लेख साहित्य जीवित अन्त्येष्टि January 17, 2017 by गंगानन्द झा | 2 Comments on जीवित अन्त्येष्टि कभी कभार आपको ऐसी किताब मिल जाती है जो आपको चौंकाती है और जीवन के प्रति आकर्षण बढ़ाती है। पिछले दिनो एक किताब पढ़ने का अवसर मिला। किताब का नाम है Tuesdays with Morrie. यह किताब अमेरिका के मैसाचुसेट्स के ब्राण्डिस विश्वविद्यालय में सामाजिक मनोविज्ञान के प्रोफेसर मॉरी श्वार्ज़ की कहानी कहती है। मॉरी जीवन […] Read more » Tuesdays with Morrie जिन्दगी और मौत के बीच के आखिरी पुल की सैर जीवित अन्त्येष्टि
लेख साहित्य स्थानीय हिन्दू शासक भी लड़ते रहे अपना स्वतंत्रता संग्राम January 14, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  सिकंदर लोदी बना सुल्तान बहलोल लोदी की मृत्यु जुलाई 1489 ई. में हो गयी थी। तब उसके पश्चात दिल्ली का सुल्तान उसका पुत्र निजाम खां सिकंदर दिल्ली का सुल्तान बना। उस समय दिल्ली सल्तनत कोई विशेष बलशाली सल्तनत नही रह गयी थी। उसके विरूद्घ नित विद्रोह हो रहे थे और सुल्तानों […] Read more » इब्राहीम लोदी सिकंदर लोदी स्वतंत्रता संग्राम हिन्दू शासक
लेख विविधा साहित्य हिंदी दिवस विश्व हिन्दी दिवस का हिन्दी के वैश्विक विस्तार में योगदान January 11, 2017 / January 11, 2017 by डॉ. शुभ्रता मिश्रा | Leave a Comment डॉ. शुभ्रता मिश्रा 10 जनवरी का दिन विश्व हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाना हर उस भारतवासी के लिए गौरव का विषय है, जो अपनी हिन्दी भाषा से सच्चा प्रेम करता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माता, अपनी मातृभूमि और अपनी मातृभाषा से प्राकृतिक रुप से प्रेम होता है। इसे जताने की आवश्यकता नहीं […] Read more » Featured विश्व हिन्दी दिवस हिन्दी के वैश्विक विस्तार में योगदान
लेख साहित्य अत्याचारों की करूण गाथा के उस काल में भी आशा जीवित रही January 11, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य सिकंदर के शासन काल में हिंदुओं की स्थिति कश्मीर में सिकंदर का शासन और हिंदुओं की स्थिति इस प्रकार थी कि सिकंदर का शासन मानो खौलते हुए तेल का कड़ाह था और हिंदू उसमें तला जाने वाला पकौड़ा। ऐसी अवस्था में बड़ी क्रूरता से हिंदुओं से जजिया वसूल किया जाता था। […] Read more » सिकंदर के शासन काल में हिंदुओं की स्थिति Featured अत्याचारों का करूण क्रंदन अत्याचारों की करूण गाथा अलबेरूनी केवल 11 हिंदू परिवार ही बचे थे कश्मीर ज्ञान छिपाने की भावना हिंदुओं में क्यों वर्तमान न्यायपालिका के प्रति अश्रद्घा क्यों? हिंदुओं के धर्मप्रेमी स्वरूप का गौरवमयी वर्णन
लेख साहित्य जब कश्मीर के राजा जशरथ ने बढ़ाया भारत का ‘यश’ रथ January 10, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य संसार एक सागर है संसार एक सागर है, जिसमें अनंत लहरें उठती रहती हैं। ये लहरें कितने ही लोगों के लिए काल बन जाती हैं, तो कुछ ऐसे शूरवीर भी होते हैं जो इन लहरों से ही खेलते हैं और खेलते-खेलते लहरों को अपनी स्वर लहरियों पर नचाने भी लगते हैं। ऐसा संयोग इतिहास […] Read more » Featured कश्मीर कश्मीर के राजा जशरथ जशरथ राजा जशरथ लोदी वंश
लेख साहित्य तैमूर लंग को किसने हराया? December 29, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ विवेक आर्य हिन्दू समाज ने एकजुट होकर अक्रान्तायों का न केवल सामना किया अपितु अपने प्राणों की बाजी लगाकर उन्हें यमलोक भेज दिया। तैमूर लंग के नाम से सभी भारतीय परिचित है। तैमूर के अत्याचारों से हमारे देश की भूमि रक्तरंजित हो गई। उसके अत्याचारों की कोई सीमा नहीं थी। तैमूर लंग ने मार्च […] Read more » Featured Taimur Lang who defeated Taimur Lang तैमूर लंग तैमूर लंग पूर्णत: धर्मांध था तैमूर लंग
