लेख संबंध मूल्य को स्थापित करता राजा राम का लोकजीवन January 18, 2024 / January 18, 2024 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment डॉ.सौरभ मालवीयसनातन धर्म के अनुयायी श्रीराम को भगवान मानते हैं तथा उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। वह भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने लंका नरेश रावण एवं अन्य राक्षसों का संहार करके मानव जाति को उनके अत्याचारों से मुक्त करवाने के लिए अयोध्या के राजा दशरथ के यहां राम के रूप में जन्म लिया […] Read more » संबंध मूल्य को स्थापित करता राजा राम
आर्थिकी लेख वित्तीयवर्ष 2024 में भारत की आर्थिक विकास दर का सही आंकलन नहीं कर पा रहे हैं विदेशी वित्तीय संस्थान January 17, 2024 / January 17, 2024 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद के बारे में विदेशी वित्तीय संस्थान अभी भी व्यावहारिक रूख नहीं अपना पा रहे हैं। विभिन्न वित्तीय संस्थानों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर 6 से 6.5 प्रतिशत रह सकती है। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 की प्रथम तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और द्वितीय तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। आगामी दो तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर यदि 5.5 प्रतिशत भी रहती है तो यह पूरे वित्तीय वर्ष के लिये 6.5 प्रतिशत से ऊपर रहने वाली है। परंतु, केंद्र सरकार एवं कुछ राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे पूंजीगत खर्चों, ग्रामीण इलाकों के बढ़ रही उत्पादों की मांग, विभिन्न कम्पनियों की लगातार बढ़ रही लाभप्रदता, वस्तु एवं सेवा कर संग्रहण एवं प्रत्यक्ष कर संग्रहण में वृद्धि दर को देखते हुए इस बात की प्रबल सम्भावना है कि आगामी दो तिमाही में भारत की विकास दर निश्चित रूप से 5.5 प्रतिशत से अधिक रहने वाली है। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की प्रबल संभावनाएं बनती दिखाई दे रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर रह सकती है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इकरा के अनुसार यह 6.5 प्रतिशत, एशिया विकास बैंक एवं बार्कलेस एवं प्राइस वॉटर कूपर्स के अनुसार यह 6.7 प्रतिशत, डेलाईट इंडिया द्वारा यह 7 प्रतिशत रहने की सम्भावना व्यक्त की गई है। इसके विपरीत विभिन्न भारतीय वित्तीय संस्थान भारत की विकास दर के बारे में लगातार अपने अनुमानों को सुधारते हुए इसे पूरे वित्तीय वर्ष के लिए 7 प्रतिशत से अधिक बता रहे हैं। आर्थिक अनुसंधान विभाग, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इसके 7 प्रतिशत से अधिक रहने की सम्भावना जताई है तथा अभी हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकीय संस्थान द्वारा इसके 7.3 प्रतिशत रहने की सम्भावना जताई गई है। दरअसल, अभी हाल ही के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था के बहुत तेजी से डिजिटलीकरण हुआ है। प्रत्यक्ष सुविधा हस्तांतरण योजना (डीबीटी) के अंतर्गत भारतीय नागरिकों के 50 करोड़ से अधिक जमा खाते विभिन्न बैकों में खोले गए हैं। इन जमा खातों के खुलने से भारत के इन नागरिकों का वित्तीय रिकार्ड बनता जा रहा है। उदाहरण के लिए, एक चाय वाला यदि दिन भर में चाय के 200 कप, 10 रुपए प्रति कप की दर से बेचता है तो वह दिन भर में 2000 रुपए की आय का अर्जन कर लेता है। भारत में लगातार बढ़ रहे डिजिटलीकरण के चलते वह दुकानदार अपने ग्राहकों से चाय के एवज में नकद रोकड़ राशि न लेकर अपने खाते में सीधे यह राशि जमा कराता है। उसके बैंक खाते में प्रति माह 60,000 रुपए की राशि जमा हो जाती है एवं पूरे वर्ष भर में 720,000 रुपए की उसके बैंक खाते में जमा हो जाती है। इससे, उस दुकानदार का क्रेडिट रिकार्ड बनता जा रहा है। एक चाय वाला दुकानदार यदि साल भर में 720,000 रुपए की बिक्री कर लेता है तो उसके इस रिकार्ड को बैंक द्वारा अच्छा रिकार्ड मानते हुए उसे ऋण प्रदान करने हेतु पात्र ग्राहक मानते