लेख अनिश्चित भविष्य एवं आभासी दुनिया से दुःखी युवापीढ़ी September 15, 2025 / September 15, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – पूरी दुनिया की सरकारें युवा के मुद्दों, उनमें बढ़ रहे तनाव एवं दुःखों और उनकी बातों पर ध्यान आकर्षित करे। न केवल सरकारें बल्कि आम-जनजीवन में भी युवकोें की स्थिति, उनके सपने, उनके जीवन लक्ष्य आदि पर चर्चाएं हो, अन्यथा युवकों की जीवनशैली में रचनात्मक परिवर्तन के स्थान पर हिंसा-आतंक-विध्वंस की […] Read more » The youth generation is unhappy with the uncertain future and virtual world दुःखी युवापीढ़ी
लेख हिंदी दिवस राष्ट्र की पहचान से विश्व की साझी भाषा तक हिन्दी की शक्ति September 13, 2025 / September 17, 2025 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment हिन्दी दिवस (14 सितम्बर) पर विशेष– योगेश कुमार गोयलहर वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाने वाला हिन्दी दिवस उस गौरव की स्मृति के रूप में मनाया जाता है, जब हिन्दी को भारतीय संघ की राजभाषा घोषित किया गया था। यह दिवस हिन्दी की समृद्धि, स्वीकार्यता, रचनात्मकता और वैश्विक विस्तार का उत्सव है। निरंतर बढ़ती हिन्दी […] Read more » हिन्दी दिवस
लेख हिंदी दिवस हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता के बावजूद देश में उपेक्षा क्यों? September 12, 2025 / September 12, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment हिंदी दिवस- 14 सितम्बर, 2025 हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक आयोजनात्मक अवसर नहीं, बल्कि हमारी भाषाई अस्मिता राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक आत्मगौरव का प्रयोजनात्मक प्रतीक है। विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा के रूप में हिंदी विश्व की उन चुनिंदा भाषाओं में से एक है जिसे करोड़ों लोग अपनी मातृभाषा, संपर्क भाषा और सांस्कृतिक […] Read more » Why is Hindi neglected in the country despite its global acceptance? हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता
लेख शख्सियत समाज परमपूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी का वैराग्य नैसर्गिक था September 11, 2025 / September 11, 2025 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (43वीं पुण्यतिथि 13 सितम्बर 2025 पर विशेष) स्वामी ब्रह्मानंद का व्यक्तित्व महान था। उन्होंने समाज सुधार के लिए काफी कार्य किए। देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने जहां स्वयं को समर्पित कर कई आंदोलनों में जेल काटी। आजादी के बाद देश की राजनीति में भी उनका भावी योगदान रहा है। स्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही कार्य किए। समाज के लोगों को शिक्षा की ओर ध्यान देने का आह्वान किया। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 04 दिसंबर 1894 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज जी के पिता का नाम मातादीन लोधी तथा माता का नाम जशोदाबाई था। स्वामी ब्रह्मानंद के बचपन का नाम शिवदयाल था। स्वामी ब्रह्मानंद ने बचपन से ही समाज में फैले हुए अंधविश्वास और अशिक्षा जैसी कुरीतियों का डटकर विरोध किया। स्वामी ब्रह्मानंद जी की प्रारम्भिक शिक्षा हमीरपुर में ही हुई। इसके पश्चात् स्वामी ब्रह्मानंद जी ने घर पर ही रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया। इसी समय से लोग उन्हें स्वामी ब्रह्मानंद से बुलाने लगे। कहा जाता है कि बालक शिवदयाल के बारे में संतों ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो राजा होगा या प्रख्यात सन्यासी। बालक शिवदयाल का रुझान आध्यात्मिकता की तरफ ज्यादा होने के कारण पिता मातादीन लोधी को डर सताने लगा कि कहीं वे साधु न बन जाए। इस डर से मातादीन लोधी ने स्वामी ब्रह्मानंद जी का विवाह सात वर्ष की उम्र में हमीरपुर के ही गोपाल महतो की पुत्री राधाबाई से करा दिया। आगे चलकर राधाबाई ने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया। लेकिन स्वामी जी का चित्त अब भी आध्यात्मिकता की तरफ था। