कला-संस्कृति लेख वर्त-त्यौहार रंगत खोते हमारे सामाजिक त्यौहार। November 6, 2023 / November 6, 2023 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment बाजारीकरण ने सारी व्यवस्थाएं बदल कर रख दी है। हमारे उत्सव-त्योहार भी इससे अछूते नहीं रहे। शायद इसीलिए प्रमुख त्योहार अपनी रंगत खोते जा रहे हैं और लगता है कि त्योहार सिर्फ औपचारिकताएं निभाने के लिए मनाये जाते हैं। किसी के पास फुरसत ही नहीं है कि इन प्रमुख त्योहारों के दिन लोगों के दुख […] Read more » Our social festivals are losing their colour.
पर्यावरण राजनीति लेख सांसों का ये कैसा आपातकाल? November 6, 2023 / November 6, 2023 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment टूट रहे हैं प्रदूषण के सारे रिकॉर्ड– योगेश कुमार गोयलदिल्ली-एनसीआर की हवा में दीवाली से कुछ दिन पहले ही इस कदर जहर घुल चुका है और हवा इतनी दमघोंटू हो चुकी है कि लोगों को न केवल सांस लेना मुश्किल हो गया है बल्कि अन्य खतरनाक बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। केन्द्रीय प्रदूषण […] Read more » What kind of respiratory emergency is this?
लेख मेरे ही कफन का साया छिपाया है November 4, 2023 / November 4, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment ओठों ने करके दफन अपने तेरे प्यार को भुलाया है सताया है रूलाया है मुझे तेरा यादों ने बुलाया है। चाहा था दिल में, हम गम की कब्र खोदेगें दिल का क्या कसूर, जो इसमें गम ही नहीं समाया है। दिखती है मेरे लबों पर, तुमको जमाने भर की हंसी हॅसी में मेरे ही कफन का, मैंने साया छिपाया […] Read more » मेरे ही कफन का साया छिपाया है
आर्थिकी लेख वैश्विक स्तर पर नया आकार ले रहा है भारत का सांस्कृतिक वैभव November 4, 2023 / November 4, 2023 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारतीय सनातन संस्कृति, सभ्यता और परम्पराएं विश्व में सबसे अधिक प्राचीन मानी जाती है। भारतीय संस्कृति को विश्व की अन्य संस्कृतियों की जननी भी माना गया है। भारत की संस्कृति और सभ्यता आदि काल से ही अपने परम्परागत अस्तितिव के साथ अजर अमर बनी हुई है। भारत में गीत संगीत, नाटक परम्परा, लोक परम्परा, धार्मिक […] Read more » India's cultural splendor is taking a new shape at the global level
पर्यावरण लेख अंतर्राष्ट्रीय सोलर गठबंधन सोलर परियोजनाओं की वायबिलिटी गैप फंडिंग में करेगा इज़ाफ़ा November 3, 2023 / November 3, 2023 by निशान्त | Leave a Comment विकासशील देशों में सोलर एनर्जी को अपनाने में तेजी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अंतर्राष्ट्रीय सोलर गठबंधन (आईएसए) ने सोलर परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता या वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ़) में पर्याप्त वृद्धि की घोषणा की है. आईएसए, जिसमें 120 से अधिक सदस्य देश शामिल हैं, निवेश के अवसरों को बढ़ाने और स्वच्छ, टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा […] Read more » International Solar Alliance to increase viability gap funding for solar projects
लेख विधि-कानून विविधा समाज आवारा पशुओं का बढ़ता आतंक November 2, 2023 / November 2, 2023 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी हमारे देश का सत्ता नेतृत्व देश के आमजन की सुरक्षा की चाहे जितनी बातें करे ,अपनी तुलना स्वयंभू रूप से पश्चिमी देशों से करने लगे और इसी मुग़ालते में स्वयं को विश्व गुरु भी बताने लग जाये परन्तु हक़ीक़त तो यह है कि हमारे देश में किसी भी साधारण व्यक्ति चाहे वह बच्चा […] Read more »
