कहानी साहित्य जसु अपजसु बिधि हाथ September 10, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment यों तो हमारे कार्यालय में हर शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है; पर कभी-कभी शुक्रवार या सोमवार को कोई पर्व या जयंती भी आ जाती है। ऐसे में केन्द्रीय कर्मचारियों की चांदी हो जाती है। आप तो जानते ही हैं कि भारत छुट्टी प्रिय देश है। साल में डेढ़ सौ दिन तो छुट्टी होती […] Read more » Featured
कहानी कहानी- इंतजार September 5, 2015 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment हर पल हर दिन उसका ख्याल मेरे दिमाग में रहता है। एक दिन बात न हो तो ऐसा लगता है कि सालों बीत गए हैं। उसे देखे बिना तो लगता है कि जिंदगी का सारा टेंशन आज ही है। एक परेशान आत्मा की तरह कब से भटक रहा हूं। लेकिन वो है कि बाहर […] Read more » Featured कहानी- इंतजार
कहानी कहानी : दीदी मां August 31, 2015 / August 31, 2015 by विजय कुमार | 1 Comment on कहानी : दीदी मां जीवन में कई बार ऐसी जटिल समस्याएं सामने आकर खड़ी हो जाती हैं कि पूरे परिवार और खानदान की प्रतिष्ठा दांव पर लग जाती है। बुजुर्गों ने ‘जर, जोरू और जमीन’ को झगड़े की जड़ कहा है। जोरू अर्थात पत्नी या महिला के कारण तो राज्यों और साम्राज्यों में बड़े भीषण युद्ध हुए हैं, जबकि […] Read more » Featured
कहानी आंटी नहीं फांटी… June 10, 2015 / June 10, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -क़ैस जौनपुरी- “चार समोसे पैक कर देना.” जी, और कुछ? और…ये क्या है? ये साबुदाना वड़ा है. ये भी चार दे देना. नाश्ते की दुकान पर खड़ा लड़का ग्राहक के कहे मुताबिक चीजें पैक कर रहा है. ग्राहक नज़र घुमा के चीजों को देख रहा है. दुकान में बहुत कुछ है. जलेबी…लाल इमिरती…और वो क्या […] Read more » Featured आंटी नहीं फांटी कहानी
कहानी चेहरा June 2, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -मोनी सिंह- सुबह उठते ही शीशे में मैं अपना चेहरा देखा करती हूं। हर दिन की शुरूआत मेरी वहीं से होती है। जिस दिन न देखूं कुछ अधूरा सा लगता है। ऐसा लगता है जैसे मैने खाना न खाया हो। किसी से बात करने का मन नही होता। अजीब से ख्याल आते मेरे मन में। […] Read more » Featured कहानी चेहरा
कहानी लव जिहाद और आईने का सच (कहानी) May 19, 2015 by सुधीर मौर्य | 3 Comments on लव जिहाद और आईने का सच (कहानी) -सुधीर मौर्य- वो कस्बे में डर डर के रहता था। हालाँकि वो डरपोक नहीं था पर फिर भी डर – डर के रहना उसकी आदत हो गई थी। उसके डर की वजह भी थी। कोई आम नहीं बल्कि खास। उस कसबे की तीन – चौथाई आबादी हरे रंग की थी। वो गेरुए रंग का था […] Read more » 'लव जिहाद' Featured लव जिहाद और आईने का सच (कहानी)
कहानी खूबसूरत अंजलि उर्फ़ बदसूरत लड़की की कहानी May 12, 2015 / May 12, 2015 by सुधीर मौर्य | Leave a Comment -सुधीर मौर्य- बहुत खूबसूरत थी वो लड़कपन में। लड़कपन में तो सभी खूबसूरत होते हैं। क्या लड़के, क्या लड़कियां। पर वो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत थी। वो लड़की जो थी। लड़कियां हर हाल में लड़कों से ज्यादा खूबसूरत होती है। ये मैंने सुना था। लोगोंं से, कई लोगों से। कुछ माना, कुछ नहीं माना। फिर […] Read more » Featured अंजलि कहानी खूबसूरत अंजलि उर्फ़ बदसूरत लड़की की कहानी स्टोरी
कहानी विविधा रुमाल खो गया April 29, 2015 by रवि कुमार छवि | Leave a Comment -रवि कुमार छवि- शनिवार का दिन था। शाम के 5 बज चुके थे। दफ्तर के ज्यादातर कमरे बंद होने शुरु हो गए थे। रवि अपना बचा हुआ निपटाने में लगा हुआ था। इतने में पीछे से आवाज़ आती है अरे दोस्त चलना नहीं है क्या, कुछ देर अपनी उंगुलियों को थामते हुए ने कहा बस […] Read more » Featured कहानी रुमाल खो गया
कहानी मकान मालिक March 6, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment क़ैस जौनपुरी खिद्दीर अंकल के मां-बाप बचपन में ही खतम हो गए थे. बहराइच में उनके चाचा ने उन्हें पाला-पोसा, बड़ा किया. ये अगूंठा छाप थे. और पन्द्रह साल की उमर से ही रोजी-रोटी की कोशिश में लग गए थे. अपना पेट खुद पालते थे. मजदूरी की. ठेला चलाया. सब्जी बेची. पैसे के लिए […] Read more » मकान मालिक
कहानी मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस February 25, 2015 by विजय कुमार सप्पाती | 6 Comments on मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस ||| सुबह 8:30 ||| मैंने टैक्सी ड्राईवर से पुछा- “और कितनी देर लगेंगी।” उसने कहा – “साहब बस 30 मिनट में पहुंचा देता हूँ।” मैंने घडी देखी 8:40 हो रहे थे। मैंने कहा – “यार 9 बजे की गाडी है।” थोडा जल्दी करो यार। उसने स्पीड बढ़ा दी. मैं नासिक की सडको को देखने लगा। मैं अपनी कंपनी के काम से आया हुआ था. […] Read more » मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस
कहानी होली बाद नमाज़ February 19, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अहद एक मुसलमान है। मुसलमान इसिलए क्योंकि वो एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ है। हां ये बात अलग है कि “वो कभी इस बात पर जोर नहीं देता है कि वो मुसलमान है। वो मुसलमान है तो है। क्या फर्क पड़ता है? और क्या जरुरत है ढि़ंढ़ोरा पीटने की?“ वो कभी इन बातों पर […] Read more » होली बाद नमाज़
कहानी फ़रिश्ता February 2, 2015 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment बहुत साल पहले की ये बात है. मुझे कुछ काम से मुंबई से सूरत जाना था. मैं मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन का इन्तजार कर रहा था. सुबह के करीब ६ बजे थे. मैं स्टेशन में मौजूद बुक्स शॉप के खुलने का इन्तजार कर रहा था ताकि सफ़र के लिए कुछ किताबे और पेपर खरीद […] Read more » फ़रिश्ता