हुए उसके व्यापार को और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आसानी से उस दुकानदार को ऋण प्रदान कर दिया जाता है। इस प्रकार, कई सूक्ष्म आकार के व्यवसायी लघु एवं मध्यम आकार के व्यवसायी बनते जा रहे हैं। छोटे छोटे व्यापारियों के व्यवसाय का आकार बढ़ने के कारण यह व्यवसायी रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित करने में सफल हो रहे हैं। दूसरे, भारत में धार्मिक पर्यटन में जबरदस्त उच्छाल देखने में आ रहा है। वाराणसी में भगवान शिव का कोरिडोर बनने के बाद से वाराणसी में 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रभु शिव के दर्शन करने हेतु पहुंचे हैं। इसी प्रकार उज्जैन में महाकाल लोक के बनने के बाद से उज्जैन नगर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुणा बढ़ गई है। गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की आदम कद भव्य प्रतिमा स्थापित होने के बाद से उस स्थल पर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। इसी प्रकार, हरिद्वार, वृंदावन, तिरुपति बालाजी, वैष्णो देवी आदि धार्मिक स्थलों के दर्शन करने हेतु करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिवर्ष इन स्थलों पर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से पहुंचते हैं। अभी हाल ही में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह एवं लक्षद्वीप को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। इससे न केवल भारत से बल्कि विदेशों से भी पर्यटकों की संख्या में अपार वृद्धि होने जा रही है। किसी भी देश में पर्यटन के बढ़ने से छोटे छोटे व्यवसाय, होटेल एवं परिवहन आदि जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले व्यापारियों के व्यवसाय में अपार वृद्धि होती है एवं इन क्षेत्रों में रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित होते हैं। इससे भी देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि होती है। तीसरे, यह भी केवल भारत की ही विशेषता है कि विभिन त्यौहारों एवं शादी जैसे समारोहों पर भारतीय नागरिक दिल खोलकर पैसा खर्च करते हैं। इससे त्यौहारों एवं शादी के मौसम में व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार में अतुलनीय वृद्धि दृष्टिगोचर होती है। जैसे दीपावली त्यौहार के समय भारत में नागरिकों के बीच विभिन्न नए उत्पादों की खरीद के लिए जैसे आपस में होड़ सी लग जाती है। भारत में लाखों करोड़ रुपए का व्यापार दीपावली त्यौहार के समय में होता है। इसी प्रकार की स्थिति शादियों के मौसम में भी पाई जाती है। संभवत: विदेशी वित्तीय संस्थान भारत में हो रहे इस तरह के उक्त वर्णित परिवर्तनों को समझ नहीं पा रहे हैं एवं केवल पारंपरिक विधि से ही सकल घरेलू उत्पाद को आंकने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए भारत की विकास दर के संबंच में विभिन्न विदेशी संस्थानों के अनुमान गलत साबित हो रहे हैं। प्रहलाद सबनानी Read more »
आर्थिकी लेख भारतीय नागरिकों के बीच कम हो रही है आय की असमानता January 16, 2024 / January 16, 2024 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारत के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि विशेष रूप से कोरोना महामारी के बाद से भारत के आर्थिक क्षेत्र में K आकार का विकास हो रहा है। आर्थिक दृष्टि से K आकार के विकास से आश्य यह है कि देश की अर्थव्यवस्था में गरीब अधिक गरीब हो रहा है और अमीर और अधिक अमीर हो रहा है। हालांकि हाल ही के समय में भारत में आय, बचत, उपभोग एवं खर्च आदि के सम्बंध में इस प्रकार की नीतियां बनाई जाती रही हैं कि देश के गरीब वर्ग को अधिकतम लाभ मिले। इसके लिए कई विशेष योजनाएं, जैसे, गरीब अन्न कल्याण योजना, उज्जवला योजना, आयुषमान भारत योजना, आवास योजना एवं प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना आदि चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत सब्सिडी आदि की राशि लाभार्थियों के खातों में सीधे ही हस्तांतरित कर दी जाती है। इससे गरीब