लेख साहित्य एक बार फिर … March 20, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on एक बार फिर … तुम्हारा वक्तव्य पढ़ कर (चूँकि स्त्रियाँ इस मार्ग पर आ गयी हैं इसलिये ब्रह्मचर्य चिरजीवी नहीं होगा और सद्धर्म केवल पाँच सौ वर्षों तक चलेगा.“)पहले तो मैं यह समझने का यत्न करती रही कि इसके लिये दोषी किसे मानें -स्त्रियों को, सद्धर्म में दीक्षित ब्रह्मचर्य निभानेवाले को , या मानव की स्वाभाविक वृत्तियाँ को ? Read more »
लेख साहित्य इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा है वीरांगना अवंतीबाई लोधी का नाम March 18, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment वीरांगना अवंतीबाई लोधी ने वीरांगना झाँसी की रानी की तरह ही अपने पति विक्रमादित्य के अस्वस्थ्य होने पर ऐसी दशा में राज्य कार्य संभाल कर अपनी सुयोग्यता का परिचय दिया और अंग्रेंजों की चूलें हिला कर रख दी। सन 1857 में जब देश में स्वतंत्रता संग्राम छिडा तो क्रान्तिकारियो का सन्देश रामगढ भी पहुंचा। रानी तो अंग्रेजो से पहले से ही जली भुनी बैठी थी। क्योकि उनका राज्य भी झाँसी की तरह कोर्ट कर लिया गया था। Read more » Featured वीरांगना अवंतीबाई वीरांगना अवंतीबाई लोधी
लेख शख्सियत साहित्य देह के बाद अनुपम March 4, 2017 by अरुण तिवारी | 2 Comments on देह के बाद अनुपम अरुण तिवारी जब देह थी, तब अनुपम नहीं; अब देह नहीं, पर अनुपम हैं। आप इसे मेरा निकटदृष्टि दोष कहें या दूरदृष्टि दोष; जब तक अनुपम जी की देह थी, तब तक मैं उनमें अन्य कुछ अनुपम न देख सका, सिवाय नये मुहावरे गढ़ने वाली उनकी शब्दावली, गूढ से गूढ़ विषय को कहानी की तरह […] Read more » Anupam Mishra death of Anupam Mishra Featured अनुपम मिश्र परंपरागत वर्षा जल-संरक्षण
कला-संस्कृति लेख साहित्य होली के रंगों का आध्यात्मिक महत्व March 2, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment श्वेत रंग की कमी होती है, तो अशांति बढ़ती है, लाल रंग की कमी होने पर आलस्य और जड़ता पनपती है। पीले रंग की कमी होने पर ज्ञानतंतु निष्क्रिय बन जाते हैं। ज्योतिकेंद्र पर श्वेत रंग, दर्शन-केंद्र पर लाल रंग और ज्ञान-केंद्र पर पीले रंग का ध्यान करने से क्रमशः शांति, सक्रियता और ज्ञानतंतु की सक्रियता उपलब्ध होती है। होली के ध्यान में शरीर के विभिन्न अंगों पर विभिन्न रंगों का ध्यान कराया जाता है और इस तरह रंगों के ध्यान में गहराई से उतरकर हम विभिन्न रंगों से रंगे हुए लगने लगा। Read more » होली
लेख स्मारकों के सुरक्षा में हम कितने सफल February 28, 2017 / February 28, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा.राधेश्याम द्विवेदी स्मारक किसे कहते हैं:- कोई वस्तु या रचना जो किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति या घटना की स्मृति को बनाए रखने के लिए हो, स्मारक कहलाता है, जैसे- शहीद स्मारक, मकबरा, समाधि, स्तूप और निशानीय स्मृति चिह्न आदि। राष्ट्रीय स्मारक एक एसा स्मारक होता है जिसे उस देश के इतिहास, राजनीति या उसके लोगों के […] Read more » स्मारकों के सुरक्षा
कला-संस्कृति लेख जहां कण-कण में बिखरी है ऋषि वाल्मिकी की स्मृतियां…!! February 27, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा — सीता ने व्यतीत किया था अज्ञातवास — लव-कुश का हुआ था जन्म आधुनिकता के उच्चतम शिखर पर जहां आज भी मानव जीवन के चिह्न नदारद हो वहां सदियों पहले मानवीय दिनचर्या की उपस्थिति किसी को भी देवत्व प्रदान करने के लिए पर्याप्त है, क्योंकि अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में सामान्य जीवन यापन […] Read more » Featured ऋषि वाल्मिकी पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत नयाग्राम के तपोवन