राजनीति लेख खुदकुशी का बढ़ता दायरा एवं विकृत होती संवेदनाएं November 2, 2023 / November 2, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग सभ्य समाज में आत्महत्या या छोटी-छोटी बातों पर हत्या कर देने की घटनाओं का बढ़ना गहन चिन्ता का विषय है। आत्महत्या एवं हत्या की खबरें तथाकथित समाज विकास की विडम्बनापूर्ण एवं त्रासद तस्वीर को बयां करती है। इस तरह आत्महत्या एवं हत्या करना जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो […] Read more » Increasing scope of suicide and distorted sensibilities
राजनीति लेख हवा के रूप में जहर खींचने की विवशता कब तक? November 1, 2023 / November 1, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- इस वर्ष फिर से दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पराली एवं वायु प्रदूषण से उत्पन्न दमघोटू माहौल का संकट जीवन का संकट बनता जा रहा हैं। दिल्ली-एनसीआर में हवा की क्वालिटी बेहद खराब यानी जानलेवा बनती जा रही है। अभी सर्दी शुरु भी नहीं हुई है, इस मौसम में ऐसा […] Read more » हवा के रूप में जहर
धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार लेख सुहागिनों का सबसे बड़ा त्यौहार है करवा चौथ November 1, 2023 / November 1, 2023 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment करवा चौथ (1 नवम्बर) पर विशेष– योगेश कुमार गोयलकरवा चौथ पर्व का हमारे देश में विशेष महत्व है क्योंकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और रात को चांद देखकर पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलती हैं। भारतीय समाज में वैसे तो महिलाएं विभिन्न अवसरों […] Read more » करवा चौथ
लेख रिश्तों की अंधी दुनिया में गुम होती किशोर पीढ़ी November 1, 2023 / November 1, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – सोशल मीडिया, मोबाइल एवं संचार-क्रांति से दुनिया तो सिमटती जा रही लेकिन रिश्तों में फासले बढ़ते जा रहे हैं। भौतिक परिवर्तनों, प्रगति के आधुनिक संसाधनों एवं तथाकथित नये जीवन का क्रांतिकारी दौर हावी हैं। लेकिन हम सामाजिक-पारिवारिक-सांस्कृतिक प्रभावों के प्रति उतने सजग नहीं है जितना बदलावों की आंधी के दौर में […] Read more »
राजनीति लेख हादसों की खूनी सड़कों पर डरावनी रिपोर्ट November 1, 2023 / November 1, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग- सड़क हादसों पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की की डरावनी, चिन्ताजनक एवं भयावह रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक, पिछले साल 4.61 लाख सड़क हादसे हुए। इन दुर्घटनाओं में 1.68 लाख लोगों ने जान गंवाई। इन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि तकरीबन हर एक घंटे में 53 सड़क […] Read more » खूनी सड़कों पर डरावनी रिपोर्ट