वर्ग के लाभार्थियों को सहायता की राशि 100 प्रतिशत तक मिल जाती है और इसमें भ्रष्टाचार की सम्भावना लगभग शून्य हो जाती है। भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक अनुसंधान विभाग द्वारा भारत के आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए आयकर विवरणियों सम्बंधी आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करते हुए यह बताया है कि भारत में नागरिकों के बीच आय की असमानता कम हो रही है। देश में वित्तीय वर्ष 2014 में व्यक्तिगत आयकर रिटर्न फाइल करने वाली कुल संख्या में 36.3 प्रतिशत संख्या निम्न आय वर्ग की श्रेणी के नागरिकों की थी, और यह वर्ग अब वित्तीय वर्ष 2021 में मध्यम आय वर्ग की श्रेणी में आ गया है तथा इस बीच इस वर्ग की आय 21.1 प्रतिशत बढ़ी है। इस कारण के चलते 3.5 लाख रुपए वार्षिक आय वाले नागरिकों की संख्या वित्तीय वर्ष 2014 में 31.8 प्रतिशत से घटकर वित्तीय वर्ष 2021 में 15.8 प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार, सबसे अधिक आयकर अदा करने वाले 2.5 प्रतिशत नागरिकों का कुल आय में योगदान 2.81 प्रतिशत से घटाकर 2.28 प्रतिशत हो गया है। अतः देश में मध्यम आय वर्ग के नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आय कर दाखिल करने वाले नागरिकों की प्रति व्यक्ति औसत आय वित्तीय वर्ष 2014 में 3.1 लाख रुपए से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2021 में 11.6 लाख रुपए हो गई है और वित्तीय वर्ष 2022 में यह 12.5 से 13 लाख रुपए के बीच रहने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। भारत के आर्थिक विकास में भारतीय महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है। कुल श्रमिक तंत्र में महिलाओं की संख्या 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 37 प्रतिशत हो गई है। महिलाएं आज कृषि के क्षेत्र में भी अपना योगदान लगातार बढ़ाती जा रही हैं। आयकर विवरणियां फाइल करने में भी महिलाओं की संख्या अब 15 प्रतिशत हो गई है। भारत में लगातार तेज गति से हो रही आर्थिक प्रगति के चलते आज भारत में दोपहिया वाहनों की तुलना में चार पहिया वाहनों के बिक्री में अधिक वृद्धि दर हासिल हो रही है। वित्तीय वर्ष 2019 में 2.12 करोड़ दोपहिया वाहनो बिक्री हुई थी, जबकि उस वर्ष कृषि क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद में केवल 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई थी और मानसून में भी लगभग 14 प्रतिशत की कमी रही थी। वर्तमान वित्तीय वर्ष में दोपहिया वाहनों की बिक्री 1.8 करोड़ की रही है। इसके पीछे मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि एक तो मध्यम वर्ग अपने लिए मकानों की खरीद अधिक मात्रा में कर रहा है और दूसरे मध्यम वर्ग आज दोपहिया वाहनों के स्थान पर चार पहिया वाहन खरीदने की ओर आकर्षित हुआ है। इसी प्रकार, आज अर्द्धशहरी क्षेत्रों में लगभग 2 करोड़ परिवार खाद्य पदार्थों को खरीदेने हेतु “जोमटो ऐप” का उपयोग कर रहे हैं। अतः आज भारत के मध्यम वर्ग का टेस्ट बदल रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में नागरिकों का उक्त व्यवहार यदि आगे आने वाले समय में भी जारी रहता है तो एक अनुमान के अनुसार, अगले दशक की समाप्ति पर 50 प्रतिशत उत्पादों का उपभोग (लगभग 16 लाख करोड़ रुपए) गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों में से 90 प्रतिशत नागरिको द्वारा किया जाने लगेगा। आज गरीब वर्ग को केंद्र सरकार द्वारा बहुत बड़े स्तर पर मुफ्त अनाज, मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं एवं मकान आदि उपलब्ध कराए जा रहे हैं (अभी तक 4 करोड़ परिवारों को रहने के लिए मकान उपलब्ध कराए जा चुके हैं), जिसके कारण इस वर्ग की 8.2 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त उपभोग कर सकने की क्षमता बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2013-14 से वित्तीय वर्ष 2021-22 के बीच 5 लाख से 10 लाख रुपए की आय वाले वर्ग में आय कर विवरणियां फाइल करने वाले नागरिकों की संख्या 