कहानी समाज ब्रह्मभोज December 7, 2015 by विजय कुमार | 4 Comments on ब्रह्मभोज पिताजी ने यों तो दोनों भाइयों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी थी; पर छोटा भाई कुछ खास नहीं पढ़ सका और पिताजी के साथ ही गांव में खेतीबाड़ी और दुकान देखने लगे। बड़ा पढ़ने में तेज निकला। उसने प्रथम श्रेणी में एम.ए. किया और फिर दिल्ली में एक डिग्री कॉलिज में उसे […] Read more » ब्रह्मभोज
कहानी साहित्य जिंदगी के रंग November 25, 2015 by आर. सिंह | Leave a Comment समापन क़िस्त [इस कहानी के प्रथम अंश में हमने देखा कि किस तरह विनय राजनीति में आया और किस तरह छः महीने के अंदर स्वतन्त्र उम्मीदवार से फिर एक पार्टी और फिर दूसरी पार्टी में शामिल हुआ.अब आगे देखते हैं जिंदगी क्या रंग बदलती है.] विनय की कहानी को आगे बढ़ाने के पहले मैं आपलोगों […] Read more » जिंदगी के रंग
कहानी साहित्य जिंदगी के रंग November 4, 2015 by आर. सिंह | 1 Comment on जिंदगी के रंग कुछ बातें ऐसी होती हैं जो याद रह जाती हैं.कुछ ऐसी बातें भी होती हैं,जिन्हे याद रखना पड़ता है.यह घटनाक्रम उन बातों में से है,जो याद रह जाती हैं. ________________ विनय से मेरा मिलना इतिफाक या संयोग ही था,पर घटनाक्रम कुछ ऐसा रहा कि वह मेरे नजदीक आता गया और आता ही गया.बात बहुत पुरानी […] Read more » Featured जिंदगी के रंग
कहानी कहानी – वत्सला October 31, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment मंगलवार को साप्ताहिक बाजार बंदी के कारण कुछ फुर्सत रहती है। कल भी मंगलवार था। शाम को मैं अपनी पत्नी राधा के साथ चाय पी रहा था कि देहरादून से शिबू का फोन आ गया। – कैसे हो भाई.. ? – भगवान की दया है। – एक शुभ समाचार है। तुम्हारी सोनचिरैया के पर निकल […] Read more » Featured कहानी वत्सला
कहानी बच्चों का पन्ना यह कैसी मित्रता October 12, 2015 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment गणेशी के खेत में बने तीन कमरों के घर में चिंकू चूहे ने अपना निवास बना लिया था |घर के ठीक सामने दो ढाई सौ फुट की दूरी पर एक नीली नदी बहती थी |नदी थी तो पहाड़ी परन्तु मार्च महीने तक उसमें भरपूर पानी रहता था |बरसात में तो पानी खेत की मेढ तक […] Read more » Featured
कहानी कहानी- कर्ज़ा October 10, 2015 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment रवि श्रीवास्तव लहराती फसल कितना सुकून देती है। रमेश अपने बेटे से कहता हुआ खेत को देख रहा था। हर तरफ से घूम कर अपनी फसल को देखा। मन में सोच रहा कि भगवान तेरा शुक्रिया कैसे अदा करूं। तभी पीछे से एक आवाज आती है। अरे रमेश क्या बात है, आज अपने बेटे को […] Read more » कहानी- कर्ज़ा
कहानी कहानी – प्रेम गली अति सांकरी…. October 10, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment विश्व साहित्य में प्रेमकथाओं का सदा से ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इनमें भी वे कथाएं अधिक लोकप्रिय हुई हैं, जिनका अंत सुखद नहीं रहा। ऐसा क्यों है, कहना कठिन है। शायद विरह और दुख के अंगारों पर धीमे-धीमे सुलगता हुआ प्रेम ही अन्य प्रेमीजनों के दिल को शांति देता है। हीर-रांझा, लैला-मजनू, शीरी-फरहाद आदि […] Read more » Featured कहानी - प्रेम गली अति सांकरी....
कहानी विविधा साहित्य हरामजादा September 27, 2015 by डॉ. भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी | Leave a Comment डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी कहानी काफी पुरानी और वास्तविक घटना पर आधारित है। इसकी समानता किसी भी तरह से अन्य लोगों से नहीं हो सकती क्योंकि यह मेरी अपनी कहानी है। इसके पात्र काल्पनिक न होकर मेरे अपने ही करीबी परिवारी जन हैं। अब तो मैंने अपनी इस कहानी का जिसे आगे लिख रहा हूँ […] Read more » Featured हरामजादा
कहानी विविधा शख्सियत दर्द या दवा September 22, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment पांच सितम्बर को भारत में ‘शिक्षक दिवस’ मनाया जाता है। यह हमारे दूसरे राष्ट्रपति डा. राधाकृष्णन का जन्मदिन है, जो एक श्रेष्ठ शिक्षक भी थे। इस दिन राष्ट्रपति महोदय देश भर के श्रेष्ठ शिक्षकों को सम्मानित करते हैं। शिक्षक होने के नाते मुझे भी इसमें रुचि रहती है कि इस बार कौन-कौन सम्मानित हुआ ? […] Read more » Featured
कहानी बच्चों का पन्ना साहित्य बेसहारा किसान September 18, 2015 / September 15, 2016 by राजू सुथार | Leave a Comment कुमार अपने बच्चों से बहुत प्रेम करता था , लेकिन लड़के आधुनिक जीवन शैली में रहना चाहते थे ‘ बाप घर पर खेती बाड़ी के धंधे में हमेशा व्यस्त ही रहता था ‘ कुमार अपने बच्चों से हमेशा अच्छी तरीके से बातें करता था लेकिन बेटे जो काफी नखरा करते हमेशा उनकी बात काट […] Read more » बेसहारा किसान
कहानी बच्चों का पन्ना साहित्य शेर और लोमड़ी की दुश्मनी September 13, 2015 / September 17, 2016 by राजू सुथार | Leave a Comment एक बार एक शेर और लोमड़ी थी जो कि ज्यादा अच्छे मित्र नहीं थे हमेशा दोनों में अनबन चलती रहती थी ,फिर भी दोनों साथ-साथ रहते तथा खेती करते थे ‘ एक बार ऐसा हुआ कि लोमड़ी किसी कारणवस बाहर जंगल में गयी और काफी समय तक जंगल में ही रही ‘ इसी बीच शेर […] Read more » Featured शेर और लोमड़ी की दुश्मनी
कहानी साहित्य द्वंद … जारी है September 11, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment एम आर अयंगर राजस्थान के चाँदा गाँव में स्नेहल एक घरेलू जाना पहचाना नाम था. गाँव के कान्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली स्नेहल पढ़ाई में अव्वल थी. मजाल कि उसके रहते कोई कक्षा में प्रथम आने की सोच भी लेता. इसके साथ वह थी भी बला की खूबसूरत. घर- बाहर सब उसे प्यार करते थे, […] Read more » story by M R Iyenger द्वंद ... जारी है