कविता हिन्दू का दुश्मन जातिवाद है June 24, 2021 / June 24, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दू विश्व मेंबेशक सबसे अधिक सहिष्णु धर्म हैकिन्तु हिन्दू कापहला और आखिरी दुश्मन जातिवाद है! जातिवाद ने हिन्दू समुदाय कोअस्तित्वहीन कर खोखला कर दिया,यद्यपि सनातन वर्णाश्रमी वैदिकों काहिन्दू नाम इस्लाम पूर्व पारसियों ने दिया, जो एक मुलम्मा मात्र हैहिन्दू के हिय अंत:स्थल मेंचार वर्ण और हजारों जातियां बसती! हिन्दुओं का सबकुछ जाति तय […] Read more » The enemy of Hindu is casteism. हिन्दू का दुश्मन जातिवाद
कविता एक नायिका के अंगो की उपमाएं June 23, 2021 / June 24, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ये यौवन क्या है तुम्हारा,उमड़ता हुआ है समंदर।डर लगता है इससे मुझको,कहीं डूब न जाऊं मै अंदर।। ये काली जुल्फे है तुम्हारी,काली घटा भी इनसे हारी।इनको जब तुम झटकती,बिजली इनके आगे मटकती।। ये आंखे क्या है तुम्हारी,नीली झील से भी गहरी।नौका विहार करूं मै इसमें,जो दुनिया देखे मुझे सारी।। ये मस्तक है जो तुम्हारा,चमकता हुआ […] Read more » नायिका के अंगो की उपमाएं
कविता बुढ़ापा June 22, 2021 / June 22, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बचपन का अंजाम बुढ़ापा |है जीवन की शाम बुढ़ापा | Read more » old age बुढ़ापा
कविता कितने हिन्दू? June 22, 2021 / June 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment कहते हैं भारतबहुसंख्यक हिन्दुओं का देश हैअक्सरा चिंता जताई जातीकि अल्पसंख्यकों कीअस्मिता और अस्तित्व कोशीघ्र लील जाएगाभारत का बहुसंख्यक हिन्दूतो क्यों नहीं करा लेते सर्वेक्षणकश्मीर से कन्याकुमारी तककौन हैं हिन्दू/कितने हैं हिन्दू?हलो! तुम कौन हो?मैं कश्मीरी/मैं पंजाबी/मैं मराठा/मैं गुजराती/मैं बंगाली-मैं उडि़या-असामी-नागा-कूकी-दीमाशा-मीजो-मिश्मी-तांखुल-मैतेयीमैं तमिल-तेलुगु-कन्नड़-मलयालीद्राविड़ दक्षिण भारतीय!और हलो! हल्लो! तुम कौन हो?बोलो तुम कौन होहिन्दी क्षेत्र के बी-मा-रु?बीमार […] Read more » कितने हिन्दू
कविता राम पूर्व दशानन विजेता सहस्त्रार्जुन June 21, 2021 / June 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक वीर सहस्त्रार्जुन भू परबड़ा यशस्वी,पराक्रमी और ज्ञानी था!राम पूर्व दशानन का विजेताकहते हैं वह बड़ा ही अभिमानी था!हैहय यदुवंशी क्षत्रिय था परमदोन्मत्त शौण्डीर्य सा जवांदानी था!विष्णु के चक्र का अवतारआर्य योद्धा बड़ा ही खानदानी था!ब्राह्मण-क्षत्रिय संघर्ष केवे नायक एक क्षत्रिय बलिदानी था!अत्रिपुत्र चन्द्र का वंशधरसूर्यपुत्र मनुकन्या इला महारानी कापुत्र पुरुरवा से चलकरआयु, […] Read more » Ram Purva Dashanan Winner Sahastrarjun दशानन विजेता सहस्त्रार्जुन
कविता कृष्ण के जीवन में ना कोई राधा थी June 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककृष्ण के जीवन में ना कोई राधा थी,औ न सोलह हजार एक सौ रानी थी!हां ये सही है कि कृष्ण राम के जैसे,एकपत्नीव्रती नहीं,अष्टरानी युक्त थे! सोलह हजार एक सौ नारियां कैद थी,असम राजा नरकासुर के रनिवास में!जिन्हें श्री कृष्ण ने मुक्ति दिलाई थी,उनके आग्रह से दिया रानी का दर्जा! कृष्ण का अवतार […] Read more » There was no Radha in Krishna's life कृष्ण के जीवन में ना कोई राधा थी
कविता योग की जीवन में महत्ता June 21, 2021 / June 21, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment शरीर को अगर रोग मुक्त तुम्हे रखना है।योग को जीवन में सदा तुम्हे रखना है।। पहला सुख निरोगी हो काया,दूसरा सुख घर में हो माया।तीसरा सुख संत्वंती हो नारी,चौथा सुख पुत्र हो आज्ञाकारी।अगर इन सुखों को तुम्हे पाना है,योग को जीवन में तुम्हे अपनाना है।। योग की परम्परा है बहुत ही पुरानी,इसको अपनाने मे करो […] Read more »