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 24 वर्ष की आयु में पुत्र और पत्नी का मोह त्याग गेरूए वस्त्र धारण कर परम पावन तीर्थ स्थान हरिद्वार में भागीरथी के तट पर ‘‘हर कि पेड़ी’’ पर सन्यास कि दीक्षा ली। संन्यास के बाद शिवदयाल लोधी संसार में ‘‘स्वामी ब्रह्मानंद’’ के रूप में प्रख्यात हुए। संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी ब्रह्मानंद ने सम्पूर्ण भारत के तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। इसी बीच उनका अनेक महान साधु संतों से संपर्क हुआ। इसी बीच उन्हें गीता रहस्य प्राप्त हुआ। पंजाब के भटिंडा में स्वामी ब्रह्मानंद जी की महात्मा गांधी जी से भेंट हुई। गांधी जी ने उनसे मिलकर कहा कि अगर आप जैसे 100 लोग आ जायें तो स्वतंत्रता अविलम्ब प्राप्त की जा सकती है। गीता रहस्य प्राप्त कर स्वामी ब्रह्मानंद ने पंजाब में अनेक हिंदी पाठशालाएँ खुलवायीं और गोवध बंदी के लिए आंदोलन चलाये। इसी बीच स्वामी जी ने अनेक सामाजिक कार्य किये 1956 में स्वामी ब्रह्मानंद को अखिल भारतीय साधु संतों के अधिवेशन में आजीवन सदस्य बनाया गया और उन्हें कार्यकारिणी में भी शामिल किया गया। इस अवसर पर देश के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी सम्मिलित हुए। स्वामी जी सन् 1921 में गाँधी जी के संपर्क में आकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। स्वतंत्रता आन्दोलन में भी स्वामी ब्रह्मानंद जी ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 1928 में गांधी जी स्वामी ब्रह्मानंद के प्रयासों से राठ पधारे। 1930 में स्वामी जी ने नमक आंदोलन में हिस्सा लिया। इस बीच उन्हें दो वर्ष का कारावास हुआ। उन्हें हमीरपुर, हरदोई और कानपूर कि जेलों में रखा गया। उन्हें पुनः फिर जेल जाना पड़ा। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने पूरे उत्तर भारत में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लोगों में अलख जगाई। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय स्वामी जी का नारा था उठो! वीरो उठो!! दासता की जंजीरों को तोड फेंको। उखाड़ फेंको इस शासन को एक साथ उठो आज भारत माता बलिदान चाहती है। उन्होने कहा था की दासता के जीवन से म्रत्यु कही श्रेयस्कर है। बरेली जेल में स्वामी ब्रह्मानंद की भेट पंडित जवाहर लाल नेहरू जी से हुई। जेल से छूटकर स्वामी ब्रह्मानंद शिक्षा प्रचार में जुट गए। 1942 में स्वामी जी को पुनः भारत छोडो आंदोलन में जेल जाना पड़ा। स्वामी जी ने सम्पूर्ण बुंदेलखंड में शिक्षा की अलख जगाई आज भी उनके नाम से हमीरपुर में डिग्री कॉलेज चल रहा है। जिसकी नीव स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 1938 में ब्रह्मानंद विद्यालय के रूप में रखी। 1966 में गौ हत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद ने 10-12 लाख लोगों के साथ संसद के सामने आंदोलन किया। गौहत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद को गिरप्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। तब स्वामी ब्रह्मानंद ने प्रण लिया कि अगली बार चुनाव लड़कर ही संसद में आएंगे। स्वामी जी 1967 से 1977 तक हमीरपुर से संासद रहे। जेल से मुक्त होकर स्वामी जी ने हमीरपुर लोकसभा सीट से जनसंघ से 1967 में चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीतकर संसद भवन पहुंचे। देश की संसद में स्वामी ब्रह्मानंद जी पहले वक्ता थे जिन्होने गौवंश की रक्षा और गौवध का विरोध करते हुए संसद में करीब एक घंटे तक अपना ऐतहासिक भाषण दिया था। 