295 प्रतिशत से बढ़ी है। इसी प्रकार, 10 लाख रुपए से 15 लाख रुपए की आय वाले वर्ग में आय कर विवरणियां फाइल करने वाले नागरिकों की संख्या 291 प्रतिशत से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2022 में 7 करोड़ नागरिकों द्वारा आय कर विवरणियां फाइल की गई थी, यह संख्या वित्तीय वर्ष 2023 में बढ़कर 7.4 करोड़ हो गई और अब वित्तीय वर्ष 2024 में 8.5 करोड़ हो जाने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। यह संख्या देश में औपचारिक क्षेत्र में कुल श्रमिकों की संख्या का 37 प्रतिशत है। पारम्परिक रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली एवं कर्नाटक राज्यों से आयकर विवरणियां फाइल करने वाले नागरिकों की संख्या अधिक रहा करती थी परंतु अब कुछ नए राज्य तेजी से इन राज्यों को पीछे छोड़ने के प्रयास में आगे बढ़ रहे हैं। इनमे प्रथम स्थान पर उत्तर प्रदेश राज्य है। इसके बाद आंध्र प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा राज्य आते हैं। अब इन राज्यों से भी आय कर विवरणियां फाइल करने वाले नागरिकों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। व्यक्तिगत आय कर अदा करने वाले नागरिकों के अतिरिक्त सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाईयों में भी लगभग इसी प्रकार के परिवर्तन दिखाई दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2014 से वित्तीय वर्ष 2021 के बीच सूक्ष्म आकार की 19.5 प्रतिशत इकाईयों की आय बहुत तेज गति से बढ़ी है और अब सूक्ष्म आकार की ये इकाईयां छोटी, मध्यम एवं बड़ी श्रेणी की इकाईयों में परिवर्तित हो गई हैं। इन सूक्ष्म इकाईयों में से 4.8 प्रतिशत इकाईयां छोटी श्रेणी की इकाईयों में, 6.1 प्रतिशत इकाईयां मध्यम श्रेणी की इकाईयों में एवं 9.3 प्रतिशत इकाईयां बड़ी श्रेणी की इकाईयों में परिवर्तित हो गई हैं। विशेष रूप से भारत में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के लागू होने के बाद से सूक्ष्म आकार की इकाईयां, छोटे आकार, मध्यम आकार एवं बड़े आकार की इकाईयों में परिवर्तित होती जा रही हैं। हाल ही के समय में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाईयों को बैंकों द्वारा प्रदान किए गए ऋण की राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि देखने में आई है। वित्तीय वर्ष 2023 में उक्त वर्ग की इकाईयों के 2.13 करोड़ खातों में 22.6 लाख करोड़ रुपए का ऋण प्रदान किया गया था और जो औसत रूप से प्रति ऋण खाता लगभग 10.6 लाख रुपए बैठता है। प्रहलाद सबनानी Read more » Income inequality among Indian citizens is decreasing
राजनीति लेख शख्सियत समाज रामभद्राचार्य श्रीराम के अद्भुत शिल्पकार एवं व्याख्याकार January 16, 2024 / January 16, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment जगतगुरु रामभद्राचार्य अमृत महोत्सव-ललित गर्ग- देश में कितने ही पवित्र संत, गुरु, ऋषियों ने अपने दैवीय शक्ति, आनंद, प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान के साथ दुनिया को अलौकिक एवं चमत्कृत किया है, परम सत्ता से साक्षात्कार के लिये अग्रसर किया है। इनमें श्रद्धेय पद्म विभूषण जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज भी हैं, जिन्होंने श्रीरामचरित मानस […] Read more » Rambhadracharya the wonderful sculptor and interpreter of Shri Ram. रामभद्राचार्य
लेख समाज सार्थक पहल बाधाओं को पार कर सशक्त बनती महादलित समाज की किशोरियां January 15, 2024 / January 15, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सिमरन सहनीमुजफ्फरपुर, बिहार 21वीं सदी के भारत ने कई क्षेत्रों में बदलाव व विकास के नए प्रतिमान स्थापित किया है. चाहे वह नए अनुसंधान का क्षेत्र हो, अभियांत्रिकी विकास, प्रौद्योगिकी विकास, बौद्धिक विकास, सामरिक क्षमता या फिर कुशल नेतृत्व की बात हो, कोई ऐसा सेक्टर नहीं है जहां भारतीयों ने अपना परचम न लहराया हो. […] Read more » Girls from Mahadalit community become empowered by overcoming obstacles.