कला-संस्कृति लेख साहित्य चौसठ योगिनी मंदिर, जिसकी अनुकृति से भारतीय संसद भवन बना है December 29, 2016 / December 29, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी योगाभ्यास करने वाली स्त्री को योगिनी या योगिन कहा जाता है। पुरुषों के लिए इसका समानांतर योगी है। अष्ट या चौंसठ योगिनियां प्रायः आदिशक्ति मां काली का अवतार या अंश होती है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने उक्त चौंसठ चौंसठ अवतार लिए थे । यह भी माना […] Read more » चौसठ योगिनी मंदिर
लेख साहित्य भारतीय समाज की विविधता का इतिहाय बयां करता फिल्मी दुनियां का सफर…. December 24, 2016 by अनिल अनूप | Leave a Comment -अनिल अनूप हिंदी सिनेमा का बीते सालों का इतिहास हम से बहुत कुछ कहता है । यह सिर्फ हिंदी सिनेमा का इतिहास नहीं अपितु भारतीय समाज के आर्थिक,सांस्कृतिक,धार्मिक एवं राजनीतिक नीतियों,मूल्यों और स्ंवेदनाओं का ऐसा इंद्र्धनुष है जिसमें भारतीय समाज की विविधता उसकी सामाजिक चेतना के साथ सामने आती है । भारतीय समाज का हर […] Read more » फिल्मी दुनियां का सफर.... भारतीय समाज की विविधता रतीय समाज की विविधता का इतिहाय बयां करता
लेख साहित्य अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल और उनके तीन शहीद साथियों को सादर नमन और श्रद्धांजलि’ December 20, 2016 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल और उनके तीन शहीद साथियों को सादर नमन और श्रद्धांजलि’ -मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। आज ऋषि दयानन्द के शिष्य और आर्यसमाज के अनुयायी अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी और उनके तीन साथी रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां तथा राजेन्द्र सिंह लाहिड़ी का शहीदी दिवस अर्थात् पुण्य तिथि है। इन चार देशभक्त सपूतों को सन् 1927 में गोरखपुर की जेल में आज ही के दिन […] Read more » Featured अशफाक उल्ला खां राजेन्द्र सिंह लाहिड़ी रामप्रसाद बिस्मिल रोशन सिंह
लेख साहित्य क्या आप अकबर के नवरत्नों को जानते हैं :? December 20, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment क्या आप अकबर के नवरत्नों को जानते हैं, आइये, मैं बताता हूं डा.राधेश्याम द्विवेदी सिर्फ किस्सागोई नहीं:-इतिहास किसी ग्रंथ में उल्लखित विवरणों की पुष्टि मात्र नहीं होता है, अपितु तत्कालिक परम्परा, मान्यता, कला, संस्कृति तथा समाज मे फैली धारणाओं का संवाहक भी होता है। आगरा मुगलकाल की सर्वाधिक समय तक राजधानी रही है। बहुत ही […] Read more » Navratnas of Akbar अकबर के नवरत्न
लेख साहित्य भारत के नये पर्व December 13, 2016 / December 13, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on भारत के नये पर्व चुनाव की आहट आते ही ये भी शुरू हो जाते हैं। राजनीतिक दल और उनके नेता घोषणाएं करने लगते हैं कि सत्ता में आकर हम ये करेंगे और वो करेंगे। कुछ लोग तो आकाश से तारे तोड़ लाने की बात करने लगते हैं, भले ही उनकी झोली में घर के वोट भी न हों। इसे ‘घोषणा पर्व’ कहते हैं। इससे मिलता हुआ ‘उद्घाटन पर्व’ है। सत्ताधारी नेता आधी हो या अधूरी, पर हर सप्ताह किसी न किसी योजना का उद्घाटन कर देते हैं। Read more » Featured भारत के नये पर्व
लेख साहित्य कीमत और मूल्य December 9, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment सामान्य रूप से ये दोनों एक से लगते हैं; पर थोड़ा गहरे में जाएं, तो ध्यान आता है कि जब कोई व्यक्ति, गांव, समाज या देश लम्बे समय तक कोई कीमत चुकाता है, तो दुनिया में कुछ मूल्य स्थापित होते हैं। फिर उन्हीं का अनुसरण कर लोग आगे बढ़ते हैं। ऐसे उदाहरण हर युग में […] Read more » कीमत कीमत और मूल्य मूल्य