1972 में स्वामी जी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आग्रह पर कांग्रेस से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति वीवी गिरि से स्वामी ब्रह्मानंद के काफी निकट संबंध थे। स्वामी जी की निजी संपत्ति नहीं थी। सन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होंने पैसा न छूने का प्रण लिया था और इस प्रण का पालन मरते दम तक किया। स्वामी ब्रह्मानंद अपनी पेंशन छात्र-छात्राओं के हित में दान कर दिया करते थे। समाज सुधार और शिक्षा के प्रसार के लिए उन्होंने अपना जीवन अर्पित कर दिया। वह कहा करते थे मेरी निजी संपत्ति नहीं है, यह तो सब जनता की है। कर्मयोगी शब्द का जीवंत उदाहरण यदि भारत देश में है तो स्वामी ब्रह्मानंद का नाम अग्रिम पंक्ति में लिखा है। कर्म को योग बनाने की कला अगर किसी में थी तो वो स्वामी ब्रह्मानंद जी ही थे। स्वामी जी का वैराग्य नैसर्गिक था उनका वैराग्य स्वयं या अपने आप तक सीमित नहीं था। बल्कि उनके वैराग्य का लाभ सारे समाज को मिला। हमेशा गरीबों की लड़ाई लड़ने वाले बुन्देलखण्ड के मालवीय नाम से प्रख्यात, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, त्यागमूर्ति, सन्त प्रवर, परम पूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी 13 सितम्बर 1984 को ब्रह्मलीन हो गए। लेकिन उनका जीवन और शिक्षाएं आज भी हमें राह दिखाती हैं। आज हम त्यागमूर्ति, संत प्रवर, परम पूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी को उनकी 43वीं पुण्यतिथि 13 सितम्बर 2025 पर नमन करते हुए यही कह सकते हैं कि- ‘‘लाखों जीते लाखों मरते याद कहा किसी की रह जाती, रहता नाम अमर उन्ही का जो दे जाते अनुपम थाती’’ – ब्रह्मानंद राजपूत Read more » परमपूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी
खान-पान लेख कुपोषण का बदलता स्वरूप: मोटापे की चुनौती September 11, 2025 / September 11, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया भर में बच्चों और किशोरों में कम वजन (कुपोषण) की तुलना में मोटापे की समस्या अधिक गंभीर हो गई है। यह पहली बार हुआ है, जब मोटापा कुपोषण के सबसे सामान्य रूप के रूप में उभरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 5 से […] Read more » The challenge of obesity The changing face of malnutrition
लेख स्वास्थ्य-योग भारतीय दिल खतरे में, एक गंभीर चुनौती की टंकार September 11, 2025 / September 11, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – आधुनिक युग को यदि सुविधाओं और संसाधनों का युग कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी, लेकिन इन सुविधाओं और विलासिताओं की कीमत भी समाज को चुकानी पड़ रही है। मशीनों और तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, परंतु इसके साथ ही ऐसी अनेक जीवनशैली-जनित बीमारियों को जन्म दिया है […] Read more » भारतीय दिल खतरे में
लेख हिंदी दिवस ‘हेय’ की नहीं ‘हित’ की भाषा है हिन्दी September 11, 2025 / September 11, 2025 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment 14 सितम्बर हिन्दी दिवस विशेष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल‘ भारत विचारों से सम्पन्न, सांस्कृतिक रूप से सबल और साहित्यिक दृष्टिसम्पन्नता वाला वैभवमय, लोक अक्षुण्ण, भाषाई सशक्त, परम्पराओं वाला राष्ट्र है। इसकी चेतना दिगदिगंत तक प्रवाहित होती है, इसके सांस्कृतिक ताने-बाने और धार्मिक दृढ़ता की चर्चा न केवल विश्वभर में है बल्कि विश्व इस बात पर भारत का लोहा […] Read more »
