगला कुछ न भी कहना चाहे तो उसे बातों में ले कोई दुखती रग छेड़कर उससे कुछ उल्टा पुल्टा कहलवा ही देते हैं। अब बात आती है कि ये स्थिति पैदा ही क्यों हुई? एक कहावत है कि दूसरों को अपने घर में झांकने का मौका दोगे तो कमियां तो बाहर जाएंगी ही। यही फिलहाल हरियाणा म्यूजिक इंडस्ट्रीज में हो रहा है। एक गायक का गाना थोड़ा पॉपुलर क्या हुआ, दूसरे को मिर्ची लग जाती है। कुछ नया कंटेंट की जगह उसी को नीचा दिखाने में न सिर और न पैर वाली अपनी अमूल्य रचना निर्मित कर अपने आप को सुप्रीम साबित करने का अलौकिक और अदभुत प्रयास करते हैं। एक दुनाली की बात करता है तो दूसरा पिस्टल की। एक पीलिए में मामा पिस्तौल की बात करता है तो दूसरा मुंह दिखाई में बंदूक की। एक पिस्टल से महंगा लहंगा बोलता है तो दूसरा कोर्ट में ही गोली चलवा देता है। एक लफंडर बनता है तो दूसरा चम्बल का डाकू। बदमाशी के ट्यूशन, जेल में खटोले आदि तो अभी बैन होकर ज्यादा चर्चा में है ही। हरियाणा की प्रसिद्ध कहावत है कि गोह के जाए, सारे खुरदरे। अर्थात् सभी एक जैसे। वाद गीतों के बोल में रहे तब तक तो ठीक है पर जब एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास हो तो यही वाद विवाद बन जाता है। और हो भी यही रहा है। सरकार की सख्ती से इंडस्ट्रीज को ब्रेक से लग गए हैं। खुद कलाकार भी इस बात को स्वीकार रहे हैं कि नया कुछ लिखने, बनाने या रिलीज करने से पहले सब हिचक रहे हैं। सब को डर है कि फायदे की जगह नुकसान न हो जाए। जो हो गया वो हो गया। भविष्य में ऐसी स्थिति सामने न आए इस पर विचार आज पहले जरूरी है। इंडस्ट्रीज में विवादों से दूर मां बोली के लिए जीने वाले राममेहर महला, रामकेश जीवनपुरिया जैसे बहुत कलाकार हैं। उन्हें आगे करें। आपसी विरोधाभास को छोड़कर एकजुट हो बैठकर सरकार से बातचीत करे। लक्ष्य एक हो कि इंडस्ट्रीज की गरिमा बनी रहे। चर्चा होगी तो समाधान भी पक्का निकलेगा। सोशल मीडिया से तो समाधान होने वाला नहीं। बात बढ़ेगी तो सख्ती ज्यादा ही होगी, कम होने से रही। चाणक्य नीति में कहा गया है कि – प्रभूतं कार्यमपि वा तत्परः प्रकर्तुमिच्छति। सर्वारम्भेण तत्कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते। छोटा हो या बड़ा, जो भी काम करना चाहें, उसे अपनी पूरी शक्ति लगाकर करें? यह गुण हमें शेर से सीखना चाहिए। इसलिए चिंतन-मनन करें। मिलने-मिलाने के बहाने क्या पता कुछ उम्मीद से ज्यादा ही मिल जाए। सुशील कुमार Read more » वाद को वाद ही रहने दें
आलोचना राजनीति महिला सुरक्षा भी होगा चुनावों में बड़ा मुद्दा September 11, 2024 / September 11, 2024 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी ओलम्पियन विनेश फोगाट के कांग्रेस में शामिल होने तथा जुलाना विधानसभा क्षेत्र से अपनी चुनावी पारी की शुरुआत करने के बाद एक बात यह भी स्पष्ट हो गयी है कि कांग्रेस विनेश का इस्तेमाल केवल स्पोर्ट्स स्टार और जाट चेहरे मात्र के रूप में ही नहीं करेगी बल्कि वह इस सुप्रसिद्ध व लोकप्रिय ओलम्पियन […] Read more » महिला सुरक्षा महिला सुरक्षा भी होगा चुनावों में बड़ा मुद्दा
आलोचना आओ बाबा बाबा खेलें… .. July 17, 2024 / July 17, 2024 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप पिछले हफ्ते भोले बाबा के धार्मिक समागम में भगदड़ मच गई जिसमें सौ से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इस आयोजन के लिए 80,000 लोगों के आने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन लगभग 2.5 लाख भक्त वहां पहुंच गए। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि भोले बाबा […] Read more »
आलोचना ‘विवाह अनंत’ : बड़ा हुआ तो क्या हुआ ? July 17, 2024 / July 17, 2024 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी मीडिया के माध्यम से पूरे देश ने पिछले दिनों एक ‘अनंत विवाह ‘ के आयोजन का ‘लुत्फ़’ उठाया। उद्योगपति मुकेश अंबानी के नूर-ए-नज़र अनंत अंबानी का अलग अलग आयोजनों के नाम से लंबे समय तक चला यह विवाह समारोह भारतीय इतिहास का अब तक का सबसे ख़र्चीला विवाह बताया जा रहा है। हमारे देश में […] Read more » अनंत विवाह
आलोचना अंध भक्तों की बेरहम मौत, मैं अपनी गोद में उन नासमझों की लाश लिए, काका हाथरसी का शहर “मैं हाथरस हूँ” July 9, 2024 / July 9, 2024 by अनिल अनूप | Leave a Comment –अनिल अनूप हींग की खुशबू और काका हाथरसी की कविताओं से महकता यह शहर अब चिताओं के धुएं में घिरा हुआ है। मेरा नाम हाथरस है। हां, सही सुना आपने, मैं वही हाथरस हूं जो हाल ही में 121 मौतों का चश्मदीद बना। तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन यहां की हवा में अब भी […] Read more » अंध भक्तों की बेरहम मौत
आलोचना कांग्रेस की नैया के खिवैया बने राहुल गांधी के स्क्रिप्ट राईटर्स और सलाहकारों पर वाकई आने लगा है तरस . . . March 11, 2024 / March 11, 2024 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे कांग्रेस की नैया के खिवैया बने राहुल गांधी जब भी बोलते हैं तो क्या वे उस बारे में विचार नहीं करते! क्या कारण है कि राहुल गांधी अक्सर विवादों में ही घिरे रहते हैं। देश की सबसे पुरानी और आधी सदी तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक राहुल […] Read more » I am really feeling pity for the script writers and advisors of Rahul Gandhi who became the captain of Congress's boat.
