कविता आँगन का आमरूद July 22, 2021 / July 22, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मैंतुम्हारे आँगन का आमरूद हूँतभी तो मैं महफूज़ हूँतुमनेमेरा बेइंतहा ख्याल रखामुसीबतों से मुझे संभाल रखा मैंछोटा सा नन्हा एक बीज थाकोई न मेरा अस्तित्व थातुमनेमुझे उम्मीद से धरती में डालाअंकुरित हुआ तो मुझे पाला मैंखुद को कभी मरने नहीं दियासपनों को टूटने नहीं दियातुमनेमेरे हौसले को बढ़ायाऔर संजीदगी से जिलाया मैंअब उम्मीदों […] Read more » courtyard amruda
कविता डाकघर के कर्मवीर July 21, 2021 / July 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे डाकघरतुम जैसे वैसेतेरे कर्मवीरतेरे गात्र की लालीसाहीबहताहैउनका अश्रु नीर! तेरी ही पत्र पेटी केजैसाउनका पेटकभी नही भरताकठिन कामकर अर्धदाम परअधखाए असमय ही मरता!इसका तुम्हेंनहीकुछ भान? बेवक्त के अधबूढ़े जैसा,तंगहाल पर तीव्र चाल सेडाकघर की ओर अग्रसरवह अंतर्देशीयनुमा ढांचा! पहला मोड़ घुटने पर,दूसरा कमर,तीसरा गर्दन परमैल गोंद से चिपका कालरइन श्रमवीरों का बोलोकिसने […] Read more » post office workers डाकघर के कर्मवीर
कविता रिश्ते प्रतिशत में कभी नहीं होते July 19, 2021 / July 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकरिश्ते प्रतिशत में कभी नहीं होतेराम है भाई श्याम के जितनेउतने राम भाई हैं रहमान के भी! वे माता-पिता जितने हैं पुत्रों केउतने माता-पिता वे पुत्रियों के भी! रिश्ते कभी प्रतिशत में नहीं होतेसबके साथ रिश्ते शत प्रतिशत होते! रिश्ते धन की तरह बांटे नहीं जातेरिश्ते फसल की तरह काटे नहीं जाते! मगर […] Read more » रिश्ते प्रतिशत में कभी नहीं होते
कविता प्रकृति पर्यावरण रक्षण भी है ईश्वर की आराधना July 18, 2021 / July 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे मानव! जड़ व चेतन देवता की आराधना करो,सूर्य चन्द्र धरती जल वायु आकाश जड़ देवता हैं,जड़ देवता सृष्टि की रक्षा करते उनको शुद्ध रखो,इन जड़ देवताओं की शुद्धि हेतु यज्ञ-यजन करो! जड़ देवता के संयोग से हीं सृष्टि विकसित होती,सृष्टि संवर्धन हेतु सनातन पथ का संवरण करो! माता-पिता परम पूज्य चेतन देवी […] Read more » Nature protection is also the worship of God
कविता इस्लाम मजहब का उद्भव July 18, 2021 / July 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on इस्लाम मजहब का उद्भव —विनय कुमार विनायकईस्वी सन् पाँच सौ सत्तर में जन्मेइस्लाम के जन्मदाता,हजरत मुहम्मद नाम उनकाघर अरब का मक्का! उनकी जाति कुरैशी थी अशिक्षित,अंधविश्वासी, मूर्ति पूजक कबिलाईकाबा के चौकोर प्रस्तर पूजन मेंनिहित थी उनकी भलाई! हज़रत मुहम्मद थे एक युग द्रष्टा,अपनी जाति-धर्म का सुधारकर्ता! उन्होंने ‘ला इलाह इल्लल्लाह’‘एको ब्रह्म दूजा नास्ति’ जैसाएक ईश्वर के सिवा कोई नहीं […] Read more » Origin of Islam religion इस्लाम मजहब का उद्भव
कविता बत्तियां गुल हैं July 16, 2021 / July 16, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment जल पड़ी ।सब और फ़ैलाने उजाला चल पड़ी ।डूबते वालों को तिनका मिल गया ।मन कमल सूखा हुआ था खिल गया। ढूंढ ली माचिस तुरत चिमनी जलाई। Read more » the lights are off बत्तियां गुल हैं
