कविता कभीतुम भारतीय आर्य वैदिक सनातनी थे August 23, 2021 / August 23, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककभीतुमभारतीय आर्य;वैदिकसनातनी थे,आजतुम जानेक्या से क्या हो गए! कभी तुमगांधार केहिन्दूप्रजा,राजा-रानी थे,आज तुमआतंकवादीअफगानी हो गए! कभी तुमतक्षशिला में पढ़े लिखेमहाज्ञानी थे,आज तुमकूड़मगजीतालिबानी हो गए! कभी तुमराम-कृष्णके वंशजस्वाभिमानीथे,आज विदेशी धार्मिक गुलामी में खो गए! कभीतुमभगवानबुद्ध,जिनके अनुगामी थे,आज क्योंतुमकरुणा हीन प्राणी हो गए? कभीबुद्ध मूर्तिउपासक बौद्धमहायानी थे,आज पूर्वजों के मूर्तिभंजकअज्ञानीहो गए! तुम ईसा पूर्व के […] Read more » Sometimes you were Indian
कविता तालिबान August 22, 2021 / August 22, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल बारूद की गंधे अभीफिज़ाओं में घूली हैंऔर भीड़ शोर में गुम हैसंवाद पर संगिनों का पहरा हैविरान शहर की खंडहर इमारतेंकुछ कहती हैं…दिवालों पर पड़ेखून के धब्बेचिथड़ों में विखरी इंसानी लाशेंबताती हैं कि यह तालिबान है ?खिलौनों की तरहकई टुकड़ों में फैले मासूमों के जिस्ममाँ के सीने से लिपटा दुधमुंहाटूटे हुए खिलौने औरबारूद […] Read more » तालिबान
कविता दुर्योधन-दुशासन तक की नहीं कलाई सूनी थी August 22, 2021 / August 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआज देश मेंएक बहन के नहीं होने पर,लाखों भाईयों की कलाई सूनी रह जातीआजगर्व नहींहमको अपनी परम्परा परजिसमें बहन की बहुतहोतीरहीख्याति! भगवानरामको एक बहन शांता थीआठ भाईयों के बाद भगवान कृष्ण कीएक प्यारी छोटीबहन सुभद्रा आई थीद्रोपदी को भीकृष्णने बहन बनाई थी! द्रोपदी ने कृष्ण की जख्मी कलाई मेंअपनीदुपट्टा चीर कर एक परम्परारक्षाबंधन […] Read more » दुर्योधन-दुशासन तक की नहीं कलाई सूनी थी
कविता मेरी बहना August 22, 2021 / August 22, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment कभी वो दोस्त जैसी है, वो दादी मां भी बनती हैबचाने की मुझे खातिर, वो डांटे मां की सुनती हैअभी सर्दी नहीं आई, वो रखती ख्याल है मेरावो मेरी बहना है मेरे लिए स्वेटर जो बुनती है। कभी लड़ती झगड़ती प्यार भी करती वो कितनी हैजो रखती हाथ सिर पे मां के आशीर्वाद जितनी हैवो […] Read more » मेरी बहना
कविता बहनों की शुभकामना ——————– August 22, 2021 / August 22, 2021 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment रक्षा बंधन प्रेम का,हृदय का त्योहार !●●●●●इसमें बसती द्रौपदी,है कान्हा का प्यार !!●●●●●कहती हमसे राखियाँ,तुच्छ है सभी स्वार्थ !बहनों की शुभकामना,तुमको करे सिद्धार्थ !!●●●●●भाई-बहना नेह के,रिश्तों के आधार !इस धागे के सामने,हीरे हैं बेकार !!●●●●●बहना मूरत प्यार की,मांगे ये वरदान !भाई को यश-बल मिले,लोग करे गुणगान !!●●●●●चिठ्ठी लाई गाँव से,जब राखी उपहार !आँसूं छलके आँख […] Read more » बहनों की शुभकामना राखी का त्यौहार
कविता मां तुम कितना कुछ सहती हो August 19, 2021 / August 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमां तुम कितना कुछसहती हो,फिरभी तुमकुछनाकहती हो,खाना हम सबको खिलाने तक,तुम मांदिनभर भूखी रहती हो! इस जहां में कहांकोईरचना,जो तेरे जैसेभूख-प्यास, नींदऔर ढेर सारी पीड़ा सहती हो,फिर भी कुछ नहीं कहती हो! मां तुम कितनीभोलीसी हो,दुनिया मेंअमृतरस घोली हो,अपनेबच्चों की आपदाओंकोअपने हीसरपर ले लेती हो! मां नहीं तो जग कैसाहोता?जीव जंतुओं सेयेसूना होता,हर […] Read more » मां तुम कितना कुछ सहती हो
