लेख योगगुरू बाबा रामदेव ने सरकार को औक़ात बतादी है! October 2, 2011 / October 2, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 7 Comments on योगगुरू बाबा रामदेव ने सरकार को औक़ात बतादी है! इक़बाल हिंदुस्तानी बाबा को घेरने का षडयंत्र नाकाम होने से सरकार नतमस्तक! सरकार अब बाबा रामदेव के अभियान पर सफार्इ देती नज़र आ रही है। उसका कहना है कि कालेधन के प्रवाह पर नज़र रखने के लिये 16 देशों से बातचीत पूरी हो चुकी है। हालांकि सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है कि […] Read more » Baba Ramdev योगगुरू बाबा रामदेव
लेख एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय October 1, 2011 / December 6, 2011 by बृजनन्दन यादव | 2 Comments on एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय बृजनन्दन यादव वे एक ऐसे राजनेता थे जिन्हें सत्ता में कोर्इ आकर्षण नहीं था। फिर भी अपने अनुयायियों के दिलों पर राज करते थे। वे राजनीति को राष्ट्रसेवा का अंग मानते थे। पंडित दीनदयाल जी का जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा के निकट नगला चन्द्रभान नामक गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। […] Read more » pt. deendayal upadyay एकात्म मानववाद के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय
लेख नवजागरण काल में लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा और हिन्दी पत्रकारिता October 1, 2011 / December 6, 2011 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डा. मयंक चतुर्वेदी नव जागरण से तात्पर्य है भारत में आधुनिकता का प्रवेश, वैज्ञानिक दृषिटकोण का विकसित होना और किसी भी घटना के परिप्रेक्ष्य में तार्किक मीमांसा के लिए तैयार हो जाना अर्थात तर्क-विर्तक की खुली परम्परा का प्रारंभ। भारतीय सन्दर्भ में इस नवजागरण काल का श्रेय हम अंग्रेजों को दे सकते है, क्योंकि प्राचीन […] Read more » hindi journalism लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा हिन्दी पत्रकारिता
लेख श्रीलाल शुक्ल और रागदरबारी September 29, 2011 / December 6, 2011 by वीरेन्द्र जैन | 4 Comments on श्रीलाल शुक्ल और रागदरबारी वीरेन्द्र जैन इसमें कोई सन्देह नहीं कि हिन्दी व्यंग्य के भीष्मपितामह हरिशंकर परसाई ही माने जाते हैं किंतु गत शताब्दी के सातवें दशक में अपने व्यंग्य उपन्यास रागदरबारी के प्रकाशन के बाद श्रीलाल शुक्लजी ने अपनी कुर्सी परसाई जी के बगल में ही डलवा ली थी। यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे कि मतभेद निराकरण […] Read more »
लेख पत्रकारों की बदलती दिशा और दशा September 29, 2011 / December 6, 2011 by डॉ0 शशि तिवारी | 2 Comments on पत्रकारों की बदलती दिशा और दशा डॉ. शशि तिवारी शब्दों में वो ताकत होती है जो बन्दूक की गोली, तोप के गोले एवं तलवार में नहीं होती है। अस्त्र-शस्त्र से घायल व्यक्ति की सीमा शरीर होता है जो देर-सबेर ठीक हो ही जाता है लेकिन, शब्द से मानव की आत्मा घायल होती है, इस पीड़ा को जीवन-पर्यन्त तक नहीं भुलाया जा […] Read more » journalist पत्रकारों की बदलती दिशा और दशा
लेख नरेंद्र भाई अभी दिल्ली दूर है… September 29, 2011 / December 6, 2011 by श्रीराम तिवारी | 8 Comments on नरेंद्र भाई अभी दिल्ली दूर है… श्रीराम तिवारी भारत में राजनीति को कुआँर की कुतिया समझ कर सरे राह लतियाने वालों में दिग्भ्रमित विपक्ष और टी आर पी रोग से पीड़ित -प्रिंट,श्रव्य,दृश्य और बतरस मीडिया का नाम पहले आता है.भारत को बर्बाद करने में जुटी पाकिस्तान कि खुफिया एजेंसी आई एस आई,उसके द्वारा प्रेरित -पोषित घृणित आतंकवादियों,अलगाववादियों,नक्सलवादियों,पूंजीवादी -सामंती शोषण कि ताकतों,एनजीओ […] Read more » Narendra Modi
