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उ.प्र. चुनाव : सपा की रणनीति से विरोधी होगें चित्त !

बसपा की बात करें तो नोटबंदी के चलते बहनजी चर्चा में रही हैं । आम जनता को नोटबंदी से हुई परेशानी के लिये मायावती ने आवाज उठाई तो भाजपा ने चुनाव में नोट लेकर टिकिट देने की छवि प्रचारित कर इस आवाज को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी । बसपा सपा को अराजकतावादी और भाजपा को साम्प्रदायिक घोषित करते हुये कानून व्यवस्था के मुद्दे पर चुनाव लड़ने जा रही है । विकास की नित नई योजनाओं से अखिलेश अपना पल्लू साफ करके मायावती की इस कोशिश को असफल करने में लगे हैं । कांग्रेस और लोकदल के जनसमर्थन के साथ आने से भी इस काले धब्बे को नकारने में सपा को मदद मिल जायेगी । ऐसे में बसपा का सीधा सामना इस महागठबंधन से होगा ।