कविता हिन्दी के बारह महीने April 2, 2022 / April 2, 2022 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on हिन्दी के बारह महीने अंग्रेजी महीनो के नाम सभी है जानते।हिंदी के महीनो के नाम बच्चे न जानते।। हिंदी के महीनो के नाम हम विस्तार से बताते।कर लो इनके नाम याद केवल तुम आते जाते।। चैत्र मास है हिंदू वर्ष का प्रथम महीना।वैशाख है हिंदू वर्ष का दितीय महीना।। जेष्ठ आषाढ़ है महीना तीसरा चौथा।इसमें गर्मी का प्रकोप बड़ा […] Read more » हिन्दी के बारह महीने
कविता कहो नालंदा ज्ञानपीठ भग्नावशेष तुम कैसे थे? March 22, 2022 / March 22, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककहो नालंदा ज्ञानपीठ भग्नावशेष तुम कैसे थे?क्या वाल्मीकि, कण्व, संदीपनी के गुरुकुल जैसेवन प्रांत में बसे या गुरु परशुराम द्रोण सरीखेपूर्वाग्रह भावयुक्त गुरुदक्षिणा जीवी आश्रम थे? या तक्षशिला विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय जैसे,जहां सवर्ण को शुल्क,निम्न निःशुल्क पढ़ते थे,या फिर बुद्ध के निःशुल्क बौद्धमठ महाविहारनालंदा, विक्रमशिला, उदन्तपुरी, वज्रासन अनोखे! हां सचमुच में अनोखे विश्वविद्यालय विश्व […] Read more » कहो नालंदा ज्ञानपीठ भग्नावशेष तुम कैसे थे?
कविता गरीब March 22, 2022 / March 22, 2022 by अजय एहसास | Leave a Comment कोई ना जाना चाहता उसके करीबरुपए, पैसे नहीं , जो है गरीब । कह रहे हैं वोगरीबी दूर होगीथक कर हालत भीउसी की चूर होगीझोपड़ी में भीअब कोहिनूर होगीरोटियों से दूर होता वो गरीबकोई ना जाना चाहता उसके करीब। ना बड़े सपने है उसकेना कोई अपना लगेखुद बनाता महल कोपर रहना तो सपना लगेकहते रहे […] Read more »
कविता मोदी चालीसा March 21, 2022 / March 21, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जय मोदी ज्ञान गुण सागर,सारे विश्व में नाम उजागर।शांति दूत अतुलित बल धामा,दामोदर दास पुत्र नरेन्द्र नामा।। तुम उपकार राष्ट्र का कीना,योगी अमित साथ है लीना।राष्ट्रहित के तुम हो रखवारे,भ्रष्टाचार निकंदन राष्ट्र दुलारे।। दुश्मन कभी निकट न आवे,मोदी का जब नाम सुनावे।वे मोदी से अब सब डरते,पास नही अब वे फटकते।। सबका विकास तुम हो […] Read more » मोदी चालीसा
कविता पति पत्नि की नोक झोंक पर हास्य व्यंग रचना March 21, 2022 / March 21, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मै सीधी सादी गैया हूं,तुम मरखने सांड प्रिय।मै किसी बगिया की कोयल हूं,तुम किसी दरबार के भांड प्रिय।। मै सुबह सुबह उठती हूं,तुम सोने मे कुंभकर्ण प्रिय।जब हलक में जाती है चाय,तब तुम उठते हो प्राण प्रिय।। मै सारे दिन व्यस्त रहती हूं,तुम गोबर के हो चौथ प्रिय।एक जगह बैठे रहते हो तुम,टस से मस […] Read more »
कविता आर्यभट्ट हिन्दू अरबी अंक पद्धति हिंदसा के जनक थे March 9, 2022 / March 9, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्यभट्ट खगोलविद; मगध कुसुमपुर पटना के,तारेगना गांव खगोल में,तारे की गणना में लगे,चार सौ छिहत्तर से पांच सौ पचास ई. मध्य मेंविश्व के प्रथम खगोलवेत्ता नक्षत्र शास्त्री ब्राह्मण,वे हिन्दू-अरबी अंक पद्धति हिंदसा के जनक थे! आर्यभट्ट ने ‘आर्यभट्टीयम’ ग्रन्थ की रचना की,जिसमें दशगीतिका व आर्याष्टाशत विवेचना थी,प्रथम गीति मंगलाचार द्वितीय अक्षरांक पद्धति‘वर्गाक्षराणि वर्गाऽवर्गेऽवर्गाक्षराणि […] Read more » Aryabhata was the father of Hindu Arabic numeral system Hindsa आर्यभट्ट हिन्दू अरबी अंक पद्धति हिंदसा के जनक थे