आलोचना राजनीति है आपकी अदाओं से गिरगिट भी शर्मसार … February 1, 2024 / February 1, 2024 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी नितीश कुमार बिहार की राजनीति के लिये कितना ही प्रासंगिक क्यों न रहे हों परन्तु उनके राजनैतिक जीवन का हासिल यही है कि उन्हें मीडिया ने ‘पलटी मार’ या ‘पल्टूराम’ का ख़िताब दे डाला है। नौ बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नितीश कुमार अलग अलग अवसरों पर कभी […] Read more » नितीश कुमार
आलोचना कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार वर्त-त्यौहार दिवाली का बदला स्वरूप November 14, 2023 / November 14, 2023 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment दिवाली के शुभ अवसर पर हमारे देश में रोशनी, मिठाईयां, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की बात करने की परंपरा है लेकिन विडंबना ये है कि आज के दौर में दिवाली के मायने पूरी तरह बदल गये हैं। दिवाली का बदला स्वरूप अब खुशियों के बजाय प्रदूषण और जाम की चिंता लेकर आता है। दिवाली की सांस्कृतिक परंपराएँ लुप्त […] Read more » Revenge form of Diwali
आलोचना भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ? July 17, 2023 / July 17, 2023 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें जैसे बाढ़ संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक मूल्यांकन और फ्लड प्लेन ज़ोनिंग एक्ट का अधिनियमन अभी तक अमल में नहीं आया है। सीडब्ल्यूसी का बाढ़ पूर्वानुमान नेटवर्क देश को पर्याप्त रूप से कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, अधिकांश मौजूदा बाढ़ पूर्वानुमान स्टेशन चालू नहीं हैं। 2006 […] Read more » What happened to India's flood management plan
आलोचना सब जीते तो हारा कौन ? June 5, 2023 / June 5, 2023 by अनुज अग्रवाल | Leave a Comment – अनुज अग्रवाल भाजपा के असंख्य आरोपों, कोशिशों, जाँच एजेंसियों के छापे और चुनावी माहौल के भगवाकरण करने के बाद भी देश से निपटती व सिमटती जा रही कांग्रेस पार्टी ने बड़े आराम से प्रभावशाली बहुमत के साथ हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक में न केवल जीत प्राप्त की वरन् सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के […] Read more »
आलोचना दाढ़ी एक रूप अनेक December 28, 2022 / December 28, 2022 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री पुरुषों की दाढ़ी को लेकर शताब्दियों से तरह तरह के मत व्यक्त किये जाते रहे हैं। बड़े बड़े वैज्ञानिकों से लेकर अनेक आध्यात्मिक गुरुओं,धर्मगुरुओं व राजनेताओं तक को अक्सर ‘दाढ़ी युक्त ‘ देखा गया है। दुनिया के अनेक महान चिंतक,विचारक कवि तथा लेखक आदि भी दाढ़ी युक्त नज़र आते रहे हैं। आमतौर […] Read more »
आलोचना बाबा रामदेव : अपने घर शीशे के और दूसरों के घरों पर पत्थर ? August 21, 2022 / August 21, 2022 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment पतंजलि समूह के कर्ता धर्ता बाबा रामदेव देश की एक अनोखी व अभूतपूर्व शख़्सियत हैं। पहले गेरुआ वस्त्र धारण कर योग गुरु के रूप में अपनी पहचान बनाई। फिर योग के बहाने अपने अनुयायियों में आयुर्वेद और स्वदेशी पर प्रवचन देना शुरू किया ,इसी माध्यम से उन्होंने अपने लाखों अनुयायी तैय्यार कर उन्हें भावनात्मक रूप […] Read more »