लेख गुरु गोविन्द सिंह हिन्दू जीवन-दर्शन के पुरोधा हैं January 15, 2024 / January 15, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment गुरु गोविन्द सिंह जयन्ती- 17 जनवरी, 2024-ललित गर्ग- भारतीय जीवन मूल्यों की रक्षा और समाज को नए सिरे से संगठित एवं सशक्त करने वाले एक महापुरुष हैं गुरु गोविन्द सिंह। उनकी महान् तपस्वी, महान् कवि, महान् योद्धा, महान् संत सिपाही साहिब आदि स्वरूपों में पहचान होती है। वे सिर्फ सिखों के नहीं संपूर्ण भारतीय समाज […] Read more » गुरु गोविन्द सिंह
लेख निजता, महंगाई एवं सुविधाओं के भंवर में भारतीय समुद्री पर्यटन January 15, 2024 / January 15, 2024 by शिवेश प्रताप सिंह | Leave a Comment शिवेश प्रताप मालदीव एवं लक्षद्वीप का मुद्दा बीते दिनों विश्व चर्चा के केंद्र में आ गया। भारत में भारत के तमाम ख्यातिलब्ध लोग देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के समर्थन में उतर आए हैं जो उचित है। इसी के साथ लोगों में यह विमर्श भी चल पड़ा है की आखिर क्यों भारत को […] Read more » Indian marine tourism in the whirlpool of privacy inflation and facilities भारतीय समुद्री पर्यटन
लेख शख्सियत समाज राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर स्वामी विवेकानंद के विचार January 12, 2024 / January 15, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानन्द का जन्म आज ही के दिन 12 जनवरी 1863 को विश्वनाथ दत्त एवं माता ज्ञानेश्वरी देवी के यहाॅ कलकत्ता में हुआ,इनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। नरेन्द्रनाथ अपनी धार्मिक एवं आध्यात्मिक जिज्ञासा के कारण रामकृष्ण परमहंस के सम्पर्क में आये तब रामकृष्ण परमहंस कलकत्ता में […] Read more » Swami Vivekananda's views on national outlook
लेख वैश्विक स्तर पर हिन्दी का विस्तार January 11, 2024 / January 11, 2024 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment – लोकेन्द्र सिंह (लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार हैं। वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं।) विश्व में करीब तीन हजार भाषाएं हैं। इनमें से हिन्दी ऐसी भाषा है, जिसे मातृभाषा के रूप में बोलने वाले दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं। मातृभाषा की दृष्टि से पहले स्थान पर चीनी है। […] Read more » Expansion of Hindi globally अंतरराष्ट्रीय हिन्दी दिवस 10 जनवरी
लेख भारत को भारत बनाएं – चलें गांव की ओर January 11, 2024 / January 11, 2024 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment प्राचीन काल में भारत का पूरे विश्व में साम्राज्य था। आज ऐसे कई प्रमाण मिल रहे हैं, जिससे सिद्ध हो रहा है कि सनातन संस्कृति का अनुपालन करने वाले लोग इंडोनेशिया तक फैले थे। यह तो हम सब जानते ही हैं कि अफगनिस्तान, ईरान, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, बांग्लादेश अखंड भारत का ही हिस्सा रहे हैं। आज एक बार पुनः वैश्विक स्तर पर कई देशों का भारत की सनातन संस्कृति की ओर विश्वास बढ़ रहा है क्योंकि ये देश विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त हैं और उनकी इन समस्याओं का हल ये देश निकाल नहीं पा रहे हैं। प्रत्येक भारतीय वसुद्धैव कुटुम्बकम की भावना पर भरोसा करता है अतः पूरे विश्व को ही अपने कुटुंब का हिस्सा मानते हुए चलता है। और, यह भावना हाल ही में पूरे विश्व ने देखी भी है। कोरोना महामारी के दौरान भारत में भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के कर्मचारियों के अतिरिक्त समाज से भी लाखों लोग घर से बाहर