पुस्तक समीक्षा साहित्य ‘सेक्युलर्टाइटिस’- एक ऐसा उपन्यास, . जिसकी पूरी कहानी हो गई घटित March 30, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment धारा ३७० को आधार बना कर लिखे गये इस उपन्यास में धर्मनिरपेक्षता पर व्यापक विमर्श हुआ है और देश के तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों की भिन्न-भिन्न धर्मनिरपेक्षी नीतियों-करतुतों को उजागर करते हुए उन्हें तरह-तरह की व्यंग्यात्मक संज्ञा देकर चूभनेवाले विशेषण प्रदान किये गये है । मसलन- कांगेस की जजिया, हजिया, सफेद, रंगीन, दुधारु, गोधरी, निर्माणकारी व तीन सौ सतरी धर्मनिरपेक्षता, तो जदयू के नीतीश की Read more » ‘सेक्युलर्टाइटिस
पुस्तक समीक्षा साहित्य “शतपथ ब्राह्मण का महत्वपूर्ण लघु परिचयात्मक ग्रन्थ शतपथ सुभाषित” March 6, 2017 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on “शतपथ ब्राह्मण का महत्वपूर्ण लघु परिचयात्मक ग्रन्थ शतपथ सुभाषित” मनमोहन कुमार आर्य शतपथ ब्राह्मण पर स्मृति-शेष प्रतिष्ठित आर्य विद्वान पं. वेदपाल जी ने ‘शतपथ सुभाषित’ नाम से एक लघु पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक का प्रकाशन सन् 1998 में हुआ। डा. भवानीलाल भारतीय जी ने इस ग्रन्थ पर अपनी सम्मति दी है जिसे हम प्रस्तुत कर रहे हैं। वह लिखते हैं कि शतपथ […] Read more » shatpath subhashit शतपथ ब्राह्मण
पुस्तक समीक्षा साहित्य ‘उत्तर प्रदेश – विकास की प्रतीक्षा में’ पुस्तक समीक्षा February 13, 2017 / February 13, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment Bloomsbury प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में पिछले 15 सालों में सपा-बसपा द्वारा उत्तर प्रदेश में किये गए कु-शासन को विस्तार से व्यापक रिसर्च करके प्रस्तुत किया गया है. इस पुस्तक के लेखक है, शान्तनु गुप्ता, जिन्होंने लंदन से पॉलिसी और राजनीति की पढ़ाई की है। और लम्बे समय से भारत में डिवेलप्मेंट रीसर्च में […] Read more » Book by Shantanu Gupta book review by Shantanu Gupta Uttar Pradesh Vikas ki pratiksha mein उत्तर प्रदेश - विकास की प्रतीक्षा में
पुस्तक समीक्षा साहित्य शिकारी का अधिकार – (व्यंग्य संग्रह) आरिफा एविस July 22, 2016 by बी एन गोयल | 3 Comments on शिकारी का अधिकार – (व्यंग्य संग्रह) आरिफा एविस समीक्षा – बी एन गोयल एक प्रसिद्ध दोहा है – शब्द सम्हारे बोलिए शब्द के हाथ न पांव एक शब्द करे औषधि एक शब्द करे घाव , इस दोहे में एक सलाह दी गयी है कि जब भी कुछ बोलो नाप तोल कर बोलो. सोच समझ कर बोलो. यह सलाह यद्यपि सब के लिए हैं […] Read more » शिकारी का अधिकार
पुस्तक समीक्षा साहित्य व्यंग्य नव लेखन में ऊँचे दर्जे का अधिकार : शिकारी का अधिकार June 1, 2016 by आरिफा एविस | 1 Comment on व्यंग्य नव लेखन में ऊँचे दर्जे का अधिकार : शिकारी का अधिकार समीक्षक : वरिष्ठ व्यंग्यकार सुरेशकांत पिछले दिनों आयोजित तीन दिवसीय ‘व्यंग्य की महापंचायत’ में कई अनोखी बातें हुईं। पहली तो यही कि बन्दा ‘अट्टहास’ के प्रोग्राम में पहली बार शामिल हुआ । व्यंग्य में गाली-गलौज के प्रयोग और सपाटबयानी पर मेरे विचारों से सभी अवगत हैं, क्योंकि मैं इन पर बहुत कह और लिख चुका […] Read more » शिकारी का अधिकार
पुस्तक समीक्षा साहित्य दुश्वारियों में यह जो मीडिया है June 1, 2016 by अमित राजपूत | Leave a Comment अमित राजपूत “जितनी तेज़ी से मीडिया के विविध आयाम विस्तार ले रहे हैं, उतनी ही तेज़ी से उस पर से विश्वास हटने की बात भी सामने आ रही है। ‘कॉरपोरेटिव मीडिया’ नाम की नई खेप हमारे संग है तो ‘ख़बरों’ को ग़ायब करके ‘बहस दर बहस’ करते जाने का मुद्दा भी ज़ोरदार ढंग से उठाया […] Read more »