कविता मेरे दिल का दर्द August 19, 2021 / August 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तेरी आंखों में मुझे अपना हाल दिखता है।लगता है मुझे भी तू भी बेहाल दिखता है।। बहाना ढूंढती रहती हूं,मैं बात करूं तुझसे।वो बात क्या है जो बात नही करते मुझसे।। हर कीमत पर तुझे मै अपना बनाना चाहती हूं।जो कीमत मांगोगे मुझसे उसे चुकाना चाहती हूं।। अपनी जिंदगी की तुझे मै,कहानी बना लूंगी।जवानी तो […] Read more » मेरे दिल का दर्द
कविता जीवन की कुछ सच्चाईयां August 17, 2021 / August 17, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रुक जाता है,नदी का प्रवाह समुंद्र में आकर।चैन मिलता है,मुसाफिर को अपने घर आकर।। पेट नही भरता लोगो का दौलत कमाकर।पेट तो भर जाता है,चार निवाले ही खाकर।। मौत ले जायेगी सभी को,एक दिन आकर।लौटा नहीं है बंदा,मौत के घर वह जाकर।। दर्शन करते हैं प्रभु के लोग मंदिर में जाकर।सच्चे भक्त को प्रभु देते […] Read more » जीवन की कुछ सच्चाईयां\
कविता एक और नई सुबह August 17, 2021 / August 17, 2021 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment एक और नई सुबह सुरभित गर्वित स्वतंत्र स्वछंद। उन्मुक्त गगन मन आतुर अधीर आसमान छूने को भरने नई उड़ान। जाना किधर किञ्चित विचलित, दिखेगी जो राह सरपट दौड़ेंगे कदम बिना सोचे विचारे। लक्ष्य अडिग पुष्पित पल्लवित पथ नहीं पाथेय नहीं अनजान सुनसान राह दूर करके सभी अवरोध मिलेगी ‘नवीन’ मंजुल मंजिल। -सुशील कुमार ‘ नवीन’ Read more » एक और नई सुबह
कविता परशुराम की सेना August 16, 2021 / August 16, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतेरी महिमा अपरंपारकौन पाएतुमसे पारचाटुकार से करते प्यारस्वाभिमानी को देते मारबिना उठाए ही हथियारसेना रखते तुम तैयार! कभी वाहिनी थी तेरीवीर क्षत्रियों की शानउनके बल पर उनकेही हरते थे तुमप्राणपकड़ी गई जब मंशातेरीउलट गई उनकी कृपाण! किंतु संयुक्त पुरोहित थेतुमइनके और उनकेदोस्त के और दुश्मन केसबके संयुक्त सलाहकार! ले कमंडलु इधर मुड़ेले कमंडलु […] Read more » परशुराम की सेना
कविता द्विज-अद्विज August 16, 2021 / August 16, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम वाणी के वरद पुत्र,श्रुति सूक्त के सूत्रधार!विधिविधानकेनियंता,श्री के स्वयंभू अवतारी! सृष्टि के पतवार को थामे,तुमनेंही मानव को बांटा!घृणितमानसिक सोचसे,द्विज-अद्विज के पाटों में! द्विज वही,जो तुम थे,तेरे थे,अद्विज वही,जिसे तुम घेरेथेसदियों से,दासता औ गुलामी केदुखदायीशासन केघेरे में? तुम शासक और वे शासित,तुम शोषक और वे शोषित,शस्त्र-शास्त्रथे,तुम्हारे रक्षक,शस्त्र-शास्त्र थे,उनके भक्षक! विधि-विधानऔज्ञान-विज्ञान,सबपर रहा अधिकार तुम्हारा!उनके […] Read more » dvija-advija द्विज-अद्विज
कविता पंद्रहअगस्त सिर्फ नहीं तिथि August 15, 2021 / August 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपन्द्रह अगस्त सिर्फ नहीं तिथि!बल्कि यह एक इतिहास हैउन पूर्वजों के एहसास की,जिनकी उनसबकोतलाश थी,बंद हुई चक्षु से देखने की,पन्द्रहअगस्तसिर्फ नहीं तिथि! कैसी थी उनकी नियति,जान गंवा कर पाने की,यह अनोखी थी नवरीति,ये‘न भूतो न भविष्यति’पन्द्रहअगस्त सिर्फनहींतिथि! पन्द्रह अगस्त स्वतंत्रता दिवस,उनकी लाश पर थी पड़ी मिलीयह अमूल्य सी महा निधि!उनके शोणित की उपलब्धि,पन्द्रहअगस्त […] Read more » 15 august not just date