लेख बाबा रामदेव की हुंकार में समझदारी September 28, 2011 / December 6, 2011 by प्रमोद भार्गव | 6 Comments on बाबा रामदेव की हुंकार में समझदारी प्रमोद भार्गव महारानी लक्ष्मीबाई की कर्मस्थली रही झांसी से बाबा रामदेव ने कालाधन वापिस लाने की जो हुंकार भरी है, वह अब समझदारी का पर्याय भी दिखाई दे रही है। स्वाभिमान यात्रा के नाम से आगाज हुआ यह अभियान परिपक्वता का पर्याय भी बन रहा है। दूध का जला छाछ भी फूंकफूंक कर पीता है, […] Read more » Baba Ramdev बाबा रामदेव
लेख भारत माता के देश में लाचार है जननी September 28, 2011 / December 6, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे दुनिया के चौधरी अमेरिका की मशहूर पत्रिका न्यूजवीक ने एक सर्वे कराया है जिसमें भारत गणराज्य में महिलाओं की दयनीय स्थिति का वर्णन मिलता है। भारत को सौ में से महज 41.9 अंक ही मिल पाए हैं। जिस देश का पहला नागरिक महिला हो, जिस देश में लोकसभाध्यक्ष महिला हो, जिस देश के […] Read more » indian mother भारत माता लाचार है जननी
लेख संयुक्त राष्ट्र में भी मनमोहन सिंह विकास के मायाजाल से नहीं निकल सके September 28, 2011 / December 6, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment सतीश सिंह आजकल मनमोहन सिंह विकास और गरीबी उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। विगत सप्ताह ही योजना आयोग ने शहरों में प्रति दिन 32 रुपये और गाँवों में प्रति दिन 26 रुपये कमाने वालों को गरीबी से निजात दिलाया है। इसके बरक्स में योजना आयोग ने सर्वोच्च न्यायलय में दाखिल अपने हलफनामें में साफ तौर […] Read more » मनमोहन सिंह विकास के मायाजाल संयुक्त राष्ट्र
लेख भ्रष्टाचार देश की बड़ी समस्या September 28, 2011 / December 6, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 5 Comments on भ्रष्टाचार देश की बड़ी समस्या सुनील कुमार बंसल आज देश के सामने कई प्रकार की समस्यायें हैं जिनके साथ हम रोजाना जूझ भी रहे हैं व उनके साथ जी भी रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या कौन सी है इसको लेकर समाज में अलग-अलग प्रकार के लोगों के अलग-अलग मत हो सकते हैं। अनुभव ऐसा है कि जो जिस समय […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार देश की बड़ी समस्या
महत्वपूर्ण लेख लेख राहुल गाँधी के बयान September 28, 2011 / December 6, 2011 by शंकर शरण | 2 Comments on राहुल गाँधी के बयान शंकर शरण अब विदेशियों को भी राहुल गाँधी से निराशा हो रही है। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की शोध संस्था ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि राहुल गाँधी बोलने में प्रायः गड़बड़ा जाते हैं। 94 पृष्ठों की यह रिपोर्ट भारत की स्थिति पर है, और इस में अगले लोक सभा चुनाव के बारे में […] Read more » Rahul Gandhi राहुल गाँधी के बयान
लेख भावनाएँ September 16, 2011 / December 6, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment जितेन्द्र माथुर मानवीय जीवन का एक अविभाज्य अंग हैं भावनाएँ । भावनाओं के बिना जीवन कैसा ? भावनाएँ ही तो हैं जो कि एक रुखेसूखे और रंगहीन जीवन को रसरंगयुक्त बनाती हैं । एक भावनाविहीन जीवन उपयोगी तो हो सकता है लेकिन उसकी उपयोगिता सीमित ही रहेगी । यदि व्यक्ति भावनाओं से रहित है तो […] Read more » feelings भावनाएँ