राजनीति लेख वैश्विक स्तर पर भारतीय सनातन संस्कृति के पालन से ही शांति सम्भव October 30, 2023 / October 30, 2023 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment आज पूरे विश्व में अशांति एवं अराजकता का माहौल है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल ही रहा था कि हमास और इजराईल के बीच युद्ध प्रारम्भ हो गया है एवं इस युद्ध में लेबनान एवं सीरिया भी कूद पड़े हैं। इधर चीन की विस्तारवादी नीतियों के चलते उसके अपने लगभग सभी पड़ौसी देशों के साथ सम्बंध अच्छे नहीं चल रहे हैं। ताईवान, मंगोलिया, जापान, इंडोनेशिया, फिलिपीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, भारत आदि जैसे शांतिप्रिय देश भी आज चीन की नीतियों से बहुत परेशान हैं। एक तरफ तो विकसित देश अपनी आर्थिक नीतियों के असफल होने के कारण कई प्रकार की आर्थिक एवं सामाजिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर अफ्रीकी महाद्वीप क्षेत्र में कई देश अभी भी आर्थिक विकास को तरस रहे हैं और इन देशों के नागरिक गरीबी का जीवन जीने को मजबूर हैं। कुल मिलाकर पूरे विश्व में ही त्राहि त्राहि मची हुई है। इन समस्त विपरीत परिस्थितियों के बीच आज भारत की आर्थिक विकास दर विश्व की समस्त बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लगातार सबसे तेज बनी हुई है, क्योंकि भारत आज अपनी सनातन संस्कृति का पालन करते हुए ही आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, आदि क्षेत्रों में कार्य करता हुआ दिखाई दे रहा है एवं इसके चलते भारत आज कई क्षेत्रों में पूरे विश्व को राह दिखा रहा है। वैसे भी किसी भी राष्ट्र के मूल में कुछ तत्व निहित होते हैं, जिनके बल पर वह देश आगे बढ़ता है और समाज के विभिन्न वर्गों को एकता के सूत्र में पिरोए रखता है। भारत के एक राष्ट्र के रूप में, इसके मूल में, सनातन हिंदू संस्कृति का आधार है जो हजारों वर्षों से भारत को आज भी भारत के मूल रूप में ही जीवित रखे हुए है। अन्यथा, पिछले लगभग 1000 वर्षों में भारत को तोड़ने के लिए अरब के आक्रांताओं और अंग्रेजों के द्वारा अनेकानेक प्रयास किए गए हैं। अरब के आक्रांताओं एवं अंग्रेजों ने बहुत अधिक प्रयास किए कि किसी तरह भारतीय मूल संस्कृति को तहस नहस किया जाय, शिक्षा पद्धति को ध्वस्त किया जाय, बलात हिंदुओं का धर्म परिवर्तन किया जाय, आदि आदि। इन प्रयासों में उन्हें कुछ सफलता तो अवश्य मिली परंतु पूर्ण रूप से भारतीय संस्कृति को समाप्त नहीं कर पाए। जबकि कई अन्य देशों (ईरान, लेबनान, इंडोनेशिया, मिस्त्र, ग्रीक आदि) में इनके यही प्रयास पूर्ण रूप से सफल रहे एवं वहां के लगभग सम्पूर्ण नागरिकों को इस्लाम में परिवर्तित करने में वे सफल रहे। भारत में चूंकि सनातन हिंदू धर्म का बोलबाला है अतः यहां इन तत्वों को आज तक सफलता नहीं मिली है हालांकि इनके प्रयास अभी भी जारी हैं। अंग्रेजों ने जब भारत पर शासन करना प्रारम्भ किया तो उनका अज्ञानतावश यह सोच था कि यहां के नागरिक कुछ जानते ही नहीं है और इनकी विज्ञान के प्रति कोई समझ ही नहीं है।उनका यह भी सोच था कि भारत कई राज्यों का एक समूह है और यह एक राष्ट्र नहीं है। अंग्रेज तो यह भी सोचते थे कि भारत कभी एक राष्ट्र नहीं रहा है, ना ही अभी यह एक राष्ट्र है और न ही कभी भविष्य में यह एक राष्ट्र रह पाएगा। क्योंकि यहां तो विभिन्न राजा राज्य करते हैं और उनके राज्यों की अलग अलग भौगोलिक सीमाएं हैं इसलिए भारत का एक राष्ट्र्र के रूप में कभी अस्तित्व ही नहीं रहा है। अंग्रेज यह भी मानते थे कि पूरे भारत के लोग एक हो जाएंगे यह कभी सम्भव ही नहीं है। अंग्रेज अहंकारवश भारतीयों को अनपढ़, असभ्य एवं रूढ़िवादी तक कहते थे। उनकी नजरों में भारतीयों की कोई एतिहासिक उपलब्धि नहीं है एवं भारत के बर्बर, जंगली लोगों को सभ्यता सिखाने का दायित्व हमारा (अंग्रेजों का) है। भारत के लोग प्रशासन करने के अयोग्य है। किसी कारण से यदि भारत को स्वतंत्र राष्ट्र्र का दर्जा दे दिया तो इस देश की बर्बादी सुनिश्चित है और फिर इसकी जवाबदारी