पुस्तक समीक्षा संभावना और चुनौतियों के बीच मूल्यानुगत मीडिया का आग्रह October 18, 2019 / October 18, 2019 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment – लोकेंद्र सिंह सक्रिय पत्रकारिता और उसके शिक्षण-प्रशिक्षण के सशक्त हस्ताक्षर प्रो. कमल दीक्षित की नयी पुस्तक ‘मूल्यानुगत मीडिया : संभावना और चुनौतियां’ ऐसे समय में आई है, जब मीडिया में मूल्यहीनता दिखाई पड़ रही है। मीडिया में मूल्यों और सिद्धांतों की बात तो सब कर रहे हैं, लेकिन उस तरह का व्यवहार मीडिया का दिखाई नहीं दे रहा है। […] Read more »
पुस्तक समीक्षा केंद्र सरकार की योजनाओं का दस्तावेज है ‘विकास के पथ पर भारत’ April 12, 2019 / April 12, 2019 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | 1 Comment on केंद्र सरकार की योजनाओं का दस्तावेज है ‘विकास के पथ पर भारत’ – लोकेन्द्र सिंह लेखक और मीडिया शिक्षक डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक ‘विकास के पथ पर भारत’ केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का दस्तावेज है। यह पुस्तक सामान्य जन से लेकर उन सबके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी जो देश में चल रहीं लोक कल्याणकारी योजनाओं को समझना चाहते हैं। यह उन अध्येताओं, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए भी […] Read more »
पुस्तक समीक्षा “गंदगी के महारथी” बदल सकती है आपकी कई बुरी आदतें August 2, 2018 / August 2, 2018 by हरीश चन्द्र बर्णवाल | Leave a Comment समीक्षक – हरीश चन्द्र बर्णवाल बहुत दिनों के बाद एक अच्छी पुस्तक पढ़ने का मौका मिला है। इस पुस्तक का नाम है “गंदगी के महारथी” और इसे लिखा है एबीपी न्यूज के पत्रकार साथी मनीष शर्मा जी ने।ऐसा बहुत कम होता है कि कोई टीवी पत्रकार बहुत अच्छी पुस्तक भी लिखे। टीवी पत्रकारों की विशेषज्ञता […] Read more » “गंदगी के महारथी” बदल सकती है आपकी कई बुरी आदतें Featured अजय तिवारी एबीपी न्यूज पत्रकार साथी मनीष शर्मा प्रधानमंत्री मोदी
पुस्तक समीक्षा असहिष्णुता के सुनियोजित प्रोपेगंडा के बरक्स June 14, 2018 / June 14, 2018 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment डॉ. आशीष द्विवेदी ( निदेशक, इंक मीडिया इंस्टीट्यूट, सागर) आज के जमाने में लिखा और कहा तो बहुत कुछ जा रहा है पर उसमें उतना असर दिखता नहीं है। कारण अंतस से मन, वचन और कर्म को एकाकार कर लिखने वाले गिनती के हैं। शायद इसीलिए वह लेखन शाम ढलते ही किसी अंधेरे कोने […] Read more » Featured असहिष्णुता के सुनियोजित उपराष्ट्रपति कलाकार निष्पक्षता प्रोपेगंडा के बरक्स प्रोपेगंडा से वैश्विक मीडिया शिक्षक साहित्य
पुस्तक समीक्षा एक नयी दुनिया के सपनो का नाम प्रोस्तोर: वंदना गुप्ता June 2, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment वंदना गुप्ता ‘प्रोस्तोर’ एक लघु उपन्यास एम. एम. चन्द्रा जी द्वारा लिखा डायमंड बुक्स से प्रकाशित है. आज बड़े बड़े उपन्यास लिखे जाने के दौर में लघु उपन्यास लिखा जाना भी साहस का काम है और यही कार्य लेखक ने किया है. शायद चुनौतियों से आँख मिला सके वो ही सच्चे साहित्यकार की पहचान होती […] Read more » Featured अघोघ उपन्यास एक नयी दुनिया के सपनो का जितेन्द्र दुष्कर प्रोस्तोर: वंदना गुप्ता बंटी भुवन मुख्य पात्र योगेश राजीव विपिन
पुस्तक समीक्षा राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती ” राष्ट्रवाद, भारतीयता और पत्रकारिता” किताब April 30, 2018 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment पुस्तक समीक्षा राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती एक किताब : राष्ट्रवाद, भारतीयता और पत्रकारिता लोकेन्द्र सिंह देश में राष्ट्रवाद से जुड़ी बहस इन दिनों चरम पर है। राष्ट्रवाद की स्वीकार्यता बढ़ी है। उसके प्रति लोगों की समझ बढ़ी है। राष्ट्रवाद के प्रति बनाई गई नकारात्मक धारणा टूट रही है। भारत में बुद्धिजीवियों का एक वर्ग […] Read more » भारतीयता और पत्रकारिता राष्ट्रवाद