कविता दुनिया की पहचान है औरत March 8, 2022 / March 8, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment दुनिया की पहचान है औरत,दुनिया पर एहसान है औरत।मत समझो इसको कमजोर,पुरुष से बलवान है औरत।। हर घर की शान है औरत,हर घर की जान है औरत।इसको तुम कम न समझना,हर रिश्ते की डोर है औरत।। मर्यादा की देवी है औरत,सम्मान की देवी है औरत।इसका सदा सम्मान करना,पूजा योग्य है सब औरत।। सबसे आगे आज […] Read more » Woman is the identity of the world
कविता स्त्री जीवन March 7, 2022 / March 7, 2022 by अजय एहसास | Leave a Comment दया प्रेम ममता की मूरततेरी अजब कहानी हैत्याग करें और कष्ट में रहेफिर भी मधुरी बानी है । वात्सल्य से ओतप्रोतहै करुण ह्रृदय और निश्चल मनहंसी सदा रहती होठों पर,पर आंखों में पानी है। मां ,पत्नी, बेटी बनकरअपना कर्तव्य निभाया हैभाई के आंसू पोछे परअपना नीर बहाया है । कभी प्रेयसी बन कदमों कोकिसी के […] Read more » स्त्री जीवन
कविता बुद्ध का कहना स्व में स्थित होना ही स्वस्थ होना है March 7, 2022 / March 7, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकस्व में स्थित होना ही स्वस्थ होना हैस्व में स्थित हो जाना स्वास्थ्य पाना हैस्वस्थ नहीं होना है अस्वस्थ रुग्णउद्विग्न मतिछिन्न उदासीन दुःखी होना! बुद्ध ने चार आर्य सत्य कहापहला आर्य सत्य हैजीवन में दुःख हैदुःख है जन्म जरा व्याधि मृत्युरोग शोक गम गरीबी बर्बादी! दूसरा आर्य सत्य हैदुःख का कारणअगर जीवन में […] Read more » Buddha says to be in self is to be healthy
कविता मै ज्ञान का सौदागर हूं March 7, 2022 / March 7, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मै ज्ञान का सौदागर हूंकरता हूं ज्ञान का व्यापार।इसके रोजाना करने से,मेरा हो जाता है बेड़ा पार।। मै छोटा सा कलमकार हूंकरता हूं कलम की पूजा।कागज स्याही है मेरी पूंजी,और काम करता नहीं दूजा।। मै पुस्तको का बड़ा प्रेमी हूं,पुस्तके ही मेरी परम मित्र हैं।इनसे ही मै मित्रता रखता हूं,ये ही मेरी मस्तिष्क के चित्र […] Read more » मै ज्ञान का सौदागर हूं
कविता महिला-जगत लैंगिक समानता बनाम सामाजिक संतुलन March 7, 2022 / March 7, 2022 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह महिला’ शब्द नारी को गरिमामयी बनाता है। महिला शब्द नारी के आदर भाव को प्रकट करता है। ‘स्त्री’ शब्द नारी के सामान्य पक्ष को प्रदर्शित करता है। नर का स्त्रीलिंग ही नारी कहलाता है। नारी शब्द का प्रयोग मुख्यत: वयस्क स्त्रियों के लिए किया जाता है। नारी शब्द का प्रयोग संपूर्ण […] Read more » gender equality International Women Day Social Equilibrium लैंगिक समानता सामाजिक संतुलन
कविता बच्चों का पन्ना ओले March 7, 2022 / March 7, 2022 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment भागे छक्कू लाल छकोले,सिर पर गिरे पड़ा पड़ ओले। छक्कू दिल्ली भागे आए।पीछे ओले भी पछियाये। छक्कू जी अब हैं हैरान।बचे ओलों से कैसे जान। छक्कू ड्रायर एक ले आये।अब तो सब ओले घबराए। ओले जान छोड़कर भागे।पल में पानी हुए अभागे। Read more » ओले