हमारी (अंग्रेजों की) होगी। उनको विशेष रूप से हिंदुओं से बहुत डर लगता था और वे हिंदुओं से सावधान रहने की आवश्यकता पर बल दिया करते थे। उनका सोच था कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत बहुत जल्दी बर्बाद हो जाएगा। भारत में लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता, यह बहुत ही अस्वाभाविक राज्य है। भारत आजाद होते ही कई टुकड़ों में बिखर जाएगा क्योंकि यहां 52 करोड़ लोग हैं एवं इनकी अलग अलग भाषाएं हैं ये आपस में लड़ते रहते हैं और कभी भी एक नहीं रह पाएंगे। भारत आजादी के बाद पूरी दुनिया के लिए एक भार बन जाएगा एवं यहां के नागरिक भूख से ही मर जाएगे। उक्त सोच ब्रिटेन, अमेरिका, लगभग समस्त यूरोपीय देशों सहित कई देशों की भी थी। आज भी आतंकवादी संगठन एवं विदेशी ताकतें जो भारत को अस्थिर करना चाहते हैं वे इसी परिकल्पना पर अपना कार्य प्रारम्भ करते हैं एवं समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में लड़ाने का प्रयास करते नजर आते हैं। उक्त वर्णित देशों की यह सोच इसलिए थी क्योंकि उनके पास हिंदू सनातन संस्कृति का कोई ज्ञान नहीं था बल्कि उनकी अपनी पश्चिम रंग में रची बसी सोच थी जो केवल “मैं” में विश्वास करती थी उनके लिए देश मतलब केवल भौगोलिक सीमाओं वाला जमीन का टुकड़ा और उस जमीन के टुकड़े पर रहने वाले लोग ही विशेष हैं। उनके सोच में अहम का भाव कूट कूट कर भरा है। केवल मैं ही श्रेष्ठ हूं। इस दुनिया में रहने वाले बाकी सभी लोग हमसे हीन हैं। जर्मन लोगों ने अपना एक विशेष दर्शन शास्त्र दुनिया के सामने रखा जिसमें उन्होंने किसी और दर्शन को स्वीकार न करते हुए केवल अपने दर्शन को ही श्रेयस्कर माना एवं अहंकार का भाव जाहिर किया। जर्मन, फ्रेंच से भिन्न हैं। यूरोप में प्रत्येक देश ने अपने आप को दूसरे देश से बिलकुल अलग रखा हुआ है। पश्चिम का राष्ट्रवाद एकांतिक है इसमें समावेशिता का नितांत अभाव है। इसीलिए आज रूस, यूक्रेन के साथ लड़ रहा है तो जर्मनी की फ्रांन्स के साथ नहीं बनती है। इसी प्रकार यूरोप के लगभग सभी देशों के आपसी विचारों में किसी न किसी प्रकार की भिन्नता दृष्टिगोचर होती रहती है। जबकि यह लगभग सभी देश ईसाई धर्म को मानने वाले देश हैं। आज कई इस्लामी देश भी पश्चिमी सोच की राह पर चलते हुए दिखाई दे रहे हैं कि केवल हमारा धर्म ही श्रेष्ठ है। इस धरा पर जो भी इस्लाम को नहीं मानता हैं वह काफिर है और उसे जीने का हक नहीं हैं। काफिर या तो इस्लाम को कबूल करे अथवा वह मार दिया जाएगा। और तो और इस्लामी देशों में भी अलग अलग किस्म के कई फिर्के आपस में ही लड़ते झगड़ते रहते हैं एवं एक दूसरे को अपने से श्रेष्ठ सिद्ध करने की कोशिश में लगे रहते हैं। जबकि भारतीय विचारधारा इसके ठीक विपरीत आचरण करना सिखाती है विशेष रूप से सनातन संस्कृति में जो व्यक्ति जितना विशेष होगा वह उतना ही विनयपूर्ण होगा और इस नाते भारतीय सनातन संस्कृति अविभाजनकारी दर्शन पर चलकर सर्वसमावेशी है। इसमें ईश्वरीय भाव जाहिर होता है। जो मेरे अंदर है वही आपके अंदर भी है अर्थात मुझमें भी ईश्वर है और आपमें भी ईश्वर का वास है। इस प्रकार प्रत्येक भारतीय, चाहे वह किसी भी जाति का हो, किसी भी मत, पंथ को मानने वाला हो, अपने आप को भारत माता का सपूत कहने में गर्व का अनुभव करता है। और, इसलिए भारतीय सनातन संस्कृति अन्य संस्कृतियों को भी अपने आप में आत्मसात करने की क्षमता रखती है। इतिहास में इस प्रकार के कई उदाहरण दिखाई देते हैं। जैसे पारसी आज अपने मूल देश में नहीं बच पाए हैं लेकिन भारत में