कविता बत्तियां गुल हैं July 16, 2021 / July 16, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment जल पड़ी ।सब और फ़ैलाने उजाला चल पड़ी ।डूबते वालों को तिनका मिल गया ।मन कमल सूखा हुआ था खिल गया। ढूंढ ली माचिस तुरत चिमनी जलाई। Read more » the lights are off बत्तियां गुल हैं
कविता मृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह July 14, 2021 / July 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह हींजीवित देह जीव के लिए दृश्यमान स्थिति,जबकि मृत्यु एक अदृश्य अवस्था है! लंबी उम्र जीनेवाले व्यक्ति कोअपने रक्त रिश्तेदारों की मौत कादारुण दुख झेलना व सहना पड़ता है! जबकि अल्प उम्र में मरने वालों की भीकम नहीं होती है भयानक मृत्यु की त्रासदी! जीवन मृत्यु के […] Read more » death is a state like life मृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह
कविता है कहर बाहर July 14, 2021 / July 14, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment क्यों घरों को छोड़कर बाहर निकलते।है कहर बाहर नहीं फिर क्यों संभलते। सड़क गलियों से अभी तक प्यार क्यों है।मिल रहीं बीमारियाँ जब राह चलते। हो गए बीमार तो फिर क्या करोगे?रोओगे रह जाओगे फिर हाथ मलते। भीड़ में जाना मुनासिब जब नहीं है,क्यों नहीं यह बात अब तक भी समझते। मास्क बांधो और छह […] Read more » है कहर बाहर
कविता तुम क्यों नहीं बनते विषपायी July 14, 2021 / July 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम क्यों नहीं बनते विषपायी?सबके हिस्से का अमृत पी लेतेऔर दूसरों को गरल पिलाते हो,किन्तु बनते नहीं हो विषपायी! सृष्टि के सारे अवदान को तुम,निज गेह में छुपा लिया करते,बन जाते भोला-भाला तमाशाई,किन्तु बनते नहीं हो विषपायी! जब भी तुमको अवसर मिला,सबकुछ झपट लिया करते हो,दीन हीन की नही करते भलाई,किन्तु बनते नहीं […] Read more » why don't you become venomous तुम क्यों नहीं बनते विषपायी
कविता हे भाई बंधुवर कोई मत दहेज लो July 13, 2021 / July 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक बात मन में अवश्य सहेज लो,हे भाई बंधुवर! कोई मत दहेज लो!कुछ भी नहीं अंतर बेटा व बेटी में,बेटा के खातिर एक बेटी खोज लो! बेटी को मत समझो कोई बोझ है,बेटा गर गुलाब है तो बेटी रोज है!दहेज एक बुराई अब जमींदोज हो,बेटा अगर राजा, बेटी रानी समझो! वैदिक काल में […] Read more » हे भाई बंधुवर कोई मत दहेज लो
कविता पराए जाति धर्म में भी खुदाई नजर आएगी July 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककभी अपनी जाति विरादरी से हटकर देखो,पराए जाति-धर्म में भी खुदाई नजर आएगी! छोड़ दो दूसरों को आंकना अपने आईने से,देखो खुद को, अपने में बुराई नजर आएगी! छोड़ो चाहत दूसरों की जाति को जानने की,पराई जाति-उपाधि में तो खाई नजर आएगी! जाति जानने की इच्छा जिस शख्स में होती,उसमें कभी ना अंकुर […] Read more » Digging will also be seen in alien caste religion पराए जाति धर्म में भी खुदाई नजर आएगी
कविता अगर एक बार तुम आ जाते July 13, 2021 / July 13, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अगर एक बार तुम आ जाते,ये आंसू आंखो से रुक जाते।लगा लेते तुम मुझको सीने से,सारे मन के मैल धुल जाते। विरह वेदना मे मै जलती हूं,बिन अग्नि के मै जलती हूं।अगर एक बार तुम आ जाते,दिल के सारे शोले बुझ जाते।। तड़फ रही हूं मै तुम्हारे लिए,भटक रही हूं मै तुम्हारे लिए।अगर एक बार […] Read more »
कविता धर्मांतरण आज मारक हथियार हो गया July 9, 2021 / July 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक आज भारतीय मुसलमान मुल्लाओं में, ये होड़ मची है कि अधिक से अधिक हिन्दुओं को स्वधर्म से धर्मांतरित करके हिन्दू विरोधी कट्टर मुसलमान बनाना! एक भले चंगे इंसान को शैतान बनाना! पूर्व हिन्दू को हिन्दू के विरुद्ध भड़काना! इस दुर्भावना के लिए एक खास पैगाम है किसी को मुसलमान बनाने से बेहतर […] Read more » धर्मांतरण
कविता दूसरा रामायण July 9, 2021 / July 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसीता रावण की कन्या थी, इसे रावण ने जाना था,किन्तु रावण ने राम को, पूर्व से ही शत्रु माना था! रावण दुखित थे राम से, बहन की नाक कट जाने सेरावण की इच्छा थी, राम को सियाविरह में रुलाने की,अस्तु रावण ने ठानी अपनी पुत्री को घर ले आने की,रावण बड़ा ही ज्ञानी […] Read more » दूसरा रामायण
कविता मेरे कन्हैया प्रभु July 9, 2021 / July 9, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मेरे मन में बस जाओ कन्हैया मेरे,सुबह उठते ही तुम्हें मै निहारा करूं। चराते हो जो गईया मधुबन में प्रभुउन गाईयो का मैं नित्य दुग्ध पान करू। बजाते हो बंसी जो यमुना तट परउस बंसी की तान में रोज श्रवण करू। खाते हो जो माखन मिश्री प्रभु तुम,उस माखन को मैं रोज तैयार करूं। खेलते […] Read more » मेरे कन्हैया प्रभु
कविता शराबी की शायरी मरने के बाद July 6, 2021 / July 6, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रोक दो मेरे जनाजे को,मुझ में जान आ रही है।आगे से जरा राइट ले लोदारू की दुकान आ रही है।। बोतले छिपा दो मेरे कफ़न मे,श्मशान में रोज पिया करूंगा।जब मांगेगा हिसाब ख़ुदा मेरे से,उसको भी दो पेग दिया करूंगा।। ले लो जब शराब की बोतले,थोड़ा सा आगे जरा बढ़ना,नमकीन वाला भी बैठा है,उससे नमकीन […] Read more » Shayari of drunkard after death
कविता ईश्वर तेरे सारे नाम विस्फोटक हो चुके July 6, 2021 / July 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकईश्वर तेरे सारे नामबारूद-डायनामाइट साविस्फोटक हो चुके! कैसे पुकारुं?हफियाते-उबासते,जब कभी निकल पड़तातुम्हारा कोई संबोधन तबहड़बड़ाए ताकता हूं आजू-बाजूकहीं उसने तो नहीं सुन लिया,वर्ना मारा जाऊंगा जब झुटपुटेअंधियारे में गुजरूंगाउसकी गली से! हे राम!तुम्हारे सारे नामसराबोर हो चुके हैंमिसाइली दुर्गंध से! ब्रह्म; पुरातन भ्रम!ईश्वर; आज का बवंडर!अल्लाह; आग सा शोला!गॉड; पश्चिमी रंगभेदी लार्ड! क्या […] Read more » God all your names have become explosive ईश्वर तेरे सारे नाम विस्फोटक हो चुके