कविता आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए May 14, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment कुलदीप विद्यार्थी आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए। बन्द सभी आशा वाले दरबार हुए। जिसको इज्ज़त बख्सी सिर का ताज कहा उनसे ही हम जिल्लत के हकदार हुए। मंदिर, मस्ज़िद, गुरुद्वारों में उलझे हम वो शातिर सत्ता के पहरेदार हुए। जिस-जिसने बस्ती में आग लगाई थी देखा है वो ही अगली सरकार हुए। आसान […] Read more » इज्ज़त कुत्ता बख्सी रिश्ते व्यापार सरकार
कविता कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में May 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में इसलिए सब पार्टी कर रही है,नाटक इस चुनाव में बीजेपी हो या कांग्रेस, कर रही नाटक चुनाव में इसलिए हर वोटर कर रहा है,नाटक इस चुनाव में रंग मंच बना हुआ है, कर्नाटक,इस चुनाव मे सारे नेता नाटक के पात्र बने हुए है,चनाव में सी.एम.पद के लिए […] Read more » कन्नड़ भाषा कर्नाटक गुल खिलायेगे चुनाव बी.जे.पी. सट्टा
कविता कर्नाटक का चुनाव जिता दो May 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment वोटर भैया,अबकी बार कर्नाटक का चुनाव जिता दो अबकी बार,अपनी मैया बुला ली,उसकी लाज रखा दो मै तो धर्म निर्पेक्ष हूँ,मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा भी जाता मै तो कभी पंडित,कभी मौलवी कभी पादरी बन जाता कभी जनेऊ धारण करता ,कभी टोपी पहन कर आता कभी तिलक लगा कर,मंदिरों में पूजा करने भी जाता देखो ये कर्नाटक […] Read more » कर्नाटक गुरुद्वारा मंदिर मस्जिद मैया बुला वोटर भैया
कविता क्यों आते हैं तूफ़ान जिन्दगी में May 11, 2018 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on क्यों आते हैं तूफ़ान जिन्दगी में आये हो जब से तुम मेरी जिन्दगी में एक तूफ़ान आ गया मेरी जिन्दगी में लगता है ये मौसम बेईमान हो गया शायद ये दिल मेरा परेशान हो गया लगता है ये तूफ़ान आगे बढ़ने लगा मेरी रातो की नींद को ये चुराने लगा न दिन में है चैन,न रात को है चैन कयू करता […] Read more » गन्दगी ज़िन्दगी तूफ़ान प्रक्रति मेहमान सदियों
कविता सोनम की शादी पर बोनी के मन के उदगार May 10, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सोनम के पवित्र गटबंधन पर काश!आज तुम जीवित होती इस घर की खुशियों में अब अपार चार गुणी वृधि होती तुम सोनम के हाथ पकड कर उसके हाथो में मेहँदी रचाती ऐसी मेहँदी तुम लगाती जो कभी छूट नहीं पाती अनिल,तुम्हे भाभी कह पुकारता वह तुम्हारे दोनों चरणों को छूता तुम उसको खूब आशीर्वाद देती […] Read more » चूडिया वाला डांस दिल्ली आहूजा बोनी कपूर सन्नाटा सोनम कपूर
कविता सागर व नदी का वार्तालाप May 10, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भले ही तुम गहरे हो ! मेरा भी रिश्ता तुमसे गहरा है सदियों से तुम्हारे पास आ रही हूँ अपना रिश्ता तुमसे निभा रही हूँ सोचा!कितनी दूर से यहाँ आती हूँ तुम्हारी,मै प्यास बुझाती हूँ मै बस तुमसे मिलने आती हूँ मै मेरा उद्गम झरने से है तुम्हारा उद्गम मेरे से है मै ही तुमको […] Read more » गंगा गोमती चिनाव झेलम नदी भागीरथी मंदाकनी यमुना रावी सागर