लेख भारतीय संज्ञा प्रज्ञा विज्ञा का परिचय September 11, 2025 / September 15, 2025 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment संदर्भ – 11 सितंबर, शिकागो संभाषण कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिये”। नोबेल सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी जी के विषय में कहा था – “उनके द्वितीय होने की कल्पना करना भी असम्भव है वे जहाँ भी गये, […] Read more » शिकागो संभाषण
लेख अपनी मौत का सामान इकट्ठा करता आदमी September 10, 2025 / September 10, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भ्रष्टाचार इस समय देश में ही नहीं, सारी दुनिया में अपने चरम पर है। इस भ्रष्टाचार के कारण लोगों में अविश्वास का भाव पैदा हुआ है। नैतिकता और ईमानदारी बीते दिनों की बात हो चुकी हैं। विश्वास के संकट से जूझती हुई दुनिया एक ऐसी अंधेरी सुरंग में घुस चुकी है, जहां से उसे बाहर […] Read more » अपनी मौत का सामान इकट्ठा करता आदमी
लेख अनिश्चित भविष्य एवं आभासी दुनिया से दुःखी युवापीढ़ी September 10, 2025 / September 10, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – पूरी दुनिया की सरकारें युवा के मुद्दों, उनमें बढ़ रहे तनाव एवं दुःखों और उनकी बातों पर ध्यान आकर्षित करे। न केवल सरकारें बल्कि आम-जनजीवन में भी युवकोें की स्थिति, उनके सपने, उनके जीवन लक्ष्य आदि पर चर्चाएं हो, अन्यथा युवकों की जीवनशैली में रचनात्मक परिवर्तन के स्थान पर हिंसा-आतंक-विध्वंस की […] Read more » The youth generation is unhappy with the uncertain future and virtual world अनिश्चित भविष्य एवं आभासी दुनिया
पर्यावरण लेख प्रकृति ने हमें चेताया है, उसे सुनें और अपनी दिशा बदलें September 10, 2025 / September 10, 2025 by राजेश जैन | Leave a Comment राजेश जैन उत्तर भारत इन दिनों एक गहरी त्रासदी से गुजर रहा है। यहां हो रही भीषण बारिश के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। मौसम विभाग के अनुसार 22 अगस्त से 4 सितंबर के बीच क्षेत्र में सामान्य से तीन गुना अधिक बारिश दर्ज हुई है। यह पिछले 14 वर्षों में सबसे अधिक और 1988 के बाद सबसे बरसात वाला मानसून है। भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने कई राज्यों को बुरी तरह प्रभावित किया है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे हैं। अब तक सौ से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अकेले पंजाब में इस दशक की सबसे भीषण बाढ़ ने 50 से अधिक लोगों की जान ले ली है और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। गांव डूब गए, सड़कें और पुल बह गए, खेत बर्बाद हो गए और शहरों का जीवन ठप हो गया है। त्रासदी का गहरा असर जब बाढ़ का पानी उतर जाएगा तो कैमरे और प्रशासन वहां से लौट आएंगे लेकिन प्रभावित लोगों की पीड़ा बरसों तक बनी रहेगी। गिरे हुए मकान, डूबे खेत, कर्ज में दबे किसान और पढ़ाई से वंचित बच्चे हमें लगातार याद दिलाएंगे कि यह महज मौसम की सामान्य घटना नहीं बल्कि एक चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चिंता नहीं बल्कि वर्तमान की कठोर सच्चाई है। सवाल यह है कि क्या हम इसे गंभीरता से लेकर रोकथाम की राह पकड़ेंगे या हर साल राहत और मुआवजे की रस्म अदायगी दोहराते रहेंगे। क्यों बदल रहा है मानसून का पैटर्न दरअसल, मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा। कहीं बेहद कम बारिश होती है तो कहीं अचानक बादल फट जाते हैं और कुछ घंटों में महीनों का पानी बरस जाता है। हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे नदियों में जलप्रवाह अचानक बढ़ जाता है। वैज्ञानिक बार-बार चेतावनी दे चुके हैं कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा