कविता हे भाई बंधुवर कोई मत दहेज लो July 13, 2021 / July 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक बात मन में अवश्य सहेज लो,हे भाई बंधुवर! कोई मत दहेज लो!कुछ भी नहीं अंतर बेटा व बेटी में,बेटा के खातिर एक बेटी खोज लो! बेटी को मत समझो कोई बोझ है,बेटा गर गुलाब है तो बेटी रोज है!दहेज एक बुराई अब जमींदोज हो,बेटा अगर राजा, बेटी रानी समझो! वैदिक काल में […] Read more » हे भाई बंधुवर कोई मत दहेज लो
कविता पराए जाति धर्म में भी खुदाई नजर आएगी July 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककभी अपनी जाति विरादरी से हटकर देखो,पराए जाति-धर्म में भी खुदाई नजर आएगी! छोड़ दो दूसरों को आंकना अपने आईने से,देखो खुद को, अपने में बुराई नजर आएगी! छोड़ो चाहत दूसरों की जाति को जानने की,पराई जाति-उपाधि में तो खाई नजर आएगी! जाति जानने की इच्छा जिस शख्स में होती,उसमें कभी ना अंकुर […] Read more » Digging will also be seen in alien caste religion पराए जाति धर्म में भी खुदाई नजर आएगी
कविता अगर एक बार तुम आ जाते July 13, 2021 / July 13, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अगर एक बार तुम आ जाते,ये आंसू आंखो से रुक जाते।लगा लेते तुम मुझको सीने से,सारे मन के मैल धुल जाते। विरह वेदना मे मै जलती हूं,बिन अग्नि के मै जलती हूं।अगर एक बार तुम आ जाते,दिल के सारे शोले बुझ जाते।। तड़फ रही हूं मै तुम्हारे लिए,भटक रही हूं मै तुम्हारे लिए।अगर एक बार […] Read more »
कविता धर्मांतरण आज मारक हथियार हो गया July 9, 2021 / July 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक आज भारतीय मुसलमान मुल्लाओं में, ये होड़ मची है कि अधिक से अधिक हिन्दुओं को स्वधर्म से धर्मांतरित करके हिन्दू विरोधी कट्टर मुसलमान बनाना! एक भले चंगे इंसान को शैतान बनाना! पूर्व हिन्दू को हिन्दू के विरुद्ध भड़काना! इस दुर्भावना के लिए एक खास पैगाम है किसी को मुसलमान बनाने से बेहतर […] Read more » धर्मांतरण
कविता दूसरा रामायण July 9, 2021 / July 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसीता रावण की कन्या थी, इसे रावण ने जाना था,किन्तु रावण ने राम को, पूर्व से ही शत्रु माना था! रावण दुखित थे राम से, बहन की नाक कट जाने सेरावण की इच्छा थी, राम को सियाविरह में रुलाने की,अस्तु रावण ने ठानी अपनी पुत्री को घर ले आने की,रावण बड़ा ही ज्ञानी […] Read more » दूसरा रामायण
कविता मेरे कन्हैया प्रभु July 9, 2021 / July 9, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मेरे मन में बस जाओ कन्हैया मेरे,सुबह उठते ही तुम्हें मै निहारा करूं। चराते हो जो गईया मधुबन में प्रभुउन गाईयो का मैं नित्य दुग्ध पान करू। बजाते हो बंसी जो यमुना तट परउस बंसी की तान में रोज श्रवण करू। खाते हो जो माखन मिश्री प्रभु तुम,उस माखन को मैं रोज तैयार करूं। खेलते […] Read more » मेरे कन्हैया प्रभु