लेख विज्ञान साहित्य विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती February 6, 2017 / February 6, 2017 by राजकुमार झांझरी | Leave a Comment विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती ‘दी गार्डियन’ में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित लेख के संदर्भ में स्टीफन हॉकिंग को भेजे पत्र का हिंदी अनुवाद ‘दी गार्डियन’ में “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित […] Read more » “This is the most dangerous time for our planet” “This is the most dangerous time for our planet” शीर्षक से प्रकाशित लेख Featured stephen hawkins The Guardian दी गार्डियन स्टीफन हॉकिंग स्टीफन हॉकिंग को भेजे पत्र का हिंदी अनुवाद
लेख साहित्य हाथीयुद्ध मनोरंजन का लोकप्रिय साधन तथा आगरा के हाथीघाट का इतिहास January 26, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा- राधेश्याम द्विवेदी हाथियों का व्ंशानुगत इतिहास :- हाथी जमीन पर रहने वाला विशाल आकार का स्तनपायी प्राणी है। आज के समय में हाथी परिवार कुल में केवल दो प्रजातियाँ जीवित हैं। एलिफस तथा लॉक्सोडॉण्टा। तीसरी प्रजाति मैमथ विलुप्त हो चुकी है। जीवित दो प्रजातियों की तीन जातियाँ पहचानी जाती हैं। लॉक्सोडॉण्टा प्रजाति की दो […] Read more » आगरा के हाथीघाट आगरा के हाथीघाट का इतिहास हाथीघाट हाथीयुद्ध हाथीयुद्ध मनोरंजन का लोकप्रिय साधन
लेख साहित्य अजब गजब रिवाज थे राज रजवारे के January 26, 2017 by अनिल अनूप | 3 Comments on अजब गजब रिवाज थे राज रजवारे के अनिल अनूप पटियाला (पंजाब) में पुरानी रियासत के महल आज भी महाराजा भुपिंदर सिंह की 365 रानियों के किस्से बयान करते हैं। महाराजा भुपिंदर सिंह ने यहां वर्ष 1900 से वर्ष 1938 तक राज किया। महाराज भुपिंद्र सिंह का जीवन रंगीनियों से भरा हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा की 10 अधिकृत रानियों के समेत […] Read more » महाराजा भुपिंदर सिंह
लेख साहित्य जीवित अन्त्येष्टि January 17, 2017 by गंगानन्द झा | 2 Comments on जीवित अन्त्येष्टि कभी कभार आपको ऐसी किताब मिल जाती है जो आपको चौंकाती है और जीवन के प्रति आकर्षण बढ़ाती है। पिछले दिनो एक किताब पढ़ने का अवसर मिला। किताब का नाम है Tuesdays with Morrie. यह किताब अमेरिका के मैसाचुसेट्स के ब्राण्डिस विश्वविद्यालय में सामाजिक मनोविज्ञान के प्रोफेसर मॉरी श्वार्ज़ की कहानी कहती है। मॉरी जीवन […] Read more » Tuesdays with Morrie जिन्दगी और मौत के बीच के आखिरी पुल की सैर जीवित अन्त्येष्टि
लेख साहित्य स्थानीय हिन्दू शासक भी लड़ते रहे अपना स्वतंत्रता संग्राम January 14, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  सिकंदर लोदी बना सुल्तान बहलोल लोदी की मृत्यु जुलाई 1489 ई. में हो गयी थी। तब उसके पश्चात दिल्ली का सुल्तान उसका पुत्र निजाम खां सिकंदर दिल्ली का सुल्तान बना। उस समय दिल्ली सल्तनत कोई विशेष बलशाली सल्तनत नही रह गयी थी। उसके विरूद्घ नित विद्रोह हो रहे थे और सुल्तानों […] Read more » इब्राहीम लोदी सिकंदर लोदी स्वतंत्रता संग्राम हिन्दू शासक
लेख विविधा साहित्य हिंदी दिवस विश्व हिन्दी दिवस का हिन्दी के वैश्विक विस्तार में योगदान January 11, 2017 / January 11, 2017 by डॉ. शुभ्रता मिश्रा | Leave a Comment डॉ. शुभ्रता मिश्रा 10 जनवरी का दिन विश्व हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाना हर उस भारतवासी के लिए गौरव का विषय है, जो अपनी हिन्दी भाषा से सच्चा प्रेम करता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माता, अपनी मातृभूमि और अपनी मातृभाषा से प्राकृतिक रुप से प्रेम होता है। इसे जताने की आवश्यकता नहीं […] Read more » Featured विश्व हिन्दी दिवस हिन्दी के वैश्विक विस्तार में योगदान