पुस्तक समीक्षा ध्येय पथ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नौ दशक March 3, 2018 by संजय द्विवेदी | 1 Comment on ध्येय पथ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नौ दशक पुस्तक-समीक्षा आरएसएस की अविराम एवं भाव यात्रा का ‘ध्येय पथ’ – लोकेन्द्र सिंह जनसंचार माध्यमों में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में भ्रामक जानकारी आती है, तब सामान्य व्यक्ति चकित हो उठते हैं, क्योंकि उनके जीवन में संघ किसी और रूप में उपस्थित रहता है, जबकि आरएसएस विरोधी ताकतों द्वारा मीडिया में संघ की […] Read more » ध्येय पथ
पुस्तक समीक्षा समाज, प्रकृति और विज्ञान September 18, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment समाज का प्रकृति एजेण्डा जगाती एक पुस्तक समीक्षक: अरुण तिवारी पुस्तक का नाम: समाज, प्रकृति और विज्ञान लेखक: श्री विजयदत्त श्रीधर, श्री राजेन्द्र हरदेनिया, श्री कृष्ण गोपाल व्यास, डाॅ. कपूरमल जैन, श्री चण्डी प्रसाद भट्ट संपादक: श्री राजेन्द्र हरदेनिया प्रकाशक: माधवराव सप्रे स्मृति समाचारप संग्रहालय, एवम् शोध संस्थान, माधवराव सप्रे मार्ग (मेन रोड नंबर […] Read more » प्रकृति और विज्ञान समाज
पुस्तक समीक्षा साहित्य सामाजिक चेतना का अग्रदूत: मन की बात July 5, 2017 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment सकारात्मक बदलाव लाती ”मन की बात” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पदभार सँभालने के बाद से ही जनमानस से जुड़ाव की कई सकारात्मक कोशिशें की हैं। मन की बात कार्यक्रम में आमजन से संवाद करना, ऐसा ही एक प्रभावी कदम रहा। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम न केवल लोकप्रिय बना बल्कि आमजन को जागरूक करने में भी […] Read more » मन की बात सामाजिक चेतना का अग्रदूत
पुस्तक समीक्षा साहित्य सजग पत्रकार की दृष्टि में मोदी-युग June 23, 2017 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment संजय द्विवेदी के जन्म से पूर्व के एक तथ्य को मैं अपनी तरफ से जोड़ना चाहता हूं, जब भारत विभाजन के पश्चात पश्चिमी पंजाब से लाखों की संख्या में हिंदू पूर्वी पंजाब पहुंचे तो संघ के स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में उनके आतिथ्य, त्वरित पुर्नवास और उनके संबंधियों तक उन्हें पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय बड़ी तादाद में अनेक व्यक्ति घायल और अंग-भंग के शिकार होकर विभाजित भारत में पहुंचे थे। उन्हें यथा संभव उपचार उपलब्ध कराने में संघ के स्वयंसेवकों ने शासन-प्रशासन तंत्र को मुक्त सहयोग दिया था। उसके साथ ही स्वतंत्र भारत ने अनेक प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी संघ के अनुषांगिक संगठनों से जुडे़ समाज सेवियों को स्वतःस्फूर्त सक्रिय पाया जाता रहा। Read more » मोदी युग सजग पत्रकार की दृष्टि में मोदी-युग
पुस्तक समीक्षा आत्ममंथन से व्यंग्यमंथन तक May 27, 2017 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment समीक्षक : एम. एम. चन्द्रा वरिष्ठ व्यंग्यकार हरीश नवल की पुस्तक “कुछ व्यंग्य की कुछ व्यंग्यकारों की ” जब मेरे हाथों में उन्होंने सौंपी, तो कुछ समय के लिए तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ. बस दो पल का आत्मीय मिलन सदियों पुराना बन गया. यह पुस्तक आत्म मंथन से व्यंग्य मंथन तक का सफ़र […] Read more » आत्ममंथन से व्यंग्यमंथन तक कुछ व्यंग्य की कुछ व्यंग्यकारों की
पुस्तक समीक्षा अपना आसमान तराशना April 7, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment जीवन में वृद्धि प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है, निश्चित पराजय के सामने रहते हुए भी वृद्धि में अवरोध नहीं आता। । अपनी पसन्द और नापसन्दी के कारण हम चीजों को उनके सही परिप्रेक्ष्य में नहीं देख पाते, क्योंकि हमारी समझ हमेशा लगाव और विमुखता से रंजित रहती है। सम्यक सफाई की जाने की जरूरत होती है ताकि चीजें वैसी ही नजर आएँ जैसी वे होती हैं। Read more » अपना आसमान तराशना