पुस्तक समीक्षा साहित्य सिंहस्थ की सनातन परंपरा और अमृत की एक बूंद सी – ‘सिंहस्थ” May 30, 2016 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment समीक्षक – डॉ. विकास दवे सिद्धार्थ शंकर गौतम की पुस्तक सिंहस्थ हाथों में है। ‘प्रभात प्रकाशन” की अपनी गौरवशाली परंपरा का निर्वाह करती-सी यह पुस्तक भी एक ही दृष्टि में अपने भौतिक कलेवर से मन मोह लेती है। आकर्षक आवरण सर्वप्रथम आकर्षित करता है। तत्पश्चात् हमारे समक्ष परत दर परत खुलने लगती है विश्व के […] Read more » अमृत की एक बूंद सी सिंहस्थ की सनातन परंपरा
पुस्तक समीक्षा साहित्य पांचो नौबत बाजती –(समीक्षा) March 30, 2016 / March 30, 2016 by बी एन गोयल | 2 Comments on पांचो नौबत बाजती –(समीक्षा) बी एन गोयल कल्पना कीजिये- कल्पना क्यों – ये दो वास्तविक प्रकरण हैं. मंच पर कुमार गन्धर्व का गायन चल रहा है – ….उड़ जायेगा ……हंस अकेला ……..भक्ति की रस धार बह रही है, गायक के स्वर सीधे ब्रह्म से जुड़े हैं श्रोता वर्ग मंत्र मुग्ध है, आँखें बंद हैं, कुछ मुंडियां हिल रही […] Read more » पांचो नौबत बाजती
पुस्तक समीक्षा प्रवक्ता न्यूज़ समाज साहित्य ऊँटेश्वरी माता का महंत March 26, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on ऊँटेश्वरी माता का महंत मदर टैरेसा पर उठा विवाद अभी थमा भी नही है कि एक ईसाई संगठन से जुड़े कैथोलिक विश्वासी पी.बी.लोमियों की हालही में आई पुस्तक ‘‘ ऊँटेश्वरी माता का महंत” ने ईसाई समाज के अंदर चर्च की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठा दिये है। “ऊँटेश्वरी माता का महंत” र्शीषक से लिखी गई यह पुस्तक एक […] Read more » ईसाई समाज के अंदर चर्च की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल ऊँटेश्वरी माता का महंत” पी.बी.लोमियों मदर टैरेसा पर उठा विवाद अभी थमा भी नही है कि एक ईसाई संगठ कैथोलिक विश्वासी
पुस्तक समीक्षा पुराने दिनों के गायब होते लोगों के किस्से October 23, 2013 by संजय पराते | Leave a Comment संजय पराते हिन्दी-साहित्य पाठकों के लिए राजेश जोशी जाना-पहचाना नाम है। वे एक साथ ही कवि-कहानीकार-आलोचक-अनुवादक-संपादक सब कुछ हैं। हाल ही में उनकी रचना ‘कि़स्सा कोताह’ (राजकमल प्रकाशन) सामने आयी है। राजेश जोशी के ही अनुसार, न यह आत्मकथा है और न उपन्यास। यह एक गप्पी का रोज़नामचा भर है- जो न कहानी है और […] Read more » किस्सा कोताह
पुस्तक समीक्षा अन्तर-पथ – एक समीक्षा July 5, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment बिपिन किशोर सिन्हा ‘अन्तर-पथ’ एक कविता संग्रह है जिसे शब्द-भाव दिए हैं, डा. रचना शर्मा ने और प्रकाशित किया है पिलग्रिम्स पब्लिशिंग, वाराणसी ने। सामान्यतः पिलग्रिम्स पब्लिशिंग नए साहित्यकारों की रचनाएं कम ही छापता है। परन्तु डा. रचना शर्मा का यह काव्य-संग्रह प्रकाशित करके, प्रकाशक ने अपनी पुरानी छवि तोड़ने का सराहनीय प्रयास किया है। […] Read more »
पुस्तक समीक्षा मातृसत्ताक समाज और ‘वोल्गा से गंगा’– सारदा बनर्जी January 2, 2013 by सारदा बनर्जी | Leave a Comment राहुल सांकृत्यायन की कृति ‘वोल्गा से गंगा’ मातृसत्ताक समाज में स्त्री वर्चस्व और स्त्री सम्मान को व्यक्त करने वाली बेजोड़ रचना है। इस रचना में यदि स्त्रियों के ओवरऑल पर्फ़र्मेंस और प्रकृति पर नज़र दौराया जाए तो पता चलता है कि मातृसत्ताक समाज में स्त्री कितनी उन्मुक्त, आत्मनिर्भर और स्वच्छंद थीं। स्त्री किसी की संपत्ति […] Read more »