कहानी सत्संग February 15, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment सोहन ने कक्षा दस तक की पढ़ाई तो अपने गांव में ही की; पर फिर पढ़ने के लिए वह मेरठ आ गया। वहां उसने एक कमरा किराये पर ले लिया। श्याम भी उसकी कक्षा में ही पढ़ता था। अतः दोनों में मित्रता हो गयी। कुछ ही दिन में यह मित्रता इतनी बढ़ी कि दोनों ने […] Read more » सत्संग
कहानी साहित्य उलझन February 4, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment शोभा का मन न जाने कैसा हो रहा था। जब से उसे अपनी जेठानी पूर्णिमा की मृत्यु का समाचार मिला था, उसका मन बार-बार चिन्तित और व्याकुल हो उठता था। क्या होगा अब पांच साल के मोहन और नवजात राधिका का ? पूर्णिमा और शोभा क्रमशः पांच साल के अन्तर से इस घर […] Read more » उलझन
कहानी साहित्य बरकत February 2, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on बरकत कल शाम देहरादून से जितेन्द्र का फोन आया, ‘‘20 अक्तूबर को तुम्हारे भतीजे का विवाह है। कार्ड तो जब छपेगा, तब भेज दूंगा; पर तारीख लिख लो। भाभी जी और बच्चों को भी आना है।’’ मैंने कहा, ‘‘हां भाई, ऐसे खुशी के मौके बार-बार थोड़े ही आते हैं। हम सब जरूर आएंगे। कोई चीज […] Read more » Featured बरकत
कहानी साहित्य सौन्दर्या February 2, 2016 by अनुप्रिया अंशुमान | Leave a Comment एक बहुत ही मीठी ,मधुर ध्वनि या स्वर सुनायी दे रही है ।आज सुबह मैं होटल की बालकनी मे खड़े होकर मनाली की रहस्यात्मक खूबसूरती के राज का आनंद ले रहा था। पर ये ध्वनि कहाँ से आ रही है –एकदम मन को मोह लेनी वाली अब तो आवाज भी आने लगी थी वो आवाज […] Read more » सौन्दर्या
कहानी साहित्य ओक्साना कुत्ते द्वारा पालित लड़की January 27, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment अविकसित मानव बच्चों की सच्ची कहानियां ( 10 ) डा. राधेश्याम द्विवेदी ओक्साना की कहानी ना तो डरी सहमी लड़की का है और ना तो किसी दोषी लड़की की है, अपितु एक उपेक्षित अथवा निष्कासित लड़की की कहानी है। वह यूक्रेन के नोवाया बलागोवेसचेनका के अपने पारिवारिक घर में रहती थी। उसके घर के पीछे […] Read more » ओक्साना कुत्ते द्वारा पालित लड़की
कहानी साहित्य जनम January 8, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on जनम ||| | गोपाला ने अपना एक झोला और बैग लिया और ट्रेन में बैठ गया, ये ट्रेन दुर्ग से जगदलपुर जा रही थी। गर्मी के दिन थे, उसे खिड़की के पास वाली सीट मिली । ट्रेन चलने लगी तो भागते हुए तीन युवक आये और ठीक उसके सामने वाली सीट पर बैठ गए । […] Read more » Featured story based on maowadis story on naxalwad जनम
कहानी साहित्य लव इन मलेशिया January 2, 2016 by आर. सिंह | Leave a Comment मलेशिया के दो राज्य सबसेअधिक रूढ़िवादी माने जाते हैं.एक तो टेरेंगानु और दूसरा पेनांग मलेशिया में यही दो राज्य हैं, जहाँ साप्ताहिक छुट्टियां शुक्रवार और शनिवार को होती हैं,नहीं तो पूरे मलेशिया में सप्ताहांत शनिवार और रविवार के रूप में प्रचलित है.टेरेंगानु राज्य की राजधानी टेरेंगानु है,और पेनांग की क्वांटन, पर यह प्रेम कहानी तो […] Read more » Featured love in Malaysia लव इन मलेशिया
कहानी साहित्य खुशी December 26, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment मेरे घर के पास ही रविवार को पटरी बाजार लगता है। मैं अपनी जरूरत का अधिकांश सामान वहीं से खरीदने की कोशिश करता हूं। वहां से न मिले, तो फिर किसी छोटी दुकान को प्राथमिकता देता हूं। हो सकता है आप इसे सस्ते-महंगे या और किसी कसौटी पर परखें; पर इसके पीछे एक घटना है। […] Read more » Featured खुशी
कहानी साहित्य प्रदूषण मुक्ति December 24, 2015 / December 24, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment मैं सुबह और शाम को तो घूमता ही हूं; पर सर्दियों में कई बार समय मिलने पर दिन में भी पार्क में चला जाता हूं। वहां खुली धूप से कमर की अच्छी सिकाई के साथ ही कई लोगों से भेंट भी हो जाती है। छुट्टी हो, तो बच्चे भी वहां खेलते मिल जाते हैं। उन्हें […] Read more » प्रदूषण मुक्ति
कहानी साहित्य प्रतीक December 21, 2015 / December 21, 2015 by विजय कुमार | 2 Comments on प्रतीक रामलाल और श्यामलाल सगे भाई थे; पर बीच में तीन बहिनों के कारण दोनों में दस साल का अंतर था। अब तो दोनों दादा और नाना बनकर सत्तर पार कर चुके हैं; फिर भी श्यामलाल जी अपने बड़े भाई का पितातुल्य आदर करते हैं। घरेलू जरूरतों के चलते रामलाल जी जल्दी ही पिताजी के साथ […] Read more » Featured प्रतीक
कहानी जरूरत December 15, 2015 by विजय कुमार | 1 Comment on जरूरत शराब को प्रायः सभी जगह बुरा माना जाता है; पर क्या यह किसी की जरूरत भी हो सकती है ? शायद हां, शायद नहीं। अब तक तो मैं इसे खराब ही नहीं, बहुत खराब समझता था; पर कल जग्गू ने मुझे इसके दूसरे पक्ष पर सोचने को मजबूर कर दिया। जग्गू यानि जगमोहन हमारे मोहल्ले […] Read more » जरूरत
कहानी बच्चों का पन्ना साइकिल December 13, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment राजू कई दिन से साइकिल सीखने की जिद कर रहा था। उसके साथ के कई लड़के साइकिल चलाते थे; पर उसके घर वालों को लगता था कि वह अभी छोटा है, इसलिए चोट खा जाएगा। अतः वे हिचकिचा रहे थे। यों तो घर में एक साइकिल थी, जिसे पिताजी चलाते थे; पर वह बड़ी थी। […] Read more » साइकिल