कविता शराबी की शायरी मरने के बाद July 6, 2021 / July 6, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रोक दो मेरे जनाजे को,मुझ में जान आ रही है।आगे से जरा राइट ले लोदारू की दुकान आ रही है।। बोतले छिपा दो मेरे कफ़न मे,श्मशान में रोज पिया करूंगा।जब मांगेगा हिसाब ख़ुदा मेरे से,उसको भी दो पेग दिया करूंगा।। ले लो जब शराब की बोतले,थोड़ा सा आगे जरा बढ़ना,नमकीन वाला भी बैठा है,उससे नमकीन […] Read more » Shayari of drunkard after death
कविता ईश्वर तेरे सारे नाम विस्फोटक हो चुके July 6, 2021 / July 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकईश्वर तेरे सारे नामबारूद-डायनामाइट साविस्फोटक हो चुके! कैसे पुकारुं?हफियाते-उबासते,जब कभी निकल पड़तातुम्हारा कोई संबोधन तबहड़बड़ाए ताकता हूं आजू-बाजूकहीं उसने तो नहीं सुन लिया,वर्ना मारा जाऊंगा जब झुटपुटेअंधियारे में गुजरूंगाउसकी गली से! हे राम!तुम्हारे सारे नामसराबोर हो चुके हैंमिसाइली दुर्गंध से! ब्रह्म; पुरातन भ्रम!ईश्वर; आज का बवंडर!अल्लाह; आग सा शोला!गॉड; पश्चिमी रंगभेदी लार्ड! क्या […] Read more » God all your names have become explosive ईश्वर तेरे सारे नाम विस्फोटक हो चुके
कविता जागो बिहार कि तुमने जग को जगाया है July 6, 2021 / July 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजागो बिहार कि तुमने जग को जगाया है,उठो बिहार कि तुमने विश्व को उठाया है! जब दुनिया अंधियारी थी तूने रोशनी बारी,अब सारा जग रौशन है तू क्यों अंधियारी! जब अज्ञानता चहुंओर, विज्ञान का ना शोर,जब सूर्य चंद्र धरती का नहीं कही था छोर! तब बिहार तुमने आर्यभट्ट दुनिया को दिए,जो विश्व के […] Read more » जागो बिहार जागो बिहार कि तुमने जग को जगाया है
कविता कोई प्यार करना सीखे तो हिन्दुओं से July 5, 2021 / July 5, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककोई प्यार करना सीखे तो हिन्दुओं सेहिन्दू धर्म अति सहिष्णु एवं उदार हैहिन्दू धोखेबाज,वादाखिलाफ नहीं होतेहिन्दू धर्म में तलाक की कुप्रथा नहीं है! हिन्दू मां-पिता परिवार की सहमति सेविवाह संस्कार में बंधना पसंद करते,विवाह के पहले वर वधू अनजाने होते,हिन्दू विवाह को ईश्वरीय विधान कहते! हिन्दू आजीवन अनजाने प्यार को निभातेहिन्दुओं का प्यार […] Read more » कोई प्यार करना सीखे तो हिन्दुओं से
कविता जीवन July 5, 2021 / July 5, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment रोने से क्या हासिल होगाजीवन ढलती शाम नहीं हैदर्द उसी तन को डसता हैमन जिसका निष्काम नहीं है ।।यह मेरा है ,वह तेरा हैयह इसका है ,वह उसका हैतोड़ फोड़ ,बाँटा -बाँटी का ,गलत इरादा किसका हैकर ले अपनी पहचान सहीतू मानव है ,यह जान सहीदानवता को मुंह न लगामानवता का कर मान सहीतुम उठो […] Read more » life जीवन
कविता कबीर से कहना है July 3, 2021 / July 3, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकहे वाणी के डिक्टेटर!जातिवाद/साम्प्रदायिकता केप्रबल विरोधी धक्कामार! यकीन नहीं होता कि गुलामभारत में तुमने वह सबकुछ कहाएक सहज सपाट बयानी मेंजिसे आजादी की सांस लेते लोगकहते डरते स्वतंत्रता के लुटेरों से! काश अगर तुम आज होतेकबीर नहीं मात्र कवि होते!राजनीति की दोगली चाल से सहमेविम्ब-प्रतीक की ढाल में दुबकेमुलम्मामार शब्दों में घिघियातेकबीर नहीं […] Read more » कबीर से कहना है