कविता मृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह July 14, 2021 / July 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह हींजीवित देह जीव के लिए दृश्यमान स्थिति,जबकि मृत्यु एक अदृश्य अवस्था है! लंबी उम्र जीनेवाले व्यक्ति कोअपने रक्त रिश्तेदारों की मौत कादारुण दुख झेलना व सहना पड़ता है! जबकि अल्प उम्र में मरने वालों की भीकम नहीं होती है भयानक मृत्यु की त्रासदी! जीवन मृत्यु के […] Read more » death is a state like life मृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह
कविता है कहर बाहर July 14, 2021 / July 14, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment क्यों घरों को छोड़कर बाहर निकलते।है कहर बाहर नहीं फिर क्यों संभलते। सड़क गलियों से अभी तक प्यार क्यों है।मिल रहीं बीमारियाँ जब राह चलते। हो गए बीमार तो फिर क्या करोगे?रोओगे रह जाओगे फिर हाथ मलते। भीड़ में जाना मुनासिब जब नहीं है,क्यों नहीं यह बात अब तक भी समझते। मास्क बांधो और छह […] Read more » है कहर बाहर
कविता तुम क्यों नहीं बनते विषपायी July 14, 2021 / July 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम क्यों नहीं बनते विषपायी?सबके हिस्से का अमृत पी लेतेऔर दूसरों को गरल पिलाते हो,किन्तु बनते नहीं हो विषपायी! सृष्टि के सारे अवदान को तुम,निज गेह में छुपा लिया करते,बन जाते भोला-भाला तमाशाई,किन्तु बनते नहीं हो विषपायी! जब भी तुमको अवसर मिला,सबकुछ झपट लिया करते हो,दीन हीन की नही करते भलाई,किन्तु बनते नहीं […] Read more » why don't you become venomous तुम क्यों नहीं बनते विषपायी
कविता हे भाई बंधुवर कोई मत दहेज लो July 13, 2021 / July 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक बात मन में अवश्य सहेज लो,हे भाई बंधुवर! कोई मत दहेज लो!कुछ भी नहीं अंतर बेटा व बेटी में,बेटा के खातिर एक बेटी खोज लो! बेटी को मत समझो कोई बोझ है,बेटा गर गुलाब है तो बेटी रोज है!दहेज एक बुराई अब जमींदोज हो,बेटा अगर राजा, बेटी रानी समझो! वैदिक काल में […] Read more » हे भाई बंधुवर कोई मत दहेज लो
कविता पराए जाति धर्म में भी खुदाई नजर आएगी July 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककभी अपनी जाति विरादरी से हटकर देखो,पराए जाति-धर्म में भी खुदाई नजर आएगी! छोड़ दो दूसरों को आंकना अपने आईने से,देखो खुद को, अपने में बुराई नजर आएगी! छोड़ो चाहत दूसरों की जाति को जानने की,पराई जाति-उपाधि में तो खाई नजर आएगी! जाति जानने की इच्छा जिस शख्स में होती,उसमें कभी ना अंकुर […] Read more » Digging will also be seen in alien caste religion पराए जाति धर्म में भी खुदाई नजर आएगी
कविता अगर एक बार तुम आ जाते July 13, 2021 / July 13, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अगर एक बार तुम आ जाते,ये आंसू आंखो से रुक जाते।लगा लेते तुम मुझको सीने से,सारे मन के मैल धुल जाते। विरह वेदना मे मै जलती हूं,बिन अग्नि के मै जलती हूं।अगर एक बार तुम आ जाते,दिल के सारे शोले बुझ जाते।। तड़फ रही हूं मै तुम्हारे लिए,भटक रही हूं मै तुम्हारे लिए।अगर एक बार […] Read more »