निकले एवं समाज में कोरोना बीमारी से ग्रसित नागरिकों की सेवा की। यह केवल भारत में ही हुआ है, विश्व में अन्य देशों के बीच इस प्रकार की भावना नहीं देखी गई थी। और तो और, भारत ने विभिन्न देशों में दवाईयों एवं टीकों को पर्याप्त मात्रा में पहुंचाया भी। भारत की वास्तविक जीवन दृष्टि यही रही है। इस जीवन दृष्टि के चलते भारत को अन्य देशों से कुछ अलग माना जाता है। भारतीय एक दूसरे के साथ आत्मीय सम्बंध स्थापित करते हैं। प्रत्येक भारतीय की नजर में चर और अचर दोनों में ईश्वर व्याप्त है। इसीलिए भारत के नागरिक पूरे विश्व को आपस में जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। अनेकता में एकता, यह भारत की दृष्टि है। भारत में अनेकता को भी एक त्यौहार की तरह देखा जाता है। केवल भारत में ही इस्लाम के समस्त फिर्के, इसाईयों के विभिन्न मत, पारसी, यहूदी आदि भी बड़ी मात्रा में भारत के अन्य समाज बन्धुओं के साथ भाईचारा रखते हुए खुशी खुशी निवास करते हैं। दरअसल, भारत समाज आधारित इकाई है, पश्चिम की तरह यह राज्य आधारित इकाई नहीं है। यह भी केवल भारत की विशेषता है कि विदेशों में पले बढ़े, रचे बसे भारतीय मूल के नागरिक भारी संख्या में भारत वापिस आकर यहां पुनः भारत के ही बन जाते हैं। इनमें से भारतीय मूल के कई नागरिक तो अपने शेष बचे जीवन को जीने के लिए भारत के गांवों को चुनते हैं। भारत के गांवों में नैसर्गिक जीवन है। गांवों में निवास कर रहे नागरिकों के बीच आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं है। आज भारत के गांव पक्की सड़कों के माध्यम से शहरों के साथ जुड़ गए हैं। 24 घंटे बिजली उपलब्ध रहती है। इंटरनेट जैसी समस्त आधुनिक सुविधाएं भी भारतीय गावों में उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर आज भारत के गांवों में समस्त प्रकार की आधारभूत संरचना विकसित हो चुकी है। गांवों में तुलनात्मक रूप से खर्च भी कम होता है। इसके ठीक विपरीत आज शहरों पर अत्यधिक जनसंख्या का दबाव है एवं शहरों का पर्यावरण बिगड़ रहा है। पश्चिमी सभ्यता ने मानव जाति का सबसे अधिक नुक्सान किया है। आर्थिक विकास के नाम पर नागरिकों के आपसी भाईचारे को खत्म किया है। प्रत्येक नागरिक केवल अपने बारे में ही सोचता है और चाहता है कि मैं जल्दी से जल्दी किस प्रकार अमीर बनूं, चाहे इसके लिए उसे कुछ गलत कार्य भी क्यों न करना पड़े। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए खाद एवं बीज के नाम पर रासायनिक पदार्थों का उपयोग अत्यधिक मात्रा में किया गया है, इससे जमीन बांझ बन गई है। आज पूरे विश्व में किसान जैविक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं एवं जैविक खेती के माध्यम से उगाए गए फल, सब्जियां महंगे दाम पर भी खरीदने को नागरिक लालायित हो रहे हैं। प्राचीन काल में भारत में कृषि कार्य केवल जैविक खेती के माध्यम से ही क्या जाता था। इसलिए उस खंडकाल में नागरिक बीमारियों से ग्रस्त भी नहीं होते थे। नागरिक ग्रामों में ही हृष्ट पुष्ट, स्वस्थ एवं हंसी खुशी से आपसी भाईचारे से रहते थे।अन्य देशों के साथ साथ आज भारतीय शहरों में भी ग्रामीण नागरिकों के बीच पाई जाने वाली विशेषताओं का अभाव दिखाई देता है। उक्त कारणों के बीच यदि भारत को एक बार पुनः भारत बनाना है तो हमें गांवों की ओर लौटना होगा। इसकी शुरुआत शहरों में रह रहे युवाओं द्वारा की जा सकती है। आज भारत का युवा तकनीक के क्षेत्र में बहुत आगे निकाल आया है। वे यदि शहरों के स्थान पर अपनी विनिर्माण इकाईयों की स्थापना ग्रामों में करते हैं तो इससे ग्रामीण आबादी का शहरों की ओर पलायन रुकेगा क्योंकि रोजगार के अवसर ग्रामीण इलाकों में ही निर्मित होंगे। ग्रामों