कविता कल तक जो हिन्दू थे आज विधर्मी हो गए June 18, 2021 / June 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपरिस्थितिजैसे बना देती है,वैसा ही, हो जाता है आदमी,कलतक जोहिन्दूधर्मीथे,आजविधर्मीहो गए आदमी! जिनके पूर्वजों ने ढेर दुख सहे,मूल धर्मकोत्यागनेके पहले,आतंकऔरअत्याचार भी सहे,परसबकैसे भूलगए आदमी? कितने लोग बलिदान हो गए,स्वधर्म व वंशको बचाने में,गर्दन कट गई, उफनहीं कहे,उनकेवंशज कैसेहुएआदमी? कल तकजोक्रूर आक्रांता था,वर्तमान मेंवही आदर्श हो गए,अपनीपूर्वजा माता, बहन, बेटी,कैसे भूल गए आज के […] Read more »
कविता बच्चों का पन्ना वीर बहादुर बनाना June 16, 2021 / June 16, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment साँझ समय उस दिन बाजार में,हुआ अचानक हमला |इस हमले को देख सहम गए ,राजू विमला कमला | मुँह ढांके काले कपड़े से ,दिखे कई आतंकी |दाग रहे थे तड़ -तड़ गोली ,ये पागल से सनकी | भगदड़ मची लोग थे घायल ,इधर -उधर को भागे |कुछ ने जान बचा ली अपनी ,कुछ मर गए […] Read more » वीर बहादुर बनाना
कविता मानव की मौलिक प्रवृत्ति है June 16, 2021 / June 16, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमानवकी मौलिक प्रवृत्ति हैअपनीगुनाहव सजा के लिएदूसरे को कसूरवारठहराना! जबकि हरेकशख्सपाता है, अपनी कृतगुनाह की सजा! मानव की मौलिकप्रवृत्ति है,गलत तरीके से प्राप्त लाभकोनिरंतर बरकरार रखना! औरगलत लाभपरअंकुशजोलगाएउसेगलत कहना! मानव कीमौलिक प्रवृत्ति हैप्रशंसा के नाकाबिल होनेपर भीअपनी प्रशंसा से खुश होना! यथा स्थिति जो बयान करे,उससेतुरंतही नाराज़ होना! मानव की मौलिक प्रवृत्ति हैजो […] Read more » मानव की मौलिक प्रवृत्ति है
कविता सबका खून होता एक समान June 16, 2021 / June 16, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकऐसाथापैगम्बरकाकहना,मानवमात्रसभीभाईहैंसबभाई-भाईबनकररहना! राजारंकफकीरऔरमुल्ला,सबसेउपरएकहीअल्लाह‘लाइलाहइल्लल्लाह—‘या‘एकोब्रह्मदूजानास्ति—‘ उस एकईश्वर अल्लाह के सिवाइबादतकोऔरनहींकोईदूजा! फिरअबकौनयहांकठमुल्ला,इंसान-इंसानमेंभेदकरानेकीसाजिशकरताखुल्लम-खुल्ला? क्याहिन्दू! क्यामुसलमान!सबकाखूनहोताएकसमान! चाहेहोउनकानिवास स्थान,इंडोनेशिया,मेसोपोटामियाइराक,ईरान,पाक,बांगलाऔरअफगानिस्तान,सारेआर्यावर्तकेहिस्सेविशालभारत/बृहत्तरहिन्दुस्तान! इराक-आर्याक-मेसोपोटामिया थाआर्यों काअपनाउपनिवेशस्थल, ईरान-आर्यानयाकिपर्सियाथाआर्य जाति कामूल निवासस्थानपारसी-ईरानीथेअग्नि केपूजकगायत्रीमंत्रोच्चारकचंद्रवंशीसंतान! यहींदेव भूमि,ऋग्वेदकीप्रसवस्थली,यहींस्वर्गथा/यहींदेवोंकाइन्द्रासन,यहींचन्द्रवंशीनृप ययातिनेलड़ा थाप्रसिद्धहोलीवारआफखोरासान! आजवेस्ताएजिन्द/वेदकेछंदकेपाठकभलेपढ़नेलगेकुरान,किन्तुचन्द्रदेव वविष्णुवाहनगरुड़कावेकरतेहैंसम्मान! इंडोनेशियाईमुसलमानकरतेपूर्वजों का सम्मान,आजभीरखतेअपने आर्य पूर्वजों सा नाम!संस्कृतशब्दसुकर्णो,सुहार्तो,मेघावतीजैसे! मस्जिदमेंरामायणकीचौपाईकेसाथखुदेहोतेशरा-ए-कुरान! बांग्लादेशऔरपाकिस्तान,कलकेहिन्दुस्तान!कलकेहिन्दूकेबच्चे,आजबनगएखान!सिवानापाकइरादोंकेउनकीनहीं कोईपहचान? मजहबबदलजातातोक्यारक्तरिश्तेदारीभीबदलजाती?आजकाअफगानिस्तानक्याआर्यावर्तकागांधारप्रांतनहींथा? गांधारकीबेटी गांधारीकारक्तक्याकौरववीरोंमेंनहींबहाथा?फिरक्योंनकारतेहोपूर्वजोंको! जुड़केदेखोभारतमां कीमिट्टीसेराम-कृष्ण-गौतम-नानकसबकेसाझे,सिर्फहमारानहींतुम्हाराभीअपना! Read more » सबका खून होता एक समान
कविता मैं देह नहीं हूंमैं देह से परे हूं June 15, 2021 / June 15, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमैं देह नहीं हूं, मैं देह से परेहूं,मैं अंगनहीं,मैंअंगको धरे हूं,मैं नेह,मैं स्नेह,मैं विशेषण हूं,मैं देह काअंग,कदापिनहीं हूं, मैं दिल नहीं हूं, मैं दिलवर हूं!मैं ह्रदय नहींहूं,मैंसुह्रदवर हूं! मैंहाथ नहींहूं,किन्तुहाथ मेरा,मैंकाननहीहूं,किन्तुकान मेरा,मैंआंखनहीं हूं,पर आंखमेरा! मैं पैर नहीं हूं,मैंवैर नहीं हूं,मैं वैर,सुलह,सफाई से परे हूं!ये सबकुछ दैहिक धर्म होते हैं! मैं देह से हटकर,देह […] Read more » मैं देह नहीं हूंमैं देह से परे हूं