वे रच बस गए हैं। इसी प्रकार इस्लाम धर्म को मानने वाले लगभग सभी फिर्के भारत में निवास करते हैं जबकि विश्व के कई इस्लामी देशों में केवल एक विशेष प्रकार के फिर्के पाए जाते हैं। भारतीय चिंतन धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार स्तंभों पर स्थापित है। इस दृष्टि से चाहे व्यक्ति हो, परिवार हो, देश यो अथवा विश्व हो, किसी के भी विषय में चिंतन का आधार एकांगी न मानकर एकात्म माना जाता है। भारत के उपनिषदों, वेदों, ग्रंथों में भी यह बताया गया है कि मनुष्य का जीवन अच्छे कर्मों को करने के लिए मिलता है एवं देवता भी मनुष्य के जीवन को प्राप्त करने के लिए लालायित रहते हैं। अच्छे कर्म कर मनुष्य अपना उद्धार कर सकता है इसीलिए भारतीय धरा को कर्मभूमि माना गया है जबकि अन्य देशों की धराओं को भोगभूमि कहा गया है। अन्य धर्म, भोग को बढ़ावा देते हैं जबकि हिंदू सनातन संस्कृति योग को बढ़ावा देती है। इस प्रकार हिंदू धर्म के शास्त्रों, पुराणों एवं वेदों में किसी भी जीव के दिल को दुखाने अथवा उसकी हत्या को निषिद्ध बताया गया है जबकि अन्य धर्म के शास्त्रों में इस प्रकार की बातों का वर्णन नहीं मिलता है। इसी कारण के चलते हिंदू धर्म को मानने वाले अनुयायी बहुत कोमल स्वभाव एवं पूरे विश्व में निवास कर रहे प्राणियों को अपने कुटुंब का सदस्य मानने वाले होते हैं। बचपन में ही इस प्रकार की शिक्षाएं हमारे बुजुर्गों द्वारा प्रदान की जाती हैं। भारतीय संस्कृति में एकात्मता का सोच है। भारत पूरे विश्व की मंगल कामना करता है एवं “वसुधैव कुटुम्बकम”, “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय”, जैसे सिद्धांतो पर विश्वास करता है। चाहे किसी भी व्यक्ति की कोई भी पूजा पद्धति क्यों न हो, पूरे भारत में एक जैसा हिंदू दर्शन है। हिंदू दर्शन ही भारत में राष्ट्र तत्व है जो पश्चिम की सोच से अलग है। हिंदू दर्शन एक मौलिक दर्शन है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, अंग्रेजों एवं अन्य कई देशों की सोच के ठीक विपरीत, विभिन्न मत, पंथों को मानने वाले भारतीय 26 विभिन्न राष्ट्रीय भाषाओं के साथ न केवल सफलतापूर्वक एक दूसरे के साथ तालमेल बिठाकर आनंद में रह रहे हैं बल्कि आज भारतीय लोकतंत्र पूरे विश्व में सबसे बड़े मजबूत लोकतंत्र के रूप में अपना स्थान बना चुका है। यह केवल सनातन हिंदू संस्कृति के कारण ही सम्भव हो सका है। सनातन हिंदू संस्कृति में एकात्मता का भाव मुख्य रूप से झलकता है। अतः वर्तमान में आतंकवादियों एवं अन्य कई देशों द्वारा पूरे विश्व में अस्थिरता फैलाने के जो प्रयास किए जा रहे हैं उन्हें भारतीय सनातन हिंदू संस्कृति के दर्शन को अपनाकर ही पूर्णतः दबाया जा सकता है। वैसे हाल ही के समय में कई देशों यथा, जापान, रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंडोनेशिया आदि आदि में भारतीय संस्कृति के प्रति रूझान बढ़ता जा रहा है। अब तो विश्व के कई विकसित देशों को भी यह आभास होने लगा है कि भारतीय सनातन संस्कृति इस धरा पर सबसे पुरानी संस्कृतियों में एक है और भारतीय वेदों, पुराणों एवं पुरातन ग्रंथों में लिखी गई बातें कई मायनों में सही पाई जा रही हैं। इन पर विश्व के कई बड़े बड़े विश्वविद्यालयों में शोध किए जाने के बाद ही यह तथ्य सामने आ रहे है। अतः कई देशों को अब यह आभास होने लगा है कि भारतीय सनातन संस्कृति को अपनाकर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। Read more » Peace is possible only by following Indian Sanatan Sanskriti at global level