में रहकर नैसर्गिक जीवन का आनंद भी उठाया जा सकेगा। प्राचीन भारत में भी छोटे छोटे उद्योग ग्रामीण इलाकों में स्थापित किए जाते थे और उत्पादित वस्तुओं का बाजार भी इन्हीं इलाकों में आसानी से उपलब्ध रहता था। इसके कारण वस्तुओं के दाम तो बढ़ते ही नहीं थे बल्कि उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता के चलते वस्तुओं के दाम सदैव नियंत्रण में रहते थे और कई बार तो कम ही होते रहते थे। मुद्रा स्फीति की समस्या प्राचीन भारत में थी ही नहीं। युवा वर्ग के ग्रामों की ओर रूख करने से ग्रामीण नागरिकों के शिक्षा के स्तर को सुधारा जा सकता है। स्वास्य सेवाओं को सुधारा जा सकता है। यदि 10 ग्रामों के एक समूह में एक भी अच्छा डॉक्टर उपलब्ध हो जाता है तो कम से कम इस समूह के ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाओं में तो सुधार होने ही लगेगा। आज गांवों से नागरिकों को अपने इलाज के लिए शहरों की ओर रूख करना होता है। अच्छे युवा डॉक्टरों को गांवों की ओर मुड़ना चाहिए। असली भारत तो आज भी गांवों में ही बसा है। भारत की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी आज भी ग्रामों में ही निवास करती है। आज की युवा पीढ़ी ग्रामों की ओर रूख करने के सम्बंध में गम्भीरता से विचार करे। भारत में कार्य कर रही विभिन्न आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों को भी इस ओर विशेष ध्यान देने की आज आवश्यकता है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान केवल 16 प्रतिशत के आसपास रहता है जबकि देश की 60 प्रतिशत आबादी ग्रामों में निवास कर रही है। इस वर्ग की प्रति व्यक्ति आय तुलनात्मक रूप से बहुत कम है। इस वर्ग को यदि मध्यम वर्ग में बदला जा सके तो भारत में ही उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने लगेगी इससे देश के आर्थिक विकास को पंख लग सकते हैं। भारत की युवा पीढ़ी के विशेष रूप के वे नागरिक जो विदेश में अपनी पढ़ाई सम्पन्न कर भारत लौटे हैं एवं वे भारत में अपना नया कारोबार प्रारम्भ करना चाहते हैं, उन्हें अपना नया कारोबार भारत के गांवों में प्रारम्भ करने के बारे में गम्भीरता से विचार करना चाहिए। इससे भारत को पुनः भारत बनाने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। ऐसा कहा भी जाता है कि भारत की आत्मा आज भी गांवों में ही निवास करती है। युवा उद्यमी यदि गांव की ओर रूख करेंगे तो निश्चित ही भारत के आर्थिक विकास को अगले लेवल पर पहुंचाया जा सकेगा, और भारत की आर्थिक विकास दर 10 प्रतिशत से भी आगे निकल सकती है। Read more »
लेख युवा भारत के लिए स्वामी विवेकानंद का संदेश January 11, 2024 / January 11, 2024 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमारवर्तमान भारत वर्ष युवा भारत है और इस युवा भारत को युवा संन्यासी स्वामी विवेकानंद ने संदेश दिया था कि ‘व्यक्ति कितना ही बड़ा क्यों ना हो, उसका अंधानुसरणना करें।’ आज के युवा भारत के लिए स्वामी विवेकानंद का यह संदेश एक मार्गदर्शक के रूप में स्थापित है. 1893 में इसी सन्यांसी स्वामी विवेकानंद […] Read more » Swami Vivekananda's message for young India
लेख कभी वज्र थी किसान की छाती, अब कमजोर क्यों ? January 11, 2024 / January 11, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment कृषि कल्याण आयोग गठित कर किसान को दी जा सकती है सुरक्षा – आत्माराम यादव पीव भारत के किसान को देश का मेरुदंड माना गया है ओर उसके जीवन के संघर्षों से उबरकर साहसी बनने के कारण ही कभी उसकी छाती व्रज के समान कठोर हुआ करती थी, जो किसान को उसकी […] Read more » The farmer's chest was once a thunderbolt