कविता चाँद की भी चमक May 10, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment चाँद की भी चमक मैं चुरा लाऊंगा तुझसे ज्यादा चमकता दिखा जो मुझे, इत्र की भी महक मैं दबा आऊंगा तुझसे ज्यादा महकता मिला जो मुझे, मांग साँझ के सूरज से लाली तेरे लाल अधरों पे लाली लगा दूंगा मैं, चुन के बागों से फूलों की कलियाँ तेरे केश बागों के भांति सजा दूंगा मैं, […] Read more » चाँद दरमियाँ फूलों की कलियाँ बिंदियाँ सजा सजता
कविता कलम बीनती दो लड़कियाँ May 10, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment कुलदीप विद्यार्थी आज सुबह होस्टल की खिड़की से देखा कलम बीनते हुई दो लड़कियाँ मैले वस्त्र, दोनों के सिर पर दो चोटियां नाक छिदा हुआ मटमैला सवाल चेहरा जान पड़ता था कि मुँह तक नहीं धुला हैं तुलसी को जल चढ़ाते हुए निगाह उन पर टिकी अमूमन इस ओर नहीं आता कोई अच्चम्बे से उनको […] Read more » अलमारी कलम खिड़की विश्वविद्यालय
कविता ‘मुल्क हिंदुस्तान हूँ….’ May 9, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment कुलदीप विद्यार्थी झाड़ियों पर वस्त्र, लोहित देह से हेरान हूँ, कल मैं कब्रिस्तान था औ’ आज मैं शमशान हूँ। कौनसी वहसत भरी हैं आपके मस्तिष्क में, पाँव पर कल ही चली मैं, एक नन्हीं जान हूँ। नोच लूँगा मैं हवस में बाग की कलियाँ सभी, मत कहो इंसान मुझको, मैं तो बस शैतान हूँ। हैं […] Read more » 'मुल्क ईमान कागज कुंठित व लुंठित झाड़ियों हिंदुस्तान
कविता आएँगे आएँगे आएँगे, अच्छे दिन आ ही जाएँगे ! May 9, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment आएँगे आएँगे आएँगे, अच्छे दिन आ ही जाएँगे; जीव जड़ ना ही रहेंगे, बोध वे पा भी सकेंगे ! माधुरी दे पाएँगे, मधुर स्वर गा पाएँगे; मोह में ना वे रहेंगे, मुक्ति रस पीते चलेंगे ! सत्व गुण होगा प्रभावी, सूक्ष्म मन होंगे प्रभारी; आएगी उनकी वारी, रहे अब तक जो पिछाड़ी! चरित्र निर्मल होंगे, […] Read more » Featured आएँगे उत्कृष्टि चखेगी चरित्र निर्मल मधु’ मानुष माधुरी
कविता तूफ़ान मचा है चारो तरफ May 9, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तूफ़ान आयेगा,तूफ़ान आयेगा तूफ़ान मचा है चारो तरफ सभी पूछ रहे एक दूजे से क्या आया वह तुम्हारी तरफ ? बीवी डिनर के लिए तैयार हो चुकी मैंने कहा तूफ़ान आ चूका इस तरफ आज नहीं चलेगे डिनर पर कल चलेंगे घर में तूफ़ान मच गया चारो तरफ स्कूलों की छुट्टी हो चुकी है दो […] Read more » Featured आंधी खिड़की बंद डिनर तूफ़ान
कविता घनघोर घटाओ व बिजली का वार्तालाप May 7, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment घनघोर घटाओ से,बिजली आज यू बोली बहन कहाँ जा रही हो,मुझे छोड़ अकेली ? मै तो साथ रहती हूँ,हमेशा तुम्हारे साथ क्या मै नहीं अब तुम्हारी प्यारी सहेली ? बिजली की सुन बाते,घनघोर–घटाएं बोली हम जा रहे विरहणी के पास जो है अकेली प्रियतम उसके पास नहीं,जो अब है अकेली अगर ले जाते है तुझे,तेरी गर्जना […] Read more » Featured कडकती घनघोर-घटाएं दुखियो पक्की सहेली फर्ज बिजली