शिकार बनेगा और वर्तमान घटनाएं आने वाले भयावह समय की झलक मात्र हैं। मानवीय त्रासदी और प्रशासनिक विफलता इस आपदा का असर केवल भूगोल तक सीमित नहीं है बल्कि लाखों लोगों के जीवन पर पड़ा है। अपनों को खो चुके परिवारों के लिए यह आंकड़े नहीं बल्कि अधूरी कहानियां हैं। लाखों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों की खड़ी फसलें डूब गईं। स्कूल बंद हैं, अस्पतालों में दवाओं की कमी है और महामारी का खतरा मंडरा रहा है। लेकिन यह त्रासदी जितनी भीषण है, उससे भी बड़ा सवाल है कि हमारी नीति और तैयारी बार-बार क्यों विफल हो जाती है। हर साल बाढ़ आती है और हर साल वही दृश्य दोहराए जाते हैं। दिल्ली में यमुना बार-बार खतरे के निशान से ऊपर चली जाती है क्योंकि नालों और जलनिकासी तंत्र पर अतिक्रमण हो चुका है। हिमालयी राज्यों में अंधाधुंध सड़कें, होटल और बांध बनने से पहाड़ और असुरक्षित हो गए हैं। सरकारें राहत और मुआवजे पर तो जोर देती हैं लेकिन दीर्घकालिक रोकथाम और जल प्रबंधन पर कम ध्यान देती हैं। सही है कि यह समस्या केवल भारत की नहीं है। जलवायु संकट वैश्विक है लेकिन भारत जैसे देशों पर इसका असर कहीं ज्यादा है। हम वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तीसरे स्थान पर हैं। उद्योग और शहरी उपभोग मॉडल प्रदूषण और उत्सर्जन को बढ़ा रहे हैं लेकिन सबसे अधिक पीड़ा गरीब और कमजोर वर्ग झेल रहा है। पहाड़ी इलाकों के छोटे किसान, मजदूर और आदिवासी इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। समाधान की राह समाधान असंभव नहीं है पर इसके लिए दृष्टिकोण बदलना होगा। हिमालयी राज्यों में संवेदनशील इलाकों की पहचान कर निर्माण पर रोक लगानी होगी। नदियों के किनारे फ्लड ज़ोन मैपिंग जरूरी है ताकि वहां नई आबादी बसाने से बचा जा सके। शहरी क्षेत्रों में ड्रेनेज और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करना होगा। मौसम पूर्वानुमान को और सटीक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है। आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी ताकि राहत और बचाव केवल सरकारी मशीनरी पर निर्भर न रहे। साथ ही विकसित देशों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण वही हैं। अब समय है कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती करें और विकासशील देशों को जलवायु फंडिंग उपलब्ध कराएं। भारत को भी नवीकरणीय ऊर्जा की ओर और तेजी से बढ़ना होगा और विकास मॉडल को प्रकृति के अनुकूल बनाना होगा। उत्तर भारत की यह बाढ़ हमें आईना दिखाती है कि यदि हमने अब भी सबक नहीं सीखा तो आने वाले वर्षों में आपदाओं का यह सिलसिला और विकराल रूप लेगा। जब तक नीतियों और विकास की दिशा को बदलकर प्रकृति के साथ संतुलन नहीं साधा जाएगा, तब तक त्रासदियां हमारे जीवन का हिस्सा बनी रहेंगी। प्रकृति ने हमें चेताया है, अब जिम्मेदारी हमारी है कि हम उसे सुनें और अपनी दिशा बदलें। राजेश जैन Read more » listen to it and change your direction Nature has warned us भीषण बारिश
लेख आत्महत्या किसी भी सामान्य जीव की नैसर्गिक प्रवृत्ति है ही नहीं September 9, 2025 / September 9, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ. एच.एस. राठौर पृथ्वी पर जीवन विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, पशु-पक्षी एवं सूक्ष्म जीवों के रूपों में प्रकट होता है और एक समय पर इनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है जिसे मृत्यु कहते है। मनुष्य जीवों में सर्वश्रेष्ठ है एवं विकासवाद के क्रम में सर्वोच्च स्थान पर है। सबसे परिष्कृत मस्तिष्क एवं किसी भी ऋतु […] Read more » आत्महत्या आत्महत्या किसी भी सामान्य जीव की नैसर्गिक प्रवृत्ति है ही नहीं